“स्टेपिंग बैक फ्रॉम द परेसीपिस: ट्रांसफॉर्मिंग लैंड मैनेजमेंट टू स्टे विदिन प्लैनेटरी बाउंड्रीज” शीर्षक से रिपोर्ट जारी की गई | Current Affairs | Vision IAS
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यह रिपोर्ट पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च ने संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय (UNCCD) के सहयोग से जारी की है।

इस रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर

  • भूमि: भूमि पृथ्वी की स्थिरता की आधारशिला है। ऐसा इसलिए, क्योंकि यह जलवायु को विनियमित करती है, जैव विविधता को संरक्षित करती है, ताजे जल की प्रणालियों को बनाए रखती है तथा भोजन, जल और कच्चा माल उपलब्ध कराती है।
    • नौ ग्रहीय सीमाओं या प्लैनेटरी बाउंड्रीज” में से सात भूमि से संबंधित हैं। ये सीमाएं वैज्ञानिक रूप से निर्धारित की गई हैं, जिनके भीतर मानव सुरक्षित रूप से अस्तित्व में रह सकता है।
      • इन सीमाओं को पार करने से विनाशकारी पर्यावरणीय बदलाव हो सकते हैं और पृथ्वी प्रणाली अस्थिर हो सकती है। 
  • भूमि का क्षरण: इसके लिए मानवीय गतिविधियों जैसे कि असंधारणीय कृषि पद्धतियां, प्राकृतिक पारिस्थितिकी-तंत्रों में व्यवधान या बदलाव करना, वनों की कटाई और शहरीकरण शामिल हैं
  • प्रभाव: भूमि क्षरण से विश्व भर में 15 मिलियन वर्ग कि.मी. क्षेत्र तथा 1.2 बिलियन लोग प्रभावित होते हैं।
    • भूमि क्षरण की आर्थिक लागत प्रतिवर्ष 6.3 से 10.6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के बीच होने का अनुमान है।

रिपोर्ट में की गई मुख्य सिफारिशें

  • सक्षमकारी कारक: इसमें सहयोगात्मक फ्रेमवर्क, आर्थिक प्रोत्साहन, संपत्ति और संसाधन-उपयोग के मामले में स्पष्ट अधिकार, अलग-अलग हितधारकों के बीच प्रभावी समन्वय आदि शामिल हैं।
  • पर्याप्त सार्वजनिक और निजी निवेश: इसके तहत विशेष रूप से सभी राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय वित्त-पोषण में संधारणीय भूमि उपयोग को बेहतर रूप से शामिल करना चाहिए तथा प्राथमिकता देनी चाहिए।
  • वैज्ञानिक फ्रेमवर्क: इसमें ग्रहीय सीमा जैसा वैज्ञानिक फ्रेमवर्क नीति निर्माताओं के लिए साक्ष्य आधारित नीतिगत निर्णय लेने हेतु व्यावहारिक मार्गदर्शक के रूप में कार्य कर सकता है। 
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