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UAE, OPEC और OPEC+ से बाहर (UAE leaves OPEC and OPEC+)

30 Jun 2026
1 min

In Summary

  • उत्पादन कोटा विवादों, रणनीतिक स्वायत्तता की इच्छा और सऊदी अरब के साथ भू-राजनीतिक मतभेदों के कारण यूएई ओपेक और ओपेक+ से बाहर निकल गया।
  • 1960 में स्थापित ओपेक का उद्देश्य पेट्रोलियम नीतियों का समन्वय करना और स्थिर कीमतें सुनिश्चित करना है, और संयुक्त अरब अमीरात के बाहर निकलने के बाद वर्तमान में इसके 11 सदस्य हैं।
  • ओपेक+ का गठन 2016 में गैर-ओपेक तेल उत्पादकों के साथ मिलकर अमेरिकी शेल तेल उत्पादन का मुकाबला करने के लिए किया गया था, जो ऐतिहासिक रूप से वैश्विक तेल आपूर्ति के लगभग 41% को नियंत्रित करता रहा है।

In Summary

सुर्ख़ियों में क्यों?

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) आधिकारिक रूप से पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) तथा ओपेक प्लस (OPEC+) से बाहर हो गया है। 

UAE ने OPEC और OPEC+ क्यों छोड़ा? 

  • क्षेत्रीय सुरक्षा: ईरान के मिसाइल हमलों के दौरान अरब एवं खाड़ी क्षेत्र के देशों द्वारा अपेक्षित एकजुटता और समर्थन का अभाव देखा गया।
  • उत्पादन कोटा संबंधी विवाद: OPEC द्वारा निर्धारित उत्पादन कोटा के कारण UAE अपनी बढ़ती तेल उत्पादन क्षमता का पूर्ण उपयोग नहीं कर पा रहा था।
  • ऊर्जा संक्रमण एवं आर्थिक विविधीकरण: UAE अपने तेल भंडार का शीघ्र आर्थिक दोहन कर प्राप्त संसाधनों को तेल-निर्भरता के अतिरिक्त अर्थव्यवस्था के निर्माण में निवेश करना चाहता था।
  • रणनीतिक स्वायत्तता: UAE अपनी ऊर्जा नीति तथा विदेश नीति संबंधी निर्णयों में अधिक स्वतंत्रता चाहता था।
  • भू-राजनीतिक कारण: यमन, सूडान तथा व्यापक खाड़ी क्षेत्र की भू-राजनीति जैसे मुद्दों पर सऊदी अरब के साथ हितों में बढ़ते मतभेद भी इसका एक कारण हैं।

OPEC के बारे में 

  • यह 11 विकासशील तेल-निर्यातक देशों का एक स्थायी अंतर-सरकारी संगठन है।
  • स्थापना: वर्ष 1960 में बगदाद सम्मेलन में ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब तथा वेनेजुएला द्वारा की गई।
  • मुख्यालय: वियना, ऑस्ट्रिया
  • उद्देश्य: सदस्य देशों की पेट्रोलियम नीतियों का समन्वय एवं एकीकरण करना तथा तेल उत्पादक देशों के लिए उचित एवं स्थिर मूल्य सुनिश्चित करना।
  • OPEC कच्चे तेल के उत्पादन में अपनी बड़ी हिस्सेदारी का उपयोग करके बाजार में तेल की उपलब्धता को बढ़ाता या घटाता है, इस प्रकार यह तेल की वैश्विक बेंचमार्क कीमतों को प्रभावित करता है।
  • वर्तमान सदस्य: UAE के बाहर होने के बाद OPEC में वर्तमान में 11 सदस्य हैं: अल्जीरिया, कांगो गणराज्य, भूमध्यरेखीय गिनी (Equatorial Guinea), गैबॉन, ईरान, इराक, कुवैत, लीबिया, नाइजीरिया, सऊदी अरब और वेनेजुएला।

बेंचमार्क कीमतें (Benchmark Prices) क्या हैं?

  • बेंचमार्क कीमतें कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त संदर्भ कीमतें (Reference Prices) होती हैं, जिनका उपयोग विश्वभर में तेल के क्रय-विक्रय के लिए मूल्य निर्धारण के मानक के रूप में किया जाता है।
  • प्रमुख तेल बेंचमार्क 
    • ब्रेंट क्रूड: यह विश्व का सबसे व्यापक रूप से प्रयुक्त तेल बेंचमार्क है। यह उत्तरी सागर से प्राप्त चार प्रकार के हल्के एवं कम सल्फरयुक्त कच्चे तेल पर आधारित है।
    • वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (West Texas Intermediate - WTI): यह संयुक्त राज्य अमेरिका का हल्का एवं कम सल्फरयुक्त कच्चे तेल का प्रमुख बेंचमार्क है। इसका मूल्य निर्धारण कुशिंग (ओक्लाहोमा, अमेरिका) में किया जाता है।
    • दुबई/ओमान: यह मध्यम गुणवत्ता वाले एवं अधिक सल्फरयुक्त कच्चे तेल का बेंचमार्क है। इसका उपयोग मुख्यतः मध्य-पूर्व से एशियाई बाजारों को होने वाले तेल निर्यात के मूल्य निर्धारण के लिए किया जाता है।
  • भारत OPEC का सदस्य नहीं है।
  • पूर्व सदस्य देश: इक्वाडोर, इंडोनेशिया, क़तर, अंगोला तथा संयुक्त अरब अमीरात (UAE)।

OPEC+ के बारे में, 

  • OPEC+ का गठन वर्ष 2016 में उस समय किया गया, जब अमेरिका में शेल तेल उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि के कारण वैश्विक तेल कीमतों में गिरावट आई। इसके बाद OPEC ने 10 अन्य तेल उत्पादक देशों के साथ समझौता कर OPEC+ की स्थापना की।
    • OPEC+ ऐतिहासिक रूप से वैश्विक तेल आपूर्ति के लगभग 41% पर नियंत्रण रखता रहा है।
  • सदस्य देश: रूस, अजरबैजान, कज़ाखस्तान, बहरीन, ब्रुनेई, मलेशिया, मेक्सिको, ओमान, दक्षिण सूडान और सूडान।

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