भारत के रक्षा निर्यात ने 2024-25 में 23,622 करोड़ रुपये तक पहुंच कर एक नया रिकॉर्ड बनाया | Current Affairs | Vision IAS
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  • रक्षा निर्यात में 2023-24 की तुलना में 2024-25 में 12.04% की वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि दर्शाती है कि भारतीय रक्षा उत्पादों को अंतर्राष्ट्र्रीय बाजार में तेजी से स्वीकार किया  जा रहा है। साथ ही, इन उत्पादों में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनने की भी क्षमता है। 

बढ़ते रक्षा निर्यात का महत्त्व

  • स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा: भारत के रक्षा उत्पादन में 2014-15 से 2023-24 के बीच 174% की वृद्धि दर्ज हुई है। इससे आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिला है।
  • नीतिगत लक्ष्यों की प्राप्ति: भारत ने 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये मूल्य के रक्षा उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपये मूल्य के रक्षा निर्यात का लक्ष्य निर्धारित किया है।
  • अंतर्राष्ट्रीय मांग की पूर्ति: रक्षा मंत्रालय ने 2024-25 में रिकॉर्ड 193 अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए थे। इनमें से 92 प्रतिशत यानी 177 अनुबंध भारत की कंपनियों को दिए गए हैं।
  • निजी क्षेत्रक की भागीदारी में वृद्धि: 2024-25 में रक्षा निर्यात में निजी क्षेत्रक ने 15,233 करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
  • रक्षा निर्यात में विविधता: बुलेटप्रूफ जैकेट, डॉर्नियर (Do-228) विमान, चेतक हेलीकॉप्टर जैसे रक्षा उत्पादों के निर्यात से धीरे-धीरे आयात पर निर्भरता कम हो रही है।

रक्षा निर्यात से जुड़ी प्रमुख चुनौतियां

  • रक्षा क्षेत्रक से संबंधित सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (DPSUs) की धीमी वृद्धि: 2024-25 में DPSUs के निर्यात में 42.85% की वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन उनकी वास्तविक उत्पादन क्षमता निजी क्षेत्रक की तुलना में काफी कम रही।
  • तकनीकी विशेषता की कमी: भारत में प्रमुख रक्षा प्रणालियों, रक्षा उत्पादों के महत्वपूर्ण भागों व घटकों और कच्चे माल के डिजाइन या निर्माण के लिए आवश्यक तकनीकी क्षमता की कमी है। इस वजह से इनका आयात करना पड़ता है।
  • नीतियों की घोषणा और उनके कार्यान्वयन में व्यापक अंतर: नौकरशाही से संबंधित बाधाओं के कारण नीतियों को लागू करने में देरी होती है।
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