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भारत-संयुक्त राज्य अमेरिका संबंध (INDIA-USA RELATIONS)

10 Apr 2025
44 min

सुर्ख़ियों में क्यों? 

हाल ही में, भारत के प्रधान मंत्री ने संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक यात्रा की।

इस आधिकारिक यात्रा के मुख्य आउटकम्स पर एक नज़र 

क्षेत्र 

विकास-क्रम 

रक्षा एवं सुरक्षा

  • अमेरिका-भारत प्रमुख रक्षा साझेदारी के लिए 10-वर्षीय फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया गया: रक्षा संबंधों को और आगे बढ़ाने के लिए फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर करने की योजना की घोषणा की गई।
  • ऑटोनॉमस सिस्टम इंडस्ट्री एलायंस (Autonomous Systems Industry Alliance: ASIA): इसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में औद्योगिक साझेदारी और उत्पादन को बढ़ाना है।
  • अन्य: भारत में जैवलिन (एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल) और स्ट्राइकर (इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स) के नए सह-उत्पादन समझौतों की घोषणा की गई।

प्रौद्योगिकी और नवाचार

  • USA-इंडिया TRUST (Transforming the Relationship Utilizing Strategic Technology/ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी का उपयोग कर संबंधों को नया रूप देना) पहल: यह रक्षा आदि क्षेत्रकों में महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सरकार-से-सरकार, शिक्षा जगत एवं निजी क्षेत्रक के मध्य सहयोग को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित है। 
  • इंडस (INDUS) इनोवेशन: यह अमेरिका-भारत उद्योग और शैक्षणिक जगत के मध्य साझेदारी को आगे बढ़ाने तथा अंतरिक्ष, ऊर्जा और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए इनोवेशन ब्रिज के रूप में काम करेगा।
    • इसे INDUS-X पहल के आधार पर तैयार किया गया है। INDUS-X सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए अमेरिका और भारत के बीच साझेदारी को बढ़ावा देती है।
  • स्ट्रैटेजिक मिनरल रिकवरी इनिशिएटिव: यह अमेरिका-भारत का एक नया कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य एल्यूमीनियम, कोयला खनन और तेल-गैस जैसे भारी उद्योगों से महत्वपूर्ण खनिजों (जैसे- लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ भू धातु) को पुनः प्राप्त करना और उनका प्रसंस्करण करना है।

अन्य 

  • 21वीं सदी के लिए यू.एस.-भारत कॉम्पैक्ट/ COMPACT (Catalyzing Opportunities for Military Partnership, Accelerated Commerce & Technology/ सैन्य साझेदारी, त्वरित वाणिज्य और प्रौद्योगिकी के लिए अवसरों को उत्प्रेरित करना): यह पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी में विश्वास को मजबूत करने के लिए परिणाम-आधारित एजेंडे को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है। 
  • हिंद महासागर सामरिक वेंचर (Indian Ocean Strategic Venture): यह आर्थिक कनेक्टिविटी और व्यापार में समन्वित निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक नया द्विपक्षीय फोरम है, जो समग्र सरकारी दृष्टिकोण पर आधारित है।
  • 'मिशन 500': 2030 तक कुल द्विपक्षीय व्यापार को दोगुने से अधिक बढ़ाकर 500 बिलियन डॉलर करने का नया लक्ष्य तय किया गया है।

 

भारत-संयुक्त राज्य अमेरिका के मजबूत संबंधों का महत्त्व

  • आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देना: संयुक्त राज्य अमेरिका भारत के लिए व्यापारिक वस्तुओं (Merchandise export) का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है।
    • भारत अमेरिका के नेतृत्व वाले इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क फॉर प्रोस्पेरिटी (IPEF) के तीन स्तंभों में शामिल हो गया है।
  • वैश्विक रणनीतिक प्रभाव को मजबूत करना: जैसे- क्वाडजो ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच एक कूटनीतिक साझेदारी है। इसका उद्देश्य एक खुले, स्थिर एवं समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र का समर्थन करना है।
    • इस तरह की पहल से चीन के बढ़ते प्रभाव को प्रतिसंतुलित करने में मदद मिलेगी।
  • रक्षा आधुनिकीकरण और क्षमता विकास: भारत ने अमेरिका के साथ कई मूलभूत रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: 
    • जनरल सिक्योरिटी ऑफ़ मिलिट्री इन्फॉर्मेशन एग्रीमेंट (GSOMIA)
    • लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (LEMOA)
    • कम्युनिकेशंस कंपेटिबिलिटी एंड सिक्योरिटी एग्रीमेंट (COMCASA) 
    • बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट (BECA)
  • अमेरिका ने भारत को स्ट्रेटेजिक ट्रेड ऑथराइजेशन-1 (STA-1) का दर्जा देकर एक प्रमुख रक्षा साझेदार के तौर पर स्वीकार किया है।
  • उभरती हुई प्रौद्योगिकियों में साझेदारी: महत्वपूर्ण और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों पर अमेरिका-भारत पहल (iCET, 2023) शुरू की गई है।
  • अंतरिक्ष क्षेत्रक में साझेदारी: उदाहरण के लिए- निसार (नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार) मिशन।
    • इसके अलावा, भारत अमेरिका के नेतृत्व वाले आर्टेमिस अकॉर्ड में शामिल हो गया है। यह बाह्य अंतरिक्ष, चंद्रमा, मंगल, धूमकेतु और क्षुद्रग्रहों के असैन्य अन्वेषण और उपयोग के लिए गैर-बाध्यकारी सामान्य सिद्धांत स्थापित करता है। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष में शांतिपूर्ण, स्थायी और पारदर्शी सहयोग को बढ़ावा देना है।
  • ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना: 2008 के अमेरिका-भारत 123 असैन्य परमाणु समझौते को पूरी तरह से लागू करने के लिए भारत में अमेरिका द्वारा डिजाइन किए गए परमाणु रिएक्टर्स  बनाए जाएंगे।
    • हालिया वर्षों में, अमेरिका भारत के लिए तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं में से एक के रूप में उभरा है।
  • आतंकवाद से निपटना: हाल ही में, अमेरिका ने तहव्वुर राणा (26/11 आतंकी हमलों से जुड़ा आतंकी) के भारत को प्रत्यर्पण को मंजूरी प्रदान की।
  • बहुपक्षीय मंचों पर समर्थन: उदाहरण के लिए- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) की सदस्यता के लिए अमेरिका का समर्थन।
    • अमेरिका अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी में पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल होने के भारत के प्रयास का समर्थन करता है।
  • जलवायु परिवर्तन से निपटना और नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग: अमेरिका भारत के नेतृत्व वाले अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल हो गया है।
    • इसके अलावा, यू.एस.-इंडिया रिन्यूएबल एनर्जी टेक्नोलॉजी एक्शन प्लेटफॉर्म (RETAP) शुरू किया गया है।
    • दोनों देश ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस (GBA) का हिस्सा हैं।

भारत-अमेरिका साझेदारी में तनाव पैदा करने वाले हालिया मुद्दे

  • व्यापार और आर्थिक चुनौतियां:
    • पारस्परिक प्रशुल्कों (Reciprocal tariffs) का आरोपण और अन्य संरक्षणवादी नीतियां भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को कम कर सकती हैं।
    • वर्ष 2024 में, भारत को अमेरिका की "स्पेशल 301" रिपोर्ट में प्रायोरिटी वॉच लिस्ट में शामिल किया गया था। यह रिपोर्ट वैश्विक स्तर पर बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) के संरक्षण और प्रवर्तन की वार्षिक समीक्षा प्रस्तुत करती है।
    • अमेरिका ने जून, 2019 में भारत को जेनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रिफ्रेंसेज (GSP) का लाभ लेने वाले देशों की सूची से बाहर कर दिया था। इससे भारत के कुछ उत्पादों के शुल्क-मुक्त निर्यात पर प्रभाव पड़ा है।
  • भू-राजनीतिक मतभेद: भारत सामरिक स्वायत्तता और स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करता है।
    • उदाहरण के लिए- भारत क्वाड का हिस्सा है, लेकिन इसे सैन्य गठबंधन में बदलने से बचता है। इसके अलावा, रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत का संतुलित दृष्टिकोण अमेरिका की नीति से अलग है।
  • वीज़ा और आव्रजन संबंधी चुनौतियां: हाल ही में अमेरिका अपने वीज़ा नियमों को सख्त कर रहा है, जैसे कि H-1B वीज़ा पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाना। इसका भारतीय IT पेशेवरों और अन्य लोगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
    • इसके अलावा, अवैध भारतीय आप्रवासियों को निर्वासित किया जा रहा है।
  • मानव एवं धार्मिक अधिकारों से संबंधित चिंताएं: संयुक्त राज्य अमेरिका के अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (United States Commission on International Religious Freedom: USCIRF) ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA), 2019 पर चिंता जताई थी। इसे भारत ने अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के रूप में देखा है।
  • भारत पर प्रतिबंध लगाना: अमेरिका ने भारत द्वारा रूस से S-400 वायु रक्षा प्रणाली जैसे उन्नत हथियारों की खरीद पर चिंता व्यक्त की है। इसके चलते, अमेरिका "काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट (CAATSA)" के तहत भारत पर आर्थिक एवं अन्य प्रतिबंध लगाने की चेतावनी देता रहता है।

भारत-अमेरिका साझेदारी को और मजबूत करने के उपाय

  • द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement: BTA) को अंतिम रूप देना: हाल ही में घोषित BTA वार्ता से बाजार पहुंच बढ़ेगी, प्रशुल्क कम होंगे, निवेश को बढ़ावा मिलेगा, आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी, आदि।
    • साथ ही, इससे पारस्परिक प्रशुल्क, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) आदि से संबंधित मुद्दों का समाधान करने में भी मदद मिलेगी। 
  • रक्षा फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देना: दोनों देश 2025 से 2035 तक 10-वर्षीय रक्षा फ्रेमवर्क को शीघ्र अंतिम रूप देने के लिए मिलकर कार्य कर सकते हैं।
    • इसके अलावा, पारस्परिक रक्षा खरीद समझौते (Reciprocal Defense Procurement: RDP) को भी अंतिम रूप दिया जा सकता है।
  • H-1B वीज़ा प्रतिबंधों में ढील देना: अमेरिका भारतीय IT पेशेवरों, शोधकर्ताओं आदि के लिए वीज़ा प्रक्रियाओं को सरल बना सकता है।
  • CAATSA के तहत छूट: भारतीय-अमेरिकी समुदाय के प्रभाव का भारत को CAATSA के तहत दीर्घकालिक छूट दिलाने में उपयोग किया जा सकता है। इससे रक्षा संबंधों को मजबूत किया जा सकेगा और क्षेत्रीय खतरों का सामना किया जा सकेगा।
  • मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों का प्रबंधन: अमेरिका को भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप से बचना चाहिए और इसके लोकतांत्रिक तंत्र की विविधता को स्वीकार करना चाहिए।
  • उभरती प्रौद्योगिकियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में सहयोग बढ़ाना: डेटा विनियमन, सूचना साझाकरण और गोपनीयता का संरक्षण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
    • उदाहरण के लिए, "यू.एस.-इंडिया ट्रस्ट पहल" के तहत यू.एस.-इंडिया रोडमैप ऑन एक्सीलरेटिंग AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा।

नोट: संयुक्त राज्य अमेरिका की संरक्षणवादी नीतियों और उनके प्रभावों के बारे में और अधिक जानकारी के लिए जनवरी, 2025 मासिक समसामयिकी का आर्टिकल 2.1. देखें। 

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