सुर्ख़ियों में क्यों?
हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री ने इटली की आधिकारिक यात्रा की। इस यात्रा के दौरान, भारत और इटली ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को 'रणनीतिक साझेदारी' से उन्नत करके 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा दिया।
यात्रा के मुख्य परिणाम
- आर्थिक और व्यापारिक लक्ष्य: भारत और इटली ने वर्ष 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 बिलियन यूरो तक पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया।
- रक्षा और सुरक्षा: दोनों देशों ने रक्षा प्लेटफॉर्म के तकनीकी सहयोग, सह-डिजाइन, सह-विकास और सह-उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 'भारत-इटली रक्षा औद्योगिक रोडमैप' और 'संयुक्त आशय घोषणा' को अपनाया।
- सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए इटली की 'गार्डिया डि फिनान्ज़ा' और भारत के 'प्रवर्तन निदेशालय' के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
- प्रौद्योगिकी एवं नवाचार: 'INNOVIT India' के गठन की घोषणा की गई; यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप को आगे बढ़ाने एवं संयुक्त अनुसंधान में मदद करेगा।
- अवसंरचना और कनेक्टिविटी: दोनों देशों ने 'भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे' (IMEC) को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और समुद्री परिवहन तथा बंदरगाहों पर सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
- 2023 में घोषित IMEC का उद्देश्य एक एकीकृत रेल और शिपिंग कॉरिडोर के माध्यम से भारत, मध्य पूर्व और यूरोप को जोड़ना है।
- प्रवासन एवं स्वास्थ्य: भारत से इटली तक नर्सों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए 'आशय घोषणा' (Declaration of Intent) पर हस्ताक्षर किए गए।
- "इटली कॉल्स इंडिया कार्यक्रम: इटली कॉल्स इंडिया-यूनिवर्सिटी एंटरप्राइज टैलेंट ब्रिज कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इसका उद्देश्य इटली के विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत भारतीय छात्रों को इटली के उद्योगों एवं कंपनियों से जोड़कर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
- संस्कृति और पर्यटन: लोगों के बीच आपसी संबंधों को और मजबूत करने के लिए, नेताओं ने घोषणा की कि 2027 को "भारत और इटली के बीच संस्कृति और पर्यटन वर्ष" के रूप में मनाया जाएगा।
- इटली ने गुजरात के लोथल में 'राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर' (National Maritime Heritage Complex) के विकास में भाग लेने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
- कृषि और पारंपरिक चिकित्सा: कृषि और पारंपरिक चिकित्सा में सहयोग के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इसमें 'अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान' और 'आयुर्वेदिक पॉइंट एसआरएल मिलान' के बीच एक समझौता ज्ञापन भी शामिल है।
- भारतीय प्रधानमंत्री ने रोम में संयुक्त राष्ट्र के 'खाद्य और कृषि संगठन' (FAO) के मुख्यालय का दौरा किया। इस अवसर पर उन्हें वैश्विक खाद्य सुरक्षा और सतत कृषि में नेतृत्व के लिए "एग्रिकोला पुरस्कार (Agricola Award)" से सम्मानित किया गया।
- रोडमैप: दोनों नेताओं ने नवंबर 2024 में रियो डी जेनेरियो (G20 शिखर सम्मेलन) के दौरान अपनाई गई संयुक्त रणनीतिक कार्ययोजना 2025–2029 के विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति की सराहना की।
भारत एवं इटली के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
- आर्थिक सहयोग:
- इटली, यूरोपीय संघ (EU) में भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
- वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच 14.25 बिलियन यूरो का द्विपक्षीय व्यापार हुआ। इस व्यापार में भारत का व्यापार अधिशेष बना रहा।
- रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग
- वर्ष 2023 में रक्षा सहयोग समझौता पर हस्ताक्षर किए गए।
- इसका उद्देश्य रक्षा अनुसंधान, रक्षा उद्योग में सहयोग, समुद्री क्षेत्र संबंधी जागरूकता को बढ़ावा देना है। दोनों देशों ने नवंबर 2025 में अपनाई गई आतंकवाद के वित्तपोषण की रोकथाम हेतु संयुक्त पहल (Joint Initiative to Counter Financing of Terrorism) को भी लागू किया।
- रणनीतिक जुड़ाव: इटली 2019 में चीन के बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) में शामिल होने वाला एकमात्र G-7 देश था। किंतु 2023 में उसने BRI से बाहर निकलने का निर्णय लिया। यह निर्णय यूरोप में चीन के बढ़ते प्रभाव का संतुलन बनाने के भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
- पर्यावरण एवं जलवायु सहयोग: इटली, भारत के नेतृत्व वाली निम्नलिखित वैश्विक पहलों में सहभागी है;
- अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन,
- आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन,
- वैश्विक जैव-ईंधन गठबंधन।
- लोगों के बीच संबंध: यूरोपीय संघ में सबसे बड़ी भारतीय आबादी इटली में निवास करती है।
- दोनों पक्षों ने 2023 में 'माइग्रेशन एंड मोबिलिटी एग्रीमेंट' पर हस्ताक्षर किए, ताकि भारतीय छात्र स्नातक के बाद 12 महीने तक वहाँ अस्थायी रूप से रह सकें।
- अन्य क्षेत्र: संयुक्त राष्ट्र में सुधार एवं मुक्त, खुले, शांतिपूर्ण और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए साझा प्रतिबद्धता, वैज्ञानिक सहयोग के लिए 2025–2027 के कार्यकारी कार्यक्रम पर आधारित वैज्ञानिक सहयोग आदि।
इटली का हिंद-प्रशांत और भारत के साथ सहयोग पर बढ़ता फोकस
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भारत-इटली संबंधों में विद्यमान मुद्दे
- श्रमिकों का शोषण: इटली के कृषि क्षेत्र में कार्यरत भारतीय श्रमिकों का शोषण चिंता का एक प्रमुख विषय है। अनेक भारतीय प्रवासी "कैपोरालातो (Caporalato)" प्रणाली के शिकार हो जाते हैं। यह एक अवैध एवं बलात श्रम व्यवस्था है, जिसमें बिचौलिए (Gang Masters) सस्ते अस्थायी श्रमिकों की भर्ती कर उनका आर्थिक एवं सामाजिक शोषण करते हैं।
- पाकिस्तान को रक्षा उपकरणों की आपूर्ति: इटली ने ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तान को मिसाइलों, हेलीकॉप्टरों तथा अन्य रक्षा उपकरणों की आपूर्ति की है।
- चीन पर निर्भरता: BRI से बाहर निकलने के बावजूद, इटली आयात और सप्लाई चेन के लिए चीन पर निर्भर है, विशेषतः टेक्सटाइल सेक्टर में, जिससे भारत के रणनीतिक हितों पर असर पड़ता है।
- विश्वास की कमी: VVIP हेलीकॉप्टर घोटाले के बाद भारत के रक्षा मंत्रालय ने इटली की सबसे बड़ी रक्षा कंपनी, लियोनार्डो, पर लगभग एक दशक तक रोक लगाई थी। अब रोक हटा ली गई है, लेकिन पूर्ण विश्वास अभी भी स्थापित नहीं हुआ है।
निष्कर्ष
भारत और इटली आर्थिक संपर्क, रक्षा सहयोग तथा लोगों के मध्य आपसी संबंधों को और सुदृढ़ बनाकर अपनी विशेष रणनीतिक साझेदारी को ठोस एवं व्यावहारिक परिणामों में बदल सकते हैं। दोनों देश G20, G7 तथा यूरोपीय संघ (EU) जैसे बहुपक्षीय मंचों का प्रभावी उपयोग करते हुए भारत–मध्य पूर्व–यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) एवं संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना जैसी पहलों को आगे बढ़ा सकते हैं।