सुर्ख़ियों में क्यों?
हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की आधिकारिक यात्रा की। इस यात्रा के दौरान भारत और UAE के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिए फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए गए।
यात्रा के मुख्य परिणाम
- रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिए फ्रेमवर्क: इससे रक्षा औद्योगिक सहयोग, नवाचार एवं उन्नत प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण, सैन्य अभ्यास, रक्षा शिक्षा एवं सिद्धांत, सैन्य बलों के बीच पारस्परिक संचालन क्षमता आदि को बढ़ावा मिलेगा।
- ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक भंडार:
- रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) का विस्तार: भारत के SPR में UAE की भागीदारी को 30 मिलियन बैरल तक बढ़ाने के लिए एक MoU पर हस्ताक्षर किए गए। यह वर्तमान क्षमता की तुलना में लगभग पाँच गुना वृद्धि है।
- इसमें विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) में मौजूद भंडारण सुविधाओं का प्रयोग करना और चांदीखोल (ओडिशा) में नए भंडार विकसित करना शामिल है।
- फुजैराह भंडारण सुविधा और गैस भंडार: इस समझौते के तहत UAE के फुजैराह बंदरगाह पर भारत के लिए सामरिक कच्चे तेल का भंडारण स्थापित करने की संभावनाओं पर सहमति व्यक्त की गई है। साथ ही भारत के भीतर रणनीतिक गैस भंडार विकसित करने पर विचार किया गया है।
- होर्मुज जलसंधि: प्रधानमंत्री ने होर्मुज जलसंधि के माध्यम से सुरक्षित एवं निर्बाध समुद्री आवागमन सुनिश्चित करने के पक्ष में भारत की स्पष्ट प्रतिबद्धता दोहराई। यह मार्ग भारत की ऊर्जा एवं खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

- निवेश: नेताओं ने UAE की संस्थाओं की ओर से 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा का स्वागत किया।
- वाडिनार शिप रिपेयर क्लस्टर: कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) और दुबई की ड्राइडॉक्स वर्ल्ड (DDW) के बीच एक MoU पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत गुजरात के वाडिनार में जहाज मरम्मत (Ship Repair) एवं ऑफशोर निर्माण का एक प्रमुख क्लस्टर विकसित किया जाएगा। यह परियोजना भारत की समुद्री विकास निधि योजना (Maritime Development Fund Scheme) के अंतर्गत स्थापित की जाएगी।
- सुपर कंप्यूटिंग क्लस्टर: भारत के C-DAC और UAE की G42 कंपनी ने 8 एक्साफ्लॉप (8 Exaflop) सुपर कंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की। यह परियोजना India AI Mission को गति देने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने में महत्वपूर्ण होगी।
- वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर: इस यात्रा के दौरान वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर को प्रारंभ किया गया। यह कॉरिडोर MAITRI (इंटरनेशनल ट्रेड और रेगुलेटरी इंटरफेस के लिए मास्टर एप्लीकेशन) डिजिटल फ्रेमवर्क पर आधारित है।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बारे में
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भारत के लिए संयुक्त अरब अमीरात(UAE) का महत्व
- अर्थव्यवस्था और व्यापार: भारत और UAE ने वर्ष 2022 में मात्र 90 दिनों के रिकॉर्ड समय में व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) संपन्न किया, जिससे द्विपक्षीय व्यापार को अत्यधिक बढ़ावा मिला।
- UAE, भारत का विश्व स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार तथा दूसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 101.25 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया।
- निवेश का प्रमुख स्रोत: अरब देशों से भारत में आने वाले कुल निवेश का लगभग 81% हिस्सा अकेले UAE से आता है। यह भारत में निवेश करने वाला सातवाँ सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है।
- प्रवासी भारतीय: UAE में 35 से 40 लाख भारतीय रहते हैं, जो देश का सबसे बड़ा प्रवासी समूह है। यह UAE की कुल आबादी का लगभग 35% हिस्सा है।
- ऊर्जा सुरक्षा: UAE भारत के लिए कच्चे तेल का चौथा सबसे बड़ा स्रोत, LNG का तीसरा सबसे बड़ा स्रोत, LPG का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। साथ ही यह भारत के तैयार पेट्रोलियम उत्पादों के लिए दूसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है।
- UAE भारत के सामरिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) कार्यक्रम में भाग लेने वाला एकमात्र विदेशी देश है।
- रुपये का अंतर्राष्ट्रीयकरण: दोनों देशों ने 'स्थानीय मुद्रा निपटान प्रणाली (Local Currency Settlement - LCS) स्थापित किया है। इसके अंतर्गत सीमा-पार व्यापार एवं भुगतान सीधे भारतीय रुपये (INR) और यूएई दिरहम (AED) में किए जा सकते हैं।
- फिनटेक सहयोग: इसके अंतर्गत भारत की UPI को UAE की AANI भुगतान प्रणाली से जोड़ा गया है तथा भारत के RuPay कार्ड को UAE के JAYWAN कार्ड नेटवर्क से इंटरलिंक किया गया है।
- पश्चिम एशिया का प्रवेश द्वार: भारत के लिए, UAE खाड़ी और व्यापक पश्चिम एशियाई क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है।
- I2U2 समूह तथा भारत–मध्य पूर्व–यूरोप आर्थिक गलियारा इस बात के उदाहरण हैं कि दोनों देश आर्थिक, तकनीकी एवं संपर्क-आधारित क्षेत्रीय व्यवस्था के निर्माण में सहयोग कर रहे हैं।
UAE के लिए भारत का महत्व
- रक्षा सहयोग: दोनों देश 'इंटरनेशनल डिफेंस एग्जीबिशन एंड कॉन्फ्रेंस' (IDEX) और 'नेवल डिफेंस एंड मैरीटाइम सिक्योरिटी एग्जीबिशन' (NAVDEX) में भाग लेते हैं। इसके अतिरिक्त 'डेजर्ट फ्लैग' और 'डेजर्ट साइक्लोन' जैसे संयुक्त सैन्य अभ्यासों में भी सहयोग करते हैं।
- अंतरिक्ष सहयोग: ISRO और UAE स्पेस एजेंसी शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बाह्य अंतरिक्ष के अन्वेषण एवं उपयोग में सहयोग कर रहे हैं। यह सहयोग I2U2 पहल का भी एक महत्वपूर्ण घटक है।
- खाद्य सुरक्षा: भारत, UAE के लिए खाद्यान्न, चावल, चीनी, फल, सब्जियाँ एवं प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता है। इससे UAE की 'नेशनल फ़ूड सिक्योरिटी स्ट्रेटेजी 2051' को समर्थन मिलता है।
- भू-राजनीतिक साझेदार: पश्चिम एशिया के अस्थिर एवं ध्रुवीकृत क्षेत्र में UAE, भारत को एक स्थिर, विश्वसनीय एवं सक्षम रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है। भारत की विदेश नीति वैचारिक पूर्वाग्रहों तथा हस्तक्षेपवादी दृष्टिकोण से अपेक्षाकृत मुक्त होने के कारण UAE के लिए विशेष महत्व रखती है।
भारत-UAE संबंधों की चुनौतियां
- क्षेत्रीय अस्थिरता: ईरान–अमेरिका–इज़राइल तथा इज़राइल–फिलिस्तीन संघर्षों के कारण पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता का प्रभाव भारत एवं UAE दोनों पर पड़ सकता है। इससे IMEC परियोजना, भारत की ऊर्जा सुरक्षा तथा UAE की आर्थिक स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
- हाल के घटनाक्रमों में फुजैराह ऑयल इंडस्ट्री ज़ोन पर ड्रोन हमले में तीन भारतीय नागरिक घायल हुए।
- प्रवासी मजदूरों के अधिकार: UAE की कफाला (Kafala) प्रणाली नियोक्ताओं को प्रवासी श्रमिकों पर अत्यधिक नियंत्रण प्रदान करती है। इसके कारण श्रमिकों के अधिकारों के उल्लंघन एवं मानवाधिकार संबंधी चिंताएं उत्पन्न होती हैं।
- गैर-शुल्क बाधाएं: विशेष रूप से प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के भारतीय निर्यातकों को UAE के अनिवार्य हलाल प्रमाणन (Mandatory Halal Certification) जैसी गैर-शुल्कीय बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
- समुद्री सुरक्षा: समुद्री डकैती, ड्रोन हमले, तथा होर्मुज जलसंधि एवं लाल सागर में व्यवधान व्यापार एवं ऊर्जा सुरक्षा के लिए चुनौती बने हुए हैं।
- बढ़ता व्यापार घाटा: व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि के बावजूद भारत का UAE के साथ व्यापार घाटा बढ़ा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत का व्यापार घाटा 26.8 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया।
निष्कर्ष
भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच संबंध व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, संपर्क, समुद्री सुरक्षा तथा क्षेत्रीय स्थिरता जैसे अनेक क्षेत्रों में विकसित एक बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी का उदाहरण हैं। जैसा कि डॉ. एस. जयशंकर ने कहा है, "भारत-UAE संबंध इस बात का एक आदर्श उदाहरण हैं कि भारत 21वीं सदी में खाड़ी देशों के साथ किस प्रकार अपनी साझेदारी को आगे बढ़ा रहा है।"