अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से 2030 तक डेटा सेंटर्स की ऊर्जा खपत दोगुनी हो जाएगी | Current Affairs | Vision IAS
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अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने एक नई रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में ऊर्जा की खपत में वृद्धि और AI के बीच संबंधों के सभी पक्षों की गहराई से जांच की गई है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नज़र

  • डेटा सेंटर्स की ऊर्जा खपत: 2030 तक वैश्विक डेटा सेंटर्स की ऊर्जा खपत लगभग 945 टेरावाट प्रति घंटा (TWh) तक हो सकती है।
    • डेटा सेंटर्स AI मॉडल्स के प्रशिक्षण और उपयोग के लिए जरूरी अवसंरचना प्रदान करते हैं।
  • ऊर्जा क्षेत्रक पर AI का प्रभाव: AI का उपयोग तेल और गैस की खोज एवं उत्पादन में, विद्युत ग्रिड में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने में, औद्योगिक दक्षता बढ़ाने में तथा बिल्डिंग सिस्टम में सुधार के लिए किया जा सकता है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा की भूमिका: डेटा सेंटर्स की ऊर्जा खपत में वैश्विक वृद्धि का लगभग आधा हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा से पूरा होने का अनुमान है। साथ ही, प्राकृतिक गैस और परमाणु ऊर्जा भी एनर्जी डिमांड को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएंगी। 

ऊर्जा क्षेत्रक में AI के उपयोग से नवाचार को बढ़ावा

  • तेल और गैस से मीथेन उत्सर्जन में कमी: AI मॉडल्स सैटेलाइट से निगरानी के जरिए मीथेन रिसाव की शीघ्र पहचान कर सकते हैं। इससे पाइपलाइन का मरम्मत कार्य तेजी से हो पाता है।
  • विद्युत क्षेत्रक से उत्सर्जन में कमी: AI मॉडल्स जीवाश्म ईंधन का उपयोग करने वाले संयंत्रों की कार्यदक्षता बढ़ाकर उत्सर्जन कम करते हैं। 
    • जैसे कि AI की मदद से प्राकृतिक गैस का उपयोग करने वाले संयंत्रों के संचालन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। 
  • औद्योगिक गतिविधियों से उत्सर्जन में कमी: AI के इस्तेमाल से विनिर्माण प्रक्रियाओं को कार्यकुशल बनाया जा सकता है। इससे ऊर्जा उपयोग दक्षता में 2% से अधिक की वृद्धि की जा सकती है और उत्सर्जन भी कम होता है।
    • जैसे कि सीमेंट उत्पादन में कम कार्बन उत्सर्जन करने वाले ईंधनों का उपयोग जा सकता है।  
  • परिवहन साधनों से उत्सर्जन में कमी: AI के इस्तेमाल से परिवहन साधनों की दक्षता बढ़ाई जा सकती है। इससे परिवहन साधनों की दक्षता में 5-10% तक सुधार हो सकता है और इनसे होने वाले उत्सर्जन में कमी की जा सकती है।
    • जैसे कि AI के इस्तेमाल से परिवहन के रूट की बेहतर योजना बनाई जा सकती है, ड्राइविंग व्यवहार में बदलाव लाया जा सकता, आदि।  
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