सुर्ख़ियों में क्यों?
तेलंगाना विधानसभा ने तेलंगाना प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स (पंजीकरण, सामाजिक सुरक्षा और कल्याण) अधिनियम, 2026 पारित किया है। यह राजस्थान, कर्नाटक, झारखंड और बिहार के बाद ऐसा कानून अपनाने वाला पांचवां राज्य बन गया है।
अधिनियम की मुख्य विशेषताएं
- उद्देश्य: प्लेटफॉर्म-आधारित गिग श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा, रोजगार और सेवा शर्तों की गारंटी देना। इसके साथ ही उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याणकारी उपाय सुनिश्चित करना।
- त्रिपक्षीय सामाजिक सुरक्षा और कल्याण बोर्ड: गिग श्रमिकों को पंजीकृत करने के लिए इसकी स्थापना की गई है। इसमें महिलाओं और विकलांग व्यक्तियों (PwDs) का प्रतिनिधित्व शामिल है।
- सामाजिक सुरक्षा और कल्याण कोष: इसका वित्तपोषण प्लेटफॉर्म लेनदेन मूल्यों पर 1-2% लेवी के माध्यम से किया जाएगा। इसका वहन एग्रीगेटर्स द्वारा किया जाएगा। इसे राज्य अनुदान और CSR निधियों से पूरक किया जाएगा।
- यह कोष बीमा, दुर्घटना कवर, पेंशन और मातृत्व लाभ में सहायता करेगा।
- सार्वभौमिक पंजीकरण: प्रत्येक श्रमिक को एक विशिष्ट पहचान संख्या प्राप्त होगी। यह संख्या सरकारी योजनाओं तक उनकी सीधी पहुंच सक्षम करेगी।
- शिकायत निवारण प्रणाली: अचानक बर्खास्तगी या भुगतान रोके जाने से श्रमिकों को बचाने के लिए प्लेटफॉर्म-स्तरीय समितियां बनाई जाएंगी। इसके साथ ही जिला-स्तरीय शिकायत तंत्र भी स्थापित किए जाएंगे।
- कम से कम 100 श्रमिकों वाले प्रत्येक एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म को एक आंतरिक विवाद समाधान समिति का गठन करना होगा।
- पारदर्शिता: कंपनियों को ऑर्डर आवंटन और भुगतान गणना में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है। मनमानी दर कटौती पर जुर्माना लगाया जाएगा।
गिग इकॉनमी के बारे में
- सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 एक गिग वर्कर को ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित करती है जो काम करता है। यह कार्य पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंधों के बाहर किया जाता है।
- प्रकार:
- प्लेटफॉर्म श्रमिक: वे लोग जिनका काम ऑनलाइन ऐप या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित होता है। उदाहरण के लिए: ओला, उबर, जोमैटो, स्विगी, अर्बन कंपनी आदि।
- गैर-प्लेटफॉर्म गिग श्रमिक: इसमें आमतौर पर पारंपरिक क्षेत्रों में आकस्मिक वेतन भोगी और स्व-नियोजित श्रमिक शामिल होते हैं। ये अंशकालिक या पूर्णकालिक रूप से काम करते हैं।
- भारत में गिग इकॉनमी की स्थिति:
- गिग श्रमिकों में वृद्धि: इनकी संख्या वित्त वर्ष 2021 (FY21) में 77 लाख से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 (FY25) में 120 लाख हो गई है।
- 2029-30 तक इनके बढ़कर 235 लाख होने का अनुमान है।
- कुल कार्यबल में हिस्सेदारी (FY25): >2%
- गिग श्रमिकों में भारत की वैश्विक रैंक: 5वीं सबसे बड़ी (2030 तक तीसरी होने का अनुमान)।
- गिग इकॉनमी का मूल्य: लगभग 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर। 2027 तक इसमें 17% वार्षिक वृद्धि का अनुमान है।
- गिग श्रमिकों में वृद्धि: इनकी संख्या वित्त वर्ष 2021 (FY21) में 77 लाख से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 (FY25) में 120 लाख हो गई है।
गिग इकॉनमी का महत्व
- आर्थिक:
- रोजगार और आर्थिक संवृद्धि : प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था में 9 करोड़ तक रोजगार उत्पन्न करने की क्षमता है। दीर्घावधि में यह भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 1.25% तक की वृद्धि कर सकती है। (BCG रिपोर्ट)।
- यह कृषि या पतनशील उद्योगों को छोड़ने वालों के लिए एक संक्रमण मार्ग प्रदान करता है। इसके अलावा, यह अस्थिर रोजगार वालों को पूरक आय और औपचारिक क्षेत्र में नौकरी न पा सकने वालों को प्राथमिक रोजगार का विकल्प देता है।
- क्विक कॉमर्स इकोसिस्टम का समर्थन: ब्लिंकिट और जेप्टो जैसे प्लेटफॉर्म अब शहरी भारत में उपभोग के प्रमुख चालक हैं। ये मुख्य रूप से गिग डिलीवरी नेटवर्क पर निर्भर हैं।
- आर्थिक विकल्प: गिग इकॉनमी श्रमिकों को यह चयन की स्वतंत्रता प्रदान करती है कि वे कब और कितना काम करें।
- रोजगार और आर्थिक संवृद्धि : प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था में 9 करोड़ तक रोजगार उत्पन्न करने की क्षमता है। दीर्घावधि में यह भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 1.25% तक की वृद्धि कर सकती है। (BCG रिपोर्ट)।
- सामाजिक:
- वित्तीय समावेशन: यह प्रवासियों, युवाओं और अर्ध-कुशल श्रमिकों को आय प्रदान करता है। इससे डिजिटल भुगतान और ऋण तक उनकी पहुंच आसान होती है।
- महिला सशक्तीकरण: गिग इकॉनमी में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने की क्षमता है, जिसके कारण हैं-
- काम के लचीले घंटे महिलाओं को घरेलू जिम्मेदारियों और सवेतन कार्य के बीच संतुलन को सुगम बनाते हैं।
- घर-आधारित और डिजिटल गिग कार्य पारंपरिक कार्यस्थलों की गतिशीलता बाधाओं और सुरक्षा चिंताओं को दूर करता है।
- प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था के श्रमिकों में महिलाएं लगभग 28% हैं। शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में उनकी भागीदारी बढ़ रही है।
- दिव्यांग व्यक्तियों (PwDs) का सशक्तीकरण: गिग इकॉनमी दिव्यांग व्यक्तियों (PwDs) के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करती है। इसका कारण लचीले और कार्य स्थान से स्वतंत्र कार्य हैं।
- सूक्ष्म-उद्यमिता: एयरबीएनबी और अर्बन कंपनी जैसे प्लेटफॉर्म लोगों को अपने कौशल, परिसंपत्ति और समय का आर्थिक उपयोग करने का अवसर देता है। साथ ही यह पूंजी तक पहुंच जैसी प्रवेश बाधाओं को भी कम करते हैं।
- प्रौद्योगिकी और नवाचार: यह कम आय वाले श्रमिकों के बीच डिजिटल अपनाने को बढ़ावा देता है। इससे लाखों लोग औपचारिक डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में आ जाते हैं।
- उपभोक्ताओं के लिए सुविधा: गिग इकॉनमी घर बैठे व्यक्तिगत और सस्ती सेवाएं सक्षम बनाती है। इससे उपभोक्ता के विकल्पों में वृद्धि होती है।
चुनौतियां
- आय में अस्थिरता: प्रति-ऑर्डर भुगतान में गिरावट और न्यूनतम वेतन की गारंटी की कमी से कमाई अस्थिर हो जाती है।
- व्यावसायिक खतरे: आक्रामक डिलीवरी समय-सीमा जैसे दक्षता बढ़ाने वाले उपाय डिलीवरी श्रमिकों में समस्या उत्पन्न करते हैं। ये उपाय दुर्घटना के जोखिम और मानसिक तनाव को बढ़ाते हैं।
- उदाहरण के लिए, स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट और जेप्टो जैसे प्लेटफॉर्म के डिलीवरी कर्मचारी नए वर्ष की पूर्व संध्या पर हड़ताल पर चले गए थे। उन्होंने 10-मिनट की डिलीवरी पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी।
- सामाजिक सुरक्षा का अभाव: 'कर्मचारी' के बजाय 'स्वतंत्र ठेकेदार' के रूप में वर्गीकरण के कारण यह समस्या उत्पन्न होती है। इसके परिणामस्वरूप मौजूदा कानूनों के तहत कोई सुनिश्चित स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना कवर या पेंशन नहीं मिलती है।
- खराब कार्य दशाएं : 60% प्लेटफॉर्म कर्मचारी सप्ताह में 7 दिन काम करते हैं। वहीं 47% कर्मचारी दिन में 12 घंटे से अधिक काम करते हैं (टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज)।
- उनके पास स्वच्छ शौचालय, पेयजल आदि जैसी बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच का अभाव है।
- एल्गोरिदम प्रबंधन: अपारदर्शी एल्गोरिदम ऑर्डर आवंटन, रेटिंग और अचानक खाता निलंबन को नियंत्रित करते हैं। इससे श्रमिकों की सामूहिक सौदेबाजी की शक्ति से समझौता होता है।
- कवरेज अंतराल: सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के '90-दिन के नियम' की आलोचना की जाती है। इसे अल्पकालिक गिग श्रमिकों के लिए बहुत अधिक प्रतिबंधात्मक माना जाता है।
- संहिता के तहत श्रमिक किसी एक प्लेटफॉर्म पर 90 दिन या कई प्लेटफॉर्म पर 120 दिन काम करने के बाद ही लाभ के पात्र होते हैं।
- लिंग और सुरक्षा बाधाएं: महिलाओं को देर रात के डिलीवरी मार्गों पर सुरक्षा चिंताओं जैसी अतिरिक्त बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही सामाजिक कलंक और उच्च भुगतान वाली गिग श्रेणियों तक सीमित पहुंच भी उनके लिए एक समस्या है।
- कार्यान्वयन में कमी: राजस्थान (2023) द्वारा गिग श्रमिकों के लिए भारत के पहले अधिनियम का कार्यान्वयन बहुत धीमा रहा है।
गिग श्रमिकों के लिए पहलें
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निष्कर्ष
गिग और प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था कार्य का वर्तमान और भविष्य है। संधारणीय विकास के लिए कानूनी और संस्थागत आधार को मजबूत करना आवश्यक है। इसके लिए सरकारों, नियोक्ताओं/ एग्रीगेटर्स और श्रमिकों के बीच एक प्रभावी त्रिपक्षीय संवाद और सहयोग होना चाहिए। नीति आयोग की रिपोर्ट ने प्लेटफॉर्मकरण में तेजी लाने और श्रमिक सुरक्षा को औपचारिक रूप देने के लिए एक सिफारिश की है। यह सिफारिश स्टार्टअप इंडिया की तर्ज पर 'प्लेटफॉर्म इंडिया पहल' प्रारंभ करने की है। गिग इकॉनमी के विकास के प्रति एक संतुलित और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। सामाजिक और आर्थिक कल्याण को बनाए रखने के लिए यह महत्वपूर्ण है।