सुर्ख़ियों में क्यों?
नीति आयोग ने "विकसित भारत हेतु DPI@2047" (DPI@2047 for Viksit Bharat) नामक रणनीतिक रोडमैप जारी किया है। इसका उद्देश्य समावेशी, आजीविका-केंद्रित तथा उत्पादकता-आधारित विकास को बढ़ावा देना है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
- रिपोर्ट में दो-चरण वाले दृष्टिकोण की अनुशंसा की गई है-
- DPI 2.0 (2025–2035), जिसका उद्देश्य तात्कालिक रूप से बड़े पैमाने पर आजीविका-आधारित विकास को गति देना है; तथा
- इसके पश्चात DPI 3.0 (2035–2047), जिसका लक्ष्य व्यापक एवं समावेशी समृद्धि सुनिश्चित करना है।
- DPI 2.0 के प्रमुख तत्व
- आठ क्षेत्रकवार रूपांतरण: इसका लक्ष्य MSMEs, कृषि, शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसे प्रमुख क्षेत्रों में विद्यमान संरचनात्मक बाधाओं को व्यवस्थित रूप से दूर करना है।
- प्रणालीगत सहायक तत्त्व: साथ ही इसका लक्ष्य ऋण, विकेन्द्रीकृत ऊर्जा तथा लाभ वितरण जैसे क्षेत्रों में आधारभूत नेटवर्क को सुदृढ़ बनाना है।
- चार प्रमुख क्रियान्वयन प्राथमिकताएं;
- जिला-आधारित मांग समेकन
- प्रौद्योगिकी उद्यमिता का विस्तार
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का प्रभावी उपयोग
- बेहतर डेटा उपयोग, डिजिटल लेन-देन, सुदृढ़ मानव संसाधन क्षमता तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लोकतंत्रीकरण के माध्यम से बहु-क्षेत्रीय परिवर्तनकारी अवसरों का दोहन करना है।
डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के बारे में
- DPI से आशय ऐसे आधारभूत एवं अंतर-संचालनीय डिजिटल तंत्रों से है, जो मुख्यतः डिजिटल पहचान, त्वरित भुगतान तथा सहमति-आधारित डेटा साझाकरण को सक्षम बनाते हैं। यह सरकार, व्यवसायों तथा नागरिकों के मध्य सुरक्षित रूप से परस्पर संवाद एवं लेनदेन को सक्षम बनाती है।
- DPI की विशेषताएं
- अंतर-संचालनीयता (Interoperability): यह अन्य प्रणालियों एवं प्लेटफ़ॉर्मों के साथ निर्बाध रूप से एकीकरण सुनिश्चित करती है तथा सुरक्षित एवं दक्ष डेटा आदान-प्रदान को सक्षम बनाती है।
- विस्तृत क्षमता (Scalability): इसे बड़े पैमाने पर अपनाए जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है तथा यह लाखों अथवा भारत जैसे देशों में अरबों उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं को पूर्ण करने सक्षम है।
- समावेशिता (Inclusivity): यह लोक वस्तु के अपवर्जन-रहित और गैर-प्रतिस्पर्धी सिद्धांतों का पालन करती है। इस प्रकार सरकार, व्यवसायों एवं सभी नागरिकों, विशेषकर वंचित समुदायों, के लिए समान एवं निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करती है।
- शासन व्यवस्था (Governance): DPI के प्रभावी संचालन के लिए पारदर्शी संस्थागत ढाँचा, उत्तरदायी निगरानी तंत्र तथा सहभागितापूर्ण नीति-निर्माण आवश्यक है, ताकि लोकहित का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
भारत का DPI पारिस्थितिकी तंत्र![]()
|
भारत में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) की परिवर्तनकारी भूमिका
- आर्थिक संवृद्धि: वर्ष 2022 में DPI का भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 0.9% योगदान था, जिसके वर्ष 2030 तक 4.2% तक पहुंचने का अनुमान है।
- समावेशी विकास: वस्तु एवं सेवा कर (GST) के अंतर्गत पंजीकृत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) की संख्या 2017-18 में 5 लाख थी, जो बढ़कर दिसंबर 2024 में 1.5 करोड़ हो गई।
- वित्तीय समावेशन: भारत ने केवल आठ वर्षों में 80% बैंक खाता कवरेज प्राप्त कर लिया। जबकि इंटरनेशनल सेटलमेंट बैंक (BIS) के अनुसार यह उपलब्धि सामान्य परिस्थितियों में 47 वर्ष में प्राप्त होती है।
- सामाजिक लाभों में लीकेज की रोकथाम: JAM ट्रिनिटी (जनधन–आधार–मोबाइल) के उपयोग से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) मिशन ने विश्व का सबसे बड़ा सरकार-से-नागरिक (G2P) भुगतान तंत्र विकसित किया। इससे सामाजिक कल्याण योजनाओं में होने वाली लीकेज में उल्लेखनीय कमी आई।
- DBT के साथ लीकेज रोकथाम के माध्यम से ₹3.48 लाख करोड़ बचाए गए।
- मोबाइल की पहुंच में वृद्धि: आधार-आधारित ई-केवाईसी (e-KYC) के अनुसार भारत में परिवारों के बीच मोबाइल स्वामित्व बढ़कर मई 2025 तक 85% हो गया।
- हॉकी-स्टिक प्रभाव': DPI के कारण ऐसी नई डिजिटल सेवाओं का तीव्र विस्तार हुआ, जिनकी पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी, जिससे विकास 'हॉकी-स्टिक' वक्र के समान तेजी से बढ़ा।
- उदाहरण लिए DPI आधारित स्टार्टअप्स ने 100 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का बाजार मूल्य सृजित किया।
- DPI कूटनीति: फरवरी 2026 तक, भारत सरकार ने इंडिया स्टैक एवं डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) में सहयोग हेतु 24 देशों के साथ समझौता ज्ञापनों (MoUs) एवं अन्य समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
- इसके अतिरिक्त, भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान नई दिल्ली लीडर्स डेक्लरेशन में DPI को विकास के उत्प्रेरक के रूप में मान्यता दी गई तथा वैश्विक डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना भंडार को अनुभवों एवं सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान के लिए एक ज्ञान मंच के रूप में प्रारंभ किया गया है।

आगे की राह: DPI 2.0 के लिए सिफारिशें
- विकेंद्रीकृत क्रियान्वयन: भारत सरकार एवं नीति आयोग के मार्गदर्शन में राज्यों को DPI 2.0 पहलों का नेतृत्व करने के लिए सशक्त बनाया जाए।

- परिवर्तन के लिए सहयोगात्मक द्विवर्षीय पुनरावृत्त चक्र: पारिस्थितिकी तंत्र के व्यापक विस्तार से पूर्व विस्तार योग्य मॉडलों का परिष्करण एवं सत्यापन करने के लिए दो-वर्षीय पुनरावृत्त (Iterative) चक्रों का उपयोग किया जाना चाहिए।
- प्रथम चक्र (2026–2027) MSMEs एवं कृषि पर केंद्रित : वर्ष 2026–2027 के दौरान MSME एवं कृषि क्षेत्र में तीन प्रमुख परिवर्तनकारी पहलों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इसके अंतर्गत छह राज्यों में आदर्श पायलट परियोजनाएं लागू किया जाना चाहिए तथा इनकी सफलता के बाद व्यापक स्तर पर इनका विस्तार किया जाना चाहिए।
- वैश्विक सहभागिता के लिए तटस्थ संस्थागत निकाय: वर्ष 2027 तक एक तटस्थ, विशेषज्ञ-समर्थित संस्थागत निकाय की स्थापना की जाए, जो डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) तथा जनहित के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का नेतृत्व कर सके।
निष्कर्ष:
वैश्विक तकनीकी बढ़त अब केवल पूंजी निवेश और चिप क्षमता पर निर्भर नहीं है, बल्कि इस बात पर अधिक निर्भर करती है कि कोई देश अपनी डिजिटल अवसंरचना को पूरी अर्थव्यवस्था में उसके व्यापक उपयोग और प्रभाव से कितनी प्रभावी ढंग से जोड़ पाता है। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और घरेलू उद्यमिता के समन्वय के माध्यम से भारत, AI को अपनाने का ऐसा मॉडल विकसित करने का लक्ष्य रखता है, जो स्थानीय भाषाओं पर आधारित हो तथा देश की विशाल जनसंख्या तक व्यापक रूप से पहुंच सके।
