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भारत में खेल शासन (Sports Governance in India)

30 Jun 2026
1 min

In Summary

  • राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025 के अंतर्गत अधिसूचित राष्ट्रीय खेल प्रशासन बोर्ड नियम और राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण नियम, 2026।
  • बोर्ड की संरचना, कार्यकाल, शक्तियां और सीएजी ऑडिट को परिभाषित किया गया; ट्रिब्यूनल अध्यक्ष/सदस्यों के कार्यकाल और शक्तियों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई।
  • सुधारों का उद्देश्य गुटबाजी और मुकदमेबाजी को कम करना, शासन व्यवस्था में सुधार करना, खिलाड़ियों की रक्षा करना और वैश्विक मानदंडों के अनुरूप होना है।

In Summary

सुर्ख़ियों में क्यों?

हाल ही में राष्ट्रीय खेल शासन बोर्ड नियम, 2026 (National Sports Governance Board Rules, 2026) तथा राष्ट्रीय खेल अधिकरण नियम, 2026  (National Sports Tribunal Rules, 2026) अधिसूचित किए गए हैं। 

 अन्य संबंधित तथ्य

  • ये नियम राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के तहत बनाए गए हैं। 
  • खेल का विषय भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की प्रविष्टि 33 के अंतर्गत शामिल है। इसलिए खेलों का विनियमन मुख्यतः राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है। 
  • खेल से संबंधित नीतिगत ढांचे के तहत राष्ट्रीय खेल नीति 2025 और खेल प्रसारण सिग्नल (प्रसार भारती के साथ अनिवार्य साझाकरण) अधिनियम, 2007 शामिल हैं। (नोट- राष्ट्रीय खेल नीति, 2025 ने 2001 की राष्ट्रीय खेल नीति का स्थान लिया है।) 

राष्ट्रीय खेल शासन (राष्ट्रीय खेल बोर्ड) नियम, 2026

  • खेल बोर्ड की संरचना: इसमें एक अध्यक्ष और दो सदस्य होंगे। इनकी नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा एक खोज-सह-चयन समिति की सिफारिशों के आधार पर की जाएगी। 
  • पदावधि: 3 वर्ष या 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, जो भी पहले हो। 
    • ये एक अतिरिक्त कार्यकाल के लिए पुनः नियुक्ति के पात्र होंगे। 
  • बोर्ड की शक्तियां और कार्य: 
    • राष्ट्रीय खेल निर्वाचन पैनल और राष्ट्रीय खेल निकायों के रिकॉर्ड को बनाए रखना।
    • राष्ट्रीय खेल निकायों में खेल शासन और समिति के कामकाज के लिए मॉडल दिशा-निर्देश तैयार करना। 
    • राष्ट्रीय खेल निकायों और उनके सहयोगियों को अंतर्राष्ट्रीय प्रसंविदाओं और सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने की सिफारिश करना।
  • लेखापरीक्षा (Audit): भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG) को बोर्ड के खातों का लेखापरीक्षण करने का अधिकार है। 

राष्ट्रीय खेल शासन (राष्ट्रीय खेल अधिकरण) नियम, 2026

  • अध्यक्ष एवं सदस्य:
    • कार्यकाल: अध्यक्ष का कार्यकाल 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक होगा।  सदस्यों का कार्यकाल 5 वर्ष या 67 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक होगा। 
    • पुनर्नियुक्ति: अध्यक्ष और सदस्य एक अतिरिक्त कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्ति के पात्र होंगे।
  • अधिकरण की शक्तियां:
    • सामान्य शक्तियां: यह न्याय सुनिश्चित करने और प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए आदेश जारी कर सकता है।
    • अंतरिम आदेश: यह संबंधित पक्षों को सुनने के बाद स्थगन आदेश या निषेधाज्ञा जारी कर सकता है। 
    • प्रवर्तन: अधिकरण के आदेश सिविल कोर्ट की डिक्री की तरह लागू करने योग्य होते हैं। अपील की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद ये आदेश अंतिम (Final) माने जाएंगे।
  • तकनीकी-कानूनी उपाय: 
    • डिजिटल पोर्टल: सरकार अधिकरण के कामकाज के लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल बना सकती है।
    • ऑनलाइन कार्य प्रणाली: यह पोर्टल निम्नलिखित कार्यों के लिए उपयोग किया जाएगा—
      • विवादों (Disputes) के ऑनलाइन पंजीकरण,
      • नोटिस जारी करना,
      • दस्तावेज प्रस्तुत करना,
      • आदेशों एवं अन्य सूचनाओं का ऑनलाइन संप्रेषण।
    • डिजिटल आदेश: अधिकरण के सभी आदेश डिजिटल हस्ताक्षर के साथ जारी किए जाएंगे। इन्हें संबंधित पक्षों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा।

सुधारों का महत्त्व

  • गुटवाद में कमी: इन सुधारों का उद्देश्य आंतरिक विवादों और गुटवाद की राजनीति पर अंकुश लगाना है। इस राजनीति ने ऐतिहासिक रूप से भारत में प्रभावी खेल प्रशासन को कमजोर किया है। 
  • मुकदमेबाजी का न्यूनीकरण: राष्ट्रीय खेल अधिकरण की स्थापना से खेलों से जुड़े विवादों का शीघ्र निपटारा होगा तथा लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रियाओं और प्रशासनिक विलंब में कमी आएगी। 
  • शासी मानकों में सुधार: यह अधिनियम पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिक आचरण को बढ़ावा देता है। यह खेल संगठनों में खिलाड़ी-केंद्रित शासन को भी बढ़ावा देता है।
  • वैश्विक मानदंडों के अनुरूप: ये सुधार भारतीय खेल प्रशासन को ओलंपिक और पैरालिंपिक चार्टर के सिद्धांतों के अनुकूल बनाते हैं। यह सर्वोत्तम अंतर्राष्ट्रीय प्रथाओं के भी अनुकूल है।
  • खिलाड़ियों के कल्याण की सुरक्षा: सुरक्षित खेल नीति और नैतिक उपाय दुर्व्यवहार तथा शोषण के खिलाफ सुरक्षा उपायों को मजबूत करते हैं। यह महिलाओं, नाबालिगों और संवेदनशील 
  • खिलाड़ियों को सुरक्षा प्रदान करता है। 
  • भारत की ओलंपिक महत्वाकांक्षाओं को बढ़ावा: बेहतर खेल प्रशासन को खेल उत्कृष्टता में सुधार के लिए आवश्यक माना जाता है। यह 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए भारत की दावेदारी को मजबूत करने का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। 

निष्कर्ष 

अधिसूचित नियम पारदर्शी, जवाबदेह और खिलाड़ी-केंद्रित खेल प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ये सुधार खेल संस्थानों की कार्यकुशलता बढ़ाने, विवादों को कम करने, खिलाड़ियों के अधिकारों की रक्षा करने तथा भारत को वैश्विक खेल शक्ति के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।  

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ओलंपिक और पैरालिंपिक चार्टर

यह अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) और अंतर्राष्ट्रीय पैरालंपिक समिति (IPC) द्वारा निर्धारित नियम, सिद्धांत और दिशानिर्देशों का एक समूह है। ये खेल की भावना, निष्पक्ष खेल और खिलाड़ियों के अधिकारों की रक्षा को बढ़ावा देते हैं।

डिजिटल हस्ताक्षर

यह एक प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर है जो किसी इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज़ की प्रामाणिकता और अखंडता को सत्यापित करने के लिए क्रिप्टोग्राफिक तरीकों का उपयोग करता है। अधिकरण के डिजिटल आदेशों पर इसका उपयोग उनकी वैधता और सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG)

यह भारतीय संविधान द्वारा स्थापित एक स्वतंत्र संवैधानिक प्राधिकरण है जो भारत सरकार और राज्य सरकारों के सार्वजनिक धन के व्यय का लेखा-परीक्षण करता है। खेल बोर्ड के खातों का ऑडिट करने का इसका अधिकार वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है।

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