सुर्ख़ियों में क्यों?
वर्ष 2026 के उत्तरार्ध में सुपर एल नीनो के आने का पूर्वानुमान लगाया गया है, जो संभवतः गत एक सदी में सबसे शक्तिशाली हो सकता है। इसने इन आशंकाओं को जन्म दिया है कि यह चरम मौसमी घटनाओं को और अधिक गंभीर बना सकता है।

अन्य संबंधित तथ्य
- मानव-जनित जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी के वायुमंडल का गर्म होना तेजी से जारी है।
- विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार, वर्ष 2025 वैश्विक स्तर पर दर्ज किए गए शीर्ष तीन सबसे गर्म वर्षों में से एक था।
- पहले से ही बढ़े हुए तापमान में एक शक्तिशाली ("सुपर") एल नीनो के विकसित होने से और अधिक तीव्रता आ सकती है। यह सामान्यतः वैश्विक तापमान को बढ़ाता है और अत्यधिक हीट वेव की घटनाओं की संभावना को बढ़ा देता है।
एल नीनो और सुपर एल नीनो के बारे में
- एल नीनो क्या है?
- स्पेनिश भाषा में एल नीनो पद का अर्थ "छोटा लड़का (Little Boy)" होता है।
- पेरू के मछुआरों ने इसका नामकरण किया था क्योंकि यह प्रशांत महासागर के जल में असामान्य रूप से उष्णता उत्पन्न करती थी।, यह परिघटना आमतौर पर 'क्रिसमस' के आसपास दिखाई देती थी।
- यह एल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) नामक प्राकृतिक जलवायु परिघटना के तीन चरणों में से एक है। ENSO के तीन चरण हैं:
- एल नीनो: गर्म चरण (Warm phase)
- ला नीना: ठंडा चरण (Cool phase)
- ENSO-तटस्थ (Neutral) चरण
- सुपर एल नीनो
- जब मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य स्तर से बहुत अधिक बढ़ जाता है, तो एल नीनो अत्यंत तीव्र हो जाता है।
- ऐसी असाधारण रूप से शक्तिशाली घटनाओं को अनौपचारिक रूप से "सुपर एल नीनो" कहा जाता है।
- यद्यपि "सुपर एल नीनो" विश्व मौसम विज्ञान संगठन द्वारा उपयोग की जाने वाली कोई आधिकारिक वैज्ञानिक श्रेणी नहीं है, फिर भी यह पद बड़े वैश्विक प्रभावों वाले असामान्य रूप से शक्तिशाली एल नीनो की घटनाओं के लिए सामान्यतः उपयोग किया जाता है।
- जब मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य स्तर से बहुत अधिक बढ़ जाता है, तो एल नीनो अत्यंत तीव्र हो जाता है।
- ENSO क्या है?
- यह बड़े स्तर पर घटित होने वाली एक जलवायु परिघटना है जिसमें विषुवतरेखीय प्रशांत महासागर में निम्नलिखित कारकों में आवधिक परिवर्तन शामिल होते हैं:
- समुद्र की सतह का तापमान (SST),
- वायुमंडलीय दबाव,
- व्यापारिक पवनें और
- महासागरीय परिसंचरण।
- यह वैश्विक जलवायु परिवर्तनशीलता के सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है और निम्नलिखित को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है:
- मानसून,
- वर्षा का पैटर्न,
- सूखा,
- बाढ़,
- चक्रवात,
- कृषि और
- वैश्विक तापमान।
- ENSO के तीन चरण होते हैं:
- ENSO: तटस्थ चरण
- एल नीनो: गर्म चरण। यह भारत में कम वर्षा का कारण बनता है।
- ला नीना (La Niña): ठंडा चरण। यह भारत में अधिक वर्षा को प्रेरित करता है।
- यह बड़े स्तर पर घटित होने वाली एक जलवायु परिघटना है जिसमें विषुवतरेखीय प्रशांत महासागर में निम्नलिखित कारकों में आवधिक परिवर्तन शामिल होते हैं:
भारत पर एल नीनो का प्रभाव
- कमजोर मानसून: एल नीनो भारत की ओर आर्द्रता के प्रवाह को कम करके दक्षिण-पश्चिम मानसून को कमजोर कर देता है, जिससे सामान्य से कम और असमान वर्षा होती है।
- भारतीय कृषि पर प्रभाव:
- फसल उत्पादकता में कमी: एल नीनो पर्याप्त वर्षा, उपयुक्त तापमान और मृदा की पर्याप्त नमी जैसी फसल वृद्धि की बुनियादी आवश्यकताओं को बाधित करके फसल उत्पादकता को कम करता है।
- कीटों और रोगों में वृद्धि: एल नीनो से संबंधित वर्षों के दौरान उच्च तापमान और शुष्क परिस्थितियां कीटों के प्रजनन और उनके प्रकोप को बढ़ाती हैं।
- एफिड्स (Aphids) और सफेद मक्खियों जैसे कीट तेजी से फैलते हैं, जबकि प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण तनावग्रस्त फसलें रोगों के प्रति अधिक सुभेद्य हो जाती हैं।
- शुष्क भूमि कृषि: शुष्क भूमि क्षेत्रों में सामान्यतः सिंचाई सुविधाएं सीमित होती हैं।
- एल नीनो मानसून को कमजोर करता है और शुष्क भूमि क्षेत्रों में सामान्य से कम और अनियमित वर्षा का कारण बनता है।
- चूंकि यह क्षेत्र अपनी जल संचयन तकनीकों के लिए मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर होते हैं, इसलिए यहां की फसलें आर्द्रता के तनाव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाती हैं।
- सूखे की स्थिति: भारत में 2002 और 2009 जैसे कई प्रमुख सूखे, एल नीनो की घटनाओं से संबंधित रहे हैं।
- आर्थिक प्रभाव: कम कृषि उत्पादन के कारण खाद्य मुद्रास्फीति और ग्रामीण संकट में वृद्धि होती है, जिससे GDP की विकास दर धीमी हो जाती है।
- जल की कमी: कमजोर मानसून वाले वर्षों के दौरान जलाशयों के जलस्तर, भूजल पुनर्भरण और सिंचाई हेतु जल की उपलब्धता में गिरावट आती है।
- स्वास्थ्य और पर्यावरण: एल नीनो के कारण हीट वेव्स, डेंगू और मलेरिया के मामलों, वनाग्नि और प्रवाल विरंजन में वृद्धि हो सकती है।
अन्य संबंधित अवधारणाएं
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इसके प्रभाव को कम करने हेतु प्रारंभ की गई पहलें
- राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA) वर्षा आधारित क्षेत्रों में जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों का समर्थन करता है।
- NMSA के अंतर्गत वर्षा आधारित क्षेत्र विकास (RAD) घटक प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए जलग्रहण क्षेत्र-आधारित दृष्टिकोण (Watershed-based approach) का अनुसरण करता है।
- मिशन मौसम का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाली चरम मौसम की घटनाओं के प्रभाव को कम करना और अधिक सुदृढ़ एवं लचीले समुदायों का निर्माण करना है।
- सरकार फसल बीमा के माध्यम से सहयोग प्रदान करती है; साथ ही, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) जैसी योजनाएं कृषि क्षेत्र में जलवायु अनुकूलन को मजबूत करती हैं।
- प्रति बूंद अधिक फसल (PDMC) के इस घटक के माध्यम से ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी कुशल सिंचाई प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा दिया जाता है।
निष्कर्ष
सुपर एल नीनो प्राकृतिक जलवायु परिवर्तनशीलता और मानव-जनित जलवायु परिवर्तन के बीच बढ़ती अंतःक्रिया को उजागर करता है। इससे चरम मौसम, जल संकट और खाद्य असुरक्षा के जोखिम बढ़ जाते हैं। भारत जैसे मानसून-निर्भर देश के लिए, जलवायु-अनुकूल कृषि को मजबूत करना, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में सुधार करना, कुशल जल प्रबंधन और आपदा तैयारी को बढ़ावा देना इस संवेदनशीलता को कम करने के लिए अनिवार्य है।