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भारत विश्व में दूसरा सबसे अधिक मोबाइल विनिर्माण करने वाला देश बन गया है। प्रथम स्थान पर चीन और तीसरे स्थान पर वियतनाम है।

  • वर्तमान में, भारत में बेचे जाने वाले 99.2% मोबाइल फोन देश में ही निर्मित होते हैं।
  • भारत के कुल इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में 43% हिस्सेदारी मोबाइल फोन की है।

इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्रक की स्थिति

  • कुल मूल्य (वैल्यूएशन): भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रक में तीव्र संवृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में यह क्षेत्रक कुल 155 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य का हो गया था।
  • उत्पादन: इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन मूल्य वित्त वर्ष 2017 में 48 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। यह वित्त वर्ष 2023 में दोगुने से अधिक बढ़कर 101 बिलियन अमेरिकी डॉलर का हो गया।
  • निर्यात: इलेक्ट्रॉनिक्स भारत का पांचवां सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बन चुका है। हालांकि, वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भारत की हिस्सेदारी अभी भी 1% से कम है।

केंद्रीय बजट 2025-26 में विशेष मखाना बोर्ड की स्थापना की घोषणा गई है। 

  • इस बोर्ड के गठन का उद्देश्य मखाना उत्पादन बढ़ाना, प्रसंस्करण में सुधार करना और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना है।

मखाना (Euryale ferox) के बारे में

  • यह पुष्पी पादप है। इसे वाटर लिली फैमिली (Nymphaeaceae) में वर्गीकृत किया गया है। यह जीनस यूरीएल (Euryale) की एकमात्र उपलब्ध प्रजाति है।
  • अनुकूल जलवायु दशाएं: मखाने की खेती के लिए 20-35°C तापमान, 50-90% सापेक्षिक आर्द्रता और 100-250 सेंटीमीटर वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है।
  • यह पूर्णतः जैविक खाद्य पदार्थ है, लेकिन अनाज की श्रेणी में नहीं आता है। इसकी खेती मुख्य रूप से भारत में होती है। हालांकि, आंशिक तौर पर कोरिया, जापान और पूर्वी रूस के कुछ हिस्सों में भी मखाने की खेती की जाती है।
    • भारत में लगभग 90% मखाना उत्पादन बिहार में होता है।
  • GI टैग: 2022 में ‘मिथिला मखाना’ को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया गया था।

शोधकर्ताओं ने रुमेटीयड गठिया (Rheumatoid Arthritis) के उपचार हेतु शरीर में सटीक तरीके से दवा पहुंचाने हेतु एक नवोन्मेषी स्व-सक्रिय प्रणाली विकसित की है। 

  • यह नई तकनीक शरीर में जॉइंट्स की सूजन को प्रत्यक्ष रूप से लक्षित करके रुमेटीइड गठिया का उपचार करती है।
  • यह तकनीक विशेष रूप से डिजाइन किए गए माइक्रोस्फीयर का उपयोग करती है। इसमें रुमेटीयड गठिया का इलाज करने वाली आम दवा ‘मेथोट्रेक्सेट’ रखी गई होती है।  
  • इन माइक्रोस्फीयर को जोड़ों में सूजन की पहचान करने और जरूरत पड़ने पर ही दवा निकालने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

रुमेटीयड गठिया के बारे में

  • यह क्रॉनिक ऑटोइम्यून बीमारी है। इससे शरीर के जॉइंट्स प्रभावित होते हैं।
  • यह बीमारी कलाई, हाथ, कोहनी, कंधे, पैर, रीढ़, घुटने और जबड़े के जॉइंट्स को प्रभावित कर सकती है।

युगांडा ने सूडान स्ट्रेन के इबोला वायरस से प्रतिरक्षा करने वाले टीके के असरदार होने पर पहली बार क्लिनिकल परीक्षण शुरू किया है। यह परीक्षण विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अन्य वैश्विक भागीदारों के साथ मिलकर किया जा रहा है। 

  • इबोला वायरस जीनस की 6 प्रजातियां हैं: जायरे, बुंडिबुग्यो, सूडान, ताई फॉरेस्ट, रेस्टन और बोम्बाली।

इबोला वायरस के बारे में

  • मनुष्यों में इबोला वायरस रोग (EVD) के दुर्लभ मामले मिलते हैं। हालांकि, यह बीमारी गंभीर हो सकती है।
  • रोग का संक्रमण: इसका मानव में फ्रूट बैट, पॉर्क्यूपाइन, नॉन-ह्यूमन प्राइमेट्स जैसे जंगली जानवरों से संक्रमण फैलता है। इसके बाद यह बीमारी मानव आबादी में फैलती है।
  • मानव से मानव में संक्रमण का माध्यम: संक्रमित व्यक्ति के रक्त, स्राव, अंगों या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क में आने से।

हाल ही में, केरल के मलप्पुरम जिले के कोट्टक्कल में आठ वर्षीय बच्ची की ब्रुसेलोसिस से मृत्यु हो गई। 

ब्रुसेलोसिस के बारे में

  • बीमारी का प्रकार: ब्रुसेलोसिस बीमारी बैक्टीरिया से फैलती है।   यह बीमारी ब्रुसेला की अलग-अलग प्रजातियों से फैलती है। इस बीमारी के संक्रमण के अधिकतर मामले मवेशी, सूअर, बकरी, भेड़ और कुत्तों में देखने को मिलते हैं।
  • दुनिया भर में इंसानों में ब्रुसेलोसिस का सबसे आम कारण ब्रुसेला मेलिटेंसिस है।
  • मानव में संक्रमण के माध्यम:
    • संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क में आने से,
    • संक्रमित पशु उत्पादों के सेवन से,
    • हवा में मौजूद बैक्टीरिया के किसी कणीय माध्यम से श्वसन तंत्र में प्रवेश करने से आदि।
  • संक्रमित व्यक्ति से किसी अन्य व्यक्ति में संक्रमण के मामले दुर्लभ हैं।
  • बीमारी का खतरा बढ़ने की वजहें:
    • पशु उद्योगों और शहरीकरण का विस्तार,
    • पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण में स्वच्छता का ध्यान नहीं रखना, आदि।

आंध्र प्रदेश में जनजातियों ने ढिम्सा नृत्य का प्रदर्शन किया।

ढिम्सा नृत्य के बारे में

  • माना जाता है कि इस नृत्य शैली की उत्पत्ति ओडिशा के कोरापुट क्षेत्र में हुई थी। 
  • यह आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम क्षेत्र में अराकू घाटी की पहाड़ी जनजातियों द्वारा किया जाने वाला अनोखा नृत्य है।
  • इसके तहत लगभग 15 से 20 महिलाएं प्रतीकात्मक जनजातीय परिधान व वस्त्र धारण कर नृत्य करती हैं।
    • मुख्य भूमिका वाली महिलाएं अपने हाथ में मोर पंख रखती हैं।
  • प्रयुक्त वाद्य यंत्र: मोरी, थुडुम और डप्पू।

हाल ही में, चमन अरोड़ा को उनकी पुस्तक "इक होर अश्वथामा" के लिए डोगरी में साहित्य अकादमी पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया है।

साहित्य अकादमी पुरस्कार के बारे में

  • उत्पत्ति: साहित्य अकादमी पुरस्कार की शुरुआत 1954 में की गई थी। यह पुरस्कार साहित्य अकादमी द्वारा दिया जाता है। यह अकादमी केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय है। 
    • पहला पुरस्कार 1955 में दिया गया था।
  • यह पुरस्कार अकादमी द्वारा मान्यता प्राप्त किसी भी प्रमुख भारतीय भाषा में प्रकाशित साहित्यिक दृष्टि से सबसे उत्कृष्ट रचनाओं के लिए दिया जाता है।
    • अकादमी द्वारा मान्यता प्राप्त भाषाओं में संविधान की अनुसूची VIII के तहत सूचीबद्ध 22 भाषाएं तथा अंग्रेजी व राजस्थानी शामिल हैं।
  • पुरस्कार एक मंजूषा के रूप में होता है। इसमें एक उत्कीर्ण तांबे की पट्टिका होती है और 1,00,000/- रुपये नकद दिए जाते है।

केंद्र सरकार ने 'तकनीकी वस्त्र क्षेत्रक में महत्वाकांक्षी नवोन्मेषकों के लिए अनुसंधान एवं उद्यमिता हेतु अनुदान (ग्रेट/ GREAT)'  योजना के तहत तकनीकी वस्त्र क्षेत्रक में 04 स्टार्ट-अप्स को मंजूरी दी।

ग्रेट स्कीम के बारे में

  • परिचय: यह राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के तहत अनुसंधान, विकास और नवाचार घटक का हिस्सा है।
  • उद्देश्य: नई प्रौद्योगिकियों, उत्पादों और प्रक्रियाओं के विकास में तेजी लाना; तकनीकी वस्त्र उद्योग के विकास व संधारणीयता में महत्वपूर्ण योगदान देना आदि।
  • यह योजना तकनीकी वस्त्र क्षेत्रक में अभूतपूर्व परियोजनाओं पर काम करने वाले शोधकर्ताओं, स्टार्ट-अप्स और उद्यमियों को वित्तीय सहायता व संसाधन प्रदान करती है।
  • केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय 18 महीने की अवधि के लिए 50 लाख रुपये तक की अनुदान सहायता प्रदान करता है।
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