सुर्ख़ियों में क्यों?
हाल ही में, जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 की अवधि को समाहित करने वाले आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) 2025 के निष्कर्ष जारी किए गए।
PLFS वार्षिक रिपोर्ट 2025 की मुख्य विशेषताएं
- स्थिर श्रम बल सहभागिता दर (LFPR): 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए 'सामान्य स्थिति' (ps+ss) में LFPR 59.3% देखा गया। यह 2024 की तुलना में स्थिर बना हुआ है।

- पुरुष के लिए 79.1% और महिला के लिए 40.0%।
- ग्रामीण क्षेत्र के लिए 62.8% और शहरी क्षेत्र के लिए 52.2%।
- श्रमिक-जनसंख्या अनुपात (WPR): 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए सामान्य स्थिति (ps+ss) में WPR 57.4% अनुमानित किया गया है।
- पुरुष के लिए 76.6% और महिला के लिए 38.8%।
- ग्रामीण क्षेत्र के लिए 61.2% और शहरी क्षेत्र के लिए 49.7%।
- बेरोजगारी दर (UR): 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए सामान्य स्थिति (ps+ss) में समग्र बेरोजगारी दर 3.1% रही।
- पुरुष और महिला दोनों के लिए 3.1% थी (2024 की 3.3% से मामूली गिरावट दर्शाती है)।
- ग्रामीण क्षेत्र के लिए 2.4%; शहरी क्षेत्र के लिए 4.8%।
- श्रम बल में शामिल न होने का मुख्य कारण: पुरुषों में 69.8% ने अपनी पढ़ाई जारी रखने की इच्छा व्यक्त की; महिलाओं में 44.4% ने बाल देखभाल/घरेलू व्यक्तिगत प्रतिबद्धताओं को मुख्य कारण बताया।
- युवा बेरोजगारी (आयु 15-29 वर्ष): सामान्य स्थिति (ps+ss) में बेरोजगारी दर (UR) में गिरावट दर्ज की गई। यह 2024 के 10.3% से घटकर 2025 में 9.9% हो गई।
- अवैतनिक कार्य अंतराल: शहरी क्षेत्रों में स्वरोजगार में लगे पुरुष अपनी महिला समकक्षों की तुलना में प्रति सप्ताह लगभग 17.5 घंटे अधिक कार्य करते हैं (ग्रामीण क्षेत्रों में यह अंतराल 12.3 घंटे प्रति सप्ताह है)।
- नियमित मजदूरी/वेतनभोगी रोजगार और आकस्मिक श्रम में, पुरुष महिलाओं की तुलना में क्रमशः लगभग 7.9 घंटे और 6.9 घंटे प्रति सप्ताह अधिक कार्य करते हैं।
- रोजगार की संरचना: रोजगार की स्थिति के अनुसार श्रमिकों के प्रतिशत वितरण (सामान्य स्थिति में) में 2025 में मामूली बदलाव दिखा।
- स्वरोजगार की हिस्सेदारी 2024 के 57.5% से घटकर 2025 में 56.2% हो गई।
- नियमित मजदूरी/वेतनभोगी रोजगार की हिस्सेदारी 22.4% से बढ़कर 23.6% हो गई।
- आकस्मिक श्रम में लगे श्रमिकों की हिस्सेदारी कुल रोजगार के लगभग पांचवें हिस्से पर स्थिर रही।
- क्षेत्रवार योगदान: रोजगार में कृषि की हिस्सेदारी सर्वाधिक है, हालांकि यह 2024 के 44.8% से घटकर 2025 में 43.0% रह गई है।
- निर्माण क्षेत्र में मामूली गिरावट (12.3% से 12.0%) देखी गई।
- विनिर्माण क्षेत्र में 11.6% से 12.1% का सुधार देखा गया।
- अन्य सेवाओं में भी वृद्धि (12.2% से 13.1%) दर्ज की गई है।
- आय में सुधार: नियमित मजदूरी/वेतनभोगी रोजगार में पुरुषों की औसत आय में 5.8% की वृद्धि (2024-2025) हुई (महिलाओं के लिए यह वृद्धि 7.2% रही)।
- शिक्षा:
- औपचारिक शिक्षा के औसत वर्ष: 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए 10 वर्ष (पुरुष 10.2 वर्ष और महिला 9.9 वर्ष); 25 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए 9.8 वर्ष।
- निम्नतम माध्यमिक शिक्षा प्राप्त व्यक्ति: 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग में 67.8%।
- औपचारिक व्यावसायिक/तकनीकी प्रशिक्षण: 15-59 वर्ष की आयु के व्यक्तियों में 4.2%, तथा 15-29 वर्ष के आयु वर्ग में 5%।
- रोजगार, शिक्षा या प्रशिक्षण में शामिल न होने वाले व्यक्ति (NEET): सामान्य स्थिति (ps+ss) में 15-59 वर्ष के आयु वर्ग के लिए यह दर 24.9% और 15-24 वर्ष के आयु वर्ग के लिए 21.0% है।
PLFS के बारे में
- उत्पत्ति: वर्ष 2017
- संचालन: सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के तहत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा।
- महत्व: यह देश में श्रम बल, जनसंख्या की क्रियाकलापों में भागीदारी और रोजगार एवं बेरोजगारी की संरचना पर आंकड़ों का प्राथमिक स्रोत है।
- संशोधित कार्यप्रणाली: जनवरी 2025 से इसकी कार्यप्रणाली में बदलाव किया गया, जैसे- PLFS की सर्वेक्षण अवधि को जुलाई-जून चक्र (कृषि वर्ष) से बदलकर जनवरी-दिसंबर चक्र (कैलेंडर वर्ष) करना और प्रतिदर्श अभिकल्पना में परिवर्तन।
- अतः, PLFS वार्षिक रिपोर्ट 2025, कैलेंडर वर्ष (जनवरी 2025-दिसंबर 2025) को सर्वेक्षण अवधि के रूप में आधार बनाने वाली पहली व्यापक रिपोर्ट है।
- संशोधन का उद्देश्य:
- अखिल भारतीय स्तर पर 'वर्तमान साप्ताहिक स्थिति' (CWS) में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए मासिक आधार पर प्रमुख रोजगार और बेरोजगारी संकेतकों (जैसे LFPR, WPR, UR) का अनुमान लगाना।
- PLFS के त्रैमासिक परिणामों का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों तक करना और CWS में ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों को शामिल करने वाले त्रैमासिक अनुमान प्रस्तुत करना।
- वार्षिक आधार पर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए सामान्य स्थिति (ps+ss) और CWS दोनों में महत्वपूर्ण संकेतकों का अनुमान लगाना।
PLFS में प्रमुख पदावलियों की परिभाषा
LFPR = (नियोजित व्यक्ति + बेरोजगार नौकरी चाहने वाले) / कुल जनसंख्या × 100
WPR = नियोजित जनसंख्या / कुल जनसंख्या × 100
UR = बेरोजगार जनसंख्या / कुल जनसंख्या × 100
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निष्कर्ष
PLFS वार्षिक रिपोर्ट 2025 एक सुदृढ़ भारतीय श्रम बाजार को रेखांकित करती है। इसमें औपचारिक एवं वेतनभोगी रोजगार की ओर क्रमिक बदलाव तथा कृषि पर पूर्ण निर्भरता में सकारत्मक कमी दिखाई देती है। हालांकि, प्रमुख आंकड़ों से आगे बढ़कर देखने पर स्थायी संरचनात्मक असंतुलन भी सामने आते हैं। इनमें युवाओं में उच्च NEET दर, व्यावसायिक कौशल की महत्वपूर्ण कमी आदि शामिल हैं।