सुर्ख़ियों में क्यों?
9वें हिन्द महासागर सम्मेलन में भारत के विदेश मंत्री ने बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच हिन्द महासागर क्षेत्र में अधिक क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
हिंद महासागर सम्मेलन (IOC) के बारे में
- इस सम्मेलन की शुरुआत 2016 में इंडिया फाउंडेशन द्वारा क्षेत्रीय थिंक टैंकों और संस्थानों के सहयोग से की गई थी। इसमें 30 से अधिक देशों की भागीदारी है।
- इंडिया फाउंडेशन एक स्वतंत्र शोध संस्थान है, जो भारतीय राजनीति से जुड़े मुद्दों, चुनौतियों और अवसरों पर केंद्रित है।
- IOC 2026 मॉरीशस में संपन्न हुआ। इसका विषय "हिन्द महासागर शासन के लिए सामूहिक प्रबंधन (Collective Stewardship for Indian Ocean Governance)" था।
- यह सम्मेलन हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के देशों के लिए क्षेत्रीय विषयों पर एक प्रमुख परामर्श मंच के रूप में उभरा है। यह 'क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास (SAGAR)' के सिद्धांत के लिए क्षेत्रीय सहयोग पर विचार-विमर्श करता है।
हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के बारे में

- IOR के पश्चिम में अफ्रीका, पूर्व में मलक्का जलडमरूमध्य और ऑस्ट्रेलिया, उत्तर में भारत और दक्षिण में अंटार्कटिका स्थित हैं।
- इसमें लगभग 36 देश शामिल हैं और यह विश्व की लगभग 35% जनसंख्या तथा 40% तटरेखा का प्रतिनिधित्व करता है।
- क्षेत्र का महत्व:
- आर्थिक एवं व्यापारिक महत्व: पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार वर्तमान में भारत का लगभग 95% व्यापार (मात्रा के आधार पर) और 68% व्यापार (मूल्य के आधार पर) समुद्री मार्गों से होता है।
- ब्लू इकोनॉमी की संभावनाएं: हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का लगभग 2.4 मिलियन वर्ग किमी का अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) है, जो संधारणीय मात्स्यिकी, समुद्री नवीकरणीय ऊर्जा, इको-टूरिज्म और समुद्री जैव विविधता संरक्षण के अवसर प्रदान करता है।
- रणनीतिक और भू-राजनीतिक मूल्य: महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों और चोकपॉइंट्स (जैसे- होर्मुज जलडमरूमध्य) होने के कारण यह क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत की 11,098.81 किलोमीटर लंबी तटरेखा और 1,300 से अधिक द्वीप इसे हिंद महासागर की सुरक्षा व्यवस्था का केंद्र बनाते हैं।
हिंद महासागर क्षेत्र की बदलती भू-राजनीतिक गतिशीलता
- महत्वपूर्ण चोकपॉइंट्स की संवेदनशीलता: पश्चिम एशिया के संघर्षों, जैसे - इजरायल-हमास युद्ध के दौरान लाल सागर में बढ़ती हिंसा तथा अमेरिका-ईरान तनाव के समय होर्मुज जलडमरूमध्य अवरोध की आशंकाओं, ने होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंडेब जैसे प्रमुख चोकपॉइंट्स के आसपास तनाव बढ़ा दिया है। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार प्रभावित होने का खतरा उत्पन्न हुआ है।
- विश्व का लगभग 30% कंटेनर यातायात तथा 42% कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का परिवहन IOR से होता है।
- IOR का सैन्यीकरण: उदाहरण के लिए, अमेरिका डिएगो गार्सिया को एक प्रमुख सैन्य केंद्र के रूप में उपयोग करता है। फ्रांस की उपस्थिति रीयूनियन और मायोट द्वीपों के माध्यम से बनी हुई है। चीन बंदरगाह अवसंरचना और पहुँच समझौतों के माध्यम से अपने प्रभाव का विस्तार कर रहा है।ऑस्ट्रेलिया अपनी रणनीतिक भूमिका मजबूत करने के लिए कोकोस (कीलिंग) द्वीपों का विकास कर रहा है।
- महत्वपूर्ण अवसंरचना की संवेदनशीलता: डिजिटल युग में एक नई और गंभीर चुनौती समुद्र के नीचे बिछी संचार केबिलों की सुरक्षा से जुड़ी है, जिनके माध्यम से विश्व के 95% से अधिक डेटा का संचार होता है।
- इन केबिलों में किसी भी प्रकार की बाधा या क्षति से सैन्य संचार, वित्तीय लेन-देन, क्लाउड कंप्यूटिंग तथा ई-कॉमर्स और सोशल मीडिया जैसी डिजिटल सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं।
- गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरे: समुद्री डकैती, समुद्री आतंकवाद, अवैध मात्स्यिकी, साइबर खतरे और जलवायु परिवर्तन जैसे उभरते खतरों ने स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है।
IOR के संबंध में भारत का दृष्टिकोण
- एकीकृत हिंद महासागर रणनीति: SAGAR पहल आतंकवाद, समुद्री डकैती और अन्य अवैध गतिविधियों जैसी चुनौतियों का मुकाबला करने पर केंद्रित है। वहीं MAHASAGAR (क्षेत्रों में सुरक्षा एवं विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) पहल SAGAR के दायरे का विस्तार करता है, इसके अंतर्गत क्षेत्र से बाहर भी सुरक्षा, विकास और प्रगति के लक्ष्यों पर भी ध्यान दिया जाता है।
- समुद्री क्षेत्र जागरूकता (MDA): सूचना संलयन केंद्र-हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR) वास्तविक समय में समुद्री जानकारी साझा करने में सक्षम बनाता है, जिससे भागीदार देशों के बीच क्षेत्र की जागरूकता और परिचालन समन्वय बढ़ता है।
- द्विपक्षीय और बहुपक्षीय कूटनीति: भारत हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (IORA), हिंद-प्रशांत महासागर पहल (IPOI), BIMSTEC, कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन और हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (IONS) जैसे क्षेत्रीय मंचों में सक्रिय रूप से भाग लेता है; ये सभी संवाद, सहयोग और क्षमता निर्माण के लिए व्यवस्थित अवसर प्रदान करते हैं।
- ''प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता': चाहे मानवीय संकट हों या प्राकृतिक आपदाएं, भारत ने हमेशा त्वरित रूप से और विश्वसनीयता के साथ आगे बढ़कर मदद की है। उदाहरण के लिए, श्रीलंका में विनाशकारी चक्रवात 'दितवाह' के बाद चलाया गया 'ऑपरेशन सागर बंधु'।'
- संयुक्त सैन्य अभ्यास: AIKEYME (अफ्रीका इंडिया की मैरीटाइम एंगेजमेंट), दोस्ती (Dosti) या मिलन (MILAN) जैसे अभ्यासों के माध्यम से भारत सामूहिक सुरक्षा, पारस्परिक संचालन क्षमता और विश्वास निर्माण को मजबूत करता है, ताकि हिंद महासागर क्षेत्र को अधिक सुरक्षित और समृद्ध बनाया जा सके।
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साथ एकीकरण: भारत क्वाड (Quad) के अन्य भागीदारों- ऑस्ट्रेलिया, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका, के साथ लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, अवसंरचना और समुद्री क्षेत्र जागरूकता जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहा है।
IOR में नई भू-राजनीति के मध्य भारत के लिए आगे की राह
- क्षमता विकास: अप्रैल 2026 में जारी भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा रणनीति बहु-क्षेत्रीय एकीकरण (भूमि, समुद्र, वायु, साइबर और अंतरिक्ष) तथा ग्रे-जोन युद्ध की चुनौतियों के लिए तैयारी पर केंद्रित है।
- ग्रे-जोन युद्ध से आशय उन शत्रुतापूर्ण गतिविधियों से है, जो शांतिपूर्ण प्रतिस्पर्धा और प्रत्यक्ष पारंपरिक युद्ध के बीच आती हैं।
- द्वीप विकास: भारत को अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के समग्र विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए। अंडमान और निकोबार कमांड (ANC) को एक महत्वपूर्ण अग्रिम संचालन आधार के रूप में विकसित करना आवश्यक है, ताकि निगरानी क्षमता मजबूत हो और विशेष रूप से मलक्का जलडमरूमध्य की ओर जाने वाले महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखा जा सके।
- समुद्री शासन: भारत को नौपरिवहन की स्वतंत्रता को सक्रिय रूप से बढ़ावा देना चाहिए और अंतर्राष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से 'संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय' (UNCLOS) के अनुपालन को सुनिश्चित करना चाहिए।
- ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण: भारत को पश्चिम एशियाई तेल पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के लिए ब्राज़ील, नॉर्वे, कनाडा, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता देशों से ऊर्जा आयात बढ़ाना चाहिए।
निष्कर्ष
आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक हितों के संगम ने हिंद महासागर को बढ़ती संवेदनशीलता और प्रतिस्पर्धा का क्षेत्र बना दिया है। प्रमुख शक्तियां अब महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों, बंदरगाहों और अवसंरचनाओं पर अपना प्रभाव सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही हैं। परिणामस्वरूप, हिंद महासागर एक निष्क्रिय परिवहन मार्ग से बदलकर ऐसा सक्रिय रणनीतिक क्षेत्र बन गया है, जहाँ आर्थिक और सैन्य हित एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।