छत्तीसगढ़ वन विभाग ने ‘सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFRR)’ पर जारी निर्देश वापस लिया | Current Affairs | Vision IAS
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इस निर्देश के तहत अन्य सरकारी विभागों, गैर-सरकारी संगठनों और निजी संस्थाओं द्वारा सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFRR) से जुड़े कार्यों पर रोक लगा दी गई थी। इस निर्देश से वन अधिकार अधिनियम (FRA) नकारात्मक रूप से प्रभावित हो रहा था। 

  • यह निर्देश प्रारंभ में CFRR को राष्ट्रीय कार्य योजना संहिता 2023 के अनुरूप बनाने के लिए जारी किया गया था।

सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFRR) के बारे में:

  • अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के तहत CFRR का प्रावधान किया गया है। इस अधिनियम को संक्षिप्त रूप में वन अधिकार अधिनियम, 2006 भी कहा जाता है।
  • इसमें ग्राम सभा के माध्यम से सामुदायिक वन संसाधन (CFR) का "संरक्षण, पुनरुद्धार या परिरक्षण या प्रबंधन" करने का अधिकार शामिल है।
    • सामुदायिक वन संसाधन (CFR) क्षेत्र वह वन भूमि होती है, जिसे पारंपरिक रूप से किसी समुदाय विशेष द्वारा संधारणीय उपयोग के लिए संरक्षित एवं प्रबंधित किया जाता रहा है। 
  • यह अधिकार समुदाय को यह अनुमति देता है कि वह अपने वन क्षेत्र के इस्तेमाल के लिए स्वयं नियम बना सके। साथ ही, समुदाय दूसरों (बाहरी लोगों) के लिए भी नियम तय कर सकता है कि वे वन क्षेत्र का उपयोग कैसे करें। इस प्रकार संबंधित समुदाय FRA के तहत अपने दायित्वों को निभाते हैं।

राष्ट्रीय कार्य योजना संहिता (National working Plan code) 2023 क्या है?

  • इसे पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 2004 में जारी किया था तथा 2014 में संशोधित किया था। 
  • यह देश के विविध वन प्रभागों के वैज्ञानिक प्रबंधन हेतु कार्य योजना बनाने के लिए मार्ग-दर्शक सिद्धांत के रूप में कार्य करती है।

वन अधिकार अधिनियम, 2006 के बारे में

  • उद्देश्य: वनवासी समुदायों के साथ इतिहास में हुए अन्याय को दूर करना; उनकी आजीविका और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना आदि।
  • वन अधिकार अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त वन अधिकार:
    • व्यक्तिगत अधिकार: इसमें स्वयं-खेती और निवास करने, यथास्थान पुनर्वास आदि अधिकार शामिल हैं। 
    • सामुदायिक अधिकार: इसमें वनों में मौजूद जल निकायों का उपयोग करने, पशुओं को चराने, मछली पकड़ने और बौद्धिक संपदा एवं पारंपरिक ज्ञान का अधिकार; पारंपरिक प्रथागत अधिकारों की रक्षा का अधिकार आदि शामिल हैं। 
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