केंद्र सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन प्रमाणन योजना (GHCI) की शुरुआत की | Current Affairs | Vision IAS
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नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) के तहत केंद्र सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन प्रमाणन योजना (GHCI) शुरू की है। 

  • इसका उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन (GH) के उत्पादन के लिए बेहतर प्रमाणन प्रणाली तैयार करना है, जिससे पारदर्शिता, ट्रेसेब्लिटी और बाजार में विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।

ग्रीन हाइड्रोजन प्रमाणन योजना (GHCI) के बारे में

  • कार्यान्वयन मंत्रालय: केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE)। 
  • उद्देश्य: ग्रीन हाइड्रोजन एवं इसके डेरिवेटिव्स के मापन, निगरानी, रिपोर्टिंग, उत्पादन स्थान पर सत्यापन और प्रमाणन की विस्तृत कार्य-प्रणाली विकसित करना। 
  • नोडल अथॉरिटी: ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE)।
  • प्रमाणन विवरण:
    • प्रमाणन का दायरा: यह प्रमाणन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन परियोजना के स्तर पर लागू होगा। इसमें परिवहन हेतु हाइड्रोजन के कंप्रेशन व शुद्धिकरण तक की सभी प्रक्रियाएं शामिल होंगी।
      • प्रमाणन के दायरे में अग्रलिखित शामिल नहीं हैं: हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र की सीमाओं के बाहर हाइड्रोजन का परिवहन व भंडारण,  हाइड्रोजन वाहक (hydrogen carrier) में रूपांतरण, वापस पूर्व स्थिति  में रूपांतरण और उपयोग।
      • हाइड्रोजन को उसके भंडारण और परिवहन को सरल बनाने के लिए विविध रूपों में बदला जा सकता है। इस प्रक्रिया में एक हाइड्रोजन वाहक तैयार किया जाता है। 
    • ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन केंद्रों (फैसिलिटी) के लिए दो प्रकार के प्रमाण-पत्र जारी किए जा सकते हैं: 
      • कॉन्सेप्ट प्रमाण-पत्र जो स्वैच्छिक हैं, और
      • फैसिलिटी लेवल प्रमाण-पत्र जो अनिवार्य हैं। 
    • ग्रीन हाउस गैस (GHG) उत्सर्जन तीव्रता को मापना: यह कार्य नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की ग्रीन हाइड्रोजन उत्सर्जन मापन कार्यप्रणाली के अनुसार किया जाएगा।
    • ‘ग्रीन’ प्रमाणन की शर्त: ‘ग्रीन’ हाइड्रोजन प्रमाण-पत्र तभी प्रदान किया जाएगा, जब प्रत्येक एक किलोग्राम ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन पर ग्रीन हाउस उत्सर्जन 2 किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन के समतुल्य से अधिक नहीं होनी चाहिए।
    • ग्रीन प्रमाण-पत्र किसी और को हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा और न ही इसकी खरीद-बिक्री की जा सकेगी। साथ ही, इस प्रमाण-पत्र के बदले उत्सर्जन में कमी के लिए किसी अन्य प्रकार के क्रेडिट का दावा नहीं किया जा सकता।

नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) के बारे में

  • प्रारंभ: इसे 2023 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन और इसके डेरिवेटिव्स के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। 
  • लक्ष्य: 2030 तक प्रति वर्ष 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करना। 
  • मिशन के प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं: 
    • स्ट्रेटेजिक इंटरवेंशंस फॉर ग्रीन हाइड्रोजन (SIGHT) कार्यक्रम; 
    • ग्रीन हाइड्रोजन हब्स। 
  • मुख्य रणनीतियां:
    • ग्रीन हाइड्रोजन के निर्यात और देश में खपत को बढ़ावा देकर मांग में वृद्धि की जाएगी;
    • ग्रीन हाइड्रोजन की आपूर्ति से संबंधित बाधाओं को दूर किया जाएगा। 
    • ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन को प्रमाणित करने की बेहतर व्यवस्था स्थापित की जाएगी। 
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