भारत की आंतरिक सुरक्षा संरचना में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उद्भव (Emergence of AI in India’s Internal Security Architecture) | Current Affairs | Vision IAS

Upgrade to Premium Today

Start Now
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

अपना ज्ञान परखें

आर्थिक अवधारणाओं में महारत हासिल करने और नवीनतम आर्थिक रुझानों के साथ अपडेट रहने के लिए गतिशील और इंटरैक्टिव सत्र।

ESC

भारत की आंतरिक सुरक्षा संरचना में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उद्भव (Emergence of AI in India’s Internal Security Architecture)

22 May 2026
1 min

In Summary

  • संसदीय रिपोर्ट में भविष्यसूचक पुलिसिंग, निगरानी और अपराध विश्लेषण के माध्यम से भारत की आंतरिक सुरक्षा में एआई की भूमिका पर प्रकाश डाला गया है।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता कानून प्रवर्तन (CCTNS 2.0), सीमा सुरक्षा (ड्रोन) और साइबर अपराध इकाइयों (I4C, Mulehunter.ai) का आधुनिकीकरण करती है।
  • एआई डार्क वेब, सीएसईएम और डीपफेक की निगरानी में मदद करता है, लेकिन पूर्वाग्रह, जवाबदेही और डिजिटल विभाजन जैसी नैतिक चिंताएं बनी हुई हैं।

In Summary

सुर्ख़ियों में क्यों?

संसद की संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने "कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उदय का प्रभाव और संबंधित मुद्दे"("Impact of Emergence of Artificial Intelligence and Related Issues") शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रकाशित की।

अन्य संबंधित तथ्य

  • रिपोर्ट में भारत की आंतरिक सुरक्षा पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रभावों पर प्रकाश डाला गया।
  • AI वास्तविक समय की निगरानी, ​​पूर्वानुमानित पुलिसिंग, व्यवहार विश्लेषण और अपराध पैटर्न की पहचान को सुगम बनाता है, जिससे त्वरित और अधिक सूचित निर्णय-निर्माण संभव होता है।

भारत की आंतरिक सुरक्षा संरचना में AI की भूमिका

  • कानून प्रवर्तन और अर्धसैनिक अभियानों का आधुनिकीकरण:
    • पुलिस बल और CCTNS 2.0: राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (NCRB) अपराध और आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम (CCTNS) को उन्नत कर रहा है। इसका उद्देश्य  FIRs से अधिनियमों और धाराओं का पूर्वानुमान लगाने, बहुभाषी प्रश्नों का उत्तर देने, अपराध के हॉटस्पॉट की पहचान करने और व्यापक आपराधिक प्रोफ़ाइल तैयार करने के लिए इकाइयों का समाधान करने हेतु  AI का उपयोग करना है।
    • सीमा सुरक्षा और अर्धसैनिक बल: सीमा निगरानी, ​​घुसपैठ का पता लगाने और भू-भाग विश्लेषण के लिए, विशेष रूप से खतरनाक या संवेदनशील क्षेत्रों में, AI -संचालित ड्रोन, रोबोटिक्स और कंप्यूटर विज़न सिस्टम तैनात किए जा रहे हैं। उदाहरण के लिए-
      • CRPF: भीड़ का पूर्वानुमान लगाने, फेक न्यूज़ की निगरानी करने और विद्रोहियों के संचार को समझने के लिए नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) का उपयोग करके AI का उपयोग करती है।
      • CISF: हवाई अड्डों पर केंद्रीकृत AI निगरानी, ​​पूर्वानुमानित खतरे की चेतावनी और AI-संचालित बैगेज स्क्रीनिंग लागू करता है। 
      • NSG: भाषा प्रसंस्करण, छवि विश्लेषण और पूर्वानुमानित खतरे की जागरूकता के लिए AI का उपयोग करते हुए राष्ट्रीय तात्कालिक विस्फोटक उपकरण डेटा प्रबंधन प्रणाली (NIDMS) विकसित करता है।
  • साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी से मुकाबला: भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) अपनी रिपोर्टिंग, जांच और रोकथाम रणनीतियों के आधुनिकीकरण हेतु AI पर व्यापक रूप से निर्भर करता है। 
    • राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP)साइबर अपराध की शिकायतों को स्वचालित रूप से वर्गीकृत करने के लिए एक AI समाधान को परिष्कृत किया जा रहा है। इससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों को मामलों को कुशलतापूर्वक प्राथमिकता देने में मदद मिलेगी।
      • I4C 1930 साइबर अपराध हेल्पलाइन के लिए AI-सहायता प्राप्त, बहुभाषी शिकायत पंजीकरण प्रणाली भी लागू कर रहा है।
    • अवैध खाते और वित्तीय धोखाधड़ी: आईआईटी बॉम्बे और रिजर्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH) के सहयोग से, I4C वित्तीय लेनदेन और बैंक खातों को संदिग्ध स्कोर देने के लिए AI और मशीन लर्निंग एल्गोरिदम (जैसे "Mulehunter.ai") का उपयोग करता है।
    • वास्तविक समय में धोखाधड़ी का पता लगाना: व्यापक परामर्शों के अनुसार बैंकों को वास्तविक समय लेनदेन की निगरानी, जोखिमपूर्ण हस्तांतरण के लिए व्यवहारिक संकेत और वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक डेटाबेस का उपयोग करके अंतर्निहित जांच के लिए AI/ML उपकरणों का उपयोग करना आवश्यक है।
  • डिजिटल खतरों, डार्क वेब और हानिकारक सामग्री की निगरानी: सुरक्षा एजेंसियां ​​ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म को स्कैन करने के लिए सक्रिय रूप से AI का उपयोग कर रही हैं।
    • डार्क वेब और खतरे का विश्लेषण: I4C के अंतर्गत राष्ट्रीय साइबर अपराध खतरा विश्लेषण इकाई (NCTAU) डेटा उल्लंघनों, अवैध बाजारों और साइबर अपराध-एक-सेवा सहित डार्क वेब गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए AI -आधारित उपकरणों का उपयोग करती है।
    • बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार सामग्री (CSEAM): CDAC मुंबई द्वारा विकसित एक सक्रिय निगरानी उपकरण (PMT) CSEAM हेतु साइबर टिपलाइनों की स्क्रीनिंग करता है।
      • इसके अतिरिक्त, सुरक्षानी/SURAKSHINI पहल सोशल मीडिया पर गैर-सहमति वाली अंतरंग छवियों तथा CSEAM के अपलोड को सक्रिय रूप से पहचानने और रोकने हेतु एक समर्पित शमन केंद्र और एक हैशबैंक स्थापित कर रही है।
    • डीपफेक और भ्रामक सूचना: NCTAU अवैध डीपफेक की पहचान करता है और सोशल मीडिया मध्यस्थों (SMIs) को वैधानिक रूप से हटाने के लिए नोटिस जारी करता है।

तकनीकी दक्षता और नैतिक एवं प्रणालीगत जोखिमों के बीच संतुलन स्थापित करना

प्रशासनिक निर्णय-निर्माण में AI और डिजिटल प्रौद्योगिकी का उपयोग शासन में एक महत्वपूर्ण बहस का विषय है। 

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता का महत्व: तार्किकता को बढ़ाना
    • डेटा-आधारित वस्तुनिष्ठता: मानवीय थकान और व्यक्तिपरक पूर्वाग्रह को समाप्त कर निष्पक्ष डेटा विश्लेषण सुनिश्चित करता है।
      • उदाहरण के लिए, वस्तुनिष्ठ क्रेडिट डेटा का उपयोग करके AI-संचालित ऋण  अनुमोदन, जिससे मानवीय पूर्वाग्रह कम होता है।
    •  परिचालन दक्षता: संसाधनों के अनुकूलन के लिए विशाल डेटासेट को तुरंत संसाधित करता है। 
      • उदाहरण के लिए, ई ग्राम स्वराज प्लेटफॉर्म पंचायत नियोजन और निधि उपयोग को सुव्यवस्थित करता है।
    • पूर्वानुमानित शासन: प्राकृतिक आपदाओं, आर्थिक रुझानों या धोखाधड़ी का पूर्वानुमान लगाकर सक्रिय प्रशासन को सक्षम बनाता है।
      • उदाहरण के लिए, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड का विश्लेषण एवं जोखिम प्रबंधन महानिदेशालय (DGARM) बड़े पैमाने पर कर चोरी होने से पहले ही संदिग्ध कर पैटर्न की पहचान कर लेता है।
    • मानकीकरण: समानता के सिद्धांत को बनाए रखते हुए, नियमों के एकसमान अनुप्रयोग की गारंटी देता है।
      • उदाहरण के लिए, यातायात नियमों के उल्लंघन के आधार पर समान दंड सुनिश्चित करने वाली ई-चालान प्रणाली।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विरुद्ध तर्क: नैतिक और तकनीकी खामियां
    • एल्गोरिथ्मिक पूर्वाग्रह: प्रशिक्षण डेटा में मौजूद ऐतिहासिक सामाजिक पूर्वाग्रहों (जाति, लिंग, नस्ल) को दोहराता और बढ़ाता है।
      • उदाहरण के लिए, AI भर्ती उपकरण पुरुष उम्मीदवारों को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि पिछले भर्ती आंकड़ों में नेतृत्व/तकनीकी नौकरियों में पुरुषों का प्रतिनिधित्व अधिक था।
    • "ब्लैक बॉक्स" समस्या: अपारदर्शी मशीन लर्निंग प्रक्रियाएं AI निर्णयों को ट्रेस करना, उनकी व्याख्या करना या उन पर अपील करना कठिन बना देती हैं।
    • जवाबदेही का अभाव: स्वचालित त्रुटियों के कारण कल्याणकारी लाभों से गलत तरीके से वंचित किए जाने पर कानूनी जिम्मेदारी अस्पष्ट हो जाती है।
    • सहानुभूति का अभाव: यह सार्वजनिक प्रशासन को मानवीय विवेक, करुणा और संदर्भ-विशिष्ट नैतिक निर्णय से वंचित करता है।
    • भारत से संबंधित विशिष्ट मुद्दे
      • डिजिटल विभाजन: अवसंरचना की कमी के कारण स्थिर इंटरनेट से वंचित 45% नागरिकों के अलग-थलग पड़ने का खतरा है, जिससे असमानता और बढ़ सकती है।
      • संप्रभुता संबंधी जोखिम: विदेशी तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता डेटा गोपनीयता और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालती है।
      • दोहरी प्रकृति: भाषिनी जैसे समाधान भाषा की बाधाओं को दूर करते हैं, लेकिन बायोमेट्रिक या निगरानी उपकरण निजता के अधिकारों का उल्लंघन कर सकते हैं।

निष्कर्ष

AI प्रशासनिक निर्णयों के लिए एक पृथक और पूर्णतः विश्वसनीय स्रोत के रूप में कार्य नहीं कर सकता। शासन के लिए एक हाइब्रिड मॉडल की आवश्यकता है, अर्थात AI डेटा-आधारित अंतर्दृष्टि प्रदान करे, जबकि मानव प्रशासक सहानुभूति और नैतिक पर्यवेक्षण सुनिश्चित करें। प्रभावी कार्यान्वयन के लिए, भारत को नियमित एल्गोरिथम ऑडिट लागू करना होगा, मानव भागीदारी वाली व्यवस्था बनाए रखनी होगी और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम को सख्ती से लागू करना होगा।

Explore Related Content

Discover more articles, videos, and terms related to this topic

RELATED TERMS

3

हाइब्रिड मॉडल (शासन)

शासन में एक दृष्टिकोण जो AI की डेटा-आधारित अंतर्दृष्टि को मानव प्रशासकों के सहानुभूतिपूर्ण और नैतिक पर्यवेक्षण के साथ जोड़ता है, ताकि AI को प्रशासनिक निर्णयों के लिए एकमात्र या पूर्णतः विश्वसनीय स्रोत के रूप में इस्तेमाल करने से बचा जा सके।

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम

यह भारत में डेटा गोपनीयता को विनियमित करने वाला एक कानून है, जो व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण के लिए नियम निर्धारित करता है। AI के बढ़ते उपयोग के साथ इसका कड़ाई से प्रवर्तन महत्वपूर्ण है।

ब्लैक बॉक्स समस्या

AI के संदर्भ में, यह वह स्थिति है जब किसी AI मॉडल के आंतरिक कार्यप्रणाली को समझना मुश्किल या असंभव होता है, जिससे उसके निर्णयों या आउटपुट के पीछे के तर्क को स्पष्ट करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet