पेमेंट्स विजन 2028 (Payments Vision 2028) | Current Affairs | Vision IAS

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पेमेंट्स विजन 2028 (Payments Vision 2028)

22 May 2026
1 min

In Summary

  • आरबीआई के पेमेंट्स विजन 2028 का उद्देश्य स्विच ऑन/ऑफ, साझा धोखाधड़ी दायित्व और विस्तारित निगरानी जैसी सुविधाओं के साथ भारत के डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ाना है।
  • इस विजन से सीमा पार भुगतान को सुव्यवस्थित किया जा सकेगा, टी-रीडीएस पर एमएसएमई की अंतरसंचालनीयता को बढ़ावा मिलेगा और धोखाधड़ी, साइबर सुरक्षा और ऐप के एकाधिकार जैसी चुनौतियों का समाधान किया जा सकेगा।
  • 2016 में लॉन्च किया गया यूपीआई, भारत के डिजिटल भुगतान का केंद्र बन गया है, जो अरबों लेनदेन को संसाधित करता है और एनपीसीआई के समर्थन से विश्व स्तर पर विस्तार कर रहा है।

In Summary

सुर्ख़ियों में क्यों? 

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपने पेमेंट्स विजन 2028 का अनावरण किया है। इसमें भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और विस्तारित करने के लिए एक व्यापक रोडमैप की रूपरेखा दी गई है।

अन्य संबंधित तथ्य

  • 2001 से, RBI ने पेमेंट्स विजन दस्तावेजों को स्पष्ट किया है। इन्होंने भारत के भुगतान और निपटान पारिस्थितिकी तंत्र के परिवर्तन का मार्गदर्शन किया है।
  • इसके अतिरिक्त, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने अपनी शुरुआत की 10वीं वर्षगांठ मनाई है।
    • UPI भारत के डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ बनकर उभरा है।

पेमेंट्स विजन 2028 की मुख्य विशेषताएं 

  • स्विच ऑन और स्विच ऑफ सुविधा: यह उपयोगकर्ताओं को सभी डिजिटल भुगतान मोड में लेनदेन को सक्षम या अक्षम करने की अनुमति देगा।
  • धोखाधड़ी के लिए साझा जिम्मेदारी: यह नया दृष्टिकोण ग्राहक के बैंक और लाभार्थी के बैंक दोनों को संयुक्त रूप से उत्तरदायी बनाएगा।
  • महत्वपूर्ण संस्थाओं तक विनियामक निरीक्षण का विस्तार: उदाहरण के लिए, ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस, केंद्रीकृत प्लेटफॉर्म और व्हाइट-लेबल आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AePS) प्रदाता। 
  • सीमा पार भुगतानों को सुव्यवस्थित करनासंदाय और निपटान प्रणाली (PSS) अधिनियम, 2007 और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 के तहत सीमा पार भुगतान प्राधिकरणों के लिए एक योजना है। यह सिंगल-विंडो आवेदन प्रक्रिया शुरू करने से संबंधित है।
  • MSME के लिए अंतःसंचालनीयता: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के विकास को बढ़ावा देने के लिए ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) प्लेटफॉर्मों पर पूर्ण अंतःसंचालनीयता लागू करना है। 
    • TReDS RBI द्वारा विनियमित एक इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म है। यह MSME को कार्यशील पूंजी प्राप्त करने में सहायता करता है। 
      • यह छोटे व्यवसायों को कई वित्तदाताओं को अपने अवैतनिक कॉर्पोरेट/ खरीदार चालान की नीलामी करने की अनुमति देता है। इससे वे भुगतान के लिए महीनों इंतजार करने के बजाय तुरंत नकद प्राप्त करने में सक्षम होते हैं। 

भारत का डिजिटल भुगतान पारितंत्र

  • स्थिति: भारत वैश्विकस्तर  पर वास्तविक समय में होने वाले डिजिटल भुगतानों में लगभग 50% योगदान देता है। 
  • शासन तंत्र
    • मूल अवसंरचना: 2004 में रीयल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS), नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (NEFT), इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सर्विसेज (ECS) और RBI द्वारा चेक ट्रंकेशन सिस्टम (CTS) द्वारा समर्थित है। 
    • संस्थागत ढांचा: 2005 में RBI के भीतर भुगतान और निपटान प्रणाली विभाग (DPSS) का गठन किया गया। इसके साथ ही भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) की स्थापना की गई। 
    • विनियामक समर्थन: RBI को PSS अधिनियम, 2007 को लागू करके भुगतान प्रणालियों को विनियमित करने का सांविधिक अधिकार दिया गया। 

डिजिटल भुगतान की वृद्धि के पीछे के कारक और उनका महत्व

  • परिवर्तनकारी प्लेटफॉर्म: UPI, भारत बिल भुगतान प्रणाली (BBPS) और AePS वित्तीय समावेशन और पारदर्शिता को सक्षम कर रहे हैं। 
  • बाजार का विस्तार: प्रीपेड भुगतान उपकरणों (PPIs) का लाइसेंस और विस्तार किया गया है। MSME भुगतानों के लिए ट्रेड्स (TReDS), और पेमेंट एग्रीगेटर्स पर मास्टर डायरेक्शन लागू किए गए हैं।
  • जैम ट्रिनिटी (JAM Trinity): इसमें प्रधानमंत्री जन-धन योजना (जन धन), आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी शामिल हैं। 
  • स्मार्टफोन और इंटरनेट की तेज पहुंच: उदाहरण के लिए, इंटरनेट की पहुंच लगभग 70% है। इसने छोटे व्यवसायों के सशक्तीकरण का नेतृत्व किया है। 
  • ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सेवाओं का विकास: इसने निर्बाध डिजिटल भुगतान विधियों की मांग में वृद्धि की है। यह आर्थिक विकास और नवाचार को गति दे रहा है। 
  • लोगों के इर्द-गिर्द आकार लेने वाला नवाचार:  इसने गैर-बैंकिंग संस्थाओं के लिए अवसर प्रदान किए हैं। तृतीय-पक्ष अनुप्रयोग प्रदाताओं को उपयोगकर्ता अनुभव  और नवाचार के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाया है।

भारत के डिजिटल भुगतान पारितंत्र के सामने चुनौतियां

  • असंतुलित धोखाधड़ी देयता: वर्तमान सीमित देयता ढांचे के तहत, अनधिकृत भुगतान धोखाधड़ी की जिम्मेदारी पूरी तरह से जारीकर्ता पर आती है। 
  • प्रणालीगत और साइबर सुरक्षा जोखिम: गैर-बैंक भुगतान प्रणाली ऑपरेटरों (PSOs) की साइबर सुरक्षा स्थिति और संभावित IT जोखिमों का प्रबंधन करना आवश्यक है। इसके लिए निरंतर और डेटा-संचालित निगरानी की आवश्यकता होती है। 
    • साइबर हमलावर डिजिटल भुगतान उपयोगकर्ताओं को लक्षित करने के लिए परिष्कृत धोखाधड़ी तकनीकों का तेजी से उपयोग कर रहे हैं। इनमें फिशिंग, पहचान की चोरी और सोशल इंजीनियरिंग हमले शामिल हैं।
  • सीमा पार लेनदेन में जटिलताएं: अंतरराष्ट्रीय भुगतान स्वाभाविक रूप से जटिल होते हैं। इसका कारण इसमें कई भागीदारों के शामिल होने के साथ रूटिंग हॉप्स, भिन्न समय क्षेत्र, विभिन्न न्यायिक अधिकार क्षेत्र और अतिव्यापी नियम होना है।
  • ऐप का द्वयाधिकार (App Duopoly): UPI लेनदेन का एक बहुत बड़ा प्रतिशत केवल दो तृतीय-पक्ष ऐप्स द्वारा संसाधित किया जाता है। यह एकाधिकार "टू बिग टू फेल" परिदृश्य बनाता है। इसमें प्लेटफॉर्म के डाउनटाइम से दैनिक आर्थिक गतिविधियां ठप हो सकती हैं।
  • वित्तीय साक्षरता: बुजुर्गों और ग्रामीण आबादी के एक बड़े हिस्से में अभी भी सुरक्षित रूप से भुगतान ऐप संचालन करने के लिए आवश्यक डिजिटल साक्षरता का अभाव है। इससे उन्हें शोषण का शिकार होने का खतरा रहता है।

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI)

  • प्रारंभ : RBI की विनियामक देखरेख में अप्रैल 2016 में NPCI द्वारा प्रारंभ किया।
  • यह एक ही मोबाइल एप्लिकेशन (किसी भी भाग लेने वाले बैंक का) में कई बैंक खातों को संचालित करता है। यह कई बैंकिंग सुविधाओं, निर्बाध फंड रूटिंग और मर्चेंट भुगतान को एक साथ मिलाता है।
    • UPI इंडिया स्टैक की भुगतान परत का एक अभिन्न अंग है। 
      • इंडिया स्टैक खुले API (एप्लीकेशन प्रोग्राम इंटरफ़ेस) और डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं का एक समुच्चय है। इसका उद्देश्य जनसंख्या के स्तर पर पहचान, डेटा और भुगतान की आर्थिक बुनियादी बातों को प्रकट करना है।
  • UPI के विभिन्न संस्करण : UPI लाइट (कम मूल्य के लेनदेन के लिए), UPI 123PAY (फीचर फोन उपयोगकर्ताओं के लिए त्वरित भुगतान प्रणाली), आदि।
  • मुख्य विशेषताएं
    • अंतःसंचालनीयता: एक साझा प्लेटफॉर्म के माध्यम से बैंकों और फिनटेक ऐप्स को जोड़ता है; विभिन्न बैंकों और ऐप्स के बीच लेनदेन की अनुमति देता है।
    • जटिल इनपुट को प्रतिस्थापित करता है: खाता संख्या और IFSC कोड जैसी जटिलताओं को हटाता है। इसके बजाय मोबाइल नंबर और UPI ID की आवश्यकता वाले सरल इंटरफ़ेस का उपयोग करता है। 
    • सुरक्षा और विश्वासदो-कारक प्रमाणीकरण यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक लेनदेन कई परतों के माध्यम से सत्यापित हो।

UPI की प्रमुख उपलब्धियां

  • वार्षिक लेनदेन मात्रावित्त वर्ष 2016-17 में 2 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ हो गई है।
    • 2025 में, इसने लगभग 22,000 करोड़ लेनदेन को संसाधित किया। इसका दैनिक औसत लगभग 60 करोड़ लेनदेन है।
  • UPI से जुड़े बैंकवित्त वर्ष 2016-17 में 44 बैंकों से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 तक 703 बैंक हो गए हैं। इनमें सार्वजनिक क्षेत्र, निजी, लघु वित्त, भुगतान और सहकारी बैंक आदि शामिल हैं।
  • वैश्विक पहुंचUAE, सिंगापुर, फ्रांस, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, मॉरीशस, कतर सहित कई देशों में संचालित है।

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI)

  • परिचय: भारत में खुदरा भुगतान और निपटान प्रणाली के संचालन के लिए यह एक अम्ब्रेला संगठन है।
  • पहलभारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय बैंक संघ (IBA) की।
  • कानूनी ढांचासंदाय और निपटान प्रणाली (PSS) अधिनियम, 2007
  • प्रकृति: कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 8 के तहत यह एक "गैर-लाभकारी" कंपनी है।
  • NPCI द्वारा पेश किए गए प्रमुख उत्पाद: तत्काल भुगतान सेवा (IMPS); नेशनल ऑटोमेटेड क्लीयरिंग हाउस (NACH); RuPay; AePS; आदि। 
  • NPCI इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) NPCI की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। इसे भारत के बाहर RuPay और UPI की तैनाती के लिए 2020 में निगमित किया गया था। 

 

 

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NPCI International Payments Limited (NIPL)

A wholly-owned subsidiary of NPCI, established to promote and deploy India's payment solutions like RuPay and UPI in international markets.

RuPay

India's own card network, developed by the National Payments Corporation of India (NPCI). It provides a platform for domestic card transactions and is often used for government-sponsored financial inclusion schemes.

UPI 123PAY

An instant payment system for feature phone users, enabling them to make UPI payments without needing a smartphone or internet connectivity.

Title is required. Maximum 500 characters.

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