भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) की ओर स्थानांतरण के लिए एक राष्ट्रीय रोडमैप जारी किया है।
इस रोडमैप का उद्देश्य ऐसी क्रिप्टोग्राफी प्रौद्योगिकियां विकसित करना है जो अत्याधुनिक क्वांटम कंप्यूटरों के हमलों से सुरक्षित हों, ताकि भविष्य में क्रिप्टोग्राफिक डेटा की सुरक्षा और डिजिटल संप्रभुता सुनिश्चित की जा सके।
- इसकी आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि क्वांटम कंप्यूटिंग में प्रगति मौजूदा क्रिप्टोग्राफी एल्गोरिदम को तोड़ने की क्षमता रखती है, जो आज की आईटी प्रणालियों, ऑनलाइन संचार, वित्तीय लेनदेन और अन्य संवेदनशील डिजिटल जानकारी की रीढ़ हैं।

- इन एल्गोरिदम्स में बेंचमार्क RSA (रिवेस्ट–शमीर–एडलमैन) और ECC (एलिप्टिक कर्व क्रिप्टोग्राफी) पब्लिक-की एन्क्रिप्शन शामिल हैं।
साइबर सुरक्षा को क्वांटम कंप्यूटिंग से जोखिम
- मौजूदा एन्क्रिप्शन का टूटना: क्वांटम कंप्यूटर पब्लिक-की क्रिप्टोग्राफी को तोड़ सकते हैं, जिससे बैंकिंग, ईमेल और सरकारी संचार खतरे में पड़ सकते हैं।
- हार्वेस्ट नाउ, डिक्रिप्ट लेटर (अभी संग्रह करें, बाद में डिक्रिप्ट करें): आज एकत्र किए गए एन्क्रिप्टेड डेटा को भविष्य में डिक्रिप्ट किया जा सकता है, जिससे दीर्घकालिक संवेदनशील जानकारी उजागर हो सकती है।
- प्रणालीगत जोखिम: क्रिप्टोग्राफी के टूटने से विद्युत, दूरसंचार, वित्त और शासन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रक बाधित हो सकते हैं।
- राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा: रक्षा और खुफिया डेटा के उजागर होने से राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है और सामरिक जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं।
सुरक्षित क्वांटम कंप्यूटिंग विकसित करने के लिए भारत के प्रयास
- राष्ट्रीय क्वांटम मिशन: इसका उद्देश्य चार विषयगत केंद्रों (thematic hubs) की स्थापना के साथ एक व्यापक स्वदेशी क्वांटम प्रौद्योगिकी प्रणाली विकसित करना है।
- विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) का क्वांटम-इनेबल्ड साइंस एंड टेक्नोलॉजी (QuEST) कार्यक्रम: इसका उद्देश्य क्वांटम प्रौद्योगिकी में युवा शोधकर्ताओं को तैयार करना है।
- राज्य-स्तरीय पहलें:
- अमरावती क्वांटम वैली (AQV) पहल: आंध्र प्रदेश,
- क्वांटम मिशन: कर्नाटक,
- तेलंगाना क्वांटम रणनीति, आदि।
Article Sources
1 source'ओटार्मेनी' (Otarmeni) नामक इस जीन थेरेपी का विकास रीजेनरोन फार्मास्यूटिकल्स ने किया है। इस थेरेपी को हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने 'नेशनल प्रायोरिटी वाउचर प्रोग्राम' के तहत मंजूरी स्वीकृति प्रदान की है।
- यह थेरेपी OTOF जीन उत्परिवर्तन के कारण होने वाले बहरापन के इलाज के लिए विकसित की गई है।
- OTOF जीन ‘ओटोफेरलिन’ (otoferlin) नामक प्रोटीन बनाने के लिए जिम्मेदार होता है। यह प्रोटीन कान की आंतरिक कोशिकाओं को ध्वनि के कंपन को मस्तिष्क द्वारा समझे जाने वाले संकेतों में बदलने में मदद करता है।
- जब किसी व्यक्ति में इस जीन की दो दोषपूर्ण प्रतियां (माता-पिता से एक-एक) होती हैं, तो इससे व्यक्ति को या तो कम सुनाई पड़ता है या वह पूर्ण बहरा हो जाता है। यह विकार वंशानुगत, गैर-सिंड्रोमिक (किसी अन्य लक्षण या बीमारी से जुड़ा नहीं होना) बहरापन के लगभग 2% से 8% मामलों में पाया जाता है।
जीन थेरेपी के बारे में
- अर्थ: जीन थेरेपी ऐसी प्रौद्योगिकियों का समूह है, जिनके माध्यम से दोषपूर्ण जीन को ठीक किया जाता है। इसमें व्यक्ति की कोशिकाओं और ऊतकों में नए जीन डाले जाते हैं ताकि बीमारी का इलाज किया जा सके।
- वेक्टर एक माध्यम या वाहक होता है, जो उपचार के लिए आवश्यक जीन को लक्षित कोशिकाओं तक पहुँचाता है।

मेघालय स्टारलिंक के साथ औपचारिक रूप से साझेदारी करने वाला तीसरा भारतीय राज्य बन गया है। प्रथम दो राज्य महाराष्ट्र और गुजरात हैं।
- स्टारलिंक को 2019 में स्पेसएक्स ने शुरू किया था। इसकी योजना पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में 42,000 उपग्रहों का संचालन करने की है।
सैटेलाइट इंटरनेट के बारे में
- परिभाषा: सैटेलाइट इंटरनेट से तात्पर्य भूस्थैतिक कक्षाओं (Geostationary Orbits: GSO) या गैर-भूस्थैतिक कक्षाओं (NGSO) में प्रक्षेपित उपग्रहों के माध्यम से प्रदान की जाने वाली इंटरनेट सेवा से है।

- पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) और मध्य भू कक्षा (MEO) गैर-भूस्थैतिक कक्षाओं के अंतर्गत आती हैं।
- फाइबर, केबल जैसी भू-आधारित इंटरनेट सेवाएं डेटा भेजने के लिए केबल्स (वायर्स) पर निर्भर हैं, जिससे इनकी पहुंच सीमित हो जाती है। वहीं, सैटेलाइट इंटरनेट सेवा इन केबल्स पर निर्भर नहीं है। इससे दुर्गम क्षेत्रों में भी इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध हो जाती हैं। सैटेलाइट इंटरनेट सेवा तेजी से पहुंचाई जा सकती है और लंबी दूरी तक डेटा भेजना आसान हो जाता है।
- अवसंरचना: इसमें आम तौर पर तीन खंड शामिल होते हैं:
- अंतरिक्ष खंड (Space Segment): इसमें कई संचार उपग्रहों का नेटवर्क शामिल है।
- स्थलीय (जमीन पर) खंड: इसमें उपग्रह मापन और नियंत्रण नेटवर्क, गेटवे स्टेशन आदि शामिल हैं।
- उपयोगकर्ता खंड (User Segment): इसमें उपयोगकर्ताओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले संचार टर्मिनल शामिल हैं।

भूमि से संचालित इंटरनेट सेवाओं की तुलना में लाभ:
- वैश्विक पहुंच: सैटेलाइट इंटरनेट सेवा उन दूर-दराज़ और कम सेवा वाले क्षेत्रों को इंटरनेट से जोड़ती है, जहाँ फाइबर या मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होते।
- त्वरित सेवा उपलब्ध कराना: इसके लिए केवल बिजली और खुला आसमान चाहिए, जिससे महंगे और समय लेने वाले निर्माण कार्यों से बचा जा सकता है।
- आपदाओं के दौरान भी उपयोगी: प्राकृतिक आपदाओं के समय यह सेवा भूमि से संचालित नेटवर्क विफल होने पर संचार को शीघ्र पुनर्बहाल करती है और बैकअप के रूप में कार्य करती है।
सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के लिए विनियामक व्यवस्था
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जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट (GIP) के डेटा से 44 मिलियन विशिष्ट भारतीय आनुवंशिक वैरिएंट्स का पता चला है।
अध्ययन के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर:
- आनुवंशिक वैरिएंट्स: अध्ययन के दौरान 129 मिलियन से अधिक आनुवंशिक वैरिएंट्स की पहचान की गई।
- अंतर्विवाह (Endogamy): समुदायों के भीतर विवाह की परंपरा के कारण भारत में आनुवंशिक रूप से विशिष्ट और पृथक समूह बने हैं।
- जनसंख्या गतिशीलता में अंतर:
- गैर-जनजातीय आबादी: इनमें अधिक आनुवंशिक मिश्रण और जनसंख्या वृद्धि दर्ज की गई है।
- जनजातीय आबादी: इनका प्रभावी जनसंख्या आकार कम होता है, इनमें आनुवंशिक बदलाव अधिक होता है और संस्थापक प्रभाव (Founder effect) मजबूत होता है। इसका अर्थ है कि लंबे समय तक अलग-थलग रहने के कारण ऐसे जीन जो विश्व में दुर्लभ होते हैं, इन समुदायों में अपेक्षाकृत ज्यादा सामान्य हो सकते हैं।
जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट (GIP) के बारे में
- प्रारंभ: इसे 2020 में केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) द्वारा प्रारंभ किया गया था।
- यह 'ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट' (HGP) का भारतीय रूप है। ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट मानव जीनोम की पहचान करने का एक वैश्विक प्रयास था जो 1990 से 2003 तक चला था।
- उद्देश्य: भारत की विविध जनसंख्या को दर्शाने वाला आनुवंशिक वैरिएंट्स का एक व्यापक डेटाबेस तैयार करना।
- नमूना आकार और विविधता: इस अध्ययन में 10,000 स्वस्थ और आपस में असंबंधित व्यक्तियों के नमूने लिए गए।
- ये लोग 83 अलग-अलग जनसंख्या समूहों का प्रतिनिधित्व करते हैं। साथ ही, ये भारत के चार प्रमुख भाषा-परिवारों को शामिल करते हैं: इंडो-यूरोपीय, द्रविड़, ऑस्ट्रो-एशियाटिक और तिब्बती-बर्मी।
- परियोजना का महत्व:
- स्वास्थ्य-देखभाल सेवा में सहायक: रोग के लिए उत्तरदायी जीन की सटीक पहचान से बीमारियों का पूर्वानुमान करना तथा शीघ्र जांच और उपचार संभव होगा। साथ ही, भारतीय जनसंख्या के अनुसार विशेष जांच-उपचार तकनीक विकसित होंगी (जैसे-अंतर्विवाह की वजह से रोग होने की आशंका के बारे में समझ)।
- पक्षपात को दूर करने में सहायक: वैश्विक अनुवांशिक डेटाबेस अभी अधिकतर यूरोपीय जनसंख्या पर आधारित हैं। जीनोम इंडिया परियोजना इस असंतुलन को कम करने में मदद करेगी।
- अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ावा मिलेगी: यह परियोजना भारत और वैश्विक जीनोमिक अनुसंधान नवाचार प्रणाली को बढ़ावा देती है।
मुख्य अवधारणाएं:
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चीन के तकला माकन रेगिस्तान में पाए गए 'पाकेपाके 005' (Pakepake 005) नामक चंद्र उल्कापिंड में एक नया खनिज 'सीरियम-मैग्नीशियम चेंजसाइट' खोजा गया है।
- इस खोज से ज्ञात चंद्र खनिजों की कुल संख्या 11 हो गई है।
सीरियम-मैग्नीशियम चेंजसाइट के बारे में
- यह विशिष्ट भौतिक और रासायनिक गुणों वाला एक दुर्लभ मृदा-युक्त फॉस्फेट खनिज है।
- भौतिक गुण: रंगहीन, पारदर्शी और कांच जैसी चमक।
- यह भंगुर (fragile) भी है और शेल-जैसे फ्रैक्चर (खंडन) को दर्शाता है, तथा UV प्रकाश में चमकता है।
- वैज्ञानिक महत्व: यह चंद्रमा पर ज्वालामुखी प्रक्रियाओं और दुर्लभ मृदा तत्वों के वितरण को समझने में मदद करेगा।
- इसकी प्रतिदीप्ति, इसे अधिक दक्ष LEDs के विकास में मूल्यवान बनाती है।
इसरो ने गगनयान चालक दल की मानसिक, शारीरिक और परिचालन क्षमताओं का परीक्षण करने के लिए मिशन मित्रा लॉन्च किया।
मिशन मित्रा (MITRA) के बारे में:
- मित्रा/MITRA से आशय है—मैपिंग ऑफ इंटर-ऑपेरेबल ट्रेट्स एंड रिस्पांस असेसमेंट।
- यह मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों के लिए इसरो द्वारा किए गए व्यवहार संबंधी एक अध्ययन है। इसे भारतीय वायु सेना (IAF) के इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन (IAM) के साथ साझेदारी में आयोजित किया गया है।
- उद्देश्य: तनाव के तहत गगनयान चालक दल के शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और परिचालन प्रदर्शन का आकलन करना।
- इसे लेह, लद्दाख में आयोजित किया गया था। वहां हाइपोक्सिया (ऑक्सीजन की कमी), कम तापमान और आइसोलेशन जैसी चरम स्थितियों का अनुकरण किया गया।