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मुफ़्त के उपहार (Freebies)

31 Mar 2026
1 min

सुर्ख़ियों में क्यों?

'तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड बनाम भारत संघ' मामले में, उच्चतम न्यायालय ने राज्यों भर में मुफ़्त के उपहार अथवा 'फ्रीबीज़' की संस्कृति पर चिंता जताई है।

उच्चतम न्यायालय द्वारा की गई मुख्य टिप्पणियां

  • बिना भेदभाव के दिए जाने वाले प्रत्यक्ष नकद अंतरण (Direct Cash Transfer) से संबंधित योजनाएं लोगों को काम करने और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रेरित नहीं कर सकती हैं।
  • करदाताओं के पैसे से दी जाने वाली अंधाधुंध रियायतें वित्तीय अनुशासन और आर्थिक स्थिरता को कमजोर कर सकती हैं तथा राष्ट्र निर्माण में बाधा डाल सकती हैं।
  • राज्यों को ऐसे चुनावी वादों के बजाय, दीर्घकालिक विकास योजनाओं पर ध्यान देना चाहिए।

मुफ़्त के उपहार(फ्रीबीज़) के बारे में

  • RBI ने फ्रीबीज़ को "एक सार्वजनिक कल्याणकारी उपाय के रूप में परिभाषित किया है, जो मुफ़्त में प्रदान किया जाता है"।
    • जैसे: मुफ़्त बिजली, मुफ़्त पानी, मुफ़्त सार्वजनिक परिवहन, ऋण माफ़ी आदि का प्रावधान।
  • RBI के अनुसार, फ्रीबीज़ को पब्लिक/मेरिट गुड्स (जैसे शिक्षा) से अलग किया जा सकता है, क्योंकि शिक्षा जैसे क्षेत्र दीर्घकालिक और व्यापक लाभ देते हैं।

फ्रीबीज़ के संदर्भ में 'श्रेय' बनाम 'प्रेय'

कठोपनिषद श्रेय (दीर्घकालिक लाभ) और प्रेय (तात्कालिक सुख) के बीच अंतर बताया गया है। इसमें एक परिपक्व मन को तत्काल संतुष्टि के बजाय दीर्घकालिक लाभ चुनने का आग्रह किया गया है। इसे फ्रीबीज़ संस्कृति के संदर्भ में राजकोषीय नीति पर लागू किया जा सकता है।

  • आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, बिना शर्त नकद अंतरण (UCTs)—विशेष रूप से महिलाओं को लक्षित करने वाली योजनाओं—पर कुल खर्च ₹1.7 लाख करोड़ (वित्त वर्ष 2025-26) होने का अनुमान है।
  • 2022-23 और 2025-26 के बीच, ऐसी योजनाएँ चलाने वाले राज्यों की संख्या पाँच गुना से भी अधिक बढ़ने का अनुमान है, जिनमें से लगभग आधे राज्यों को राजस्व घाटे का सामना करना पड़ सकता है।

दूसरे शब्दों में, जब देश 'विलंबित संतुष्टि' (तत्काल सुख को टालकर भविष्य के लाभ को प्राथमिकता देना) और राष्ट्रीय अनुशासन का पालन करता है, तो उसे भारी लाभ होता है। 'श्रेय' को चुनकर, राज्य UCTs के 'प्रेय' पर, बुनियादी ढांचे पर पूंजीगत व्यय (CapEx) को प्राथमिकता देता है; जो विकास पर अधिक 'गुणक प्रभाव' (multiplier effect) डालता है

फ्रीबीज़ से संबंधित संवैधानिक और कानूनी परिप्रेक्ष्य

  • राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP):
    • अनुच्छेद 38: राज्य लोगों के कल्याण को बढ़ावा देने के लिए एक सामाजिक व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। 
    • अनुच्छेद 39: यह सुनिश्चित करना कि पुरुषों और महिलाओं के पास आजीविका के पर्याप्त साधन हों; धन के संकेंद्रण को रोकना।
    • अनुच्छेद 41: कुछ मामलों में काम, शिक्षा और सार्वजनिक सहायता का अधिकार।

उच्चतम न्यायालय का निर्णय:

  • सुब्रमण्यम बालाजी केस (2013): SC ने योग्य व्यक्तियों को रंगीन TV, लैपटॉप आदि बांटने को DPSPs के अनुरूप माना।
    • लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (RPA), 1951 की धारा 123 "रिश्वत" को प्रतिबंधित करती है, जिसे किसी उम्मीदवार या उसके एजेंट द्वारा किसी मतदाता को वोट देने के लिए प्रेरित करने हेतु दिए गए किसी भी उपहार, प्रस्ताव या वादे के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • चुनाव घोषणापत्रों के लिए भारत निर्वाचन आयोग के दिशानिर्देश: आदर्श आचार संहिता (MCC) में शामिल इन दिशानिर्देशों के तहत दलों को ऐसे वादों से बचने की आवश्यकता होती है जो चुनावों की पवित्रता को दूषित करते हों।

सकारात्मक प्रभाव

नकारात्मक प्रभाव

  • मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति: भोजन और पोषण, स्वास्थ्य सेवा, आवास, शिक्षा जैसी मदें उपलब्ध कराने से गरीबों का बोझ कम हो सकता है।
  • सामाजिक सशक्तिकरण: यह समावेशिता और सामाजिक गतिशीलता को बढ़ावा देता है। जैसे, स्कूली छात्राओं को लैपटॉप या साइकिल देने से स्कूल में दाखिला बढ़ता है।
  • राजनीतिक भागीदारी: मुफ़्त के उपहार (Freebies) उन मतदाताओं को आकर्षित कर सकते हैं जो चुनाव प्रक्रिया से दूर रहते हैं और लोकतंत्र में चुनावी भागीदारी बढ़ा सकते हैं।
  • आर्थिक विकास: मूलभूत आवश्यकताओं को मुफ़्त में उपलब्ध कराने से लोगों की प्रयोज्य आय बढ़ती है, जिससे उनकी खरीदने की क्षमता बढ़ती है और राष्ट्रीय आर्थिक विकास को गति मिलती है।
  • आय समानता: मुफ़्त के उपहार धन और संसाधनों को अधिक न्यायसंगत तरीके से पुनर्वितरित करके आय की असमानता को कम करते हैं।
  • जन विश्वास: सरकार द्वारा दिए जाने वाले मुफ़्त के उपहार शासन व्यवस्था में जनता का भरोसा बढ़ा सकते हैं, क्योंकि ये लोगों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और जवाबदेही को दर्शाती हैं।
  • वित्तीय भार: इससे सरकारी बजट पर दबाव पड़ता है, राजकोषीय घाटा बढ़ता है और अवसंरचना के विकास तथा रोजगार सृजन पर होने वाला खर्च कम हो जाता है।
    • राज्यों का कुल सकल राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2022 में GDP के 2.6% से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 3.2% हो गया। (आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26)
  • 'फ्री राइडर' संबंधी समस्याएँ: मुफ़्त के उपहार निर्भरता की संस्कृति को बढ़ावा देती हैं, क्योंकि लोग इन्हें अपना हक समझने लगते हैं। इससे उत्पादकता कम होती है और निजी निवेश के लिए मिलने वाले प्रोत्साहन कमज़ोर पड़ जाते हैं।
  • सतत विकास को कमज़ोर करना: जैसे, मुफ़्त बिजली और मुफ़्त जल के कारण भूजल का स्तर नीचे जा सकता है और आने वाली पीढ़ियों पर बोझ बढ़ सकता है। (CAG रिपोर्ट)
  • लोकतांत्रिक राजनीति को विकृत करना: यह अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन करता है, क्योंकि यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए आवश्यक 'समान अवसर' में बाधा डालता है।
  • संस्थाओं को कमज़ोर करना: जैसे, ऋण माफ़ी और मुफ़्त बिजली जैसी योजनाएँ बैंकों और बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) को कमज़ोर करती हैं।

 

 

आगे की राह

  • नीतिगत सुधार
    • राजकोषीय विवेक और ऋण प्रबंधन: संधारणीय कल्याणकारी योजनाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही राजकोषीय अनुशासन और ऋण की स्थिरता को बनाए रखना चाहिए। उदाहरण के लिए, किसी योजना के लागत-लाभ का पहले से विश्लेषण करना।
    • रिसाव और भ्रष्टाचार को रोकना: सब्सिडी के लक्ष्यीकरण में सुधार किया जाना चाहिए, और समावेशन/बहिष्करण से जुड़ी त्रुटियों को समाप्त करना चाहिए।
    • अन्य: कमजोर वर्गों के लिए सुरक्षा के रूप में बीमा कवरेज का विस्तार करने के साथ-साथ कल्याणकारी योजनाओं के दुरुपयोग के खिलाफ राजनीतिक सहमति और जन-जागरूकता विकसित करनी चाहिए।
    • सुब्रमण्यम बालाजी बनाम तमिलनाडु (2013): राज्यों को बिना किसी योग्यता के मुफ्त के उपहार (freebies) देने के बजाय, रोजगार (कल्याण) के अवसर बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।
    • आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26: अनियंत्रित नकद अंतरण के बजाय ऐसी नीतियाँ अपनानी चाहिए जो आय और उत्पादकता में दीर्घकालिक वृद्धि करें।
      • उदाहरण के लिए, मेक्सिको के 'प्रोग्रेसा' (Progresa) या ब्राजील के 'बोल्सा फैमिलिया' (Bolsa Família) कार्यक्रमों में स्कूल में उपस्थिति और स्वास्थ्य जांच से संबंधित नकद अंतरण।

निष्कर्ष

मुफ्त के उपहार (फ्रीबीज़) जो कल्याण और सशक्तिकरण के साधन के रूप में कार्य करती हैं, अक्सर राजकोषीय नियंत्रण की कमी के कारण राज्य की वित्तीय स्थिति पर दबाव डालती हैं। ये योजनाएँ दीर्घकालिक विकास दृष्टिकोण की बजाय अल्पकालिक लाभों को प्राथमिकता देती हैं। इसलिए आवश्यक है कि राजनीतिक संस्थानों, सरकारों और नागरिकों के व्यवहार में परिवर्तन लाकर इस संरचनात्मक समस्या का समाधान किया जाए।

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प्रोग्रेसा (Progresa) / बोल्सा फैमिलिया (Bolsa Família)

ये क्रमशः मेक्सिको और ब्राजील की सामाजिक कल्याण योजनाएं हैं, जो नकद अंतरण (cash transfers) को स्कूल में उपस्थिति और स्वास्थ्य जांच जैसी शर्तों से जोड़ती हैं। इन्हें सफल उदाहरणों के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

बिना शर्त नकद अंतरण (Unconditional Cash Transfer - UCTs)

ऐसी नकद हस्तांतरण योजनाएँ जिनमें लाभार्थियों को धन प्राप्त करने के लिए किसी विशेष शर्त (जैसे, स्कूल में उपस्थिति) को पूरा करने की आवश्यकता नहीं होती है। लेख में महिलाओं को लक्षित UCTs पर बढ़ते खर्च पर प्रकाश डाला गया है।

राजकोषीय विवेक (Fiscal Prudence)

सरकार की खर्च करने की आदतों में सावधानी और अनुशासन। इसमें यह सुनिश्चित करना शामिल है कि सरकारी व्यय टिकाऊ हो, राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में रखे और राष्ट्रीय ऋण का प्रबंधन करे।

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