सुर्खियों में क्यों?
राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के अंतर्गत, हाल ही में आंध्र प्रदेश के अमरावती में 'क्वांटम वैली' परियोजना की आधारशिला रखी गई है।
अन्य संबंधित तथ्य
- इस परियोजना का उद्देश्य अमरावती को क्वांटम प्रौद्योगिकियों के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाना और 2026 तक भारत का पहला 133-क्यूबिट क्वांटम कंप्यूटर स्थापित करना है।
- यह 'ट्रिपल हेलिक्स मॉडल' का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें सरकार, उद्योग जगत के अग्रणी घरानों (IBM, TCS, L&T) और शिक्षाविदों के बीच त्रिपक्षीय गठबंधन शामिल है।

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (2023 से 2030-31) के विषय में
- वैश्विक स्थिति: भारत एक समर्पित क्वांटम मिशन शुरू करने वाला विश्व का 7वां (अमेरिका, चीन, फिनलैंड, ऑस्ट्रिया, फ्रांस और कनाडा के बाद) देश है।
- शासन: विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन यह एक 8-वर्षीय मिशन है। यह PM-STIAC (प्रधानमंत्री की विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सलाहकार परिषद) द्वारा शासित 9 मिशनों में से एक है।
- कार्यान्वयन रणनीति: विषयगत केंद्र: इस मिशन ने 'हब-स्पोक-स्पाइक मॉडल' का अनुसरण करते हुए देश के प्रमुख संस्थानों में 4 विशेष हब (केंद्र) स्थापित किए हैं।
विषय | प्रमुख संस्थान | प्रमुख आउटपुट / लक्ष्य |
क्वांटम कंप्यूटिंग | भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु | क्रमशः 3 वर्ष, 5 वर्ष और 8 वर्ष में 20-50 भौतिक क्यूबिट, 50-100 भौतिक क्यूबिट और 50-1000 भौतिक क्यूबिट विकसित करना। |
क्वांटम संचार | आईआईटी मद्रास (IIT Madras) | उपग्रह-आधारित सुरक्षित संचार लिंक और 2,000 किमी से अधिक दूरी तक क्वांटम कुंजी वितरण (QKD)। |
सेंसिंग और मेट्रोलॉजी | आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) | सटीक नेविगेशन और समय-निर्धारण (Precision navigation & timing)। |
सामग्री और उपकरण | आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) | अगली पीढ़ी के क्वांटम सबस्ट्रेट्स (substrates), सुपरकंडक्टर्स (अतिचालक), और 2D सामग्रियां। |
भारत द्वारा की गई अन्य पहलें
वैश्विक पहलें
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भारत के लिए NQM का महत्त्व
- रणनीतिक लाभ: अमेरिका, चीन, यूरोपीय संघ के सदस्य देश और कनाडा जैसे देशों ने पहले ही क्वांटम प्रौद्योगिकियों में भारी निवेश किया है। इससे भारत के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक निर्भरता से बचने के लिए शीघ्र कदम उठाना आवश्यक हो गया है।
- सुरक्षा: वर्तमान एन्क्रिप्शन विधियां क्वांटम हमलों के प्रति संवेदनशील हैं। इसलिए, NQM के तहत पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) का विकास एक संप्रभु अनिवार्यता है।
- क्षमता निर्माण: उदाहरणार्थ, NQM ने अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के साथ उच्चतर शिक्षा में क्वांटम प्रौद्योगिकी (QT) पाठ्यक्रम की शुरुआत की है।
- स्टार्टअप इकोसिस्टम: उदाहरणार्थ, NQM के अंतर्गत बेंगलुरु स्थित QpiAI ने 'QpiAI-Indus' शुरू किया, जो 25 क्यूबिट्स की क्षमता वाला भारत के सबसे शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटरों में से एक है।
- आर्थिक विकास: नीति आयोग के अनुसार, क्वांटम प्रौद्योगिकी (QT) 2035 तक 1-2 ट्रिलियन डॉलर मूल्य का सृजन कर सकती है।
क्वांटम प्रौद्योगिकियों के विकास में चुनौतियां
- क्यूबिट्स की नाजुकता: क्वांटम अवस्थाएं "शोर" और पर्यावरणीय गड़बड़ी के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होती हैं। इसके कारण विसंगति उत्पन्न होती है।
- हार्डवेयर आवश्यकताएँ: इन प्रणालियों के निर्माण के लिए अत्यधिक अलगाव और परम शून्य के निकट अति-शीत तापमान की आवश्यकता होती है।
- त्रुटि सुधार: सुपरपोजिशन कई संभावित परिणाम उत्पन्न करता है और मापन एक यादृच्छिक परिणाम दे सकता है। इसलिए, त्रुटि-सुधार अभी भी सक्रिय अनुसंधान का एक सतत क्षेत्र बना हुआ है।
- नैतिक जोखिम:
- दोहरे उपयोग की दुविधा: क्वांटम प्रौद्योगिकियों के नागरिक और सैन्य दोनों तरह के अनुप्रयोग हैं, जो इसके शस्त्रीकरण से संबंधित चिंताएं बढ़ाते हैं।
- उन्नत निगरानी: अत्यधिक संवेदनशील क्वांटम सेंसर निजता संबंधी चिंताएं उत्पन्न करते हैं, क्योंकि वे उन सिग्नलों को भी इंटरसेप्ट कर सकते हैं जो पहले सुरक्षित माने जाते थे।
- "क्वांटम डिवाइड": अपनी पूंजी-गहन प्रकृति के कारण क्वांटम प्रौद्योगिकी के प्रयास कुछ चुनिंदा संपन्न देशों तक ही केंद्रित हो सकते हैं। इससे मौजूदा वैश्विक असमानताएं और गहरी हो सकती हैं।
- अन्य: वैज्ञानिक बाधाओं के अलावा, भारत को पारिस्थितिक तंत्र से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जैसे सीमित निर्माण क्षमता, अंतःविषय शोधकर्ताओं की कमी, आयातित घटकों पर निर्भरता और उद्योग व अकादमिक जगत के बीच कमजोर समन्वय।
आगे की राह
- वैश्विक बेंचमार्किंग: वैश्विक मानक निकायों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ना और अंतर्राष्ट्रीय मानक निर्धारण में नेतृत्व की भूमिका निभाना।
- R&D में निवेश: GERD (अनुसंधान और विकास पर सकल घरेलू व्यय) के अंतर को पाटकर (जो वर्तमान में लगभग 0.7% है) इसे वैश्विक लगभग 2% के मानक तक ले जाना।
- वैश्विक सहयोग: उदाहरणार्थ, विश्व आर्थिक मंच (WEF) के 'क्वांटम इकोनॉमी नेटवर्क' के साथ सहयोग, जिसका उद्देश्य क्वांटम प्रौद्योगिकी के बारे में जागरूकता और समझ बढ़ाना है।
- अन्य: क्षमता निर्माण, और प्रयोगशाला से बाजार तक उत्पादों के संक्रमण के लिए विनियामक जटिलताओं को आसान बनाना।
निष्कर्ष
भारत का लक्ष्य 2035 तक शीर्ष तीन क्वांटम अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु हमें व्यापक सहयोग, क्षमता निर्माण और क्वांटम प्रौद्योगिकियों की दिशा में अनुसंधान एवं विकास (R&D) में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान केंद्रित करना होगा।