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AI प्रभाव शिखर सम्मेलन (AI Impact Summit)

31 Mar 2026
1 min

In Summary

  • नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट 2026, जो वैश्विक दक्षिण में पहली बार आयोजित किया गया, भारत के मानव-केंद्रित एआई दृष्टिकोण (MANAV फ्रेमवर्क) पर केंद्रित था।
  • भारत की एआई रणनीति निष्पक्षता, पारदर्शिता, जवाबदेही, राष्ट्रीय संप्रभुता, सुलभता और विश्वास पर जोर देती है, जिसका मार्गदर्शन इंडियाएआई मिशन द्वारा किया जाता है।
  • चरणबद्ध रोडमैप में बुनियादी ढांचे का विस्तार, मितव्ययी मॉडल, डेटा गवर्नेंस, एआई सुरक्षा संस्थान और दीर्घकालिक लचीलेपन के लिए शैक्षिक सुधार शामिल हैं।

In Summary

सुर्खियों में क्यों?

हाल ही में भारत के नई दिल्ली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) प्रभाव शिखर सम्मेलन 2026 (AI Impact Summit 2026) का आयोजन किया गया।

एआई शिखर सम्मेलन 2026 के बारे में:

  • ​यह ग्लोबल साउथ (Global South) में आयोजित होने वाला पहला वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन है।
  • पूर्व के शिखर सम्मेलन: एआई एक्शन समिट 2025 (पेरिस, फ्रांस), एआई सियोल समिट 2024 (दक्षिण कोरिया), एआई सेफ्टी समिट 2023 (ब्लेचले पार्क, यूके)।
  • आयोजन: यह इंडिया एआई मिशन (India AI Mission) के तत्वावधान में आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य मिशन के प्रभाव लक्ष्यों पर वैश्विक सहयोग को गति प्रदान करना है।
  • ​इस शिखर सम्मेलन को एआई के प्रभाव को स्पष्ट करने वाले 7 चक्रों (कार्यकारी समूहों) और 3 सूत्रों (मूल सिद्धांतों) के इर्द-गिर्द संरचित किया गया था। (इंफोग्राफिक्स देखें)

​इस शिखर सम्मेलन ने एआई विकास के प्रति भारत के दृष्टिकोण को विशेष रूप से रेखांकित किया।

भारत का एआई विकास दृष्टिकोण क्या है?

फ्रेमवर्क: मानव-केंद्रित एआई के लिए M.A.N.A.V. (मानव)

  • M (Moral and Ethical system - नैतिक और आचारपरक पद्धति): यह एआई के डिजाइन और परिनियोजन में निष्पक्षता, पारदर्शिता और मानवीय पर्यवेक्षण को गैर-परक्राम्य (अपरिहार्य) सिद्धांतों के रूप में महत्त्व देता है।
    • उदाहरण: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 डिजिटल और एआई साक्षरता को प्राथमिकता देती है। यह डेटा-संचालित निर्णय-निर्माण और आचारपरक एआई सिद्धांतों के प्रारंभिक रूप से परिचित कराता है।
  • A (Accountable Governance - जवाबदेह शासन): इसमें पारदर्शिता, सुदृढ़ निगरानी और स्पष्ट संस्थागत उत्तरदायित्व शामिल है।
    • उदाहरण: इंडियाएआई मिशन (IndiaAI Mission) एआई प्रणालियों के उत्तरदायी विकास, परिनियोजन और निगरानी के लिए मानकों को संस्थागत रूप देता है।
  • N (National Sovereignty - राष्ट्रीय संप्रभुता): भारत के संदर्भ में इसका तात्पर्य महत्त्वपूर्ण डेटासेट की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, घरेलू संगणन (कंप्यूट) क्षमता को मजबूत करना और स्वदेशी एआई मॉडल के विकास को बढ़ावा देना है।
    • उदाहरण: सेमीकंडक्टर्स में आयात निर्भरता को कम करने के लिए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन शुरू किया गया है।
  • A (Accessible and Inclusive AI - सुलभ और समावेशी एआई): यह सुनिश्चित करता है कि एआई समाज के लिए एक गुणक के रूप में कार्य करे, न कि कुछ विशेषाधिकार प्राप्त लोगों के लिए एकाधिकार बनकर रह जाए।
    • उदाहरण: मेघराज जीआई क्लाउड (MeghRaj GI Cloud) और इंडियाएआई कंप्यूट पोर्टल (IndiaAI Compute Portal) जैसे प्लेटफॉर्म ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) जैसे साझा कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुंच का लोकतंत्रीकरण कर रहे हैं।
  • V (Valid and Legitimate - वैध और प्रामाणिक): यह एआई परिनियोजन के केंद्र में विश्वास, सुरक्षा और वैधता को स्थापित करता है।
    • उदाहरण: सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम, 2026 कृत्रिम रूप से उत्पन्न सामग्री को सुनियोजित रूप से परिभाषित और विनियमित करते हैं।

भारत के एआई भविष्य के लिए चरणबद्ध रूपरेखा (आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में उल्लिखित):

  • चरण 1: समन्वय और प्रारंभिक परीक्षण 
    • अवसंरचना का विस्तार: समुदाय-क्यूरेटेड कोड रिपॉजिटरी बनाकर और सार्वजनिक डेटासेट तक पहुंच को एकत्रित करके बॉटम-अप (नीचे से ऊपर) नवाचार दृष्टिकोण अपनाना।
    • मितव्ययी मॉडल (Frugal Models): तकनीकी ध्यान पूरी तरह से संसाधन-कुशल, अनुप्रयोग-विशिष्ट, छोटे और ओपन-वेट (Open-weight) मॉडल पर केंद्रित होगा।
    • डेटा: घरेलू मूल्य को बनाए रखने के लिए प्रोत्साहन के साथ-साथ एआई प्रशिक्षण के लिए कार्यात्मक डेटा वर्गीकरण और लेखा-परीक्षण की शुरुआत करने के लिए डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) रूपरेखा के तहत डेटा गवर्नेंस विकसित होगा।
  • चरण 2: चयनात्मक स्केलिंग और जोखिम-आधारित विनियमन
    • कंप्यूटिंग विस्तार: बड़ी कंपनियों को विनियामक सुविधाओं और सार्वजनिक डेटासेट तक पहुंच के बदले स्वेच्छा से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
    • एआई सुरक्षा को सुदृढ़ करना: परिदृश्य-आधारित 'रेड टीमिंग' (Red-teaming) आयोजित करने के लिए एक एआई सुरक्षा संस्थान (AI Safety Institute) की स्थापना करना और पूर्वानुमानित पुलिसिंग तथा फेशियल रिकग्निशन जैसे उच्च-जोखिम वाले अनुप्रयोगों के आस-पास गैर-परक्राम्य सीमाएं लागू करना।
  • रेड टीमिंग साइबर सुरक्षा की प्रभावशीलता के परीक्षण की एक प्रक्रिया है जहाँ एथिकल हैकर्स एक अनुरूपित और गैर-विनाशकारी साइबर हमले का संचालन करते हैं।
  • चरण 3: दीर्घकालिक लचीलापन और श्रम अनुकूलन
    • रणनीतिक स्वायत्तता: बाह्य हार्डवेयर आपूर्ति आघातों के प्रति भेद्यता को कम करने के लिए भारत उन्नत कंप्यूटिंग हार्डवेयर तक पहुंच सुरक्षित करने हेतु रणनीतिक साझेदारी और कूटनीति का उपयोग करेगा।
    • शैक्षिक विकास: मूलभूत संज्ञानात्मक और सामाजिक-भावनात्मक कौशल को प्राथमिकता देने के लिए प्राथमिक शिक्षा में सुधार किया जाएगा, जबकि कौशल प्रणालियों को एआई-केंद्रित और मानव-केंद्रित दोनों तरह की नौकरी की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाएगा।

निष्कर्ष 

भारत को संरचनात्मक निर्भरता उत्पन्न होने से पहले, सुविचारित और समन्वित नीतिगत कार्रवाई के माध्यम से एआई विकास को अपने विकासात्मक लक्ष्यों और दीर्घकालिक आर्थिक समुत्थानशीलता के साथ संरेखित करना चाहिए। भारत की रणनीति में अस्थिर वैश्विक मॉडलों की नकल करने के बजाय घरेलू आर्थिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित होना चाहिए। साथ ही, एआई को केवल एक तकनीक के रूप में नहीं बल्कि महत्त्वपूर्ण अवसंरचना, श्रम बाजारों, विदेश नीति और संस्कृति को आकार देने वाली एक रणनीतिक प्राथमिकता के रूप में माना जाना चाहिए।

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