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इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) तकनीक का उपयोग करके सफलतापूर्वक पहला कंगारू भ्रूण तैयार किया गया है। इससे शिशुधानी प्रजातियों की रक्षा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

शिशुधानी (Marsupials) जीव के बारे में

  • यह स्तनधारी जीवों का एक समूह है। इसमें 330 से अधिक प्रजातियां शामिल हैं।
  • उदाहरण: कोआला, बैंडिकूट, वॉम्बैट, वॉलबी, पॉसम आदि।
  • इन्हें महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत का महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है।
    • पहले ये उत्तरी अमेरिका में रहते थे और फिर महाद्वीपीय विस्थापन के कारण दक्षिण अमेरिका, अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया में फ़ैल गए।
  • इनके शरीर में एक थैली (Pouch) होती है। इसमें अपूर्ण विकसित बच्चे को पोषण और सुरक्षा मिलती है, क्योंकि इनका गर्भनाल (placenta) अल्पकालिक होता है। 
    • सभी शिशुधानी प्राणियों में थैलियां नहीं होती हैं।
  • वितरण: लगभग 2/3 ऑस्ट्रेलिया में पाए जाते हैं, जबकि 1/3 दक्षिण अमेरिका में पाए जाते हैं।

ला नीना की परिघटना के बावजूद भी 2025 का जनवरी महीना अब तक का सबसे गर्म जनवरी महीना रहा है।

ला नीना के बारे में

  • ला नीना, एक जलवायु संबंधी परिघटना है, इसमें अल नीनो के विपरीत दशाएं होती हैं।
  • ला नीना में उष्णकटिबंधीय प्रशांत में व्यापारिक पवनें बहुत प्रचंड हो जाती हैं। इसके परिणामस्वरूप, मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में ठंडे जल का असामान्य से अधिक संचय हो जाता है ।
  • भारतीय जलवायु पर ला नीना के प्रभाव
    • पूरे भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान सामान्य से अधिक वर्षा होती है।
    • सर्दियों के दौरान तापमान सामान्य से कम हो जाता है।

ब्रायोस्पिलस (इंडोब्रायोस्पिलस) भाराटिकस वंश की एक नई वाटर फली प्रजाति (क्रसटेशियन) पाई गई है।

क्रस्टेशियन के बारे में

  • ये अधिकतर जलीय आर्थ्रोपोड्स होते हैं। इनमें श्वसन के लिए गलफड़े होते हैं।
  • उदाहरण: केकड़े, श्रिम्प, लॉबस्टर, क्रेफ़िश, वुडलाइस आदि। 
  • शरीर के भाग: इनमें सिर, वक्ष और उदर शामिल हैं।
  • पर्यावास: मुख्यतः जलीय, कुछ अर्धस्थलीय और स्थलीय प्रजातियां।
  • पारिस्थितिक भूमिका: ये समुद्री खाद्य श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, फाइटोप्लांकटन से लेकर मछलियों और व्हेल तक पोषण पहुंचाते हैं। साथ ही, पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण में मदद भी करते हैं।
    • उदाहरण के लिए: डायटम-क्रस्टेशियन-हेरिंग्स।

आयुष मंत्रालय ने "शतावरी- बेहतर स्वास्थ्य के लिए" नामक अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य शतावरी के स्वास्थ्य संबंधी लाभों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। 

शतावरी (शतावरी रेसमोसस) के बारे में

  • शतावरी का अर्थ है “सौ रोगों का इलाज करने वाली”।
  • यह एक औषधीय पादप है, जो 1-2 मीटर ऊंचाई तक बढ़ता है।
  • उपयोग: इसकी सूखी जड़ें व पत्तियां आयुर्वेदिक चिकित्सा में औषधि के रूप में उपयोग की जाती हैं।
  • पर्यावास: उष्णकटिबंधीय जलवायु और कम ऊंचाई वाले छायादार स्थान।
    • यह एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका में पाया जाता है।
  • स्वास्थ्य संबंधी लाभ: 
    • महिला जनन स्वास्थ्य में सुधार करता है;
    • हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में सहायक है;
    • अल्सर को ठीक करने में मदद करता है;
    • ऊर्जा व दीर्घायु (Vitality & Longevity) को बढ़ावा देता है;
    • रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को मजबूत करता है;
    • तंत्रिका संबंधी विकारों (Nervous Disorders) के उपचार में लाभदायक है आदि।

खगोलविदों ने ब्रह्मांड में सबसे बड़ी ज्ञात संरचना या स्ट्रक्चर की पहचान की है। इसे क्विपु नाम दिया गया है।

क्विपु सुपरस्ट्रक्चर के बारे में

  • इस सुपरस्ट्रक्चर का द्रव्यमान 200 क्वाड्रिलियन सौर द्रव्यमान के बराबर है तथा इसका विस्तार 1.3 बिलियन प्रकाश वर्ष से अधिक है।
  • सुपरस्ट्रक्चर: यह आकाशगंगा क्लस्टरों और सुपरक्लस्टरों के समूहों वाली अत्यंत विशाल संरचना या स्ट्रक्चर होते हैं।

सुपरस्ट्रक्चर के प्रभाव:

  • कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड (CBM): सुपरस्ट्रक्चर CBM में उतार-चढ़ाव उत्पन्न कर सकते हैं। CBM वस्तुतः बिग बैंग परिघटना की बची हुई विकिरण हैं।
  • हबल कॉस्टैंट: सुपरस्ट्रक्चर, ब्रह्माण्ड के विस्तार दर की सटीक माप में गड़बड़ी उत्पन्न करती हैं।
  • ग्रेविटेशनल लेंसिंग के कारण आकाश की छवियां विकृत हो जाती हैं।
    • ग्रेविटेशनल लेंसिंग एक परिघटना है। इसके अंतर्गत अधिक दूर से चमकने वाले प्रकाश को उसके स्रोत और प्रेक्षक के बीच आने वाले किसी पिंड (जैसे कि आकाशगंगा या क्वासर) के गुरुत्वाकर्षण द्वारा मोड़ दिया जाता है। पिंड का गुरुत्वाकर्षण अपने आस-पास के स्पेस-टाइम में इतनी वक्रता (curvature) उत्पन्न कर देता है, कि उससे प्रकाश अपने पथ से विचलित हो जाता है।

रक्षा मंत्रालय ने पिनाका MRLS के लिए गोला-बारूद खरीद हेतु 10,147 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए।

पिनाका MRLS 

  • विकासकर्ता: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)।
  • प्रकार: पिनाका एक "मल्टी-बैरल रॉकेट लांचर" है। यह 44 सेकंड में 12 रॉकेट दाग सकता है।
  • क्षमता: आर्टिलरी की कार्रवाइयों के लिए विस्तारित दूरी तक सटीक हमले की सुविधा प्रदान करता है।
  • रेंज: पिनाका MK-II रॉकेट की रेंज 60 कि.मी. है।
  • महत्त्व: आर्टिलरी रॉकेट रेजिमेंट्स का आधुनिकीकरण करने में;  लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता विकसित करने में; और युद्धक्षेत्र प्रभावशीलता में वृद्धि करने में।
  • निर्यात: भारत ने पहली बार आर्मेनिया को पिनाका रॉकेट बेचे हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद इजरायल भी संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) से हट गया। इजरायल ने इसका कारण उसके खिलाफ पूर्वाग्रह बताया। 

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के बारे में

  • यह मानवाधिकार पर चर्चा के लिए संयुक्त राष्ट्र का अंतर-सरकारी निकाय है।
  • मुख्यालय: जिनेवा (स्विट्जरलैंड) में स्थित है।
  • प्रमुख कार्य: मानवाधिकारों के प्रति सार्वभौमिक सम्मान को बढ़ावा देना और उल्लंघन होने पर समाधान करना।
  • स्थापना: इसका गठन 2006 में मानवाधिकार आयोग (1946-2006) की जगह पर किया गया था। 
  • संरचना: इसके 47 सदस्य हैं। इसके सदस्य संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 3 वर्ष के कार्यकाल के लिए चुने जाते है। इसकी सदस्यता सीटों के समान भौगोलिक वितरण पर आधारित होती है। भौगोलिक प्रतिनिधित्व की अवधारणा संतुलित वितरण सुनिश्चित करती है।
  • सार्वभौमिक आवधिक समीक्षा (UPR) रिपोर्ट: इसमें सभी संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों के मानवाधिकार रिकॉर्ड का आकलन किया जाता है।

प्रकाश प्रदूषण के चलते अटाकामा मरुस्थल में स्थापित विश्व के सबसे बड़े टेलीस्कोप के समक्ष समस्या उत्पन्न हो गई। 

अटाकामा मरुस्थल (उत्तरी चिली, दक्षिण अमेरिका) के बारे में

  • अवस्थिति: यह उत्तरी चिली (दक्षिण अमेरिका) में स्थित है। यह मरुस्थल एंडीज पर्वत और प्रशांत महासागर के मध्य अवस्थित है।
  • विशेषताएं: इसमें साल्ट पैंस, एल्यूवियल फैन्स, टीले और ज्वालामुखी शंकु आदि शामिल हैं।
  • जलवायु एवं पर्यावरण: यह पृथ्वी पर सबसे शुष्क स्थानों में से एक है।
  • शुष्कता का कारण: प्रशांत तट से बहने वाली हम्बोल्ट धारा।  यह एक ठंडी समुद्री धारा है।
  • महत्त्व: आसमान साफ ​​होने के कारण यह खगोलीय पर्यवेक्षणों के लिए काफी उपयोगी है।
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