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किसान उत्पादक संगठन (Farmers Producer Organisations: FPOs)

30 Jun 2026
2 min

In Summary

  • राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (एनएएएस) ने किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की दक्षता और स्थिरता बढ़ाने के लिए उपायों का सुझाव दिया।
  • किसानों की पंजीकृत संस्थाएं, जिन्हें एफपीओ कहा जाता है, सामूहिक सौदेबाजी, प्रत्यक्ष बाजार पहुंच, वित्तीय समावेशन और जोखिम न्यूनीकरण जैसे लाभ प्रदान करती हैं।
  • प्रमुख सिफारिशों में बेहतर वित्तीय सहायता, प्रौद्योगिकी के माध्यम से जोखिम प्रबंधन, फसल कटाई के बाद की बेहतर प्रक्रियाएं और सरलीकृत सरकारी नीतियां शामिल हैं।

In Summary

सुर्ख़ियों में क्यों?

हाल ही में, राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (National Academy of Agricultural Sciences - NAAS) ने जारी एक नीति-पत्र में भारत में किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) की दक्षता और संधारणीयता बढ़ाने के लिए कई महत्त्वपूर्ण उपाय सुझाए हैं।

FPOs के बारे में

  • किसान उत्पादक संगठन (FPO), उत्पादक संगठनों का एक प्रकार है। यह प्राथमिक उत्पादकों, जैसे कि– किसान, मछुआरे, बुनकर इत्यादि द्वारा बनाया गया एक विधिक संगठन होता है। FPO के सदस्य मुख्य रूप से किसान होते हैं। (नाबार्ड, 2015)
  • पंजीकरण/गठन: FPO का गठन कंपनी अधिनियम के भाग IXA या संबंधित राज्य अथवा केंद्र सरकार के सहकारी समिति अधिनियम के तहत किया जा सकता है। 
  • लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (Small Farmers' Agribusiness Consortium - SFAC): कृषि मंत्रालय द्वारा इसे FPOs के गठन में राज्य सरकारों की सहायता करने का कार्य सौंपा गया है।
  • FPO रजिस्ट्री पोर्टल: FPO को केंद्र सरकार द्वारा संचालित इस पोर्टल पर पंजीकरण कराना आवश्यक होता है। पंजीकरण के बाद उसे एक विशिष्ट पहचान संख्या, अर्थात RIC (Registration Identity Code) प्रदान की जाती है।
  • वर्तमान स्थिति: अधिकांश FPOs (85%) कृषि फसलों और बागवानी पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जबकि केवल 15% का ध्यान डेयरी, पशुधन और मत्स्य पालन पर केंद्रित है।
  • FPOs की प्रमुख विशेषताएं : 
    • FPOs का स्वामित्व उसके सदस्यों के पास होता है और इसका प्रबंधन सदस्यों के प्रतिनिधियों के माध्यम से किया जाता है।
    • FPO अपने लाभ का एक हिस्सा उत्पादकों के बीच वितरित करता है, जबकि शेष अधिशेष राशि को व्यवसाय के विस्तार के लिए अपने कोष में रखा जाता है।
  • FPO की संरचना: ग्राम स्तर पर किसानों को 15-20 सदस्यों के समूहों (जिन्हें किसान हित समूह या FIGs कहा जाता है) में संगठित किया जाता है और आगे चलकर एक संघ (Association) बनाया जाता है।  (इन्फोग्राफिक्स देखें)

FPOs के लाभ

  • सामूहिक सौदेबाजी : FPOs लघु किसानों को एक संगठित इकाई में एक साथ लाकर उनकी सामूहिक सौदेबाजी की क्षमता बढ़ाते हैं। इससे लागत कम करने और बड़े पैमाने पर लाभ प्राप्त करने में मदद मिलती है।
    • उदाहरण के लिए, थोक खरीद से लागत में 20-40% की कमी आती है।
  • बाजार तक प्रत्यक्ष पहुंच: FPOs, ई-नाम और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच के माध्यम से 3-4 बिचौलियों के स्तर को समाप्त कर देते हैं।
  • प्रौद्योगिकी अपनाने में आसानी: FPOs किसानों को कृषि यांत्रिकी, जैसे कि– ट्रैक्टर और हार्वेस्टर तथा परिशुद्ध कृषि के उपकरणों जैसे ड्रोन और सेंसर का साझा उपयोग करने में सक्षम बनाते हैं। साथ ही, डिजिटल रिकॉर्ड रखने और उत्पादों की ट्रेसबिलिटी (उत्पाद की पूरी आपूर्ति-श्रृंखला का पता लगाने की क्षमता) को भी बढ़ावा मिलता है। 
  • वित्तीय समावेशन: FPOs कम ब्याज दरों पर ऋण, फसल बीमा और सरकारी सब्सिडी तक पहुंच बढ़ाते हैं।
  • उदाहरण के लिए, '10,000 FPO के गठन और संवर्धन' योजना के तहत, 3 वर्षों के लिए प्रबंधन लागत के लिए प्रत्येक FPO को 18 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
  • मूल्य-वर्धन : FPOs उच्च मूल्य वाले उत्पादों के लिए प्रसंस्करण इकाइयों, ब्रांडिंग और पैकेजिंग समर्थन, तथा जैविक/GI प्रमाणन सहायता जैसी सेवाएं प्रदान करते हैं।
  • जोखिम में कमी: FPOs आय के स्रोतों (बहु-फसली, प्रसंस्करण) में विविधता लाकर, मूल्य में उतार-चढ़ाव के दौरान सामूहिक सौदेबाजी को सक्षम बनाकर और जलवायु-स्मार्ट कृषि प्रशिक्षण देकर सदस्यों के जोखिम को कम करते हैं।
  • नीतिगत पक्ष-समर्थन: क्षेत्रीय/राष्ट्रीय मंचों पर प्रतिनिधित्व के माध्यम से, FPO कृषि, व्यापार और बाजार पहुंच से संबंधित अनुकूल नीतियों व विनियमों का पक्ष-समर्थन कर सकते हैं और नीतिगत निर्णयों को प्रभावित कर सकते हैं।
  • ज्ञान साझाकरण और क्षमता निर्माण: कृषि विशेषज्ञों, बाजार विशेषज्ञों आदि से परामर्श, प्रशिक्षण तथा सदस्यों के बीच सर्वोत्तम कृषि पद्धतियों को साझा करने के माध्यम से FPOs किसानों की क्षमता बढ़ाते हैं। इससे आधुनिक एवं समुत्थानशील कृषि पद्धतियों, बाजार संबंधी जानकारी और गुणवत्ता मानकों की समझ विकसित होती है। 

FPOs की दक्षता और समुत्थानशीलता में सुधार के लिए प्रमुख सिफारिशें

  • वित्तीय सहायता: एक मजबूत सदस्यता आधार तैयार करके तथा लाभ के अधिक हिस्से को संगठन में बनाए रखकर आंतरिक वित्तपोषण, इक्विटी और कार्यशील पूंजी को सुदृढ़ किया जाना चाहिए। 
  • जोखिम प्रबंधन: अनुकूलन क्षमता में सुधार करने तथा मौसम-संबंधी और अन्य जैविक जोखिमों से निपटने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और समूह बीमा जैसी आधुनिक प्रौद्योगिकियों का उपयोग किया जाना चाहिए।
  • फसल कटाई के बाद प्रबंधन : फलों की बैगिंग, कटाई की उन्नत तकनीकों और प्राथमिक प्रसंस्करण के माध्यम से मूल्य संवर्धन संबंधी विशेष प्रशिक्षण एक कुशल FPO मूल्य श्रृंखला बना सकता है। साथ ही यह आंतरिक समन्वय को सुगम बना सकता है और अपशिष्ट को कम कर सकता है।
  • डिजिटल तकनीकों का एकीकरण: ब्लॉकचेन, IoT और AI जैसी तकनीकें FPO को विभिन्न चुनौतियों के अनुकूल होने में मदद कर सकती हैं। 
    • उदाहरण के लिए, ब्लॉकचेन आधारित ट्रैसेबिलिटी से पारदर्शिता बढ़ती है, जबकि बिग डेटा और IoT का उपयोग परिशुद्ध कृषि तथा लॉजिस्टिक्स प्रबंधन को बेहतर बनाने में किया जा सकता है। 
  • सरकारी नीति और समर्थन: यद्यपि FPOs को 100 करोड़ रुपये तक के कारोबार (टर्नओवर) के लिए आयकर से छूट प्राप्त है, फिर भी उन्हें न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) का भुगतान करना पड़ता है, जिसे सुव्यवस्थित और पुनर्गठित किया जाना चाहिए।
  • अनुपालन का सरलीकरण: कृषि मंत्रालय को कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के साथ मिलकर FPOs से संबंधित अनुपालन आवश्यकताओं की समीक्षा और सरलीकरण करना चाहिए। FPO से संबंधित सभी मामलों के लिए एकल-खिड़की प्रणाली अपनाई जानी चाहिए।
  • संस्थागत खरीदारों को FPOs के साथ जोड़ना: रेलवे, सेना और भारतीय खाद्य निगम (FCI) जैसे संस्थागत खरीदारों को खाद्य और गैर-खाद्य दोनों प्रकार की वस्तुओं की खरीद में FPO को प्राथमिकता देनी चाहिए।
  • R&D के साथ FPOs के संपर्कों को सुदृढ़ करना: ICAR और NAAS, FPOs पर केंद्रित अनुसंधान और पहलों में तेजी ला सकते हैं। इससे उनके प्रचार और संचालन को बढ़ावा मिलेगा।
    •  उदाहरण के लिए, 'फार्मर फर्स्ट' (Farmer FIRST) परियोजना में FPO को अनुसंधान सहयोगियों के रूप में एकीकृत किया जा सकता है।

 

FPOs को बढ़ावा देने की दिशा में की गई प्रमुख पहलें

  • 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) का गठन और संवर्धन योजना: यह किसानों को समूहों में संगठित करने के लिए एक केंद्रीय क्षेत्रक की योजना है। यह उन्हें प्रत्यक्ष विपणन में संलग्न होने में सक्षम बनाती है।
    • इस योजना के तहत क्लस्टर-आधारित व्यापार संगठनों (Cluster-Based Business Organizations - CBBOs) को FPOs की पहचान कर उन्हें प्रासंगिक उद्योगों से जोड़ने और बाजार संपर्क (Market linkages) को सुगम बनाने का कार्य सौंपा गया है।
  • ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से जुड़ाव: FPOs को अपने उत्पादों को सूचीबद्ध करने और खरीदारों/व्यापारियों के साथ सीधे बातचीत करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक-राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM), ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC), गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GEM) इत्यादि जैसे सरकारी प्लेटफॉर्म का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
  • परंपरागत उद्योगों के पुनर्जनन के लिए कोष की योजना (Scheme of Fund for Regeneration of Traditional Industries  - स्फूर्ति/SFURTI): इस योजना के तहत, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) अपने यहां पंजीकृत FPOs को निर्यात के लिए सहायता प्रदान करता है।
  • किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) पर मसौदा (Draft) राष्ट्रीय नीति: इसका उद्देश्य मौजूदा FPOs को वैज्ञानिक और सुनियोजित रूप से समेकित करना तथा नए FPOs का गठन करना है। इससे लगभग 2.50 करोड़ किसानों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है।

निष्कर्ष

FPOs के लिए एक समर्पित "FPO सहायता एवं विकास मिशन" प्रारंभ किया जा सकता है, जिसके अंतर्गत एकीकृत वित्तीय सहायता, क्षमता निर्माण, बाजार संपर्क सहयोग तथा एकल-खिड़की प्रणाली के माध्यम से सरल नियामकीय सेवाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इससे FPOs अधिक दक्षता और संधारणीयता के साथ कार्य करने में सक्षम होंगे। 

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इलेक्ट्रॉनिक-राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM)

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एकल-खिड़की प्रणाली

A single-window system is an administrative reform that consolidates all government agencies and services required for a specific transaction (like starting a business or obtaining a permit) into a single point of contact. This reduces red tape, improves efficiency, and facilitates ease of doing business. It is a key concept in administrative reforms and economic policy for UPSC.

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