सुर्ख़ियों में क्यों?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी वित्त वर्ष 2025–26 की वार्षिक रिपोर्ट जारी की है। इसमें बताया गया है कि धन-शोधन अर्थात मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में जब्त की गई संपत्ति में 23 गुना बढ़ोतरी हुई है। यह वर्ष 2005–14 में ₹5,171 करोड़ से बढ़कर 2014–24 में ₹1.19 लाख करोड़ हो गई है।
वार्षिक रिपोर्ट के अन्य मुख्य तथ्य
- धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 का सशक्त प्रवर्तन: ED ने वित्त वर्ष 2025–26 में 657 मुख्य अभियोजन शिकायतें दर्ज कीं। यह FY 2024–25 की 333 शिकायतों से लगभग दोगुनी है।
- अब तक दर्ज की गई सभी PMLA शिकायतों में से 41% से अधिक शिकायतें पिछले दो वर्षों में दर्ज की गईं।
- दोषसिद्धि दर: धन शोधन मामलों में लगभग 94% की दोषसिद्धि दर दर्ज की गई।
- भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA), 2018: इसके तहत ₹2,178.34 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई।
प्रवर्तन निदेशालय (मुख्यालय: नई दिल्ली)
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धन शोधन के बारे में
- वर्ष 1988 के संयुक्त राष्ट्र के वियना कन्वेंशन के अनुसार, धन शोधन का अर्थ है आपराधिक गतिविधियों से मिली संपत्ति को स्थानांतरित करना, ताकि उसके गैर-कानूनी स्रोत को छिपाया जा सके या अपराधियों को कानूनी नतीजों से बचने में मदद मिल सके।

मनी लॉन्ड्रिंग का प्रभाव
- आर्थिक प्रभाव
- आर्थिक विकृति: धन शोधन (ML) अवैध धन को रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में प्रवाहित करके बाजार को विकृत करता है। इससे कृत्रिम मूल्य वृद्धि होती है। साथ ही, कर चोरी, आय कम दिखाने और संपत्ति छिपाने से सरकारी राजस्व भी कम होता है।
- निवेश में कमी: धन शोधन मे वृद्धि से वित्तीय पारदर्शिता कम होती है, जिससे घरेलू और विदेशी निवेश घटता है तथा वैश्विक वित्तीय प्रणाली में देश की साख को नुकसान पहुँचता है।
- समानांतर अर्थव्यवस्था: अवैध रूप से अर्जित आय को वैध बनाना काले धन की अर्थव्यवस्था (Black Economy) को मजबूत करता है। साथ ही, नकद-आधारित, अनियमित लेन-देन को बढ़ावा मिलता है।
- राजनीतिक प्रभाव
- लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के लिए खतरा: अवैध धन से आपराधिक नेटवर्क चुनाव, राजनीतिक अभियानों और नीति-निर्माण को प्रभावित कर सकते हैं। इससे लोकतांत्रिक संस्थाएँ कमज़ोर होती हैं।
- शासन पर प्रभाव
- भ्रष्टाचार में बढ़ोतरी: रिश्वत और सरकारी पद के दुरुपयोग से हुई अवैध आय को छिपाने से भ्रष्टाचार बढ़ता है, जवाबदेही के तरीके कमज़ोर होते हैं और संस्थागत सुदृढ़ता समाप्त होती है।
- प्रशासनिक बोझ में वृद्धि: धन शोधन से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर निगरानी, जाँच और कानूनी कार्रवाई आदि की आवश्यकता होती है।
- सुरक्षा पर प्रभाव
- संगठित अपराध/आतंकवाद: धन शोधन से संगठित अपराधों और आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंडिंग होती है। इससे अपराधी नेटवर्क मजबूत होते हैं और आंतरिक सुरक्षा व राष्ट्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा होता है।
- सामाजिक प्रभाव
- असमानता का बढ़ना: धन शोधन की वजह से गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल लोग औपचारिक अर्थव्यवस्था से बाहर भारी संपत्ति जमा कर पाते हैं और उसे अपने पास रख पाते हैं। इससे सामाजिक-आर्थिक असमानता और बढ़ती है।
धन शोधन से निपटने के लिए उठाए गए कदम
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धन शोधन को रोकने में चुनौतियां
- न्यायिक देरी: धन शोधन के मामलों में अक्सर लंबी जांच और लंबी न्यायिक कार्यवाही होती है। इसके कारण दोषसिद्धि दर कम होती है तथा जब्त की जाने वाली संपत्ति और अंततः सरकार द्वारा ज़ब्त की गई संपत्ति के बीच बड़ा अंतर होता है।
- बढ़ती जटिलता: आधुनिक तकनीकों, क्रिप्टोकरेंसी, डिजिटल परिसंपत्तियाँ, कई चरणों वाले लेन-देन आदि के इस्तेमाल से गैर-कानूनी फंड का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
- तालमेल की कमी: धन शोधन रोधी (AML) नियमों को लागू करने में कई एजेंसियों (ED, CBI, वित्तीय आसूचना) के शामिल होने से जानकारी साझा करने में देरी, बिखरी हुई जांच आदि जैसी समस्याएं होती हैं।
- नियमन की कमी: रियल एस्टेट, ज्वेलरी आदि क्षेत्रों में अपर्याप्त नियमन और साथ ही नकद लेन-देन का व्यापक चलन।
- अलग-अलग अधिकार-क्षेत्र वाले ढांचे: AML नियमों का पालन अलग-अलग अधिकार-क्षेत्रों में अलग-अलग होता है। वैश्विक स्तर पर काम करने वाली संस्थाओं के लिए कई देशों के नियमों का पालन सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
- उदाहरण के लिए, यूरोपियन यूनियन के निर्देश बनाम भारत में PMLA, 2002 जैसे स्थानीय नियम।
निष्कर्ष
धन शोधन तथा आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने वाली प्रणाली को मजबूत करने के लिए एक समन्वित दृष्टिकोण की जरूरत है। इसमें तेजी से मुकदमा चलाना, जोखिम-आधारित नियमन, मजबूत निगरानी, बेहतर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और प्रभावी खुफिया सूचना साझाकरण शामिल हैं।