अखिल भारतीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (All India Index of Industrial Production: IIP) | Current Affairs | Vision IAS

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अखिल भारतीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (All India Index of Industrial Production: IIP)

30 Jun 2026
1 min

In Summary

  • MoSPI ने IIP के आधार वर्ष को संशोधित करके 2022-23 कर दिया है, जिसमें गैस आपूर्ति और अपशिष्ट प्रबंधन को शामिल करने के लिए कवरेज का विस्तार किया गया है।
  • नई आईआईपी श्रृंखला में 1,042 उत्पादों के साथ एक संशोधित आइटम बास्केट और खनन और विद्युत सूचकांकों में बेहतर सटीकता शामिल है।
  • इसमें चेन-लिंक्ड आईआईपी, ज्योमेट्रिक मीन लिंकिंग फैक्टर का परिचय दिया गया है और बेहतर सटीकता के लिए मौसमी रूप से समायोजित डेटा की योजना बनाई गई है।

In Summary

सुर्ख़ियों में क्यों?

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने औद्योगिक क्षेत्रक की वर्तमान संरचना और गतिशीलता को बेहतर तरीके से दर्शाने के उद्देश्य से IIP का आधार वर्ष (Base Year) 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है। 

IIP की नई श्रृंखला में प्रमुख बदलाव 

  • आधार वर्ष में संशोधन: आधार वर्ष संशोधन के लिए गठित 'तकनीकी सलाहकार समिति' (TAC-IIP) के तत्वावधान में इसे संशोधित कर 2022-23 कर दिया गया है।
    • आधार वर्ष एक विशिष्ट संदर्भ समयावधि होती है। इसका उपयोग आर्थिक और वित्तीय आंकड़ों (जैसे कि उत्पादन या कीमतों) की तुलना करने के लिए एक मानदंड (बेंचमार्क) के रूप में किया जाता है।
  • सूचकांक तैयार करते समय आधार वर्ष को ठीक 100 का सूचकांक मूल्य (Index value) दिया जाता है। इसके बाद के वर्षों के आंकड़ों की तुलना इस 100 से करके यह पता लगाया जाता है कि आर्थिक गतिविधि में वृद्धि हुई है या कमी। 
  • कवरेज: नई श्रृंखला में मौजूद क्षेत्रकों के साथ गैस आपूर्ति, जलापूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन जैसी गतिविधियों को जोड़ा गया है।
  • खनन क्षेत्रक का अधिक समावेशी वर्गीकरण: इस क्षेत्रक का बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए इसमें 
  • गौण/लघु खनिजों (Minor minerals) और दुर्लभ मृदा खनिजों (Rare earth minerals) को जोड़ा गया है।
  • मदों की बास्केट में संशोधन: मदों की बास्केट को 839 मदों से बढ़ाकर 1,042 उत्पाद (463 मद समूह) कर दिया गया है।
  • शामिल की गई मदें: मैग्नेटिक स्ट्राइप वाले कार्ड, सीसीटीवी (CCTV) कैमरे, गैर-बुने हुए (Non-woven) वस्त्रों की वस्तुएं, विमान और अंतरिक्ष यान के पुर्जे, स्टेंट (Stents) और टीके/वैक्सीन (पशु चिकित्सा को छोड़कर)। 
  • हटाई गई मदें: मिट्टी का तेल (Kerosene), फ्लोरोसेंट ट्यूब और CFL, साइकिल/तिपहिया/रिक्शा के टायरों के लिए ट्यूब, हल्के मोटर वाहनों (LMV) के टायरों के लिए ट्यूब, प्रिंटिंग मशीनरी और सिलाई मशीनें।
  • "n.e.c." मदों को शामिल करना: "अन्यत्र वर्गीकृत नहीं" (Not elsewhere classified - n.e.c.) मदों (जिन्हें पहले बाहर रखा गया था) को अब शामिल किया गया है। इन मदों को शामिल करने का उद्देश्य ऐसे विशिष्ट, विविध और नवीन उत्पादों को भी आंकड़ों में शामिल करना है, जो पहले पर्याप्त रूप से प्रदर्शित नहीं हो पाते थे। 
  • औद्योगिक गतिविधियों का अधिक विस्तृत वर्गीकरण: यह औद्योगिक गतिविधियों का अधिक विस्तृत वर्गीकरण प्रदान करता है। खनन क्षेत्रक के अंतर्गत यह निम्नलिखित को शामिल करता है: (i) ईंधन खनिज, (ii) धात्विक खनिज (दुर्लभ मृदा खनिजों सहित), और (iii) गैर-धात्विक खनिज (गौण खनिजों सहित)।
  • अब विद्युत सूचकांक में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों और गैर-नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से होने वाले विद्युत उत्पादन को अलग-अलग मापा जाएगा। 
  • कारखानों का प्रतिस्थापन और संवर्द्धन: नई कार्यपद्धति के तहत यदि कोई कारखाना स्थायी रूप से बंद हो जाता है या उसके उत्पादन में बड़ा बदलाव हो जाता है, तो उसके स्थान पर समान प्रकार की उत्पादन इकाई को शामिल किया जा सकता है। इससे सूचकांक अधिक प्रासंगिक बना रहेगा। 
  • चेन-लिंक्ड सूचकांक (Chain-Linked Index): पारंपरिक निश्चित-आधार (Fixed-base) सूचकांक के साथ-साथ, एक चेन-लिंक्ड IIP भी जारी किया जाएगा। 
    • इसमें प्रत्येक वर्ष भारांश को अद्यतित किया जा सकेगा। इससे उद्योगों में होने वाले संरचनात्मक बदलावों को तेजी से दर्शाया व समझा जा सकेगा और पुराने भारांशों के कारण होने वाली त्रुटि कम होगी।
  • लिंकिंग फैक्टर (समायोजन गुणांक): पुरानी और नई श्रृंखला के बीच सटीक ऐतिहासिक तुलना बनाए रखने के लिए, 2011-12 की पुरानी श्रृंखला को 2022-23 की नई श्रृंखला से संयोजन के तरीके में बदलाव किया गया है। अब इन दोनों श्रृंखलाओं को जोड़ने के लिए पुरानी 'अंकगणितीय माध्य' (Arithmetic Mean) विधि की जगह 'ज्यामितीय माध्य' (Geometric Mean - GM) विधि को अपनाया गया है। 
  • मूल्य अपस्फीतिकारक (Price Deflators): वर्तमान में, जिन मद समूहों के उत्पादन संबंधी आंकडें मूल्य (Value) के संदर्भ में दर्ज किए जाते हैं, उन्हें अपस्फीति करने (मूल्य प्रभाव को समायोजित करने) के लिए थोक मूल्य सूचकांक (WPI) का अंतरिम उपाय के रूप में उपयोग किया जाता है। हालांकि, आउटपुट उत्पादक मूल्य सूचकांक (Output PPI) के आधिकारिक तौर पर जारी होने और इसकी स्थिरता का मूल्यांकन होने के बाद भविष्य में इसी अपस्फीतिकारक  (Preferred Deflator) को प्राथमिकता दी जाएगी।
  • आउटपुट PPI को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अधिक उपयुक्त माना जाता है क्योंकि यह उत्पादकों द्वारा प्राप्त उत्पाद की कीमतों को प्रत्यक्ष रूप से मापता है और उत्पादों की गुणवत्ता में होने वाले परिवर्तनों को भी ध्यान में रखता है।
  • मौसमी समायोजन: मासिक या उच्च आवृत्ति वाले आंकड़ों पर कैलेंडर प्रभाव, कार्य दिवसों की संख्या और तिथियों के अनुसार बदलने वाले त्योहारों (जैसे दीपावली) से बहुत प्रभावित होता है। इसी कारण MoSPI भविष्य में मौसमी रूप से समायोजित IIP आंकड़े (Seasonally Adjusted IIP Data) जारी करने की योजना बना रहा है।
  • यह व्यवस्था नई आधार वर्ष श्रृंखला के लिए मासिक आंकड़ों की लगातार 5 वर्षों की स्थिर समय-श्रृंखला उपलब्ध होने के बाद लागू की जाएगी।

अखिल भारतीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के बारे में

  • परिभाषा: औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) एक समग्र सूचकांक है, जो किसी निश्चित अवधि में औद्योगिक उत्पादों की एक चयनित बास्केट के उत्पादन की मात्रा में होने वाले अल्पकालिक परिवर्तनों को आधार अवधि की तुलना में मापता है।
  • ऐतिहासिक संदर्भ एवं आधार वर्ष: भारत में औद्योगिक उत्पादन पर निगरानी रखने की लंबी परंपरा रही है। स्वतंत्रता से पहले 1937 को आधार वर्ष मानकर पहली बार IIP जारी किया गया था। 
    • अब तक IIP के आधार वर्ष में 10 बार संशोधन किया जा चुका है।
  • जारी करने की अवधि: IIP मासिक आधार पर जारी किया जाता है। इसे संदर्भित माह की समाप्ति के 28 दिन बाद जारी किया जाता है।
  • जारी करने वाली संस्था: IIP को सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी किया जाता है।
  • शामिल क्षेत्रक: IIP में 4 प्रमुख क्षेत्रकों को शामिल किया गया है, जिनका सूचकांक में अलग-अलग भारांश (Weightage) है। (तालिका देखें)
  • सूचकांक की गणना: IIP की गणना लास्पेयर्स के स्थिर-आधार मात्रा सूचकांक सूत्र (Laspeyres' Fixed-Base Volume Index Formula) के आधार पर की जाती है। इसमें नीचे से ऊपर (Bottom-up) की पद्धति अपनाई जाती है, अर्थात पहले प्रत्येक वस्तु के उत्पादन की मात्रा में समय के साथ हुए बदलाव को मापा जाता है और फिर आधार वर्ष के भारांश के आधार पर इन सभी को मिलाकर समग्र औद्योगिक उत्पादन सूचकांक तैयार किया जाता है।

 

 

 

 

IIP के आधार वर्ष में संशोधन के निहितार्थ 

  • निवेश और व्यावसायिक नियोजन को प्रोत्साहन: औद्योगिक उत्पादन और उपभोग के रुझानों का अधिक सटीक आकलन होने से सरकार को बेहतर नीतियां बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही, व्यवसाय इन आंकड़ों के आधार पर भविष्य की मांग का बेहतर अनुमान, उत्पादन योजना और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन कर सकेंगे। 
  • बेहतर नीति निर्माण: नए आधार वर्ष पर तैयार और अधिक विस्तृत IIP यह सुनिश्चित करता है कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक एवं राजकोषीय नीतियों संबंधी निर्णय सटीक, अद्यतन और वर्तमान आंकड़ों पर आधारित हों। 
    • उदाहरण के लिए, नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय विद्युत तथा लघु खनिजों के लिए अलग-अलग सूचकांक होने से सरकार अपनी नीतियों, अवसंरचना में निवेश और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े प्रयासों के प्रभाव की सीधे निगरानी कर सकेगी। 
  • समष्टि-आर्थिक (Macroeconomic) आंकड़ों में समन्वय: नए IIP को अन्य समष्टि-आर्थिक आंकड़ों के साथ बेहतर तरीके से समन्वित किया गया है। इससे आंकड़ों के बीच विसंगतियां कम होंगी और अर्थव्यवस्था की संवृद्धि, मूल्य-वर्धन आदि की तुलना अधिक सार्थक और समान आधार पर की जा सकेगी। 

निष्कर्ष

हालिया सांख्यिकीय सुधार, विशेषकर 2022-23 की नई IIP श्रृंखला, भारत की बदलती अर्थव्यवस्था के अनुरूप अधिक विश्वसनीय, सटीक और प्रतिनिधित्वपूर्ण आंकड़े उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ये सुधार साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेंगे। 

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Macroeconomic

Relating to or denoting the branch of economics that deals with the large-scale economic factors of a country or region, such as national income and unemployment.

Laspeyres’ Fixed-Base Volume Index Formula

A standard formula used to calculate volume indices, including the IIP. It uses the quantities of the base period as weights and measures changes in volume relative to the base period.

Seasonally Adjusted IIP Data

IIP data that has been adjusted to remove predictable seasonal variations, such as those caused by weather patterns or holidays. This allows for a clearer understanding of underlying trends in industrial production.

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