भारत ने “राष्ट्रीय जलवायु और प्रकृति वित्त मंच” विकसित करने के लिए योजना की घोषणा की | Current Affairs | Vision IAS
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भारत ने ब्राजील के बेलेम (Belém) में COP-30 में एक मंत्रिस्तरीय कार्यक्रम के दौरान देश या क्षेत्र विशिष्ट मंच स्थापित करने के लिए योजनाओं की घोषणा की। भारत ने 13 अन्य विकासशील देशों और क्षेत्रों के साथ मिलकर इन योजनाओं की घोषणा की है। 

  • इस भागीदारों में अफ्रीकी द्वीप राज्य जलवायु आयोग (African Islands States Climate Commission: AISCC) जैसे क्षेत्रीय निकाय तथा कंबोडिया, कोलंबिया और अन्य भागीदार देश शामिल हैं।

मंच के बारे में

  • समर्थन: इसे हरित जलवायु कोष (Green Climate Fund: GCF) के तत्परता और प्रारंभिक सहायता कार्यक्रम (Readiness and Preparatory Support Programme) के माध्यम से समर्थन प्राप्त है।
    • तत्परता कार्यक्रम: यह देशों द्वारा संचालित पहलों को समर्थन प्रदान करता है। इससे उनकी संस्थागत क्षमताओं व शासन तंत्रों को मजबूत किया जा सकेगा और परिवर्तनकारी दीर्घकालिक जलवायु कार्रवाई एजेंडे की दिशा में योजनाओं का निर्माण किया जा सकेगा। 
  • उद्देश्य: यह रणनीतिक व देश-संचालित तंत्र होगा, जो जलवायु संबंधी प्राथमिकताओं को कार्यक्रम-आधारित निवेश कार्यपद्धितयों में रूपांतरित करेगा।
    • यह जलवायु वित्त जुटाने पर आधारित खंडित परियोजना कार्यपद्धति को प्रतिस्थापित करेगा।
    • यह विभिन्न सार्वजनिक, निजी, अंतर्राष्ट्रीय और स्थानीय हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय के लिए एक मंच भी प्रदान करेगा।

हरित जलवायु कोष (GCF) के बारे में

  • यह विश्व का सबसे बड़ा जलवायु कोष है।
  • उत्पत्ति: वर्ष 2010 में कानकुन में आयोजित UNFCCC के COP-16 में।
    • पेरिस समझौते का अनुच्छेद 9 जलवायु वित्त के लिए एक फ्रेमवर्क की स्थापना का प्रावधान करता है। GCF उस फ्रेमवर्क के अंतर्गत एक प्रमुख परिचालनरत संस्था है।  
  • अधिदेश (Mandate): विकासशील देशों की उनके राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदानों (Nationally Determined Contributions - NDCs) की महत्वाकांक्षाओं को कम उत्सर्जन और जलवायु-अनुकूल मार्गों की ओर बढ़ाने एवं साकार करने में सहायता करना।
  • गवर्नेंस: इस कोष का संचालन GCF बोर्ड करता है। यह COP, UNFCCC के प्रति जवाबदेह है तथा उसके मार्गदर्शन में कार्य करता है।
  • मुख्यालय: कोरिया गणराज्य की इंचियोन सिटी के सोंग्डो में।
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