भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की नियुक्ति प्रक्रिया {Appointment Procedure of the Election Commission of India (ECI)} | Current Affairs | Vision IAS

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भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की नियुक्ति प्रक्रिया {Appointment Procedure of the Election Commission of India (ECI)}

30 Jun 2026
1 min

In Summary

  • सुप्रीम कोर्ट ने 2023 के अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया को "चुने हुए प्रतिनिधियों का अत्याचार" करार दिया।
  • 2023 अधिनियम की चयन समिति (प्रधानमंत्री, कैबिनेट मंत्री, विपक्ष के नेता) सत्तारूढ़ सरकार को 2:1 का बहुमत प्रदान करती है, जो खोज समिति की संक्षिप्त सूची को दरकिनार कर देती है।
  • संविधान के अनुच्छेद 324-329 चुनाव आयोग की शक्तियों, संरचना, नियुक्तियों और चुनावी मामलों को नियंत्रित करते हैं, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के अनूप बरनवाल के फैसले ने पहले ही चयन में मुख्य न्यायाधीश को शामिल करना अनिवार्य कर दिया था।

In Summary

सुर्ख़ियों में क्यों?

भारत के उच्चतम न्यायालय ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के सदस्यों की वर्तमान नियुक्ति व्यवस्था को "निर्वाचित सरकार की निरंकुशता (Tyranny of the Elected)" कहा है।

संबंधित अन्य तथ्य 

  • उच्चतम न्यायालय ने यह टिप्पणी मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा-शर्तें एवं पदावधि) अधिनियम, 2023 को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान की।
    • याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि वर्ष 2023 का अधिनियम, अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ (2023) के निर्णय की भावना को कमजोर करता है।
    • वर्ष 2023 के अधिनियम के अनुसार चयन समिति में प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता सम्मिलित होते हैं, इस प्रकार सत्तारूढ़ सरकार को 2:1 का निर्णायक बहुमत प्राप्त हो जाता है।
      • इस अधिनियम के तहत चयन समिति को खोज समिति द्वारा प्रस्तुत पाँच नामों की सूची को पूरी तरह नजरअंदाज करने का वैधानिक अधिकार भी प्राप्त है

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से संबंधित संवैधानिक उपबंध (अनुच्छेद 324–329)

  • अधीक्षण, निदेशन एवं नियंत्रण की शक्तियां
    • अनुच्छेद 324 के अंतर्गत संसद एवं राज्य विधानमंडलों के निर्वाचन के अधीक्षण, निदेशन एवं नियंत्रण का संपूर्ण दायित्व निर्वाचन आयोग को सौंपा गया है।
  • संरचना एवं नियुक्ति
    • अनुच्छेद 324(2) के अनुसार निर्वाचन आयोग में एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) तथा उतने अन्य निर्वाचन आयुक्त (ECs) होंगे, जितनी संख्या राष्ट्रपति समय-समय पर निर्धारित करें।
    • इसमें यह भी उपबंध किया गया है कि "उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा, संसद द्वारा इस संबंध में बनाई गई विधि के अधीन होगी।"
  • स्वतंत्रता एवं पद से हटाए जाने के विरुद्ध संरक्षण
    • अनुच्छेद 324(5) यह सुनिश्चित करता है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सेवा-शर्तों में नियुक्ति के पश्चात उनके प्रतिकूल कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
    • यह अनुच्छेद यह भी उपबंध करता है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को "केवल उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान प्रक्रिया एवं समान आधारों पर" ही पद से हटाया जा सकता है।
      • इसके विपरीत, अन्य निर्वाचन आयुक्तों को यह समान संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त नहीं है, क्योंकि उन्हें मुख्य निर्वाचन आयुक्त की संस्तुति पर पद से हटाया जा सकता है।
  • निर्वाचन संबंधी अन्य उपबंध 
    • अनुच्छेद 326 के अंतर्गत लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं के निर्वाचन सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर कराए जाने का उपबंध है।
    • अनुच्छेद 327 एवं अनुच्छेद 328 क्रमशः संसद एवं राज्य विधानमंडलों को निर्वाचन संबंधी सभी विषयों पर विधि बनाने की शक्ति प्रदान करते हैं।
    • अनुच्छेद 329 निर्वाचन संबंधी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप पर प्रतिबंध लगाता है तथा यह उपबंध करता है कि निर्वाचन को केवल निर्वाचन याचिका के माध्यम से ही चुनौती दी जा सकती है।

निर्वाचन आयोग की चयन एवं नियुक्ति प्रक्रिया का विकास

  • 1991 से पूर्व: इस अवधि में संसद द्वारा कोई विशिष्ट विधि अधिनियमित नहीं की गई थी।
    • अनुच्छेद 324(2) के अंतर्गत नियुक्तियां राष्ट्रपति द्वारा, केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सहायता एवं सलाह पर की जाती थीं।
  • निर्वाचन आयोग (निर्वाचन आयुक्त सेवा शर्त और कारबार का संव्यवहार) अधिनियम, 1991
    • इस अधिनियम ने पदावधि, वेतन एवं कार्य-संचालन की प्रक्रिया का मानकीकरण किया। किंतु इसने पृथक चयन प्रक्रिया का प्रावधान नहीं किया। परिणामस्वरूप, नियुक्ति की शक्ति पूरी तरह कार्यपालिका के विवेक पर ही बनी रही।
  • अनूप बरनवाल मामला (2023): उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया कि निर्वाचन आयोग की नियुक्तियों को केवल कार्यपालिका पर छोड़ना संस्था की स्वतंत्रता को प्रभावित करता है।
    • संसद द्वारा विधि बनाए जाने तक न्यायालय ने अंतरिम व्यवस्था के रूप में तीन सदस्यीय चयन समिति का गठन किया :  
      • प्रधानमंत्री;
      • लोकसभा में विपक्ष के नेता (या लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता);
      • भारत के मुख्य न्यायाधीश(CJI)।
  • इसके पश्चात संसद ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा-शर्तें एवं पदावधि) अधिनियम, 2023 पारित किया तथा 1991 के अधिनियम को निरस्त कर दिया। इस अधिनियम के माध्यम से निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए नई प्रक्रिया लागू की गई। 
  • वर्ष 2023 के अधिनियम के अंतर्गत निर्वाचन आयोग की वर्तमान नियुक्ति प्रक्रिया
  • खोज समिति: कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति पांच योग्य उम्मीदवारों की संक्षिप्त सूची तैयार करती है।
  • चयन समिति: प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता से युक्त चयन समिति राष्ट्रपति को अंतिम अनुशंसा करती है।
  • कार्यपालिका का विवेकाधिकार: चयन समिति को यह सांविधिक शक्ति प्राप्त है कि वह खोज समिति की संक्षिप्त सूची को अनदेखा कर "किसी अन्य व्यक्ति" पर भी विचार कर सकती है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति हेतु चयन समिति की संरचना पर सुझाव

  • तारकुंडे समिति (1975), गोस्वामी समिति (1990) एवं विधि आयोग (255वीं रिपोर्ट, 2015): इन सभी ने तीन सदस्यीय कॉलेजियम की अनुशंसा की, जिसमें निम्नलिखित सदस्य हों : 
    • प्रधानमंत्री
    • लोकसभा में विपक्ष के नेता
    • भारत के मुख्य न्यायाधीश
  • द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग, 2007: इसने निम्नलिखित सदस्यों वाला कॉलेजियम प्रस्तावित किया :
    • प्रधानमंत्री
    • लोकसभा अध्यक्ष
    • लोकसभा में विपक्ष के नेता
    • विधि मंत्री 
    • राज्यसभा के उपसभापति।

वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाएं:

  • दक्षिण अफ्रीका: नियुक्तियां एक अत्यंत स्वतंत्र पैनल की अनुशंसा के आधार पर की जाती हैं, जिसमें संवैधानिक न्यायालय के अध्यक्ष तथा मानवाधिकार संस्थाओं के प्रतिनिधि सम्मिलित होते हैं।
  • यूनाइटेड किंगडम: भर्ती प्रक्रिया स्पीकर समिति की देखरेख में होती है, जिसमें सांसद सम्मिलित होते हैं। नियुक्ति से पूर्व हाउस ऑफ कॉमन्स की स्वीकृति आवश्यक होती है, जिसके पश्चात सम्राट औपचारिक नियुक्ति करते हैं।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका: सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, किंतु नियुक्ति के लिए सीनेट की पुष्टि अनिवार्य होती है।
    • नियुक्ति के समय सदस्य किसी अन्य संघीय कार्यपालिका, विधायिका अथवा न्यायपालिका के पद पर आसीन नहीं हो सकते।
  • कनाडा: नियुक्तियां सीधे विधायिका (हाउस ऑफ कॉमन्स) के प्रस्ताव द्वारा की जाती हैं।

निष्कर्ष 

भारत निर्वाचन आयोग का प्रभावी संचालन सुशासन की गुणवत्ता तथा राष्ट्र के लोकतंत्र की समग्र सुदृढ़ता को प्रत्यक्ष रूप से निर्धारित करता है। संविधान सभा की बहसों के दौरान डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कहा था कि यदि निर्वाचन वास्तव में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष होने हैं, तो निर्वाचन तंत्र को उस समय की सरकार के नियंत्रण से बाहर रखा जाना चाहिए तथा वह "कार्यपालिका के अधीन नहीं रहना चाहिए"।

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कॉलेजियम (Collegium)

यह एक प्रकार की चयन समिति या निकाय है जो विभिन्न नियुक्तियों के लिए उम्मीदवारों के नामों की सिफारिश करती है। भारत में, न्यायपालिका और निर्वाचन आयोग जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों की नियुक्तियों के लिए कॉलेजियम प्रणाली पर बहस जारी है।

कार्यपालिका का विवेक (Executive Discretion)

यह सरकार की उस शक्ति को संदर्भित करता है जहाँ वह किसी विशेष मामले में निर्णय लेने के लिए अपनी मर्जी का उपयोग कर सकती है, अक्सर नियमों या कानूनों द्वारा सीमित नहीं होती। अधिनियम 2023 के तहत, चयन समिति के पास खोज समिति की सूची को अनदेखा करने का विवेकाधिकार है।

सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Suffrage)

यह एक मौलिक लोकतांत्रिक सिद्धांत है जिसके अनुसार प्रत्येक वयस्क नागरिक को, आयु, लिंग, जाति, धर्म या संपत्ति की परवाह किए बिना, वोट देने का अधिकार है। अनुच्छेद 326 भारत में इसके कार्यान्वयन का प्रावधान करता है।

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