सुर्ख़ियों में क्यों?
संसद की संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने "कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उदय का प्रभाव और संबंधित मुद्दे"("Impact of Emergence of Artificial Intelligence and Related Issues") शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रकाशित की।
अन्य संबंधित तथ्य
- रिपोर्ट में भारत की आंतरिक सुरक्षा पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रभावों पर प्रकाश डाला गया।
- AI वास्तविक समय की निगरानी, पूर्वानुमानित पुलिसिंग, व्यवहार विश्लेषण और अपराध पैटर्न की पहचान को सुगम बनाता है, जिससे त्वरित और अधिक सूचित निर्णय-निर्माण संभव होता है।
भारत की आंतरिक सुरक्षा संरचना में AI की भूमिका
- कानून प्रवर्तन और अर्धसैनिक अभियानों का आधुनिकीकरण:
- पुलिस बल और CCTNS 2.0: राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (NCRB) अपराध और आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम (CCTNS) को उन्नत कर रहा है। इसका उद्देश्य FIRs से अधिनियमों और धाराओं का पूर्वानुमान लगाने, बहुभाषी प्रश्नों का उत्तर देने, अपराध के हॉटस्पॉट की पहचान करने और व्यापक आपराधिक प्रोफ़ाइल तैयार करने के लिए इकाइयों का समाधान करने हेतु AI का उपयोग करना है।
- सीमा सुरक्षा और अर्धसैनिक बल: सीमा निगरानी, घुसपैठ का पता लगाने और भू-भाग विश्लेषण के लिए, विशेष रूप से खतरनाक या संवेदनशील क्षेत्रों में, AI -संचालित ड्रोन, रोबोटिक्स और कंप्यूटर विज़न सिस्टम तैनात किए जा रहे हैं। उदाहरण के लिए-
- CRPF: भीड़ का पूर्वानुमान लगाने, फेक न्यूज़ की निगरानी करने और विद्रोहियों के संचार को समझने के लिए नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) का उपयोग करके AI का उपयोग करती है।
- CISF: हवाई अड्डों पर केंद्रीकृत AI निगरानी, पूर्वानुमानित खतरे की चेतावनी और AI-संचालित बैगेज स्क्रीनिंग लागू करता है।
- NSG: भाषा प्रसंस्करण, छवि विश्लेषण और पूर्वानुमानित खतरे की जागरूकता के लिए AI का उपयोग करते हुए राष्ट्रीय तात्कालिक विस्फोटक उपकरण डेटा प्रबंधन प्रणाली (NIDMS) विकसित करता है।
- साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी से मुकाबला: भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) अपनी रिपोर्टिंग, जांच और रोकथाम रणनीतियों के आधुनिकीकरण हेतु AI पर व्यापक रूप से निर्भर करता है।
- राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP): साइबर अपराध की शिकायतों को स्वचालित रूप से वर्गीकृत करने के लिए एक AI समाधान को परिष्कृत किया जा रहा है। इससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों को मामलों को कुशलतापूर्वक प्राथमिकता देने में मदद मिलेगी।
- I4C 1930 साइबर अपराध हेल्पलाइन के लिए AI-सहायता प्राप्त, बहुभाषी शिकायत पंजीकरण प्रणाली भी लागू कर रहा है।
- अवैध खाते और वित्तीय धोखाधड़ी: आईआईटी बॉम्बे और रिजर्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH) के सहयोग से, I4C वित्तीय लेनदेन और बैंक खातों को संदिग्ध स्कोर देने के लिए AI और मशीन लर्निंग एल्गोरिदम (जैसे "Mulehunter.ai") का उपयोग करता है।
- वास्तविक समय में धोखाधड़ी का पता लगाना: व्यापक परामर्शों के अनुसार बैंकों को वास्तविक समय लेनदेन की निगरानी, जोखिमपूर्ण हस्तांतरण के लिए व्यवहारिक संकेत और वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक डेटाबेस का उपयोग करके अंतर्निहित जांच के लिए AI/ML उपकरणों का उपयोग करना आवश्यक है।
- राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP): साइबर अपराध की शिकायतों को स्वचालित रूप से वर्गीकृत करने के लिए एक AI समाधान को परिष्कृत किया जा रहा है। इससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों को मामलों को कुशलतापूर्वक प्राथमिकता देने में मदद मिलेगी।
- डिजिटल खतरों, डार्क वेब और हानिकारक सामग्री की निगरानी: सुरक्षा एजेंसियां ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म को स्कैन करने के लिए सक्रिय रूप से AI का उपयोग कर रही हैं।
- डार्क वेब और खतरे का विश्लेषण: I4C के अंतर्गत राष्ट्रीय साइबर अपराध खतरा विश्लेषण इकाई (NCTAU) डेटा उल्लंघनों, अवैध बाजारों और साइबर अपराध-एक-सेवा सहित डार्क वेब गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए AI -आधारित उपकरणों का उपयोग करती है।
- बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार सामग्री (CSEAM): CDAC मुंबई द्वारा विकसित एक सक्रिय निगरानी उपकरण (PMT) CSEAM हेतु साइबर टिपलाइनों की स्क्रीनिंग करता है।
- इसके अतिरिक्त, सुरक्षानी/SURAKSHINI पहल सोशल मीडिया पर गैर-सहमति वाली अंतरंग छवियों तथा CSEAM के अपलोड को सक्रिय रूप से पहचानने और रोकने हेतु एक समर्पित शमन केंद्र और एक हैशबैंक स्थापित कर रही है।
- डीपफेक और भ्रामक सूचना: NCTAU अवैध डीपफेक की पहचान करता है और सोशल मीडिया मध्यस्थों (SMIs) को वैधानिक रूप से हटाने के लिए नोटिस जारी करता है।
तकनीकी दक्षता और नैतिक एवं प्रणालीगत जोखिमों के बीच संतुलन स्थापित करनाप्रशासनिक निर्णय-निर्माण में AI और डिजिटल प्रौद्योगिकी का उपयोग शासन में एक महत्वपूर्ण बहस का विषय है।
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निष्कर्ष
AI प्रशासनिक निर्णयों के लिए एक पृथक और पूर्णतः विश्वसनीय स्रोत के रूप में कार्य नहीं कर सकता। शासन के लिए एक हाइब्रिड मॉडल की आवश्यकता है, अर्थात AI डेटा-आधारित अंतर्दृष्टि प्रदान करे, जबकि मानव प्रशासक सहानुभूति और नैतिक पर्यवेक्षण सुनिश्चित करें। प्रभावी कार्यान्वयन के लिए, भारत को नियमित एल्गोरिथम ऑडिट लागू करना होगा, मानव भागीदारी वाली व्यवस्था बनाए रखनी होगी और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम को सख्ती से लागू करना होगा।