सुर्ख़ियों में क्यों ?
जलवायु परिवर्तन शमन के एक उपकरण के रूप में समुद्री कार्बन डाइऑक्साइड के निष्कासन (mCDR) के प्रति अभिरुचि निरंतर बढ़ रही है।
mCDR के बारे में
- यह उन पद्धतियों को संदर्भित करता है जो जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) को अवशोषित और संचित करने की महासागर की प्राकृतिक क्षमता को बढ़ाती हैं।
- इसके उदाहरणों में मैंग्रोव और समुद्री घास की पुनर्बहाली, महासागरीय क्षारीयता वृद्धि, बायोमास सिंकिंग और कृत्रिम उद्वेलन शामिल है।
mCDR की आवश्यकता
- वायुमंडलीय CO₂ के बढ़ते स्तर: शमन प्रयासों के बावजूद वैश्विक CO₂ का उत्सर्जन उच्च बना हुआ है। mCDR वायुमंडल में पहले से मौजूद अतिरिक्त CO₂ के निष्कासन में सहायक सिद्ध हो सकता है।
- महासागरों की विशाल कार्बन भंडारण क्षमता: महासागर, वायुमंडल की तुलना में 50 गुना अधिक कार्बन संचित करते हैं, जो उन्हें एक संभावित व्यापक कार्बन सिंक बनाता है।

- पेरिस जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति: 1.5°C और 2°C के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए केवल उत्सर्जन में कटौती पर्याप्त नहीं होगी। इसके लिए बड़े पैमाने पर कार्बन निष्कासन की भी आवश्यकता हो सकती है।
- ब्लू इकोनॉमी को प्रोत्साहन: यह समुद्री शैवाल की खेती, पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली और समुद्री प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में रोजगार एवं आर्थिक अवसर सृजित कर सकता है।
mCDR की चुनौतियां
- मापन, रिपोर्टिंग और सत्यापन संबंधी चुनौतियां: निगरानी प्रौद्योगिकियों के निरंतर विकसित होने के कारण सटीक CO₂ ट्रैकिंग और कार्बन लेखांकन अभी भी एक जटिल कार्य है।
- पर्यावरणीय जोखिम: महासागरीय रसायन विज्ञान में होने वाले परिवर्तन समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को हानि पहुंचा सकते हैं।
- व्यापकता : उच्च ऊर्जा दक्षता के साथ इसका बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन करना चुनौतीपूर्ण है।
- मानकों का अभाव: सुदृढ़ कार्बन लेखांकन और पर्यावरण आकलन प्रोटोकॉल अभी भी विकास की प्रक्रिया में हैं।
- शासन संबंधी कमियां : इसके लिए स्पष्ट नियमों और अनुमति ढांचे का अभाव है।
- सार्वजनिक चिंताएं: जियोइंजीनियरिंग से जुड़ी आशंकाएं इसकी सामाजिक स्वीकार्यता और नीतिगत समर्थन में बाधा उत्पन्न कर सकती हैं।
निष्कर्ष
समुद्री कार्बन डाइऑक्साइड का निष्कासन (mCDR) जलवायु परिवर्तन के समाधान हेतु उत्सर्जन में की जाने वाली भारी कटौती का पूरक हो सकता है, हालांकि, यह उसका विकल्प नहीं है। इसकी वास्तविक क्षमता का लाभ उठाने के लिए विज्ञान-आधारित विनियमन, सुदृढ़ निगरानी, पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि महासागर-आधारित कार्बन निष्कासन सुरक्षित, प्रभावी और न्यायसंगत हो, जिससे वैश्विक नेट-ज़ीरो और पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता मिल सके।