सुर्ख़ियों में क्यों?
हाल ही में नेपाल में नई सरकार चुनी गई है।
भारत-नेपाल संबंधों का अवलोकन | |
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भारत-नेपाल संबंधों के समक्ष प्रमुख चुनौतियां
- राजनीतिक अस्थिरता: नेपाल में बार-बार बदलती सरकारों के कारण दीर्घकालिक घरेलू नीतियों और विदेश संबंधों, विशेषकर पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में निरंतरता की कमी देखी जा रही है।
- 2008 में राजशाही की समाप्ति के बाद से ही नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है। इसका मुख्य कारण कमजोर राजनीतिक गठबंधन, गहन गुटबाजी से संबंधित संघर्ष और लगातार सामने आने वाले भ्रष्टाचार घोटालों के मामले हैं।
- वर्ष 2014 से अब तक भारत और नेपाल के बीच राष्ट्राध्यक्ष/सरकार प्रमुख स्तर पर 17 उच्चस्तरीय दौरे हो चुके हैं।
- सीमा व्यापार और सीमा शुल्क से संबंधित मुद्दे: उदाहरण के लिए, हाल ही में नेपाल की नव-निर्वाचित सरकार ने भारत से लाए जाने वाले 100 नेपाली रुपये (NRS) से अधिक मूल्य के सामान पर सीमा शुल्क लगाने का निर्णय लिया था। हालांकि, नेपाल के शीर्ष न्यायालय ने बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार के इस निर्णय पर अंतरिम रोक लगा दी।
- सीमा विवाद: वर्ष 2020 में नेपाल ने एक नया राजनीतिक मानचित्र जारी किया, जिसमें कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख को अपने क्षेत्र का हिस्सा बताया गया।
- नेपाल का तर्क है कि महाकाली नदी के पूर्व स्थित ये क्षेत्र 1816 की सुगौली संधि के अनुसार उसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
- यह सीमा विवाद 2025 में तब पुनः उभर कर सामने आया, जब भारत और चीन ने लिपुलेख दर्रे के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू करने की पहल की।
- चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा : उदाहरण के लिए, 2015 में भारत द्वारा लगाए गए व्यापार अवरोध के बाद नेपाल ने चीन के साथ अपने संबंधों को मजबूत करते हुए व्यापार में विविधता लाने का प्रयास किया। इसी क्रम में 2017 में नेपाल चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) में शामिल हुआ।
- आर्थिक व्यवधान: पंचेश्वर बहुउद्देश्यीय परियोजना, अरुण-III और ऊपरी करनाली जैसी प्रमुख संयुक्त परियोजनाएं राजनीतिक गतिरोध और बढ़ते विश्वास संकट के कारण विलंबित हुई हैं।
- सुरक्षा संबंधी मुद्दे: कुछ रिपोर्टों के अनुसार, भारत-नेपाल की खुली सीमा का दुरुपयोग आतंकवादी और संगठित अपराध समूहों द्वारा प्रशिक्षित संचालकों की आवाजाही, नकली भारतीय मुद्रा के प्रसार तथा तस्करी जैसी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।
- गोरखा भर्ती मुद्दा: भारत की अग्निपथ योजना ने गोरखा सैनिकों सहित सैन्य भर्ती की शर्तों में बदलाव किया है। इसके कारण नेपाल ने नई व्यवस्था के तहत भर्ती प्रक्रिया को स्थगित कर दिया है।
निष्कर्ष
नेपाल में जैन-जी (Gen-Z) आंदोलन के नेतृत्व में हो रहा बदलाव राजनीतिक स्थिरता हासिल करने का एक अवसर प्रदान करता है; यह अनिश्चितता को दूर करता है, मौजूदा कमियों को दूर करता है और एक अधिक समावेशी तथा प्रतिनिधि राजनीतिक माहौल को बढ़ावा देता है।
नेपाल के प्रति भारत की विदेश नीति उसके "नेबरहुड फर्स्ट" दृष्टिकोण के अंतर्गत संचालित होती है, जिसमें राजनीतिक प्रबंधन से आगे बढ़कर "शांत कूटनीति" पर बल दिया गया है। भारत स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, स्वच्छता, जल निकासी, ग्रामीण विद्युतीकरण, जलविद्युत आदि प्राथमिक क्षेत्रों में उच्च प्रभाव सामुदायिक विकास परियोजनाओं (HICDPs) के माध्यम से स्थानीय स्तर पर नेपाल के नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
