सुर्ख़ियों में क्यों?
पंचायती राज मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2023–24 के लिए पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) 2.0 जारी किया।
पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) क्या है?
- यह पंचायती राज मंत्रालय द्वारा प्रारंभ किया गया एक मूल्यांकन साधन है। इसका उद्देश्य भारत की 2.6 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों/उनके समकक्ष संस्थाओं द्वारा ग्रामीण विकास के विभिन्न क्षेत्रों में की गई क्रमिक प्रगति का आकलन करना है।
- यह सूचकांक सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (Localization of Sustainable Development Goals - LSDGs) के ढांचे पर आधारित है। इसमें 17 वैश्विक SDGs को पंचायती राज संस्थाओं के लिए उपयुक्त 9 विषयगत क्षेत्रों में समाहित किया गया है।
- प्रदर्शन श्रेणियां: समग्र अंकों के आधार पर ग्राम पंचायतों/समकक्ष संस्थाओं को 5 श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है;
- अचीवर/पूर्ण प्राप्तकर्ता (A+): 90 एवं उससे अधिक अंक,
- फ्रंट रनर/अग्रणी (A): 90 से कम 75 तक अंक;
- परफॉर्मर/बेहतर प्रदर्शनकर्ता (B): 75 से कम 60 तक अंक;
- एस्पिरैंट/आकांक्षी (C): 60 से कम 40 तक अंक तथा
- बिगिनर्स/आरंभिक स्तर पर (D): 40 से कम अंक।
- PAI 2.0 में 33 राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा सत्यापित आंकड़े प्रस्तुत किए गए, जिसके परिणामस्वरूप 97.30% का राष्ट्रीय सहभागिता स्तर दर्ज किया गया।
- PAI संस्करण 1.0 (वर्ष 2025 में प्रारंभ) के अंतर्गत 80.79% सहभागिता प्राप्त हुई थी।
- PAI 2.0 में PAI 1.0 की तुलना में प्रमुख सुधार
- एकीकृत डेटा प्रविष्टि प्रपत्र (Data Entry Form)।
- पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने हेतु ग्राम सभा द्वारा अनिवार्य सत्यापन।
- केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों के राष्ट्रीय पोर्टलों से आंकड़ों का उन्नत स्वचालित स्थानांतरण (Auto-porting)।
- आंकड़ों की शुद्धता बढ़ाने हेतु सॉफ्ट एवं क्रॉस-डेटा सत्यापन प्रणाली।
- सहज उपयोग हेतु रीयल-टाइम डैशबोर्ड की सुविधा।
- स्थानीय (Vernacular) भाषाओं का समावेश।

PAI 2.0 के प्रमुख निष्कर्ष
- समग्र प्रदर्शन: कोई भी ग्राम पंचायत अचीवर (A+) श्रेणी में नहीं आई।
- लगभग 1.4% ग्राम पंचायतें फ्रंट रनर श्रेणी में हैं।
- लगभग 45.72% ग्राम पंचायतें परफॉर्मर श्रेणी में हैं।
- लगभग 47.6% ग्राम पंचायतें एस्पिरैंट श्रेणी में हैं।
- 5.27% ग्राम पंचायतें बिगिनर्स श्रेणी में हैं।
- श्रेष्ठ एवं पिछड़े राज्य
- श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य: त्रिपुरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनकर्ता राज्य रहा, जहां 80% ग्राम पंचायतें फ्रंट रनर श्रेणी में रहीं। इसके पश्चात केरल एवं ओडिशा का स्थान रहा।
- निम्न प्रदर्शन करने वाले राज्य: उत्तर प्रदेश की 57,678 ग्राम पंचायतों में से केवल 51 ग्राम पंचायतें फ्रंट रनर श्रेणी में पहुंचीं। राजस्थान (8), बिहार (2) तथा पंजाब (1) का प्रदर्शन भी निम्न रहा।
पंचायती राज संस्थाओं ( PRIs) के बारे में
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PAI ने पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के रूपांतरण में किस प्रकार सहायता की है?
- साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण: PAI ग्राम पंचायत विकास योजना (Gram Panchayat Development Plan - GPDP) के अंतर्गत पंचायतों को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता प्रदान करता है।
- सूचनाओं पर आधारित शासन एवं निर्णय-निर्माण: PAI, गरीबी, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता आदि SDG आधारित नौ विषयगत क्षेत्रों से संबंधित मापनीय संकेतकों को संकलित करता है। इससे पंचायतें अपनी सुदृढ़ताओं एवं कमियों की पहचान कर सकती हैं।
- पारदर्शिता एवं नागरिक सहभागिता में वृद्धि: जमीनी स्तर पर उत्तरदायित्व को बढ़ावा देने के लिए पंचायतें अपने PAI स्कोरकार्ड पंचायत कार्यालय के बाहर प्रदर्शित कर रही हैं।
- कुछ राज्य PAI स्कोर के आधार पर पंचायतों को अतिरिक्त संसाधनों का आवंटन भी करते हैं।
- स्थानीय विकास प्राथमिकताओं का निर्धारण: यह स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास पहलों को निर्धारित करने में सहायता करता है।
- उदाहरण: यदि किसी ग्राम पंचायत के स्वच्छता अथवा जल उपलब्धता में अंक कम हैं, तो वह अपनी वार्षिक कार्ययोजना में उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दे सकती है।
- स्वस्थ प्रतिस्पर्धा एवं उत्कृष्टता को प्रोत्साहन: यह सूचकांक पंचायतों के बीच सकारात्मक प्रतिस्पर्धा की भावना को बढ़ावा देता है तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और पुरस्कार दिलाने में सहायता करता है।
- पंचायत शासन को सुदृढ़ करना: PAI को नीतिगत निर्णयों के लिए भी संस्थागत रूप दिया गया है। इसमें आदर्श पंचायत, पंचायत लर्निंग सेंटर तथा आदर्श महिला-अनुकूल पंचायतों की पहचान सम्मिलित है। इससे पंचायतों के बीच एक-दूसरे से सीखने की प्रवृत्ति और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों का प्रसार होता है।
निष्कर्ष
पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI), केंद्र एवं राज्य सरकारों के लिए मनरेगा (MGNREGS), स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं के परिणामों का मूल्यांकन करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। साथ ही, यह नीति-निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेगा तथा अधिक पारदर्शी एवं उत्तरदायी ग्रामीण शासन सुनिश्चित करने में सहायक होगा।