सिटिज़न डेटा पर कोपेनहेगन फ्रेमवर्क | Current Affairs | Vision IAS
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केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय सिटीजन डेटा पर कोपेनहेगन फ्रेमवर्क की प्रासंगिकता और भारत की सांख्यिकीय प्रणाली के साथ इसके एकीकरण पर विचार कर रहा है।

सिटिज़न डेटा पर कोपेनहेगन फ्रेमवर्क के बारे में

  • आवश्यकता: सिटीजन डेटा में नागरिकों द्वारा उत्पन्न डेटा, समुदाय-संचालित डेटा और सिटीजन साइंस डेटा शामिल है। ये आमतौर पर राष्ट्रीय डेटा इकोसिस्टम का हिस्सा होने के बावजूद आधिकारिक सांख्यिकी में शामिल नहीं हो पाते हैं।
  • उत्पत्ति: इसे 2023 में संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी प्रभाग (UNSD) द्वारा तैयार किया गया था।
  • फ्रेमवर्क के मुख्य प्रावधान:
    • इसमें सिटीजन डेटा के संभावित प्रकारों को परिभाषित किया गया है। साथ ही, यह सिटीजन डेटा के लिए एक ठोस आधार के रूप में प्रासंगिक अवधारणाओं और उनकी परिभाषाओं की एक सामान्य समझ प्रदान करता है।
    • यह एक ऐसा क्षेत्र प्रदान करता है, जो नागरिकों द्वारा डेटा में भूमिका निभाने के अलग-अलग तरीकों पर अवधारणा बनाने और सहमत होने में मदद करता है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने घोषणा की है कि प्राथमिक सदस्य (जैसे कि बैंक जिसकी सरकारी प्रतिभूति बाजारों तक सीधी पहुंच है) और उसके गिल्ट खाताधारक (GAH) के बीच लेन-देन का मिलान अब NDS-OM प्लेटफॉर्म पर किया जा सकता है।

  • गिल्ट खाताधारक (GAH): यह एक प्रकार क्लाइंट (जैसे म्यूचुअल फंड) है, जो RBI के पास सीधे कारोबार करने की बजाय प्राथमिक सदस्य के जरिए सरकारी प्रतिभूतियां धारण करता है।

NDS-OM के बारे में

  • NDS-OM से आशय है- नेगोशियेटेड डीलिंग सिस्टम-ऑर्डर मैचिंग। 
  • प्रकार: यह सेकेंडरी मार्केट में सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री के लिए स्क्रीन आधारित इलेक्ट्रॉनिक एनोनिमस ऑर्डर मैचिंग सिस्टम है।
    • "इलेक्ट्रॉनिक एनोनिमस ऑर्डर मैचिंग सिस्टम" एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहां शामिल कारोबारियों की पहचान उजागर किए बिना खरीद और बिक्री के ऑर्डर का मिलान किया जाता है।
  • स्वामित्व: RBI के पास है। 
  • सदस्य: बैंक, प्राथमिक डीलर, बीमा कंपनियां, म्यूचुअल फंड आदि।
  • खरीद-बिक्री योग्य लिखत (इंस्ट्रूमेंट्स): केंद्र सरकार द्वारा जारी सभी प्रतिभूतियों, राज्य सरकार द्वारा जारी सभी प्रतिभूतियों और ट्रेजरी बिल का NDS-OM पर कारोबार किया जा सकता है।

केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने ‘उद्यमिता के लिए AI’ माइक्रो-लर्निंग मॉड्यूल लॉन्च किया।

‘उद्यमिता के लिए AI’ माइक्रो-लर्निंग मॉड्यूल के बारे में

  • इसे राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) और इंटेल इंडिया के सहयोग से लॉन्च किया गया है। 
  • उद्देश्य: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अवधारणाओं को सरल बनाना और पूरे भारत में युवा नवोन्मेषकों में उद्यमशीलता की सोच को प्रोत्साहित करना।
  • लक्ष्य: 2025 तक 1 लाख युवाओं को प्रौद्योगिकी-संचालित अर्थव्यवस्था में कामयाब होने के लिए आवश्यक कौशल से प्रशिक्षित करके उन्हें सशक्त बनाना।

चौथी पीढ़ी की डीप-ओशन मानव-युक्त वैज्ञानिक सबमर्सिबल ‘मत्स्य-6000’ का वेट परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा हुआ।

समुद्रयान परियोजना के बारे में

  • इसे पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के डीप ओशन मिशन (DOM) के तहत लॉन्च किया गया है।
    • डीप ओशन मिशन केंद्रीय क्षेत्रक की योजना है। इसका उद्देश्य डीप ओशन सर्वे और एक्सप्लोरेशन; डीप ओशन माइनिंग जैसी ब्लू इकोनॉमी पहलों का समर्थन करना है।
  • उद्देश्य: ‘मत्स्य 6000’ नामक जलयान से तीन व्यक्तियों को समुद्र में 6000 मीटर की गहराई तक भेजना। ये गहरे समुद्र में खनिज जैसे संसाधनों की खोज करेंगे।
  • कार्यान्वयन अवधि: 5 वर्ष (2020-2021 से 2025-2026)।

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि समुद्र के ऊपर प्रति-चक्रवाती तूफान की मौजूदगी मुंबई में तापमान में वृद्धि का कारण बन रही है। 

प्रति-चक्रवात क्या है? 

  • प्रति-चक्रवात की प्रकृति तथा विशेषताएं चक्रवात से पूर्णतः विपरीत होती हैं। प्रतिचक्रवात के केंद्रीय भाग में हवाएं ऊपर से नीचे उतरती हैं (अपसारी हवा)। इसकी वजह से उच्च दबाव का क्षेत्र निर्मित होता है। 

विशेषताएं: 

  • चक्रवातों की तुलना में इसमें निर्धारित दूरी पर दबाव में कम बदलाव देखा जाता है। इससे हवा का वेग कम होता है, जिससे कई दिनों या हफ़्तों तक स्थिर और शांत स्थितियां बनती हैं। 
  • जैसे-जैसे हवा नीचे उतरती है, यह गर्म होती जाती है, जिससे गर्म और शुष्क मौसम बनता है।
    • धीरे-धीरे विकसित होने वाला मध्य-क्षोभमंडलीय प्रति-चक्रवाती तूफान भारत में हीटवेव का मुख्य घटक है।
    • पवन की दिशा: 
      • उत्तरी गोलार्ध में दक्षिणावर्त (घड़ी की सुइयों की दिशा में); तथा 
      • दक्षिणी गोलार्ध में वामावर्त (घड़ी की सुइयों की विपरीत दिशा में)।

अंटार्कटिका की एकमात्र ज्ञात देशी कीट प्रजाति फ्लाइटलेस अंटार्कटिक मिज (बेल्गिका अंटार्कटिका) हाल ही में सुर्ख़ियों में थी।

  • इसे चरम मौसम की स्थिति में जीवित रहने की क्षमता के कारण एक एक्सट्रीमोफाइल कीट (Extremophile Insect) के रूप में भी जाना जाता है।

इस कीट द्वारा दो साल के जीवन चक्र के दौरान अपनाई गई 2-चरण की उत्तरजीविता रणनीतियां:

  • किइसेन्स (निष्क्रियता) (एक वर्ष में): यह एक त्वरित अनुकूलन प्रक्रिया है, जिसमें अचानक तापमान गिरने पर कीट तुरंत निष्क्रिय हो जाता है।
  • ऑब्लिगेट डायपॉज (दूसरे वर्ष में): ऊर्जा संचय करके एक निर्धारित अवधि तक निष्क्रिय अवस्था रहती है।

अन्य प्रकार की निष्क्रियताएं: 

  • हाइबरनेशन: इसके तहत कम चयापचय के साथ लंबे समय तक जीव (जैसे- भालू, जमीनी गिलहरियां आदि) सर्दियों में निष्क्रिय रहते हैं।
  • एस्टीवेशन: गर्मी/ सूखे से बचने के लिए कुछ जीव (जैसे- लंगफिश, घोंघे आदि) ग्रीष्मकाल में विश्राम की अवस्था में रहते हैं।
  • ब्रूमेशन: सरीसृप (जैसे- सांप, कछुए आदि) जीव ठंड की वजह से निष्क्रिय रहते हैं।

व्हाइट-विंग्ड डक का एक दुर्लभ जोड़ा दिहिंग पटकाई राष्ट्रीय उद्यान (असम) में देखा गया।

व्हाइट-विंग्ड डक (असरकोर्निस स्कुटुलाटा) के बारे में

  • प्रकृति: यह प्रजाति तराई के सदाबहार वनों और आर्द्रभूमियों में पाई जाती है।
  • अवस्थिति: यह प्रजाति इंडो-मलायन जैव-भौगोलिक क्षेत्र के लिए स्थानिक है। 
  • फेनोटाइप: यह प्रजाति पंखों पर अपने विशिष्ट सफेद धब्बों और विशिष्ट भूतिया आवाजों के लिए प्रसिद्ध है।
  • अन्य: यह असम का राजकीय पक्षी है। असमिया में इसे 'देव हान' (स्पिरिट डक) कहा जाता है।
  • संरक्षण: 
    • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत अनुसूची-I में सूचीबद्ध है; 
    • इसे असम सरकार और भारतीय वन्यजीव ट्रस्ट द्वारा तैयार व्हाइट-विंग्ड डक कंजर्वेशन स्ट्रेटेजी एंड एक्शन प्लान 2022 में शामिल किया गया है;
    • IUCN लाल सूची: क्रिटिकली इंडेजर्ड।

ट्रेलगार्ड AI ने ओडिशा के सिमलीपाल टाइगर रिजर्व में अवैध शिकार को कम करने में सहायता की है। 

ट्रेलगार्ड AI के बारे में

  • यह एक एंड-टू-एंड, कैमरा-आधारित अलर्ट प्रणाली है। इसे वन्यजीव संरक्षण को बढ़ाने और दूरदराज के क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने के लिए डिजाइन किया गया है। 
  • लाभ:
    • लक्षित ऑब्जेक्ट्स का स्वायत्त तरीके से पता लगाना। उदाहरण के लिए- शिकारियों, वन्यजीवों का कृषि भूमि में प्रवेश आदि।
    • रियल टाइम अलर्ट ट्रांसमिशन: यह कार्य GSM, लंबी दूरी के रेडियो या उपग्रह के माध्यम से किया जाता है। इससे तीव्र प्रतिक्रिया को बढ़ावा देने में मदद मिली है। 
    • इसका छोटा आकार इसे हानि पहुंचाने और चोरी होने से रोकता है। 
  • सिमलीपाल टाइगर रिजर्व के बारे में 
    • इसे 1994 में बायोस्फीयर रिजर्व के रूप में घोषित किया गया था। 2009 में यूनेस्को ने इसे बायोस्फीयर रिजर्व की सूची में शामिल किया था। 
    • प्रमुख नदियां: सालंदी, काहैरी और देव।
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