सुर्ख़ियों में क्यों?
सरकार ने खाद्यान्नों का सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित करने के लिए कृषि अवसंरचना कोष (AIF) के ऋण लक्ष्य को दोगुना करने हेतु अनुमोदन प्रक्रियाओं में तेजी ला दी है।
भारत में खाद्यान्न भंडारण की वर्तमान स्थिति
- वर्ष 2024-25 के तृतीय अग्रिम अनुमानों के अनुसार, भारत ने 353.96 मिलियन टन का रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन प्राप्त किया है।
- केंद्रीकृत भंडारण: केंद्रीकृत खरीद प्रणाली के तहत, खाद्यान्न या तो सीधे भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा या राज्य सरकार की एजेंसियों द्वारा खरीदा जाता है, जिसे बाद में केंद्रीय पूल में स्थानांतरित कर दिया जाता है।
- FCI किसानों की आय की रक्षा और पर्याप्त बफर स्टॉक बनाए रखने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खाद्यान्न की खरीद करता है।
- 1 जुलाई, 2025 तक, केंद्रीय पूल के खाद्यान्नों के भंडारण के लिए FCI और राज्य एजेंसियों के पास उपलब्ध भंडारण क्षमता 917.83 लाख मीट्रिक टन (LMT) थी।
- विकेंद्रीकृत भंडारण: यह ग्रामीण गोदामों, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) और किसानों द्वारा स्वयं के स्तर पर किए जाने वाले भंडारण के माध्यम से किया जाता है।
- कुल उत्पादित खाद्यान्न का लगभग 60-70% विभिन्न स्वदेशी पारंपरिक भंडारण संरचनाओं का उपयोग करके घरेलू स्तर पर संग्रहीत किया जाता है।
- किसानों की आय को दोगुना करने से संबंधित अशोक दलवई समिति (2018) ने भी PACS के माध्यम से विकेंद्रीकृत भंडारण की सिफारिश की थी।
खाद्यान्न भंडारण के सुदृढ़ीकरण हेतु प्रमुख योजनाएं
- Aकृषि अवसंरचना कोष (AIF): वर्ष 2020 में शुरू की गई यह योजना गोदामों, कोल्ड स्टोरेज, छंटाई एवं ग्रेडिंग इकाइयों और लॉजिस्टिक्स अवसंरचना के विकास का समर्थन करती है।
- कृषि विपणन अवसंरचना (AMI): यह ग्रामीण क्षेत्रों में गोदामों के निर्माण और नवीनीकरण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
- यह कृषि विपणन के लिए एकीकृत योजना (ISAM) का एक घटक है।
- प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY): यह खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रक के लिए आधुनिक अवसंरचना के निर्माण हेतु एक व्यापक योजना है, जो खेत से खुदरा बाजार तक एक कुशल आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करती है।
- सहकारी क्षेत्रक में विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना: इसका उद्देश्य AIF, AMI जैसी योजनाओं के समन्वय के माध्यम से PACS स्तर पर भंडारण और अन्य कृषि-अवसंरचना विकसित करना है।
बेहतर भंडारण की आवश्यकता क्यों है?
- क्षति: विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, अनुचित भंडारण के कारण होने वाली खाद्यान्न और नाशवान वस्तुओं की बर्बादी इतनी अधिक है कि उससे भारत की एक-तिहाई गरीब आबादी का पेट भरा जा सकता है।
- मूल्य स्थिरता: बेहतर भंडारण सरकार को अभाव के समय स्टॉक जारी करने और कीमतों के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में सक्षम बनाता है।
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का समर्थन: खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों के तहत करोड़ों लाभार्थियों तक अनाज के निर्बाध वितरण के लिए सुदृढ़ भंडारण अवसंरचना की आवश्यकता होती है।
- किसानों की परेशानी कम करना: बेहतर भंडारण सुविधाएं किसानों को अपनी उपज संग्रहित करने और बाद में लाभकारी कीमतों पर बेचने में सक्षम बनाकर उन्हें संकटपूर्ण बिक्री से बचने में मदद करती हैं। यह किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में एक प्रभावी कदम है।
भारत में खाद्यान्न भंडारण की चुनौतियां
- भंडारण में क्षेत्रीय असंतुलन: भंडारण अवसंरचना मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा जैसे प्रमुख खरीद वाले राज्यों में केंद्रित है, जबकि कई पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में पर्याप्त सुविधाओं का अभाव है। इससे अनाज के परिवहन और वितरण में लॉजिस्टिक संबंधी चुनौतियां उत्पन्न होती हैं।
- भंडारण अवसंरचना के निर्माण में विलंब: निजी उद्यमी गारंटी योजना (PEG) जैसी योजनाओं के तहत भंडारण परियोजनाएं अत्यधिक विलंब का शिकार हुई हैं।
- उदाहरण: गोदाम निर्माण के अनुबंध देर से प्रदान किए गए और गोदामों का कार्य 2 से 7 वर्षों की देरी के बाद पूरा हुआ।
- जलवायु परिवर्तन: बढ़ता तापमान और अनियमित आर्द्रता खाद्यान्नों के खराब होने और कवक की वृद्धि की प्रक्रिया को तेज कर देते हैं।
- किसान स्तर पर भंडारण संरचनाएं: ग्रामीण क्षेत्रों में भंडारण संरचनाओं के निर्माण के लिए मुख्य रूप से मृदा, बांस, पत्थर और पादप सामग्रियों का उपयोग किया जाता है। ये संरचनाएं न तो कृंतक-रोधी हैं और न ही कवक एवं कीटों के हमलों से सुरक्षित हैं।
आगे की राह
- कैग (CAG) निष्पादन लेखापरीक्षा रिपोर्ट (2023)
- वैज्ञानिक भंडारण क्षमता में वृद्धि: सरकार को खाद्यान्न प्रबंधन, भंडारण और परिवहन पर राष्ट्रीय नीति के तहत नियोजित भंडारण सुविधाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण के कार्य को पूर्ण करना चाहिए।
- कवर्ड एंड प्लिंथ (CAP) भंडारण को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना: कवर्ड एंड प्लिंथ (CAP) यानी खुले भंडारण को धीरे-धीरे समाप्त किया जाना चाहिए और उसके स्थान पर आधुनिक भंडारण अवसंरचना स्थापित की जानी चाहिए।
- शांता कुमार समिति (2014)
- भंडारण प्रबंधन का कंप्यूटरीकरण: समिति ने खरीद केंद्रों, गोदामों और वितरण बिंदुओं पर खाद्यान्न स्टॉक की वास्तविक समय पर डिजिटल ट्रैकिंग की आवश्यकता पर बल दिया है।
- निजी क्षेत्रक की भागीदारी: निजी क्षेत्रक और अन्य भंडारण एजेंसियों की सहायता से भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पुराने पारंपरिक गोदामों को आधुनिक साइलो (Silos) में परिवर्तित किया जा सकता है।
- परक्राम्य वेयरहाउस रसीद (NWR) प्रणाली को बढ़ावा: समिति ने परक्राम्य वेयरहाउस रसीद (NWR) प्रणाली के विस्तार की सिफारिश की है। इसके तहत किसान अपनी उपज को पंजीकृत गोदामों में संग्रहित कर सकते हैं और उस संग्रहित उपज के बदले बैंक ऋण प्राप्त कर सकते हैं।