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सजग पूंजीवाद (Conscious Capitalism)

22 May 2026
1 min

In Summary

  • सचेत पूंजीवाद, सार्वभौमिक कल्याण और आर्थिक समानता के उद्देश्य से, वित्तीय सफलता के साथ उद्देश्य, नैतिकता और हितधारक मूल्य को एकीकृत करता है।
  • यह शेयरधारकों की प्रधानता और लाभ को अधिकतम करने की बजाय हितधारकों के एकीकरण और दीर्घकालिक स्थिरता को प्राथमिकता देकर पारंपरिक पूंजीवाद के विपरीत है।
  • पुरुषार्थ और गांधी के न्यासवाद जैसे भारतीय दर्शन सचेत पूंजीवाद के नैतिक और समावेशी विकास सिद्धांतों के अनुरूप हैं।

In Summary

प्रस्तावना 

मानव सभ्यता का विकास वणिकवाद (Mercantilism) से वित्तीय पूंजीवाद (जो तर्कहीन लालच और लाभ के अधिकतमकरण पर आधारित है) की ओर हुआ है। साथ ही, वर्तमान समय में शक्तिशाली डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्रों तथा जटिल कॉर्पोरेट संरचनाओं का उदय हुआ है। इस नए युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भविष्यवादी क्रांति, नवीकरणीय ऊर्जा संक्रमण और जलवायु संकट जैसे बदलावों के साथ सजग पूंजीवाद को अपनाना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि ये बदलाव अपने साथ विभिन्न जोखिम, चुनौतियाँ और अवसर प्रस्तुत कर रहे हैं। वैश्विक शांति और संधारणीयता को बढ़ावा देने के लिए, निष्पक्षता, नैतिकता और समता के सिद्धांतों के साथ धन-सृजन को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।

सजग पूंजीवाद क्या है? 

  • यह एक ऐसा दर्शन है जो वित्तीय सफलता के साथ-साथ उद्देश्य, नैतिकता और हितधारकों के मूल्य पर बल देता है, जिसका लक्ष्य एक ऐसा व्यवसाय संचालित करना है जो इसमें शामिल सभी पक्षों के लिए मूल्य का सृजन करे।    
  • संबद्ध मूल्य: एक न्यायपूर्ण समाज के निर्माण के उद्देश्य से सार्वभौमिक कल्याण, सत्य, अहिंसा, आत्म-त्याग और आर्थिक समानता इसके संबद्ध मूल्य हैं
  • व्यावसायिक नैतिकता, सजग पूंजीवाद की नींव है।
    • व्यावसायिक नैतिकता कॉर्पोरेट आचरण में नैतिक सिद्धांतों के अनुप्रयोग से संबंधित है, जो निष्पक्षता, पारदर्शिता और दीर्घकालिक मूल्य सृजन को बढ़ावा देती है तथा हितधारकों के अधिकारों, पर्यावरणीय संधारणीयता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व को प्राथमिकता देती है।
  • सजग पूंजीवाद के अनुरूप भारतीय दार्शनिक विचार:
    • पुरुषार्थ: धन का अर्जन और भौतिक संपदा का संचय (अर्थ) हमेशा नैतिक धार्मिकता और कर्तव्य (धर्म) द्वारा निर्देशित होना चाहिए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि व्यावसायिक गतिविधियाँ सामाजिक सद्भाव का समर्थन करती हैं।
    • महात्मा गांधी का न्यासिता का सिद्धांत: इसके तहत व्यवसाय के स्वामियों को पूंजी के पूर्ण मालिक के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक समुदाय की ओर से धन का प्रबंधन करने के लिए जिम्मेदार न्यासियों के रूप में देखा जाता है।
    • समावेशी विकास: भारतीय शासन मॉडल अंत्योदय (अंतिम व्यक्ति का कल्याण) और सर्वोदय (सार्वभौमिक उत्थान) के सिद्धांतों को बढ़ावा देते हैं।

पारंपरिक पूंजीवाद और सजग पूंजीवाद के बीच मुख्य अंतर क्या हैं?

मानदंड (Parameters)

पारंपरिक पूंजीवाद (Traditional Capitalism)

सजग पूंजीवाद (Conscious Capitalism)

 

मूल सिद्धांत 

  • व्यक्तिगत और निजी संपत्ति के अधिकार।
  • मुक्त व्यापार (Free Trade)।
  • कानून का शासन।
  • पूंजीवाद के मूल सिद्धांतों पर आधारित।
  • इसके साथ ही इसमें सामाजिक न्याय को भी समाहित किया जाता है।

निदेशन (Directive)

  • शेयरधारकहोती की सर्वोच्चता।
  • इक्विटी मालिकों के लिए अल्पकालिक त्रैमासिक रिटर्न को अधिकतम करना।
  • हितधारकों का एकीकरण।
  • संधारणीय बौद्धिक, सामाजिक और पारिस्थितिक संपदा का सृजन करना।

लाभ पर फोकस

  • लाभ का अधिकतमकरण।
  • लागत में कटौती, मजदूरी में कमी, पर्यावरण की उपेक्षा आदि।
  • कार्यों के व्यापक प्रभावों पर विचार करना।
  • पृथ्वी और लोगों पर ध्यान केंद्रित करना।
  • संधारणीय व्यावसायिक मॉडल।

दीर्घकालिक संधारणीयता

  • अल्पकालिक लक्ष्यों को प्राथमिकता देना।
  • भविष्य के परिणामों पर विचार किए बिना संसाधनों का दोहन करना।
  • दीर्घकालिक व्यवहार्यता (व्यवसाय में नैतिक प्रथाओं को एकीकृत करना)।
  • संधारणीय संसाधन और सामुदायिक कल्याण।

आर्थिक मॉडल

  • संसाधनों के निष्कर्षण का रैखिक आर्थिक मॉडल
  • अपशिष्ट के प्रभाव या व्यापक प्रभाव पर विचार करने वाला चक्रीय मॉडल

CSR के प्रति दृष्टिकोण

  • यह एक सैटेलाइट (पूरक) कार्यक्रम के रूप में कार्य करता है।
  • कंपनी की संस्कृति और जड़ों से अलग होता है।
  • सामाजिक न्याय व्यवसाय के मूल ताने-बाने (Fibre) में बुना होता है।
  • यह व्यवसाय करने का एक तरीका है।

वर्तमान समय में सजग पूंजीवाद क्यों गति पकड़ रहा है?

  • नैतिक व्यावसायिक प्रथाओं को बढ़ावा देना: नैतिक पूंजीवाद सजग पूंजीवाद के केंद्र में है। 
    • यह कंपनियों को कल्याण की एक शक्ति और सकारात्मक बदलाव के प्रवर्तक के रूप में स्थापित करता है। जिस प्रकार सभी मनुष्यों के एक-दूसरे के प्रति नैतिक दायित्व होते हैं, उसी प्रकार व्यवसायों के भी मानवता और उनके पर्यावरण के प्रति नैतिक दायित्व हैं।
  • पूंजीवाद के वास्तविक स्वरूप का अहसास: बाजार की दक्षता, वित्त की अनियंत्रित प्रकृति और दूसरों की तुलना में कुछ ही लोगों के लाभ के लिए मुनाफे और धन के अधिकतमकरण की होड़ ने असमानताएं पैदा की हैं। इसके कारण शांति और संधारणीयता के संबंध में खराब परिणाम सामने आए हैं।
  • उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताएँ: उपभोक्ता तेजी से अपने क्रय निर्णयों (Purchasing Decisions) के साथ नैतिक मूल्यों का एकीकरण कर रहे हैं और उन व्यवसायों का समर्थन करना पसंद करते हैं जो उनके मूल्यों के अनुरूप हैं।
  • पारदर्शिता का युग: डिजिटल मीडिया के युग में, कॉर्पोरेट कार्यों की निरंतर बारीकी से जांच की जाती है। कंपनियों को प्रामाणिकता और जवाबदेही के साथ काम करना चाहिए, अन्यथा उन्हें प्रतिष्ठित क्षति (Reputational Damage) का जोखिम उठाना पड़ता है
  • दीर्घकालिक मूल्य सृजन: विश्वास और वफादारी का निर्माण करके उद्देश्य और हितधारकों पर ध्यान केंद्रित करने की प्रवृत्ति बढ़ी है, जिससे एक संधारणीय प्रतिस्पर्धी लाभ उत्पन्न होता है।
  • समकालीन घटनाक्रम: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को तेजी से अपनाने, नवीकरणीय ऊर्जा संक्रमण आदि जैसे घटनाक्रमों ने उनके नैतिक और सामाजिक प्रभावों के बारे में चिंताएं बढ़ा दी हैं।

सजग पूंजीवाद की प्रथाओं को लागू करने में मुख्य चुनौतियाँ

  • अल्पकालिक और दीर्घकालिक लक्ष्यों में संतुलन: तत्काल वित्तीय परिणाम देने का दबाव दीर्घकालिक, उद्देश्य-संचालित पहलों के साथ टकराव पैदा करता है।
  • सांस्कृतिक परिवर्तन: संगठनात्मक संस्कृति को बदलने के लिए व्यवसाय के सभी स्तरों से समय, प्रयास और प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है।
  • प्रभाव का मापन: सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव को मात्रात्मक रूप से मापना (Quantify करना) जटिल हो सकता है, जिससे प्रगति का आकलन करना कठिन हो जाता hunger है।
  • ग्रीनवॉशिंग और वोक-वॉशिंग का जोखिम: कुछ व्यवसाय सचेत शब्दावली (Conscious Terminology) का उपयोग विशुद्ध रूप से एक विपणन ढाल (Marketing Shield) के रूप में करते हैं; वे अपनी शोषणात्मक और अपरिवर्तित व्यावसायिक गतिविधियों को छिपाने के लिए प्रगतिशील ब्रांडिंग का उपयोग करते हैं।
  • परिवर्तन के प्रति प्रतिरोध: सभी हितधारक इस बदलाव को स्वीकार नहीं कर पाते हैं, विशेष रूप से पारंपरिक या केवल लाभ-केंद्रित उद्योगों में।

व्यावसायिक नैतिकता की दिशा में सजग पूंजीवाद को लागू करने के तरीके

  • नैतिक लाभ के सिद्धांतों को आत्मसात करना: यह सुनिश्चित करना कि व्यावसायिक गतिविधियाँ सकारात्मक बाह्यताओं का एक दायरा तैयार करें, जैसे कि स्थानीय पहलों का समर्थन करना, पर्यावरणीय संधारणीयता, आर्थिक विकास आदि।
  • सहायक कार्य वातावरण: निष्पक्ष वेतन, कर्मचारियों के लिए विकास के अवसरों के माध्यम से वफादारी को बढ़ावा देना, उत्पादकता में वृद्धि करना और एक समावेशी संस्कृति का निर्माण करना।
  • लचीले/अनुकूलनीय मॉडल का निर्माण: त्वरित लाभ और नैतिक विचारों (जैसे- काम में कोताही बरतना, श्रम का शोषण आदि) की कीमत पर विस्तार करने के बजाय धीमी, संधारणीय वृद्धि पर ध्यान केंद्रित करना।
  • सामाजिक रूप से जिम्मेदार निवेश (SRI): इसे "मूल्य-आधारित निवेश" भी कहा जाता है, जिसके तहत संदिग्ध प्रथाओं वाली कंपनियों में निवेश नहीं किया जाता है।
  • नेतृत्व की भूमिका: पारंपरिक, कमान-और-नियंत्रण (Command-and-control) वाले प्रबंधन से हटकर नैतिक निर्णय लेने पर ध्यान केंद्रित करने वाले अधिक सहानुभूतिपूर्ण और उद्देश्य-संचालित दृष्टिकोण की ओर बढ़ना।

सजग पूंजीवाद: सर्वोत्तम अभ्यास 

  • पेटागोनिया (आउटडोर क्लॉथिंग कंपनी): पर्यावरण के अनुकूल आपूर्ति श्रृंखला (Supply बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
  • स्टारबक्स: यह सुनिश्चित करने के लिए कि इसकी सभी कॉफी नैतिक रूप से प्राप्त की गई है और किसानों को उचित भुगतान मिले, यह निष्पक्ष तृतीय-पक्ष मूल्यांकनकर्ताओं पर निर्भर करती है।
  • व्होल फूड्स: यह कंपनी ऐसे स्टोर बनाती है जो वैकल्पिक ऊर्जा का उपयोग करते हैं, वर्षा जल का पुनर्चक्रण करते हैं और ऊर्जा के लिए खाद्य अवशेषों का उपयोग करते हैं।
  • रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL): अपनी "ग्रीन विज़न" योजना के तहत तीन वर्षों में 75,000 करोड़ रुपये का निवेश करने के लिए प्रतिबद्ध है।
  • टाटा समूह: इसने विवेकयुक्त व्यवसाय (Businesses with a conscience) की अवधारणा को अपनाया है; यह मूल मूल्यों के एक ऐसे सेट को अपनाता है जो इसके निर्णय लेने और कार्यों को निर्देशित करते हैं, जैसे कि व्यक्तियों के प्रति सम्मान, सत्यनिष्ठा और उत्कृष्टता।

 

निष्कर्ष

यद्यपि एआई (AI) युग के नए विकास मानव संबंधों, वैश्विक साझेदारियों और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को मौलिक रूप से बदल देंगे, फिर भी आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और नेट जीरो 2070 विज़न जैसी भारतीय पहलें समय की कसौटी पर खरी उतरती हैं। भविष्य में वैश्विक शांति और संधारणीयता को बढ़ावा देने के लिए इन्हें सजग पूंजीवाद के मार्गदर्शक के रूप में देखा जा सकता है।

अपनी नैतिक अभिरुचि का परीक्षण करें

आपको हाल ही में उत्तर भारत की एक अग्रणी कपड़ा कंपनी में मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) के रूप में नियुक्त किया गया है। आपका मुख्य कार्य कच्चे माल की खरीद और विक्रेता प्रबंधन से जुड़े आपूर्ति श्रृंखला विभाग की देखरेख करना है। अधिकांश कच्चा माल पूर्वी अफ्रीका के एक सुदूर गाँव से मंगाया जाता है और हाल ही में आपके सामने ऐसी रिपोर्टें आई हैं कि अधिकांश बड़ी कंपनियों द्वारा सस्ते मूल्य पर कच्चे माल की खरीद करने के लिए शोषणकारी और दमनकारी नीतियां अपनाई जा रही हैं। आगे की जाँच से यह निष्कर्ष निकलता है कि उस क्षेत्र में काम करने वाले आपकी कंपनी के प्रतिनिधि भी मुनाफा कमाने और व्यक्तिगत पदोन्नति की संभावनाओं को बढ़ाने के उद्देश्य से ऐसी प्रथाओं में लिप्त हैं। आप एक साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं और आपने अपनी वर्तमान व्यावसायिक स्थिति हासिल करने के लिए कड़ा संघर्ष किया है। अप्रत्यक्ष रूप से ही सही, ऐसी प्रथाओं का हिस्सा बनने ने आपकी अंतरात्मा को झकझोर दिया है और आप इस मुद्दे को हल करने के लिए दृढ़ संकल्पित हो गए हैं।

इस पृष्ठभूमि में, निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

  1. इस स्थिति में आपके द्वारा की जाने वाली उपयुक्त कार्रवाई का उल्लेख कीजिए।
  2. किसी कंपनी को अपने कार्यों के प्रति अधिक सचेत और नैतिक बनाने के लिए किन उपायों की आवश्यकता है?  
  3. पारंपरिक पूंजीवाद और सजग पूंजीवाद के बीच मुख्य अंतरों की चर्चा कीजिए।

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