राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RASHTRIYA BAL SWASTHYA KARYAKRAM) | Current Affairs | Vision IAS

Upgrade to Premium Today

Start Now
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

अपना ज्ञान परखें

आर्थिक अवधारणाओं में महारत हासिल करने और नवीनतम आर्थिक रुझानों के साथ अपडेट रहने के लिए गतिशील और इंटरैक्टिव सत्र।

ESC

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RASHTRIYA BAL SWASTHYA KARYAKRAM)

30 Jun 2026
1 min

In Summary

  • राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) 2.0 के तहत परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) द्वारा 18 वर्ष तक के बच्चों की शीघ्र पहचान और व्यापक देखभाल के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।
  • यह कार्यक्रम 38 स्थितियों को लक्षित करता है, जिसमें मूल 4D (दोष, रोग, कमियां, विलंब) और मानसिक स्वास्थ्य और गैर-संचारी रोगों के जोखिम कारकों जैसी नई पीढ़ी की चुनौतियां शामिल हैं।
  • आरबीएसके 2.0 में रेफरल संबंधों को मजबूत करने, स्वास्थ्य कार्डों के साथ डिजिटलीकरण और शिक्षा और महिला एवं बाल विकास प्रणालियों के साथ बहु-क्षेत्रीय अभिसरण पर जोर दिया गया है।

In Summary

सुर्ख़ियों में क्यों?

हाल ही में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) 2.0 के दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

प्रमुख उद्देश्य 

योजना की प्रमुख विशेषताएं

  • प्रारंभिक पहचान और हस्तक्षेप: जन्मजात दोषों, रोगों, कमियों तथा विकास संबंधी विलंब (दिव्यांगताओं सहित) अर्थात् 4D की समय रहते पहचान और उपचार सुनिश्चित करना।
  • समग्र देखभाल: बच्चों को निवारक, प्रोत्साहनात्मक तथा उपचारात्मक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना।
  • समग्र विकास: बच्चों के अस्तित्व, विकास, वृद्धि तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित करना।
  • आर्थिक राहत: समय पर हस्तक्षेप और रोगों की रोकथाम के माध्यम से व्यक्तिगत व्यय को कम करना।

 

 

  • प्रारंभ: फरवरी 2013 में प्रारंभ किया गया।
  • मंत्रालय: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW)
  • RBSK बच्चों में चयनित स्वास्थ्य समस्याओं की प्रारंभिक पहचान करने तथा उनके चिकित्सा एवं शल्य-चिकित्सा प्रबंधन से जोड़ने का एक कार्यक्रम है। इसके माध्यम से समुदाय स्तर पर बच्चों को समग्र स्वास्थ्य देखभाल उपलब्ध कराई जाती है।
    • RBSK 2.0 के अंतर्गत 38 सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं की प्रारम्भिक पहचान, निःशुल्क उपचार तथा आवश्यक हस्तक्षेपों को शामिल किया गया है। इसमें तृतीयक स्तर पर सर्जरी की सुविधा भी प्रदान की जाती है।
  • क्रियान्वयन एजेंसी: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM)
  • लक्षित समूह: जन्म से लेकर 18 वर्ष तक की आयु के बच्चे।
  • RBSK 2.0 दिशा-निर्देशों की प्रमुख विशेषताएं -
    • 4D से आगे विस्तारित दायरा: पारंपरिक 4D (जन्मजात दोष, रोग, कमियां तथा विकास संबंधी विलंब) के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, व्यवहारगत चुनौतियों तथा मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप जैसे गैर-संचारी रोगों (NCDs) के जोखिम कारकों जैसी नई स्वास्थ्य चुनौतियों को भी शामिल किया गया है।
    • जांच के मंच: बच्चे के विकास के विभिन्न चरणों में विशिष्ट स्थानों पर निरंतर जांच की जाती है।
      • प्रसव केंद्र: जन्म से लेकर 6 सप्ताह तक के नवजात शिशुओं की जाँच।
      • आंगनवाड़ी केंद्र: 6 सप्ताह से लेकर 6 वर्ष तक के बच्चों की जाँच।
      • सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालय: 6 से 18 वर्ष तक के विद्यार्थियों की जाँच।
    • रेफरल प्रणाली को सुदृढ़ बनाना: सामुदायिक स्तर पर जाँच से लेकर स्वास्थ्य संस्थानों में निदान और उपचार तक देखभाल की निरंतरता बनाए रखने तथा रेफरल प्रणाली को मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया है।
      • जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र (DEIC): एक ही स्थान पर व्यापक उपचार और प्रबंधन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
      • तृतीयक स्वास्थ्य सेवाएं: इनमें शल्य-चिकित्सा प्रबंधन तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत RBSK योजना के तहत कॉक्लियर प्रत्यारोपण जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।
    • द्वितीयक एवं तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के दायरे का विस्तार: इस योजना की परिकल्पना एक सुव्यवस्थित हब-एंड-स्पोक मॉडल के रूप में की गई है, ताकि विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं सभी स्तरों पर बच्चों तक पहुँच सकें।
    • डिजिटलीकरण एवं निगरानी: इसके अंतर्गत डिजिटल स्वास्थ्य कार्ड, रियल-टाइम मॉनिटरिंग तथा रेफरल ट्रैकिंग प्रणाली शुरू की गई है।
    • स्वास्थ्य कार्ड की अवधारणा: बच्चों की निगरानी प्रणाली से जुड़े दीर्घकालिक "स्वास्थ्य कार्ड" की व्यवस्था शुरू की गई है, जो रिपोर्ट कार्ड की अवधारणा पर आधारित है।
    • बहु-क्षेत्रीय समन्वय: विद्यालयों और आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से स्वास्थ्य, शिक्षा तथा महिला एवं बाल विकास प्रणालियों को एकीकृत किया गया है।
  • अन्य प्रावधान:
    • सहभागितापूर्ण देखभाल के साथ सामाजिक एवं व्यवहार परिवर्तन संचार (SBCC) को बढ़ावा देना।
    • बच्चों के बीच स्वस्थ एवं अस्वस्थ आदतों के संबंध में प्रारंभिक शिक्षा और अवधारणा निर्माण करना।
    • बच्चों, परिवारों, विद्यालयों और समुदायों की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करना, ताकि देखभाल की निरंतरता बनी रहे और घरों में स्वस्थ आदतों को अपनाया जा सके।

Explore Related Content

Discover more articles, videos, and terms related to this topic

RELATED TERMS

3

सामाजिक एवं व्यवहार परिवर्तन संचार (SBCC)

यह एक साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण है जिसका उपयोग स्वास्थ्य संबंधी ज्ञान, दृष्टिकोण और व्यवहार को बदलने के लिए किया जाता है, जिसमें सहभागितापूर्ण देखभाल को बढ़ावा देना भी शामिल है।

डिजिटल स्वास्थ्य कार्ड

बच्चों की निगरानी प्रणाली से जुड़ा एक दीर्घकालिक रिकॉर्ड, जो उनकी स्वास्थ्य जानकारी, उपचार और विकास के रिपोर्ट कार्ड के रूप में कार्य करता है, जिससे स्वास्थ्य की निरंतर निगरानी संभव होती है।

हब-एंड-स्पोक मॉडल

एक स्वास्थ्य सेवा वितरण मॉडल जहाँ एक केंद्रीय 'हब' (अस्पताल) विशेषज्ञ सेवाएं प्रदान करता है और कई 'स्पोक' (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) रेफरल के माध्यम से हब से जुड़ते हैं, जिससे विशेषज्ञ सेवाएं दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँच सकें।

Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet