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सर्विलांस कैपिटलिज्म

10 Apr 2025
42 min

परिचय

हालिया वर्षों में डिजिटल सूचना का विस्तार काफी तेजी से हुआ है। 1986 में यह केवल 1% था, जो 2013 तक 98% तक पहुंच गया। इसके चलते व्यक्तिगत डेटा 21वीं सदी में नई सम्पति बनकर उभरा है। इस बदलाव ने सर्विलांस कैपिटलिज्म के उदय को बढ़ावा दिया है। यह एक ऐसी प्रणाली है, जहां मानव अनुभवों और व्यवहारों को लाभ के लिए संसाधन के रूप में जुटाया जाता है। गूगल, मेटा और अमेजन जैसी दिग्गज तकनीकी कंपनियों के नेतृत्व में इस बदलाव ने निजता, स्वायत्तता और लोकतांत्रिक जवाबदेही के बारे में गहरी नैतिक, सामाजिक और विनियामकीय चिंताएं उत्पन्न की हैं।

सर्विलांस कैपिटलिज्म क्या है?

  • परिभाषा: यह एक ऐसी आर्थिक प्रणाली है जहां निजी कंपनियां (जैसे- अमेज़न, अल्फाबेट, मेटा, आदि) मानव व्यवहार का पूर्वानुमान लगाने और उसे प्रभावित करने के लिए सुनियोजित रूप से व्यक्तिगत डेटा एकत्र करती हैं, उनका विश्लेषण करती हैं और लाभ कमाती हैं, जैसे- लक्षित विज्ञापन, मूल्य निर्धारण, बीमा संबंधी निर्णय, आदि।
  • कार्यप्रणाली: यह निम्नलिखित तरीके से कार्य करता है-
    • डेटा जुटाना: गूगल, फेसबुक और अमेज़न जैसे प्लेटफॉर्म सर्च आधारित प्रश्नों से लेकर खरीद हिस्ट्री तक उपयोगकर्ता की गतिविधियों को ट्रैक करते हैं।
    • पूर्वानुमान हेतु विश्लेषण: AI और एल्गोरिदम यूजर्स की प्राथमिकताओं का अनुमान लगाने के लिए उनके व्यवहार से जुड़े पैटर्न का विश्लेषण करते हैं।
    • प्रभाव डालने वाली तकनीकें: प्राप्त तथ्यात्मक जानकारी का उपयोग लक्षित विज्ञापनों, डायनेमिक मूल्य निर्धारण और व्यवहार को प्रभावित करके उपभोक्ता द्वारा चुने जाने वाले विकल्पों, उनके राजनीतिक विचारों और यहां तक कि भावनाओं को दिशा देने के लिए किया जाता है।

सर्विलांस कैपिटलिज्म से संबंधित नैतिक निहितार्थ

  • हेरफेर करना: एल्गोरिदम के कारण यूजर्स के निर्णयों को आकार देने के लिए संज्ञानात्मक पूर्वाग्रहों का फायदा उठाया जाता है।
    • उदाहरण के लिए- यूट्यूब की रेकमंडेशन प्रणाली भावनात्मक रूप से उत्तेजित कंटेट को बढ़ावा देकर यूजर्स के जुड़ाव को बढ़ाती है।
  • गोपनीयता का क्षरण: डेटा अक्सर उचित सहमति के बिना एकत्र किया जाता है, जिसकी मदद से बड़े पैमाने पर निगरानी की जाती है।
    • उदाहरण के लिए- 2021 में फ्रांस में क्लियरव्यू AI को बिना कानूनी अनुमति के लोगों का डेटा इकट्ठा करने के कारण रोक दिया गया था।
  • व्यक्तिगत डेटा का वस्तु के रूप उपयोग: निजी संवेदनशील डेटा को अब एक वस्तु की तरह खरीदा और बेचा जाता है।
    • उदाहरण के लिए- 2018 में, अमेरिका में स्लीप एपनिया मशीनों ने यूजर्स के डेटा को गुप्त रूप से बीमा कंपनियों को भेजा था, जिससे बीमा कवरेज प्रभावित हुआ था।
  • अनुचित वाणिज्यिक प्रथाएं: डेटा के उपयोग के बारे में पारदर्शिता की कमी।
    • उदाहरण के लिए- इटली ने 2021 में डेटा भंडारण के बारे में यूजर्स को गुमराह करने के लिए फेसबुक पर 7 मिलियन यूरो का जुर्माना लगाया था।
  • लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन: राज्य और कंपनियों द्वारा की जाने वाली निगरानी नागरिक स्वायत्तता का क्षरण करती है।
    • उदाहरण के लिए- भारत के IT नियम (2021) में राष्ट्रीय सुरक्षा और सरकारी नियंत्रण के बीच स्पष्टता का अभाव है।
  • मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जोखिम: यूजर्स के जुड़ाव को अधिकतम करने के लिए डिज़ाइन किए गए क्यूरेटेड कंटेंट के संपर्क में आने से लोग तनाव और अवसाद के शिकार हो सकते हैं।
    • उदाहरण के लिए- सोशल मीडिया एल्गोरिदम उन कंटेंट को प्राथमिकता देते हैं जो क्रोध और भय को ट्रिगर करते हैं तथा राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देते हैं।

सर्विलांस कैपिटलिज्म को नियंत्रित करने में मौजूद चुनौतियां

  • विनियमन: वर्तमान नियम डेटा को वस्तु के रूप में खरीदने और बेचने की व्यवस्था को खत्म करने में सक्षम नहीं हैं। बड़ी तकनीकी कंपनियां अक्सर कड़े नियमों का विरोध करती हैं, जैसा कि एंटीट्रस्ट कानूनों के प्रति उनके विरोध से स्पष्ट है। वे लॉबिंग और अन्य तरीकों से निरीक्षण को कमजोर करने की कोशिश करती हैं। 
  • प्रौद्योगिकी: AI और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) के तेजी से विकास के चलते विनियामकीय फ्रेमवर्क अप्रासंगिक बन जाते है।
  • कॉर्पोरेट-राज्य की मिलीभगत: कॉर्पोरेट और सरकार के बीच सांठगांठ भी एक बड़ी चुनौती है। जब कंपनियों और सरकार के हित आपस में मिल जाते हैं, जैसे कि खुफिया एजेंसियों के साथ डेटा साझा करना, तो सार्वजनिक निगरानी कम हो जाती है और यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि कौन जिम्मेदार है। 

सर्विलांस कैपिटलिज्म को विनियमित करने के प्रयास

वैश्विक प्रयास

भारत में किए गए प्रयास

  • यूरोपीय संघ का जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (2018): यह डेटा एकत्र करने के संबंध में उपभोक्ताओं व यूजर्स की सहमति को लागू करता है और उल्लंघन की स्थिति में जुर्माना लगाता है। इससे यूजर्स के अधिकारों में वृद्धि हुई है।
  • कैलिफोर्निया कंज्यूमर प्राइवेसी एक्ट (2020): यह कैलिफोर्निया के निवासियों को निम्नलिखित अधिकार देता है:
    • लोग जान सकते हैं कि कंपनियां उनके बारे में कौन-सी निजी जानकारी इकट्ठा कर रही हैं।
    • लोग कंपनियों को अपनी जानकारी बेचने से मना कर सकते हैं।
    • लोग कंपनियों से अपना डेटा पूरी तरह से डिलीट करने की मांग कर सकते हैं।
  • के.एस. पुट्टास्वामी मामला (2017): भारत के सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता को मौलिक अधिकार घोषित किया।
  • डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम (2023): यह डेटा प्रसंस्करण के लिए संबंधित व्यक्ति की सहमति को अनिवार्य करता है, व्यक्तियों को अपने डेटा को एक्सेस और डिलीट करने में सक्षम बनाता है एवं उल्लंघन के मामले में कंपनियों पर दंड का प्रावधान करता है।

 

आगे की राह

  • मजबूत विनियामकीय फ्रेमवर्क: डेटा के दुरुपयोग को रोकने के लिए स्पष्ट जवाबदेही, नियमित ऑडिट और कठोर दंडात्मक प्रावधानों के साथ प्रासंगिक कानूनों को लागू करने की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए- रियायत को सीमित करके और न्यायिक निरीक्षण सुनिश्चित करके भारत को DPDP अधिनियम को मजबूत करना चाहिए।
  • यूजर्स को सशक्त बनाना: इसके लिए डेटा साक्षरता संबंधी अभियानों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है और सहमति के संबंध में पारदर्शी तंत्र को लागू करना चाहिए। इससे यूजर्स अपने डेटा को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर सकेंगे।
  • एंटीट्रस्ट उपयोग: बड़ी टेक कंपनियों के तकनीकी एकाधिकार को समाप्त करके उनकी अनियंत्रित शक्ति को कम करना चाहिए। इस तरह के एंटीट्रस्ट उपायों पर संयुक्त राज्य अमेरिका में चर्चा जारी है, ताकि निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और नवाचार सुनिश्चित किया जा सके।
  • वैश्विक सहयोग: इस संबंध में अंतर्राष्ट्रीय मानकों के साथ सामंजस्य स्थापित करना चाहिए, ताकि कम-विनियमित देशों में डेटा के दुरुपयोग को रोका जा सके। ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति की इस तरह की चुनौती के एकीकृत समाधान को बढ़ावा मिलेगा।
  • प्रौद्योगिकी में नैतिक मूल्यों का समावेशन: टेक कंपनियों को निजता-आधारित डिजाइन अपनाने हेतु प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि निगरानी (Surveillance) को शुरुआती स्तर पर ही कम किया जा सके।

अपनी नैतिक अभिक्षमता का परीक्षण कीजिए

आप एक मध्यम आकार के भारतीय टेक स्टार्टअप के CEO हैं जिसने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया एक अभिनव मोबाइल ऐप विकसित किया है। यह ऐप ग्रामीण किसानों और छोटे विक्रेताओं जैसी वंचित आबादी को व्यक्तिगत सूक्ष्म-ऋण और वित्तीय सलाह देने के लिए यूजर्स के ऑनलाइन व्यवहार, खर्च करने की आदतों और सोशल मीडिया पर उनकी गतिविधियों का विश्लेषण करने के लिए AI एल्गोरिदम का उपयोग करता है। लॉन्च के बाद से, ऐप ने काफी लोकप्रियता हासिल की है तथा 5 लाख से अधिक यूजर्स को सेवा दे रहा है और स्टार्टअप ने पूंजीपतियों से काफी निवेश आकर्षित किया है। हालांकि, एक न्यूज आउटलेट द्वारा हाल ही में किए गए खुलासे से पता चला है कि यह स्टार्टअप अतिरिक्त राजस्व सृजित करने के लिए तीसरे पक्ष के विज्ञापनदाताओं और बीमा कंपनियों के साथ यूजर्स का डेटा साझा कर रही है, यह जानकारी ऐप के लंबे टर्म्स एंड कंडीशंस में छुपी हुई है जिसे अधिकांश यूजर्स पूरी तरह से पढ़ और समझ नहीं पाए हैं।

आप असमंजस की स्थिति में हैं। डेटा-साझाकरण जारी रखने से स्टार्टअप की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित हो सकती है और विस्तार को बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन यह कानूनी कार्रवाई, यूजर्स के विश्वास की हानि और कर्मचारियों के मनोबल को खतरे में डालता है। इसे रोकने से स्टार्टअप के विकास और निवेशकों के विश्वास पर असर पड़ सकता है, जिससे वंचित समुदायों की सेवा करने का आपका मिशन कमजोर हो सकता है।

उपर्युक्त केस स्टडी के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

  • हितधारकों की पहचान करते हुए, इस स्थिति में मौजूद नैतिक दुविधाओं का विश्लेषण कीजिए।
  • CEO के रूप में आपकी संभावित कार्यवाइयां क्या होंगी? प्रत्येक के गुण और दोषों का मूल्यांकन कीजिए। 
  • आप क्या निर्णय लेंगे और अपने हितधारकों के समक्ष इसे कैसे उचित ठहराएंगे?

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