सुर्ख़ियों में क्यों
हाल ही में चीन ने अपनी नई 'एटलस ड्रोन स्वार्म प्रणाली' (Atlas या Atelasi) का अनावरण किया है।
अन्य संबंधित तथ्य
- यह एक AI-आधारित UAV ड्रोन स्वार्म युद्ध प्रणाली है। इसे चाइना इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी ग्रुप कॉर्पोरेशन (CETC) द्वारा विकसित किया गया है।
- UAV (मानवरहित हवाई वाहन) स्वॉर्म ऐसे स्वायत्त ड्रोन का समूह होता है। यह आपसी समन्वय, संचार और विकेंद्रीकृत निर्णय-प्रक्रिया के माध्यम से मिलकर कार्य करता है।
ड्रोन स्वार्म प्रणाली की प्रमुख विशेषताएं
- मापनीयता: मिशन की आवश्यकताओं के अनुसार UAV स्वॉर्म में ड्रोनों की संख्या को आसानी से बढ़ाया या घटाया जा सकता है।
- स्वार्म के आकार में अत्यधिक वृद्धि होने पर भी इसकी प्रभावशीलता उच्च बनी रहती है।
- मजबूती एवं उत्तरजीविता: यदि स्वॉर्म के कुछ ड्रोन नष्ट हो जाएँ या उनमें तकनीकी खराबी आ जाए, तब भी शेष ड्रोन अपना कार्य जारी रख सकते हैं। अन्य ड्रोन स्वतः अपनी भूमिका में बदलाव करके हुए नुकसान की भरपाई करते हैं, जिससे मिशन लगातार जारी रह सकता है।
- अनुकूलनशीलता एवं लचीलापन: UAV स्वार्म बदलते परिवेश और मिशन के उद्देश्यों के अनुसार अपने व्यवहार में परिवर्तन कर सकता है।
- AI की सहायता से ड्रोन वास्तविक समय में मार्ग बदल सकते हैं, लक्ष्यों को पुनः सेट कर सकते हैं और अपनी संरचना (फॉर्मेशन) में बदलाव कर सकते हैं।
- समानांतर कार्य क्षमता: कई ड्रोन एक ही समय में अलग-अलग कार्य कर सकते हैं। इससे मिशन की गति और दक्षता बढ़ती है तथा एक बड़े क्षेत्र को कम समय में कवर किया जा सकता है।
- बहु-कार्य क्षमता: स्वॉर्म के अलग-अलग समूह एक साथ निगरानी, संचार और लक्षित कार्रवाई जैसे विभिन्न कार्य कर सकते हैं।
- इस प्रकार एक ही स्वॉर्म युद्धक्षेत्र में कई प्रकार के कार्य या भूमिकाएँ एक साथ निभा सकता है।
- विकेंद्रीकृत नियंत्रण:
- ड्रोन पूरी तरह किसी एक केंद्रीय नियंत्रक पर निर्भर रहने के बजाय एक-दूसरे के साथ सीधे समन्वय कर सकते हैं। इससे संचार व्यवस्था में बाधा आने या शत्रु द्वारा संचार बाधित (Jamming) किए जाने की स्थिति में भी स्वॉर्म अधिक सशक्त बना रहता है।
- सामूहिक बुद्धिमत्ता: प्रत्येक ड्रोन आपस में सूचना साझा करते हैं और और एक समूह के रूप में समन्वित निर्णय लेते हैं।
- इस प्रकार पूरा स्वॉर्म एक समेकित दल के रूप में मिलकर कार्य करता है और जटिल कार्यों को पूरा कर सकता है।
- स्वायत्त निर्णय-निर्माण: AI और मशीन लर्निंग ड्रोन को लक्ष्य को पहचानने, बाधाओं से बचने और ऑटोनॉमस तरीके से कार्यों का आवंटन करने में मदद करते हैं।
- इससे मानव पर निर्भरता कम होती है तथा युद्धक्षेत्र में निर्णय लेने की गति तेज हो जाती है।

समान प्रकार की सैन्य प्रणालियाँ
|
UAV स्वॉर्म की चुनौतियां
- संचार एवं समन्वय: बड़ी संख्या में ड्रोन के बीच विश्वसनीय और निरंतर संचार बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है।
- मार्ग-निर्धारण और टक्कर से बचाव: ड्रोन को लगातार सुरक्षित मार्ग निर्धारित करना पड़ता है तथा अन्य ड्रोन और बाधाओं से टकराने से बचना होता है।
- ऊर्जा संबंधी सीमाएं: सीमित बैटरी क्षमता के कारण उड़ान का समय, भार वहन क्षमता और परिचालन सीमा या दूरी सीमित हो जाती है।
- पर्यावरणीय व्यवधान: तेज हवाओं, खराब मौसम और जटिल भू-भाग में ड्रोन के बीच समन्वय और एकसमान संरचना बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है।
- नैतिक चिंताएँ: ड्रोन स्वॉर्म के उपयोग से निजता, हवाई क्षेत्र के विनियमन, जवाबदेही और स्वायत्त हथियारों से जुड़े कई नैतिक एवं कानूनी प्रश्न उत्पन्न होते हैं, जिनका अभी पूर्ण समाधान नहीं हुआ है।
निष्कर्ष
ड्रोन स्वॉर्म भविष्य की सैन्य रणनीतियों और युद्ध सिद्धांतों का एक अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं। इसलिए देशों को अपनी स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने, प्रभावी एंटी-स्वॉर्म तकनीकों को विकसित करने तथा इनके जिम्मेदार और सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानदंड विकसित करने की आवश्यकता है।