प्रधान मंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) | Current Affairs | Vision IAS
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प्रधान मंत्री ने गुजरात की एक फायर फैक्ट्री में हुए विस्फोट के पीड़ितों के लिए प्रधान मंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से अनुग्रह सहायता राशि देने की घोषणा की। 

प्रधान मंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) के बारे में

  • स्थापना: 1948 में पूर्व प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस कोष की स्थापना की थी। 
    • इसे पाकिस्तान से विस्थापित होकर भारत में आए लोगों को सहायता प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया था।
  • वर्तमान में उपयोग:
    • इस कोष से मुख्य रूप से बाढ़, चक्रवात, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं में मृतकों के परिवारों को तुरंत राहत सहायता प्रदान की जाती है।
    • इस कोष से जरूरतमंद लोगों की हार्ट सर्जरी, किडनी प्रत्यारोपण, कैंसर रोग के उपचार, और एसिड अटैक के पीड़ितों के चिकित्सा खर्च का आंशिक रूप से वहन किया जाता है।
  • वित्त-पोषण का स्रोत: यह कोष पूरी तरह से आम लोगों के योगदान पर निर्भर है। इस फंड के लिए कोई भी बजटीय आवंटन नहीं किया जाता है।
  • कर छूट: PMNRF में दिए गए प्रत्येक योगदान को आयकर अधिनियम की धारा 80(G) के तहत कर-छूट दी जाती है।

हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री ने "नीति NCAER स्टेट्स इकोनॉमिक फोरम" पोर्टल लॉन्च किया। 

  • इस पोर्टल को नीति आयोग ने नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) के सहयोग से तैयार किया है।

नए पोर्टल के बारे में

  • विशाल डेटा भंडार: यह सामाजिक, आर्थिक और वित्तीय मानकों से संबंधित डेटा का बड़ा भंडार है। इनमें शोध रिपोर्ट, शोध-पत्र और राज्य वित्त पर विशेषज्ञों की टिप्पणियां शामिल हैं। इस पोर्टल पर 30 वर्षों (1990-91 से 2022-23) का डेटा उपलब्ध होगा।
  • उद्देश्य: यह पोर्टल राज्यों को राजस्व बढ़ाने, ऋण का बेहतर तरीके से प्रबंधन करने और अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों से सीखने जैसी लोक-वित्त नीतियों पर डेटा आधारित निर्णय लेने में सहायता करेगा।

राज्य सभा ने 'विमानन वस्तुओं में हितों का संरक्षण विधेयक, 2025' (The Protection of Interests in Aircraft Objects Bill, 2025) पारित किया। 

  • इस विधेयक का उद्देश्य विमानन से संबंधित भारतीय कानूनों को केपटाउन कन्वेंशन (कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल इंटरेस्ट इन मोबाइल इक्विपमेंट) और विशेष रूप से विमान उपकरणों से संबंधित विषयों पर प्रोटोकॉल के अनुरूप करना है।

केपटाउन कन्वेंशन और प्रोटोकॉल के बारे में

  • उद्देश्य: चल संपत्तियों, विशेष रूप से उच्च-मूल्य वाली परिसंपत्तियों (जैसे-विमान, इंजन और हेलीकॉप्टर) से संबंधित लेन-देन को मानकीकृत करना, ताकि डिफॉल्ट की स्थिति में ऋणदाता अपने अधिकारों को लागू कर सकें।
  • स्वीकृति: इन्हें 2001 में अंतर्राष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (ICAO) और इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर द यूनिफिकेशन ऑफ़ प्राइवेट लॉ (UNIDROIT) द्वारा संयुक्त रूप से अपनाया गया था।
  • पक्षकार: 2016 तक 65 देश इस कन्वेंशन के पक्षकार बन चुके थे। भारत ने इस कन्वेंशन पर 2008 में हस्ताक्षर किए थे।

चिली के राष्ट्रपति ने भारत यात्रा के दौरान भारत के प्रधान मंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता में भाग लिया।

द्विपक्षीय वार्ता के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर

  • अंटार्कटिका में सहयोग पर आशय पत्र: भारत के अंटार्कटिका तक पहुंचने में चिली गेटवे के रूप में कार्य करेगा।
  • भारत-चिली सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम: चिली ने 4 नवंबर को राष्ट्रीय योग दिवस मनाने की घोषणा की है।
  • आपदा प्रबंधन: चिली के नेशनल सर्विस फॉर डिजास्टर प्रिवेंशन एंड रिस्पॉन्स (SENAPRED) और भारत के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
  • खनन: चिली की नेशनल कॉपर कॉरपोरेशन (CODELCO) और भारत की हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के बीच सहयोग एवं सूचना के आदान-प्रदान पर समझौता हुआ है।
  • व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA): दोनों देश CEPA पर वार्ता शुरू करने पर सहमत हुए।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ओपन मार्केट ऑपरेशन्स (OMO) के जरिए बैंकों में 80,000 करोड़ रुपये की तरलता बढ़ाने की घोषणा की।

ओपन मार्केट ऑपरेशन्स (OMO) के बारे में

  • परिभाषा: यह RBI द्वारा खुले बाजार में सरकारी बॉण्ड की खरीद और बिक्री की प्रक्रिया है।
  • उद्देश्य: यह RBI द्वारा उपयोग किए जाने वाले मात्रात्मक उपायों (Quantitative tools) में से एक है। इस कदम के उद्देश्य हैं- मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित करना, मुद्रास्फीति प्रबंधन करना और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना। 
    • जब RBI सरकारी बॉण्ड खरीदता है, तब अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति बढ़ती है।
    • जब RBI सरकारी बॉण्ड बेचता है, तब अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति घटती है।

हाल ही में, भारी उद्योग और इस्पात राज्य मंत्री ने 4 स्मार्ट एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग एंड रैपिड ट्रांसफॉर्मेशन हब (समर्थ/ SAMARTH) केंद्रों के बारे में संसद को सूचना दी।

  • इन्हें “भारतीय पूंजीगत सामान क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने” की योजना के तहत स्थापित किया गया है।

समर्थ केंद्रों के बारे में

  • समर्थ उद्योग भारत 4.0 भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय की एक उद्योग 4.0 पहल है।
    • उद्योग 4.0 की विशेषता: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और रोबोटिक्स जैसी डिजिटल तकनीकों का एकीकरण है। इसका उद्देश्य उद्योगों में दक्षता, लचीलापन और स्मार्ट निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाना है।
  • समर्थ केंद्र विभिन्न उद्योगों (खासकर MSMEs) को कार्यशालाओं, परामर्श और स्टार्ट-अप्स को इनक्यूबेशन समर्थन आदि के जरिए कार्यबल को प्रशिक्षित करने तथा उन्हें उद्योग 4.0 तकनीकों के बारे में जागरूक करने में सहायता प्रदान करते हैं।

भारत में वित्त वर्ष 2024-25 में रिकॉर्ड 4,515 बच्चों को गोद लिया गया था। इसमें CARA ने 8,598 नए पहचाने गए बच्चों को गोद लेने की प्रकिया में शामिल किया है।

CARA के बारे में

  • उत्पत्ति: 1990 में। 
  • प्रकृति: यह किशोर न्याय (बालकों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत एक वैधानिक निकाय है।
  • मंत्रालय: महिला और बाल विकास मंत्रालय।
  • प्रमुख कार्य: यह भारत में बच्चों के गोद लेने की प्रक्रिया के लिए नोडल निकाय है। CARA बाल दत्तक ग्रहण संसाधन सूचना और मार्गदर्शन प्रणाली (CARINGS) के माध्यम से देश में और अंतर-देशीय गोद लेने की प्रक्रिया की निगरानी एवं विनियमन करता है।
    • अंतर-देशीय दत्तक ग्रहण पर हेग कन्वेंशन, 1993 के तहत अंतर-देशीय दत्तक ग्रहण के प्रबंधन के लिए CARA केंद्रीय प्राधिकरण के रूप में नामित है। भारत ने हेग कन्वेंशन का अनुसमर्थन 2003 में किया था।
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चीन ने ताइवान जलसन्धि के मध्य और दक्षिणी भागों में "स्ट्रेट थंडर-2025A" नामक नए सैन्य अभ्यास शुरू किए।

  • जलसन्धि एक संकरा जल क्षेत्र होता है, जो दो बड़े जल निकायों को आपस में जोड़ता है।

ताइवान जलसन्धि (या ब्लैक डिच) के बारे में

  • 16वीं शताब्दी के अंत में पुर्तगाली नाविकों द्वारा इसका नाम फॉर्मोसा ("ब्यूटीफुल") रखा गया था।
  • अवस्थिति: यह चीन के फुकियन प्रांत और ताइवान के बीच स्थित है।
  • यह जलसन्धि दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर के बीच दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व तक विस्तारित है।
  • महत्त्व: यह एक प्रमुख वैश्विक पोत परिवहन मार्ग है। यहां से विश्व के 44% कंटेनर जहाज गुजरते हैं।
  • मीडियन लाइन या डेविस लाइन: यह लाइन ताइवान जलसन्धि के लगभग बीच से होकर गुजरती है। चीन इसे नहीं मानता है। 
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