सुर्ख़ियों में क्यों?
हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री ने नॉर्वे और स्वीडन की आधिकारिक यात्रा की तथा नॉर्डिक देशों के प्रधानमंत्रियों के साथ तीसरे भारत–नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया।
यात्रा के प्रमुख परिणाम
- भारत–नॉर्वे संबंध:
- बेहतर सहयोग: भारत और नॉर्वे ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को हरित रणनीतिक साझेदारी (Green Strategic Partnership) के स्तर तक उन्नत किया। इसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु अनुकूलन, ब्लू इकोनॉमी, ग्रीन शिपिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाना है।
- इंडो-पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव (IPOI): नॉर्वे ने भारत के इंडो-पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव (IPOI) में शामिल होने की घोषणा की।
- IPOI को भारत ने 2019 में ईस्ट एशिया समिट के दौरान शुरू किया था। यह "क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास" (SAGAR) पहल पर आधारित है।
- भारत-नॉर्वे डिजिटल विकास साझेदारी: इसके तहत सार्वजनिक डिजिटल संसाधनों आदि पर सहयोग के लिए एक ढांचा तैयार किया गया है।
- पुरस्कार: भारत के प्रधानमंत्री को नॉर्वे के राजा हेराल्ड V द्वारा 'ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट' से सम्मानित किया गया।
- भारत और स्वीडन:
- रणनीतिक साझेदारी के रूप में उन्नयन: भारत और स्वीडन आधिकारिक तौर पर अपने द्विपक्षीय संबंधों का 'रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक उन्नयन करने पर सहमत हुए।
- व्यापार और निवेश के लक्ष्य: दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में अपने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को दोगुना करने का साझा लक्ष्य निर्धारित किया है।
- अंतरिक्ष अन्वेषण: भारत के वीनस ऑर्बिटर मिशन में स्वीडिश पेलोड को शामिल करने के प्रस्ताव पर एक समझौते को आगे बढ़ाया गया।
- आतंकवाद-रोधी प्रयास: दोनों देशों ने आतंकवाद एवं उसके समर्थकों के विरुद्ध हर प्रकार की संयुक्त कार्रवाई जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
- तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के परिणाम:
- साझेदारी का विस्तार: द्विपक्षीय संबंधों को "ग्रीन टेक्नोलॉजी और इनोवेशन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप" के स्तर पर उन्नयन किया गया। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, डिजिटल इनोवेशन और संधारणीय विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित किया गया।
- व्यापार: दोनों पक्षों ने भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (India–EU FTA) तथा भारत–EFTA व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (India–EFTA TEPA) का लाभ उठाकर व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। साथ ही, प्रधानमंत्री ने नॉर्डिक देशों को गुजरात की गिफ्ट(GIFT) सिटी में अपनी उपस्थिति स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया।
- जलवायु संबंधी कार्रवाई: जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए दोनों पक्षों ने सहयोग बढ़ाने पर बल दिया। इसमें भारत की मिशन LiFE पहल को प्रमुखता दी गई, जो सतत जीवनशैली और व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देती है। लीडरशिप ग्रुप फॉर इंडस्ट्री ट्रांजिशन (LeadIT) के माध्यम से हरित औद्योगिक परिवर्तन को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। आइसलैंड ने LeadIT पहल में अपने सहयोग का विस्तार करने की घोषणा की।
- समुद्री सहयोग एवं ब्लू इकोनॉमी: इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) और भारत के समुद्री विज़न 'महासागर' (MAHASAGAR) के माध्यम से सहयोग को मज़बूत किया गया।
- दोनों देशों ने हांगकांग सम्मेलन का समर्थन किया, ताकि जहाजों का सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल पुनर्चक्रण सुनिश्चित किया जा सके।
- अंतरिक्ष और आर्कटिक अन्वेषण: आर्कटिक परिषद (Arctic Council) के ढांचे के अंतर्गत ध्रुवीय अनुसंधान एवं स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान के आदान-प्रदान पर बल दिया गया। भारत 2013 से आर्कटिक परिषद का पर्यवेक्षक देश है।

नॉर्डिक क्षेत्र के बारे में
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नॉर्डिक देशों और भारत के बीच सहयोग के क्षेत्र
- आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग: नॉर्डिक ब्लॉक एक विकसित क्षेत्र है जिसकी कुल जीडीपी लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर है।
- 2024 में भारत और नॉर्डिक देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 19 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया।
- भारत और EFTA (जिसमें नॉर्वे और आइसलैंड शामिल हैं) ने 'व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते' (TEPA) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का उद्देश्य 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश को आकर्षित करना तथा भारत में 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करना है।
- आर्कटिक क्षेत्र तक रणनीतिक पहुँच: सभी पाँच नॉर्डिक देश आर्कटिक काउंसिल के सदस्य हैं, जिससे भारत को आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग का महत्वपूर्ण अवसर मिलता है। यह सहयोग आर्कटिक क्षेत्र में चीन की "पोलर सिल्क रोड" पहल के संतुलन में भी सहायक हो सकता है।
- भारत ने जुलाई 2008 में नॉर्वे के न्यू-एलेसंड (Ny-Ålesund) में अपना पहला स्थायी आर्कटिक अनुसंधान केंद्र 'हिमाद्री (Himadri)' स्थापित किया। भारत 2013 से आर्कटिक परिषद का पर्यवेक्षक सदस्य है।
- तकनीकी और हरित विशेषज्ञता: उदाहरण के लिए, आइसलैंड भू-तापीय ऊर्जा में विशेषज्ञता रखता है, स्वीडन उन्नत विनिर्माण (एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग) में अग्रणी है और फिनलैंड दूरसंचार में अग्रणी है।
- अंतरिक्ष अन्वेषण: ISRO सैटेलाइट डेटा प्राप्त करने के लिए नॉर्वे के 'स्वालबार्ड ग्राउंड स्टेशन' का उपयोग करता है।
- वैश्विक शासन और सुरक्षा: नॉर्डिक देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करते हैं। उन्होंने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) की सदस्यता के लिए भी भारत का समर्थन किया है।
भारत-नॉर्डिक देशों के संबंधों की चुनौतियां
- सुरक्षा संबंधी अलग-अलग दृष्टिकोण: नॉर्डिक देशों के लिए रूस प्रमुख सुरक्षा चुनौती है, विशेषकर फिनलैंड एवं स्वीडन के NATO में शामिल होने के बाद।
- इसके विपरीत, भारत चीन को अपनी सबसे बड़ी सामरिक एवं सुरक्षा चुनौती मानता है।
- सीमित व्यापार: 2024 में नॉर्डिक देशों के साथ भारत का कुल व्यापार 19 बिलियन डॉलर है, जो भारत के वैश्विक व्यापार का केवल 1% है।
- नियामकीय बाधाएं एवं व्यापारिक असमानताएं: EFTA–TEPA जैसे महत्वपूर्ण समझौतों के बावजूद व्यापार में कई बाधाएं बनी हुई हैं, जैसे-जटिल नियामकीय प्रक्रियाएं, गैर-शुल्कीय बाधाएं, लॉजिस्टिक एवं परिवहन संबंधी चुनौतियां आदि।
- कनेक्टिविटी एवं लॉजिस्टिक संबंधी बाधाएं: अत्यधिक भौगोलिक दूरी तथा सीमित प्रत्यक्ष समुद्री एवं हवाई संपर्क के कारण परिवहन लागत अधिक है। समर्पित समुद्री गलियारों तथा प्रत्यक्ष उड़ानों की कमी भी व्यापारिक सहयोग को प्रभावित करती है।
निष्कर्ष
भारत और नॉर्डिक देशों को सतत विकास, नवाचार तथा सुदृढ़ आपूर्ति शृंखलाओं के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी में परिवर्तित करना चाहिए। स्वच्छ प्रौद्योगिकी, रक्षा सहयोग, जलवायु परिवर्तन, संपर्क अवसंरचना तथा लोगों के बीच संबंधों को अधिक गहरा करके दोनों पक्ष समावेशी, हरित एवं नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था के निर्माण में विश्वसनीय और दीर्घकालिक साझेदार बन सकते हैं।