तीसरी परमाणु ऊर्जा संचालित पनडुब्बी 'आईएनएस अरिदामन' को शामिल किया गया | Current Affairs | Vision IAS

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संक्षिप्त समाचार

22 May 2026

INS अरिदमन, भारत की अरिहंत श्रेणी की पनडुब्बी (सबमरीन) है। यह भारत की अन्य परमाणु पनडुब्बियों; INS अरिहंत (2016) और INS अरिघात (2024) की तुलना में अधिक उन्नत बैलिस्टिक मिसाइल सक्षम पनडुब्बी (SSBN) है।

भारत के परमाणु-संचालित पनडुब्बी कार्यक्रम के बारे में

  • उन्नत प्रौद्योगिकी पोत (Advanced Technology Vessel: ATV) कार्यक्रम तीन दशक से अधिक पहले शुरू किया गया था। इसमें निजी कंपनियों और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की भागीदारी रही, साथ ही रूस से सहयोग प्राप्त हुआ।
  • इसका मुख्य ध्यान बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों (SSBNs) के विकास पर रहा है, जो परमाणु ऊर्जा से चलती हैं। ये पनडुब्बी से प्रक्षेपित की जाने वाली कई प्रकार की बैलिस्टिक मिसाइलें (SLBMs) ले जा सकती हैं, जिनमें एक या कई परमाणु वारहेड लगे होते हैं।

भारत के लिए परमाणु-संचालित पनडुब्बियों का महत्व

  • परमाणु त्रय (Nuclear Triad) की पूर्णता: यह पनडुब्बी उन चुनिंदा देशों (अमेरिका, रूस, चीन और फ्रांस के साथ) के समूह में भारत की स्थिति को मजबूत करती है जो स्थल, वायु और समुद्र (जल) से परमाणु हथियार प्रक्षेपित करने में सक्षम हैं।
  • सामरिक प्रतिरोधक क्षमता (Strategic Deterrence): ये पनडुब्बियां परमाणु बैलिस्टिक मिसाइलें लेकर चलती हैं, जिससे चीन और पाकिस्तान जैसे क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ भारत की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।
  • स्टील्थ और सहनशक्ति: परमाणु ऊर्जा से संचालित होने के कारण ये पनडुब्बियां लंबे समय तक जल के नीचे मिशन पर रह सकती हैं, जिससे इन्हें पहचानना मुश्किल होता है और इनकी उत्तरजीविता क्षमता अधिक होती है।
  • परमाणु सिद्धांत का विस्तार: ये पनडुब्बियां 'नो-फर्स्ट यूज़' (पहले उपयोग न करने) की नीति के साथ भारत द्वारा 'जवाबी हमला करने’ की क्षमता की गारंटी सुनिश्चित करती है। 

भारतीय नौसेना को कई प्रमुख युद्धपोत प्राप्त हुए हैं, जो स्वदेशी रक्षा विनिर्माण के क्षेत्रक में बड़ी उपलब्धि है।

प्राप्त किए गए प्रमुख युद्धपोत:

  • मालवन: यह दूसरा 'एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट' (ASW SWC) है। इसे कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया गया है।
    • इसका नाम ऐतिहासिक तटीय शहर मालवन के नाम पर रखा गया है। यह छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ी समृद्ध समुद्री विरासत को दर्शाता है।
    • क्षमताएं: पानी के भीतर निगरानी, पनडुब्बी-रोधी और माइन वारफेयर। 
  • गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE), कोलकाता द्वारा निर्मित तीन अग्रिम नौसैनिक प्लेटफॉर्म:
  • स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट दूनागिरी: यह नीलगिरी श्रेणी (प्रोजेक्ट 17A) का पांचवां पोत है। यह मिसाइलों के साथ निर्दिष्ट लक्ष्यों पर प्रहार करने में सक्षम है।
  • चौथा सर्वे वेसल (लार्ज) ‘संशोधक’: यह तटीय और गहरे पानी में हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण कार्य करता है।
  • 'अग्रेय': यह आठ 'एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट' (ASW SWC) में से चौथा है। इसे दुश्मन की पनडुब्बियों को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

रक्षा मंत्रालय ने तुंगुस्का वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की खरीद के लिए अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं। 

तुंगुस्का वायु-रक्षा मिसाइल प्रणाली के बारे में: 

  • इसे नाटो द्वारा दिए गए नाम “SA-19 'ग्रिसन'” के नाम से भी जाना जाता है। 
  • विकासक्रम: यह सोवियत मूल की, ट्रैक्ड, स्व-चालित वायु रक्षा प्रणाली है। इसे स्थलीय बलों को कम ऊंचाई वाले हवाई खतरों से बचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। 
  • विशेषता: यह सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को दोहरी 30 मिमी ऑटो-कैनन के साथ एकीकृत करती है। यह विशेषता इसे विभिन्न श्रेणियों और ऊंचाइयों पर लक्ष्यों को भेदने में सक्षम बनाती है। 
  • रेंज: 
    • डिटेक्शन: 18 किमी दूर तक। 
    • लक्ष्य: 8-10 किमी तक की दूरी और 3,500 मीटर तक की ऊंचाई पर लक्ष्यों को भेद सकती है। 
  • महत्व: हाइब्रिड डिज़ाइन इसे हेलीकॉप्टरों, ड्रोनों और क्रूज मिसाइलों के खिलाफ प्रभावी बनाता है।

भारतीय वायु सेना (IAF) RPSA कार्यक्रम के तहत मानव-रहित स्टेल्थ लड़ाकू विमानों को शामिल करने की तैयारी कर रही है। 

RPSA कार्यक्रम के बारे में:

  • RPSA का लक्ष्य 'मानव रहित कॉम्बैट एरियल व्हीकल्स' (UCAVs) विकसित करना है। इन्हें ‘घातक UCAVs’ के रूप में जाना जाता है।
    • UCAVs आमतौर पर मिसाइल या बम जैसे हथियार ले जाते हैं। इनका उपयोग ड्रोन हमलों और अन्य सैन्य अभियानों के लिए किया जाता है। 
  • घातक एक स्टेल्थ-सक्षम UCAV है, जो 'फ्लाइंग-विंग' कॉन्फ़िगरेशन पर आधारित है।
  • परिचालन में आने के बाद, ‘घातक’ गहरे प्रहार अभियानों को अंजाम देने में सक्षम होगा। यह पायलटों को जोखिम में डाले बिना उच्च-जोखिम वाले लक्ष्यों को भेदने के लिए अभेद्य सुरक्षा वाले हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर सकता है।

भारतीय नौसेना ने कोच्चि में IONS समुद्री अभ्यास (IMEX) टेबलटॉप एक्सरसाइज (TTX) 2026 की मेजबानी की है।

IONS - हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी के बारे में:

  • हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (IONS) एक स्वैच्छिक पहल है जो हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के तटीय देशों की नौसेनाओं के बीच आपसी समुद्री सहयोग को बढ़ाने का प्रयास करती है। 
  • अध्यक्षता: IONS की अध्यक्षता प्रति दो वर्ष में इसके सदस्यों के बीच रोटेशन के आधार पर हस्तांतरित होती है, अध्यक्ष के चयन के लिए सभी सदस्यों की आम सहमति अनिवार्य है।
    • भारत ने वर्ष 2026 में IONS की अध्यक्षता ग्रहण की है।
  • सदस्य: कोई भी ऐसा स्वतंत्र देश जिसकी स्थायी भौगोलिक सीमा हिंद महासागर से सटी हुई है या इसके भीतर स्थित है, वह इसका सदस्य बनने के लिए पात्र है। 
    • वर्तमान में, भारत सहित कुल 25 देश इसके सदस्य हैं।
  • साइक्लोन-IV अभ्यास: यह भारत-मिस्र के बीच द्विपक्षीय संयुक्त विशेष बल सैन्य अभ्यास है।
  • डस्टलिक अभ्यास: भारतीय सेना की एक टुकड़ी भारत-उज्बेकिस्तान संयुक्त सैन्य अभ्यास 'डस्टलिक' के सातवें संस्करण हेतु प्रस्थान कर चुकी है। 
    • यह एक वार्षिक आयोजन है। इसे बारी-बारी से भारत और उज्बेकिस्तान में आयोजित किया जाता है। 

 

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DRDO (Defence Research and Development Organisation)

India's premier agency responsible for the research and development of defense technologies, including unmanned aerial systems.

Stealth and Endurance (in submarines)

Key characteristics of advanced submarines. Stealth refers to their ability to evade detection, while endurance signifies their capacity for prolonged underwater missions, significantly enhancing their survivability and operational effectiveness.

No-First-Use (NFU)

A declaration by a nuclear weapon state that it will not be the first to use nuclear weapons in a conflict. India adheres to the NFU policy and maintains a credible 'second-strike' capability through its SSBNs.

Title is required. Maximum 500 characters.

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