भारत और कतर ने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी तक बढ़ाया (INDIA AND QATAR ELEVATE BILATERAL TIES TO STRATEGIC PARTNERSHIP) | Current Affairs | Vision IAS
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संक्षिप्त समाचार

10 Apr 2025
38 min

कतर के अमीर, भारत की राजकीय यात्रा पर आए थे। इस दौरान उन्होंने आपसी संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का फैसला किया। इसके तहत व्यापार, ऊर्जा, निवेश, प्रौद्योगिकी, खाद्य सुरक्षा और दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।  

  • दोनों पक्षों ने पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 28 बिलियन डॉलर करने का लक्ष्य भी रखा है।

यात्रा के अन्य मुख्य परिणाम:

  • रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए दो समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें दोहरे कराधान से बचाव और राजकोषीय अपवंचन (Evasion) की रोकथाम शामिल है।
  • व्यापार और निवेश सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कतर बिजनेसमैन एसोसिएशन और भारतीय उद्योग संघ (CII) के बीच तथा इन्वेस्ट कतर एवं इन्वेस्ट इंडिया के बीच अतिरिक्त समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

भारत कतर संबंध

  • आर्थिक संबंध: 2023-24 में दोनों देशों के बीच 14.08 बिलियन अमेरिकी डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ था। इसमें भारत व्यापार घाटे में है।                   
    • 2022-23 के आंकड़ों के अनुसार भारत कतर के शीर्ष तीन निर्यात गंतव्यों में से एक है और कतर के आयात के शीर्ष तीन स्रोतों में भी शामिल है।
  • ऊर्जा संबंध: कतर, भारत का सबसे बड़ा LNG आपूर्तिकर्ता है। भारत के कुल LNG आयात के 40% से अधिक की आपूर्ति कतर से होती है।
  • रक्षा संबंध: भारत-कतर रक्षा सहयोग समझौते को 2018 में पांच वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया था।
    • द्विपक्षीय अभ्यास: ज़ायर अल बहर (नौसेना)।
    • भारत नियमित रूप से कतर में आयोजित होने वाले द्विवार्षिक दोहा अंतर्राष्ट्रीय समुद्री रक्षा प्रदर्शनी और सम्मेलन (DIMDEX) में भाग लेता है।
  • सांस्कृतिक संबंध: कतर में सक्रिय भारतीय सांस्कृतिक केंद्र के साथ 2012 में किए गए सांस्कृतिक सहयोग समझौते के तहत नियमित आदान-प्रदान और गतिविधियां संपन्न की जाती हैं।
    • लोगों के बीच संबंध: कतर में 830,000 से अधिक भारतीय निवास करते हैं। यह  भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करता है।

युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय ने गांधीनगर (गुजरात) में पहली बार बिम्सटेक युवा शिखर सम्मेलन की मेजबानी की।

  • इसका लक्ष्य पूरे क्षेत्र में युवा सहयोग को मजबूत करना और बिम्सटेक सदस्य देशों के बीच युवाओं के नेतृत्व वाली पहलों के आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाना है।

बिम्सटेक के बारे में

  • सचिवालय: ढाका (बांग्लादेश) में स्थित है। 
  • उत्पत्ति: इसका गठन 1997 में बैंकॉक घोषणा-पत्र के माध्यम से किया गया था। 
  • सदस्य: बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार, नेपाल और भूटान।
  • उद्देश्य: तीव्र आर्थिक विकास एवं सामाजिक प्रगति को बढ़ावा देना और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में शांति व स्थिरता सुनिश्चित करना।
  • 7 फोकस क्षेत्र: व्यापार; पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन; सुरक्षा; कृषि एवं खाद्य सुरक्षा; लोगों के बीच संपर्क; विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार; तथा कनेक्टिविटी।

 

संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति ने अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) पर प्रतिबंध लगाने वाले एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए। 

  • यह आदेश उन व्यक्तियों और उनके परिवारों पर वित्तीय एवं वीज़ा संबंधी प्रतिबंध लगाता है, जो अमेरिकी नागरिकों या उसके इजरायल जैसे सहयोगियों की ICC जांच में सहायता करते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के बारे में 

  • इसका मुख्यालय नीदरलैंड के हेग में स्थित है।  
  • यह विश्व का पहला स्थायी अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय है।
  • संस्थापक संधि: इसे रोम संविधि के माध्यम से स्थापित किया गया है। रोम संविधि को 1998 में अपनाया गया था तथा यह 2002 में प्रभावी हुई थी।  
  • ICC द्वारा निपटाए जाने वाले अपराधों के प्रकार: नरसंहार, युद्ध अपराध, मानवता के खिलाफ अपराध और आक्रामकता के अपराध। 
  • सदस्यता: इसके 125 देश सदस्य हैं।
    • भारत, इजरायल, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन रोम संविधि के पक्षकार नहीं हैं।
    • हालिया सदस्य: मलेशिया (2019) तथा यूक्रेन (2025)।
  • प्रबंधन: असेम्बली ऑफ़ स्टेट्स पार्टीज़ न्यायालय का प्रबंधन निगरानी और विधायी निकाय है।
    • यह निकाय उन देशों के प्रतिनिधियों से बना है, जिन्होंने रोम संविधि की पुष्टि की है या उसे स्वीकार कर लिया है।
  • आधिकारिक भाषाएं: अंग्रेजी, फ्रेंच, अरबी, चीनी, रूसी और स्पेनिश। 

ICC के कामकाज में संरचनात्मक मुद्दे

  • पक्षकार देशों के सहयोग पर अत्यधिक निर्भरता, क्योंकि ICC के पास गिरफ्तारी और साक्ष्य संग्रह के लिए कार्यकारी शक्ति का अभाव है।
  • राजनीतिक दबाव: यह अक्सर सत्ता की राजनीति और मानवाधिकारों के बीच फंस जाता है। इसके अलावा, अक्सर कुछ देशों द्वारा विरोधियों को निशाना बनाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।

सेना द्वारा शासित तीन देशों माली, बुर्किना फासो और नाइजर ने कूटनीतिक तनाव के बाद आधिकारिक तौर पर पश्चिम अफ्रीकी क्षेत्रीय ब्लॉक, ECOWAS की सदस्यता का त्याग कर दिया है।

ECOWAS के बारे में 

  • उत्पत्ति: इसकी स्थापना 1975 में हुई थी। 
  • मुख्यालय: इसका मुख्यालय अबुजा (नाइजीरिया) में स्थित है। 
  • उद्देश्य: इस संगठन का उद्देश्य लोगों के जीवन स्तर को बढ़ाने और आर्थिक संवृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
    • ECOWAS के सदस्य देशों के नागरिकों को सभी सदस्य देशों के यहां रहने और कार्य करने का अधिकार है। साथ ही, उन्हें वस्तुओं के मुक्त परिवहन का अधिकार भी दिया गया है।
  • सदस्य: 12 (उपर्युक्त तीनों देशों के निकलने के बाद)
    • इसके वर्तमान सदस्य हैं- बेनिन, काबो वर्डे, कोटे डी आइवर, गैम्बिया, घाना, गिनी, गिनी-बिसाऊ, लाइबेरिया, नाइजीरिया, सेनेगल, सिएरा लियोन और टोगो।

हाल ही में, ब्राजील की सरकार ने ओपेक+ संगठन में ब्राजील के शामिल होने को मंजूरी दी।

ओपेक के बारे में

  • यह तेल निर्यातक 12 विकासशील देशों का एक स्थायी अंतर-सरकारी संगठन है।
    • भारत इसका सदस्य नहीं है।
  • स्थापना: इसे 1960 में बगदाद सम्मेलन में ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब और वेनेजुएला द्वारा गठित किया गया था।
  • उद्देश्य: पेट्रोलियम उत्पादकों के लिए उचित और स्थिर मूल्य सुनिश्चित करने के लिए सदस्य देशों के बीच पेट्रोलियम नीतियों का समन्वय एवं एकीकरण करना।
  • मुख्यालय: वियना (ऑस्ट्रिया)।
  • ओपेक+ के बारे में
    • संयुक्त राज्य अमेरिका में शेल तेल उत्पादन में अधिक वृद्धि होने से तेल की कीमतों में गिरावट होने लगी। इसी स्थिति से निपटने के लिए ओपेक ने 2016 में 10 अन्य तेल उत्पादक देशों के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर करके ओपेक+ का गठन किया था। 

भारत को सिंगापुर में IALA के उपाध्यक्ष पद के लिए चुना गया है। इससे समुद्री सुरक्षा, नौवहन और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता मजबूत हुई है।

अंतर्राष्ट्रीय समुद्री नौवहन सहायता संगठन के बारे में 

  • मुख्यालय: यह फ्रांस के सेंट-जर्मैन-एन-लाई में स्थित है। 
  • स्थापना: इसकी स्थापना 1957 में एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) के रूप में की गई थी।
  • अंतर-सरकारी संगठन के रूप में ट्रांजीशन: IALA पहले एक NGO था, लेकिन 2024 में यह एक अंतर-सरकारी संगठन (IGO) बन  गया।
  • उद्देश्य: यह सदस्यों से वैश्विक स्तर पर समुद्री नेविगेशन सहायता (Marine Aids to Navigation) के मानकीकरण में सहयोग करने का आह्वान करता है, ताकि जहाजों की आवाजाही सुरक्षित, प्रभावी और पर्यावरण-अनुकूल बनाई जा सके।
  • सदस्यों की श्रेणियाँ: IALA के तीन प्रकार के सदस्य हैं;
    • सदस्य राष्ट्र, 
    • एसोसिएट सदस्य, और 
    • औद्योगिक जगत के सदस्य।

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