सुर्ख़ियों में क्यों?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपने पेमेंट्स विजन 2028 का अनावरण किया है। इसमें भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और विस्तारित करने के लिए एक व्यापक रोडमैप की रूपरेखा दी गई है।

अन्य संबंधित तथ्य
- 2001 से, RBI ने पेमेंट्स विजन दस्तावेजों को स्पष्ट किया है। इन्होंने भारत के भुगतान और निपटान पारिस्थितिकी तंत्र के परिवर्तन का मार्गदर्शन किया है।
- इसके अतिरिक्त, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने अपनी शुरुआत की 10वीं वर्षगांठ मनाई है।
- UPI भारत के डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ बनकर उभरा है।
पेमेंट्स विजन 2028 की मुख्य विशेषताएं
- स्विच ऑन और स्विच ऑफ सुविधा: यह उपयोगकर्ताओं को सभी डिजिटल भुगतान मोड में लेनदेन को सक्षम या अक्षम करने की अनुमति देगा।
- धोखाधड़ी के लिए साझा जिम्मेदारी: यह नया दृष्टिकोण ग्राहक के बैंक और लाभार्थी के बैंक दोनों को संयुक्त रूप से उत्तरदायी बनाएगा।
- महत्वपूर्ण संस्थाओं तक विनियामक निरीक्षण का विस्तार: उदाहरण के लिए, ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस, केंद्रीकृत प्लेटफॉर्म और व्हाइट-लेबल आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AePS) प्रदाता।
- सीमा पार भुगतानों को सुव्यवस्थित करना: संदाय और निपटान प्रणाली (PSS) अधिनियम, 2007 और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 के तहत सीमा पार भुगतान प्राधिकरणों के लिए एक योजना है। यह सिंगल-विंडो आवेदन प्रक्रिया शुरू करने से संबंधित है।
- MSME के लिए अंतःसंचालनीयता: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के विकास को बढ़ावा देने के लिए ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) प्लेटफॉर्मों पर पूर्ण अंतःसंचालनीयता लागू करना है।
- TReDS RBI द्वारा विनियमित एक इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म है। यह MSME को कार्यशील पूंजी प्राप्त करने में सहायता करता है।
- यह छोटे व्यवसायों को कई वित्तदाताओं को अपने अवैतनिक कॉर्पोरेट/ खरीदार चालान की नीलामी करने की अनुमति देता है। इससे वे भुगतान के लिए महीनों इंतजार करने के बजाय तुरंत नकद प्राप्त करने में सक्षम होते हैं।
- TReDS RBI द्वारा विनियमित एक इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म है। यह MSME को कार्यशील पूंजी प्राप्त करने में सहायता करता है।
भारत का डिजिटल भुगतान पारितंत्र
- स्थिति: भारत वैश्विकस्तर पर वास्तविक समय में होने वाले डिजिटल भुगतानों में लगभग 50% योगदान देता है।
- शासन तंत्र
- मूल अवसंरचना: 2004 में रीयल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS), नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (NEFT), इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सर्विसेज (ECS) और RBI द्वारा चेक ट्रंकेशन सिस्टम (CTS) द्वारा समर्थित है।
- संस्थागत ढांचा: 2005 में RBI के भीतर भुगतान और निपटान प्रणाली विभाग (DPSS) का गठन किया गया। इसके साथ ही भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) की स्थापना की गई।
- विनियामक समर्थन: RBI को PSS अधिनियम, 2007 को लागू करके भुगतान प्रणालियों को विनियमित करने का सांविधिक अधिकार दिया गया।
डिजिटल भुगतान की वृद्धि के पीछे के कारक और उनका महत्व
- परिवर्तनकारी प्लेटफॉर्म: UPI, भारत बिल भुगतान प्रणाली (BBPS) और AePS वित्तीय समावेशन और पारदर्शिता को सक्षम कर रहे हैं।
- बाजार का विस्तार: प्रीपेड भुगतान उपकरणों (PPIs) का लाइसेंस और विस्तार किया गया है। MSME भुगतानों के लिए ट्रेड्स (TReDS), और पेमेंट एग्रीगेटर्स पर मास्टर डायरेक्शन लागू किए गए हैं।
- जैम ट्रिनिटी (JAM Trinity): इसमें प्रधानमंत्री जन-धन योजना (जन धन), आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी शामिल हैं।
- स्मार्टफोन और इंटरनेट की तेज पहुंच: उदाहरण के लिए, इंटरनेट की पहुंच लगभग 70% है। इसने छोटे व्यवसायों के सशक्तीकरण का नेतृत्व किया है।
- ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सेवाओं का विकास: इसने निर्बाध डिजिटल भुगतान विधियों की मांग में वृद्धि की है। यह आर्थिक विकास और नवाचार को गति दे रहा है।
- लोगों के इर्द-गिर्द आकार लेने वाला नवाचार: इसने गैर-बैंकिंग संस्थाओं के लिए अवसर प्रदान किए हैं। तृतीय-पक्ष अनुप्रयोग प्रदाताओं को उपयोगकर्ता अनुभव और नवाचार के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाया है।
भारत के डिजिटल भुगतान पारितंत्र के सामने चुनौतियां
- असंतुलित धोखाधड़ी देयता: वर्तमान सीमित देयता ढांचे के तहत, अनधिकृत भुगतान धोखाधड़ी की जिम्मेदारी पूरी तरह से जारीकर्ता पर आती है।
- प्रणालीगत और साइबर सुरक्षा जोखिम: गैर-बैंक भुगतान प्रणाली ऑपरेटरों (PSOs) की साइबर सुरक्षा स्थिति और संभावित IT जोखिमों का प्रबंधन करना आवश्यक है। इसके लिए निरंतर और डेटा-संचालित निगरानी की आवश्यकता होती है।
- साइबर हमलावर डिजिटल भुगतान उपयोगकर्ताओं को लक्षित करने के लिए परिष्कृत धोखाधड़ी तकनीकों का तेजी से उपयोग कर रहे हैं। इनमें फिशिंग, पहचान की चोरी और सोशल इंजीनियरिंग हमले शामिल हैं।
- सीमा पार लेनदेन में जटिलताएं: अंतरराष्ट्रीय भुगतान स्वाभाविक रूप से जटिल होते हैं। इसका कारण इसमें कई भागीदारों के शामिल होने के साथ रूटिंग हॉप्स, भिन्न समय क्षेत्र, विभिन्न न्यायिक अधिकार क्षेत्र और अतिव्यापी नियम होना है।
- ऐप का द्वयाधिकार (App Duopoly): UPI लेनदेन का एक बहुत बड़ा प्रतिशत केवल दो तृतीय-पक्ष ऐप्स द्वारा संसाधित किया जाता है। यह एकाधिकार "टू बिग टू फेल" परिदृश्य बनाता है। इसमें प्लेटफॉर्म के डाउनटाइम से दैनिक आर्थिक गतिविधियां ठप हो सकती हैं।
- वित्तीय साक्षरता: बुजुर्गों और ग्रामीण आबादी के एक बड़े हिस्से में अभी भी सुरक्षित रूप से भुगतान ऐप संचालन करने के लिए आवश्यक डिजिटल साक्षरता का अभाव है। इससे उन्हें शोषण का शिकार होने का खतरा रहता है।
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI)
UPI की प्रमुख उपलब्धियां
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