उन्नत प्रौद्योगिकी एवं सीमा प्रबंधन (Advance Technology & Border Management) | Current Affairs | Vision IAS

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उन्नत प्रौद्योगिकी एवं सीमा प्रबंधन (Advance Technology & Border Management)

31 Mar 2026
1 min

In Summary

  • ड्रोन हमलों, साइबर युद्ध और दुर्गम भूभाग जैसे नए खतरों के कारण सीमा प्रबंधन के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • सैनिकों की थकान को दूर करने और परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए सीआईबीएमएस, एआई-संचालित निगरानी और स्मार्ट निगरानी जैसी प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करना आवश्यक है।
  • एक एकीकृत कमान प्रणाली और सीमा सुरक्षा प्रौद्योगिकी निरीक्षण प्राधिकरण की स्थापना से अनुपालन सुनिश्चित होगा और निगरानी के दुरुपयोग को रोका जा सकेगा।

In Summary

सुर्खियों में क्यों?

हाल ही में, केंद्रीय गृह मंत्री ने सीमावर्ती क्षेत्रों में शत्रुओं द्वारा उत्पन्न नई चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए उन्नत तकनीकी समाधानों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

सीमा प्रबंधन में उन्नत प्रौद्योगिकी की आवश्यकता

  • नई घुसपैठ रणनीति (ड्रोन और सुरंगें) का सामना करना: भौतिक बाड़ और पारंपरिक सीमा चौकियां अब घुसपैठ रोकने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, क्योंकि अपराधी और आतंकवादी सक्रिय रूप से उनसे बचकर निकल जाते हैं।
    • उदाहरण के लिए, विशेषकर पश्चिमी क्षेत्र में, ड्रोन द्वारा मादक पदार्थों और हथियारों को गिराने की घटनाओं में अचानक वृद्धि हुई है।
    • संगठित आपराधिक नेटवर्क अत्यधिक अनुकूलनीय होते हैं, और प्रायः पकड़े जाने से बचने के लिए एन्क्रिप्टेड संचार और उन्नत निगरानी का उपयोग करते हैं।
  • भूभागपूर्वी नदीय सीमाओं के बदलते स्वरूप तथा गुजरात के दलदली क्षेत्रों जैसे कठिन भूभाग में बिना बाड़ वाले अंतरालों का प्रबंधन करना।
  • साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध: उदाहरण के लिए, सीमा निगरानी अवसंरचना और संचार नेटवर्क पर हमले।
  • सैनिकों की थकान कम करना और कमांड का केंद्रीकरण करना: पारंपरिक सीमा सुरक्षा के लिए अत्यधिक जनशक्ति की आवश्यकता होती है, जिससे सैनिकों में थकान बढ़ती है और परिचालन दक्षता कम हो जाती है।
  • समुद्री और जलमग्न क्षेत्र की सुरक्षा: सीमा सुरक्षा भूमि और हवाई क्षेत्र से आगे बढ़कर समुद्री और जलमग्न क्षेत्रों तक विस्तारित हो गई है। उदाहरण के लिए, 26/11 के हमले।

सीमा प्रबंधन में प्रौद्योगिकी के एकीकरण को बढ़ावा देने के उपाय

  • वर्तमान निगरानी अवसंरचना का विस्तार करना
    • CIBMS का व्यापक विस्तार: BOLD-QIT जैसे पायलट परियोजनाओं के बाद, CIBMS के चरण II और चरण III को लागू किया जाएगा, जो लगभग 1,955 किलोमीटर की संवेदनशील सीमाओं को कवर करेगा।
    • AI-आधारित निगरानी: उदाहरण के लिए, सीमा सुरक्षा बल (BSF) एक एकीकृत "स्मार्ट बॉर्डर ऑब्जर्वेशन एंड मॉनिटरिंग सिस्टम" शुरू करने की योजना बना रहा है।
    • अन्य: दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्रों में डिजिटल अवसंरचना, विश्वसनीय विद्युत और उच्च गति वाले इंटरनेट की कमी का समाधान करने के लिए सौर ऊर्जा आधारित निगरानी टावर, उपग्रह-आधारित संचार और स्वचालित ड्रोन निगरानी में निवेश किया जाए।
  • परिचालन संबंधी सुधार: उदाहरण के लिए, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी को दूर करने के लिए एक एकीकृत डिजिटल कमांड एवं नियंत्रण प्रणाली स्थापित की जाए।
    • इस प्रणाली का उद्देश्य सभी सीमा सुरक्षा एजेंसियों को एक केंद्रीकृत नेटवर्क में एकीकृत करना होना चाहिए।
  • सीमा सुरक्षा प्रौद्योगिकी पर्यवेक्षण प्राधिकरण का गठन: इसे निगरानी अभियानों की समीक्षा और ऑडिट करने का कार्य सौंपा जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे विधिक ढांचे का अनुपालन कर रहे हैं और दुरुपयोग को रोक रहे हैं।

निष्कर्ष

भारत में प्रभावी सीमा प्रबंधन के लिए स्मार्ट फेंसिंग, AI-आधारित निगरानी और ड्रोन-रोधी प्रणालियों जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों का एकीकरण अत्यंत आवश्यक होता जा रहा है। इज़राइल की स्मार्ट फेंस और अमेरिका के इंटीग्रेटेड फिक्स्ड टावर्स जैसी वैश्विक प्रणालियों से सीख लेते हुए, हमें अपने स्वदेशी नवाचार, अवसंरचना और अंतर-एजेंसी समन्वय को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है, जो उभरते खतरों से निपटने और भारत की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।

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