संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक कार्बन बाजार के तहत पहले कार्बन क्रेडिट को मंजूरी दी है। यह परियोजना म्यांमार में है और दक्षिण कोरिया के सहयोग से संचालित की गई है।
पेरिस समझौता क्रेडिटिंग तंत्र (अनुच्छेद 6.4) क्या है?
- यह पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते के अनुच्छेद 6 के अंतर्गत कार्बन क्रेडिट तंत्र है।
- यह सत्यापन योग्य उत्सर्जन कटौती को बढ़ावा देता है, जलवायु परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण प्राप्त करता है और देशों के बीच सहयोग को आसान बनाता है।
- उदाहरण के लिए: किसी एक देश की कंपनी अपने देश में उत्सर्जन कम करती है और इस उत्सर्जन कटौती के बदले उसे कार्बन क्रेडिट मिलते हैं। इन क्रेडिट्स को वह दूसरे देश की कंपनी को बेच सकती है।
- अनुच्छेद 6.4 के अलावा, अनुच्छेद 6 के अन्य दो घटक हैं:
- अनुच्छेद 6.2: पक्षकारों के लिए लेखा-जोखा और रिपोर्टिंग से जुड़े नियम बताता है।
- अनुच्छेद 6.8: ग़ैर-बाजार आधारित सहयोग के अवसर प्रदान करता है।
Article Sources
1 sourceNGT ने परियोजना के "रणनीतिक महत्त्व" को ध्यान में रखते हुए, इसकी पर्यावरणीय मंजूरी और ICRZ (द्वीप तटीय विनियमन क्षेत्र) तथा CRZ मानदंडों के अनुपालन को बरकरार रखा है।
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के बारे में
- अवस्थिति: यह प्रोजेक्ट ग्रेट निकोबार द्वीप में निर्मित की जा रही है। यह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का सबसे दक्षिणी द्वीप है। इसमें गलाथिया खाड़ी, कैंपबेल बे और ग्रेट निकोबार बायोस्फीयर रिज़र्व के हिस्से शामिल हैं।
- उद्देश्य: इस दूरस्थ क्षेत्र को एक प्रमुख ट्रांसशिपमेंट और रक्षा केंद्र में बदलना। इसमें एकीकृत टाउनशिप; 450 MVA गैस और सौर-आधारित विद्युत संयंत्र; दोहरे उपयोग वाला (असैन्य-सैन्य) हवाई अड्डा आदि शामिल हैं।
- कार्यान्वयन एजेंसी: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह एकीकृत विकास निगम (ANIIDCO) तथा नीति (NITI) आयोग।
परियोजना से जुड़ी चिंताएं
- विनियामक कमियां:
- पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) व्यापक बहु-सांस्कृतिक मूल्यांकन की बजाय केवल एक मौसम के डेटा पर आधारित था।
- हरियाणा में प्रस्तावित प्रतिपूरक वनीकरण एक उष्णकटिबंधीय वर्षावन पारिस्थितिकी-तंत्र के नुकसान की भरपाई के लिए अपर्याप्त है।
- वन अधिकार अधिनियम (FRA): जनजातीय परिषद द्वारा अपनी सहमति वापस लेने के बावजूद भी सरकार परियोजना को आगे बढ़ा रही है।
- पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) व्यापक बहु-सांस्कृतिक मूल्यांकन की बजाय केवल एक मौसम के डेटा पर आधारित था।
- जैव विविधता को खतरा: इस परियोजना में लगभग 130 वर्ग किमी उष्णकटिबंधीय वर्षावन का गैर-वन उद्देश्यों के लिए उपयोग शामिल है। इसमें लगभग 10 लाख वृक्षों की कटाई की जाएगी। यह वर्षावन निकोबार मेगापोड, निकोबार ट्री श्रू, विशाल लेदरबैक कछुए और प्रवालों (Corals) का आश्रय स्थल है।
- सामाजिक प्रभाव: परियोजना का जनजातीय आबादी, जैसे शोंपेन (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह - PVTG) और निकोबारी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- प्राकृतिक आपदा के प्रति सुभेद्यता: यह द्वीप उच्चतम भूकंपीय-जोखिम क्षेत्र (जोन V) में आता है।
भारत के लिए परियोजना का महत्त्व
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यूनेस्को का अंतर-सरकारी समुद्र-विज्ञान आयोग (IOC) ने एकीकृत महासागर कार्बन अनुसंधान (IOC-R), 2026 रिपोर्ट जारी की है।
अंतर-सरकारी समुद्र-विज्ञान आयोग (IOC) के बारे में:
- उद्देश्य: महासागरों के बारे में बेहतर समझ विकसित करने के लिए अनुसंधान, सेवाओं और क्षमता निर्माण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना और कार्यक्रमों का समन्वय करना।
- सदस्य: 152 देश (भारत भी सदस्य है)
- सचिवालय: पेरिस (फ्रांस)
रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर
- कार्बन सिंक: महासागर वायुमंडल में मौजूद अतिरिक्त CO₂ को अवशोषित करते हैं, जिससे ग्रीनहाउस गैसों की सांद्रता कम होती है।
- विलेयता पंप: ठंडे महासागरीय जल में CO₂ आसानी से घुल जाती है और यह गहरे महासागरीय स्तरों तक पहुँच जाती है। महासागर की गहरी परतों में ये दीर्घकाल तक भंडारित रहती है।
- स्थल–महासागर–हिम के बीच विनिमय: महासागर नदियों और पिघलती हुई बर्फ के साथ कार्बन का विनिमय करते हैं। इस तरह महासागर वैश्विक कार्बन वितरण को प्रभावित करता है।
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1 sourceमेघालय में अवैध रैट-होल खनन के कारण 20 से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई
रैट-होल माइनिंग क्या है?
- रैट-होल खनन कोयला निकालने का एक आदिम (पुराना) और अवैज्ञानिक तरीका है।
- इस प्रक्रिया में, सर्वप्रथम सतही वनस्पतियों को काटकर भूमि को साफ किया जाता है। तत्पश्चात, कोयला संस्तर तक पहुँचने के लिए भूमि में संकरे गड्ढे व सुरंग खोदी जाती हैं।
- पहाड़ी ढालों का उत्खनन करके कोयला संस्तरों तक पहुँचा जाता है। इसके बाद एक क्षैतिज सुरंग बनाई जाती है, जिसके जरिए मजदूर अंदर घुसते हैं और कोयला निकालते हैं।
- निष्कर्षण की विधियाँ: पार्श्व-कर्तन (Side-cutting) और बॉक्स-कटिंग (Box-cutting)।
अवैध खनन जारी रहने के उत्तरदायी कारक
- प्राकृतिक कारक: मेघालय में कोयले की परतें बहुत पतली हैं। इस कारण वहां 'ओपनकास्ट माइनिंग' (विवृत/खुले खनन) की तुलना में रैट-होल माइनिंग आर्थिक रूप से अधिक लाभदायक लगती है।
- विकल्पों का अभाव: बागवानी, निर्माण या विनिर्माण जैसे क्षेत्रकों में ठोस आर्थिक विकल्पों का अभाव है। इस कारण स्थानीय आबादी अपनी जीविका के लिए फिर से खनन की ओर रुख करती है।
- जटिल स्वामित्व संरचनाएं: मेघालय की विशिष्ट पारिस्थितिकी तंत्र में लघु, निजी या समुदाय के स्वामित्व वाली भूमि-जोतें शामिल हैं और इनका स्वामित्व भी खंडित है।
अवैध रैट-होल खनन को रोकने के उपाय
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पहले वैज्ञानिक आकलन में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एवं बाघ अभयारण्य में फिशिंग कैट की अधिक मौजूदगी दर्ज की गई है।
फिशिंग कैट के बारे में

- यह अधिक शक्तिशाली विडाल/ बिल्ली प्रजाति है। यह आकार में घरेलू बिल्ली से लगभग दोगुनी होती है।
- पर्यावास: भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, थाईलैंड की खाड़ी आदि क्षेत्रों में आर्द्रभूमियों एवं मैंग्रोव वनों में पाई जाती है।
- भारत में मुख्यतः सुंदरबन क्षेत्र, हिमालयी गिरिपाद के साथ गंगा एवं ब्रह्मपुत्र घाटियों, पश्चिमी घाट में प्राप्त होती हैं।
- व्यवहार और मुख्य आहार: ये निशाचर शिकारी हैं। मछलियों, मेंढकों, क्रस्टेशियंस, सांपों, पक्षियों और अपमार्जित शवों (मृत पशुओं के अवशेषों) को अपना आहार बनाते हैं।
- संरक्षण स्थिति: IUCN की लाल सूची (वल्नरेबल); वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (अनुसूची-1); CITES परिशिष्ट II में सूचीबद्ध।
- विशेष मान्यता: पश्चिम बंगाल का राजकीय पशु (स्टेट एनिमल)
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे अपनी तरह के पहले ‘मधुमक्खी गलियारे/ बी-कॉरिडोर्स’ (BeeCorridors) विकसित करने की घोषणा की है।
मधुमक्खी गलियारे (बी-कॉरिडोर्स) के बारे में
- ये मधुमक्खी-अनुकूल वनस्पतियों का एक क्रमिक रैखिक विस्तार हैं। इनमें पुष्पी पादप और पौधों होते हैं।
- यह पूरे वर्ष मकरंद (Nectar) और पराग (Pollen) की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।
- महत्व: यह पहल मधुमक्खियों और अन्य परागणकों द्वारा सामना किए जा रहे पारिस्थितिकी संबंधी संकटों को कम करने में मदद करेगी।
मधुमक्खियां और उनका महत्त्व
- मधुमक्खियों की विशेषताएं और महत्त्व:
- केवल मादा मधुमक्खियों के पास डंक होते हैं जो वास्तव में संशोधित ‘अंडनिक्षेपक (Modified Ovipositor)’ होते हैं। ये वे अंग हैं जिनका उपयोग मूल रूप से अंडे देने के लिए किया जाता है।
- ये अपने आहार के लिए पूर्णतः पुष्पीय पौधों से प्राप्त होने वाले शर्करा-युक्त मकरंद और प्रोटीन-समृद्ध पराग पर ही निर्भर होती हैं।
- महत्त्व: विश्व के खाद्य उत्पादन का एक-तिहाई (1/3) हिस्सा मधुमक्खियों पर निर्भर करता है।
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1 sourceकांगो लोकतांत्रिक गणराज्य की माई-न्डोम्बे झील और तुम्बा झील के आस-पास स्थित पीटलैंड से कार्बन उत्सर्जित हो रहा है। यह कार्बन हजारों वर्षों से वहां प्राकृतिक रूप से भंडारित था।
- कांगो बेसिन के दलदल और पीटलैंड्स पृथ्वी की सतह के केवल 0.3% हिस्से में फैले हैं, फिर भी इनमें विश्व के उष्णकटिबंधीय पीटलैंड्स में संचित कार्बन का एक-तिहाई हिस्सा मौजूद है।
पीटलैंड के बारे में
- पीटलैंड वह भूक्षेत्र है जहाँ सतह पर आंशिक रूप से अपघटित जैविक पदार्थ की परतें जमा होती हैं, जिसे ‘पीट’ कहा जाता है।
- पीट का निर्माण और विकास जलभराव वाली दशाओं में होता है।
- पीटलैंड्स क्षेत्र प्रत्येक वर्ष वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में का कम-से-कम 5% का योगदान देते हैं। यह उत्सर्जन वहां के अपवाह तंत्र और उनमें लगने वाली आग से होता है। इस तरह, ये जलवायु परिवर्तन के लिए उत्तरदायी हैं।