सुर्ख़ियों में क्यों?
भारत के उच्चतम न्यायालय ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के सदस्यों की वर्तमान नियुक्ति व्यवस्था को "निर्वाचित सरकार की निरंकुशता (Tyranny of the Elected)" कहा है।
संबंधित अन्य तथ्य
- उच्चतम न्यायालय ने यह टिप्पणी मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा-शर्तें एवं पदावधि) अधिनियम, 2023 को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान की।
- याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि वर्ष 2023 का अधिनियम, अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ (2023) के निर्णय की भावना को कमजोर करता है।
- वर्ष 2023 के अधिनियम के अनुसार चयन समिति में प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता सम्मिलित होते हैं, इस प्रकार सत्तारूढ़ सरकार को 2:1 का निर्णायक बहुमत प्राप्त हो जाता है।
- इस अधिनियम के तहत चयन समिति को खोज समिति द्वारा प्रस्तुत पाँच नामों की सूची को पूरी तरह नजरअंदाज करने का वैधानिक अधिकार भी प्राप्त है
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से संबंधित संवैधानिक उपबंध (अनुच्छेद 324–329)
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निर्वाचन आयोग की चयन एवं नियुक्ति प्रक्रिया का विकास
- 1991 से पूर्व: इस अवधि में संसद द्वारा कोई विशिष्ट विधि अधिनियमित नहीं की गई थी।
- अनुच्छेद 324(2) के अंतर्गत नियुक्तियां राष्ट्रपति द्वारा, केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सहायता एवं सलाह पर की जाती थीं।
- निर्वाचन आयोग (निर्वाचन आयुक्त सेवा शर्त और कारबार का संव्यवहार) अधिनियम, 1991
- इस अधिनियम ने पदावधि, वेतन एवं कार्य-संचालन की प्रक्रिया का मानकीकरण किया। किंतु इसने पृथक चयन प्रक्रिया का प्रावधान नहीं किया। परिणामस्वरूप, नियुक्ति की शक्ति पूरी तरह कार्यपालिका के विवेक पर ही बनी रही।
- अनूप बरनवाल मामला (2023): उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया कि निर्वाचन आयोग की नियुक्तियों को केवल कार्यपालिका पर छोड़ना संस्था की स्वतंत्रता को प्रभावित करता है।
- संसद द्वारा विधि बनाए जाने तक न्यायालय ने अंतरिम व्यवस्था के रूप में तीन सदस्यीय चयन समिति का गठन किया :
- प्रधानमंत्री;
- लोकसभा में विपक्ष के नेता (या लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता);
- भारत के मुख्य न्यायाधीश(CJI)।
- संसद द्वारा विधि बनाए जाने तक न्यायालय ने अंतरिम व्यवस्था के रूप में तीन सदस्यीय चयन समिति का गठन किया :
- इसके पश्चात संसद ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा-शर्तें एवं पदावधि) अधिनियम, 2023 पारित किया तथा 1991 के अधिनियम को निरस्त कर दिया। इस अधिनियम के माध्यम से निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए नई प्रक्रिया लागू की गई।
- वर्ष 2023 के अधिनियम के अंतर्गत निर्वाचन आयोग की वर्तमान नियुक्ति प्रक्रिया
- खोज समिति: कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति पांच योग्य उम्मीदवारों की संक्षिप्त सूची तैयार करती है।
- चयन समिति: प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता से युक्त चयन समिति राष्ट्रपति को अंतिम अनुशंसा करती है।
- कार्यपालिका का विवेकाधिकार: चयन समिति को यह सांविधिक शक्ति प्राप्त है कि वह खोज समिति की संक्षिप्त सूची को अनदेखा कर "किसी अन्य व्यक्ति" पर भी विचार कर सकती है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति हेतु चयन समिति की संरचना पर सुझाव
वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाएं:
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निष्कर्ष
भारत निर्वाचन आयोग का प्रभावी संचालन सुशासन की गुणवत्ता तथा राष्ट्र के लोकतंत्र की समग्र सुदृढ़ता को प्रत्यक्ष रूप से निर्धारित करता है। संविधान सभा की बहसों के दौरान डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कहा था कि यदि निर्वाचन वास्तव में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष होने हैं, तो निर्वाचन तंत्र को उस समय की सरकार के नियंत्रण से बाहर रखा जाना चाहिए तथा वह "कार्यपालिका के अधीन नहीं रहना चाहिए"।