सुर्खियों में क्यों?
केंद्रीय बजट 2026–27 में दो-ट्रैक वाली विनिर्माण रणनीति का प्रस्ताव किया गया है, जिसमें प्रौद्योगिकी-आधारित क्षेत्रों की क्षमताओं को सुदृढ़ करना तथा श्रम-प्रधान उद्योगों में पैमाने और रोजगार को बनाए रखना शामिल है।
प्रमुख बजटीय घोषणाएं
- रणनीतिक एवं उन्नत विनिर्माण पहलें
- बायोफार्मा शक्ति: जैव-औषधियों (biologics) और बायोसिमिलर्स को बढ़ावा देने हेतु ₹10,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
- इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0: सेमीकंडक्टर निर्माण, पैकेजिंग और उपकरणों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (ECMS): इसके लिए बजट ₹22,919 करोड़ से बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ किया गया है।

- दुर्लभ-भू स्थायी चुंबक पहल : ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में विशेष कॉरिडोर स्थापित कर खनन, प्रसंस्करण और चुंबक निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा।
- केमिकल पार्क: आयात निर्भरता कम करने हेतु तीन "प्लग-एंड-प्ले" रासायनिक पार्क स्थापित किए जाएंगे।
- निर्माण और अवसंरचना उपकरण (CIE) योजना : यह उच्च मूल्य और उन्नत तकनीक वाले उपकरणों के घरेलू निर्माण को सुदृढ़ करने हेतु नई योजना है।
- श्रम-प्रधान एवं पारंपरिक उद्योगों के लिए समर्थन
- वस्त्र क्षेत्र: फाइबर आत्मनिर्भरता, क्लस्टरों का आधुनिकीकरण, चुनौती-आधारित मेगा टेक्सटाइल पार्क और महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल के माध्यम से खादी एवं हथकरघा को सुदृढ़ करना।
- खेल सामग्री उद्योग: खेल उपकरण एवं सामग्री विज्ञान में विनिर्माण, नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने हेतु विशेष पहल की जाएगी।
- पारंपरिक क्लस्टर: 200 पारंपरिक औद्योगिक क्लस्टरों को तकनीकी एवं अवसंरचनात्मक उन्नयन के माध्यम से पुनर्जीवित करने हेतु विशेष योजना है।
- MSME विकास हेतु उपाय
- वित्तीय सहायता: उच्च क्षमता वाले उद्यमों के लिए ₹10,000 करोड़ का SME ग्रोथ फंड तथा सूक्ष्म उद्यमों के लिए आत्मनिर्भर भारत फंड में ₹2,000 करोड़ की अतिरिक्त राशि आवंटित की गई है।
- तरलता एवं अनुपालन: MSMEs से CPSE की खरीद के लिए व्यापार प्राप्य बट्टा प्रणाली (TReDS) को अनिवार्य भुगतान मंच बनाया गया, जिससे तरलता संकट कम होगा।
- कर एवं सीमा शुल्क सुधार
- प्रत्यक्ष कर प्रोत्साहन: पूंजीगत वस्तुओं की आपूर्ति करने वाले गैर-निवासियों को 5 वर्ष की कर छूट प्रदान की जाएगी।
- सीमा शुल्क में कमी: माइक्रोवेव ओवन और विमान के पुर्जों के निर्माण में उपयोग होने वाले कुछ विशेष भागों पर मूल सीमा शुल्क से छूट प्रदान की जाएगी।
- व्यापार सुविधा: विश्वसनीय निर्माताओं के लिए स्थगित शुल्क भुगतान खिड़की और सीमा शुल्क एकीकृत प्रणाली (CIS) की शुरुआत के साथ-साथ बहु-एजेंसी कार्गो निकासी को सुव्यवस्थित करने के लिए एक एकल डिजिटल खिड़की की शुरुआत की गई है।
विनिर्माण रणनीति में परिवर्तन का महत्व
- दो ट्रैक वाली विनिर्माण रणनीति: बजट घोषणाएं एक द्वि-आयामी दृष्टिकोण को दर्शाती हैं इसमें एक ओर सेमीकंडक्टर और जैव-औषधियों जैसे रणनीतिक एवं प्रौद्योगिकी-आधारित क्षेत्रों में क्षमताओं को सुदृढ़ करना, तथा दूसरी ओर वस्त्र और खेल सामग्री जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के माध्यम से रोजगार सृजन और निर्यात विविधीकरण को बढ़ाना शामिल है।
- रणनीतिक अनिवार्यता की ओर परिवर्तन: यह बजट भारत को केवल "रणनीतिक स्वायत्तता" से आगे बढ़ाकर "रणनीतिक अनिवार्यता" की दिशा में ले जाने का प्रयास करता है, जिससे भारत वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (GVCs) में एक महत्वपूर्ण और अपरिहार्य केंद्र बन सके।
- रणनीतिक सुनम्यता हेतु अनुशासित स्वदेशी: स्वदेशी को एक अनुशासित रणनीति के रूप में अपनाना आवश्यक है, क्योंकि प्रत्येक प्रकार का आयात प्रतिस्थापन न तो संभव है और न ही वांछनीय।

- उत्पादकता बढ़ाने वाले निवेश, क्षमता उन्नयन और निर्यात उन्मुखता के बिना संरक्षणवाद सुदृढ़ता के बजाय कमजोरी उत्पन्न करता है।
- "स्माइलिंग कर्व" में ऊपर की ओर बढ़ना: कई उपाय भारत को "स्माइलिंग कर्व" में ऊपर ले जाने का प्रयास करते हैं, अर्थात् इनका उद्देश्य कम मूल्य वाले असेंबली कार्य से हटकर उच्च मूल्य वाले कार्यों जैसे डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास (R&D) और घटक निर्माण की ओर बढ़ना है।
- "स्माइलिंग कर्व" वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं की एक अवधारणा है, जो दर्शाती है कि अधिक मूल्य सृजन प्रारंभिक (R&D, डिजाइन) और अंतिम (ब्रांडिंग, विपणन) चरणों में होता है, जबकि मध्य में स्थित विनिर्माण और असेंबली अपेक्षाकृत कम मूल्य उत्पन्न करते हैं।
- भू-आर्थिक संतुलन और आपूर्ति सुरक्षा: महत्वपूर्ण कच्चे इनपुट्स के स्थानीयकरण के माध्यम से भारत आयात निर्भरता और रणनीतिक जोखिमों को कम करना चाहता है।
- उदाहरण के लिए, दुर्लभ-भू स्थायी चुंबक योजना इलेक्ट्रिक वाहनों और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए घरेलू क्षमता विकसित करती है, जबकि बायोफार्मा शक्ति ब्रांडेड दवाओं पर संभावित अमेरिकी शुल्क के जोखिम को कम करने में सहायक है।
- व्यापक और समावेशी विकास: 200 पारंपरिक औद्योगिक क्लस्टरों के पुनर्जीवन का उद्देश्य उच्च-प्रौद्योगिकी केंद्रों से बाहर भी विकास को फैलाना है, जिससे साझा अवसंरचना और ज्ञान के आदान-प्रदान के माध्यम से उत्पादकता बढ़े।
- MSME "चैंपियंस" का विकास: इक्विटी, TReDS के माध्यम से तरलता और अनुपालन सहायता इन तीनों प्रकार के समर्थन से MSMEs को विकास का प्रमुख इंजन मानते हुए उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उद्योगों में परिवर्तित करने का लक्ष्य है।
- अवसंरचनात्मक सुधारों द्वारा विनिर्माण विस्तार: सरकार द्वारा अवसंरचना और लॉजिस्टिक्स में किए जा रहे सुधार, कनेक्टिविटी, औद्योगिक ढांचे और कौशल विकास में निवेश के माध्यम से विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार को प्रोत्साहित कर रहे हैं।
निष्कर्ष
तेजी से बदलती वैश्विक व्यवस्था के बीच, आत्मनिर्भरता के विभिन्न चरण अब क्रमिक न होकर परस्पर समांतर हो गए हैं। इससे यह आवश्यक हो गया है कि आयात प्रतिस्थापन (आयात निर्भरता में कमी), लचीलापन (आपूर्ति श्रृंखला की निरंतरता और सुरक्षा) और अनिवार्यता (वैश्विक नेतृत्व और वार्ता में प्रभाव) को एक साथ आगे बढ़ाया जाए। विनिर्माण को एक संस्थागत परीक्षण के रूप में देखते हुए तथा नीति और क्रियान्वयन में समन्वय स्थापित करके, भारत स्थिरता के प्राप्तकर्ता से आगे बढ़कर वैश्विक प्रभाव का स्रोत बन सकता है।