स्थायी लोक अदालत | Current Affairs | Vision IAS
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

ESC

देश में केरल पहला राज्य बन गया है, जिसने ‘ऑनलाइन स्थायी लोक अदालत सेवाएं’ शुरू की हैं।

स्थायी लोक अदालत के बारे में:

  • इसे विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 22-B के तहत आयोजित किया जाता है।
  • शक्ति: इसे सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत किसी सिविल कोर्ट के समान शक्तियां प्राप्त हैं।
  • अधिकार क्षेत्र: यह परिवहन, डाक, टेलीग्राफ जैसी जन उपयोगिता सेवाओं से संबंधित मामलों में मुकदमा शुरू होने से पहले सुलह और समझौते के लिए अनिवार्य प्रक्रिया है।
  • निर्णय का प्रभावी होना: इसका निर्णय अंतिम और सभी पक्षों पर बाध्यकारी होता है।
  • यह 1 करोड़ रुपये तक के वित्तीय मामलों की सुनवाई करती है।

अप्रैल 2025 से अखिल भारतीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) अब प्रत्येक माह की 28 तारीख को जारी किया जाएगा। 

  • इसका अर्थ है संदर्भ माह का IIP उस माह के समाप्त होने के 28 दिनों के भीतर जारी किया जाएगा। पहले इसे 42 दिनों के बाद जारी किया जाता था।
  • इसके अतिरिक्त, पहले जहां तीन अनुमान जारी किए जाते थे, अब से केवल दो अनुमान (त्वरित और अंतिम) जारी किए जाएंगे। 

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के बारे में:

  • यह एक संयुक्त संकेतक (Composite Indicator) है। यह किसी निश्चित लघु अवधि में निर्धारित औद्योगिक उत्पादों की उत्पादन मात्रा में आधार वर्ष के सापेक्ष परिवर्तनों को दर्शाता है।  
  • वर्तमान आधार वर्ष (Base Year) 2011–12 है। 
  • इसे केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) संकलित करता है और प्रतिमाह जारी करता है।
  • शामिल क्षेत्रक: यह सूचकांक खनिज खनन एवं क्वारीइंग, विनिर्माण और विद्युत क्षेत्रकों को सम्मिलित करता है।

FIU-IND और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) तथा उससे संबंधित नियमों को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए समन्वित प्रयासों हेतु एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

FIU-IND के बारे में:

  • यह एक केंद्रीय राष्ट्रीय एजेंसी है। इसका कार्य संदिग्ध वित्तीय लेन-देन से संबंधित जानकारी प्राप्त करना, उसका विश्लेषण करना और कार्रवाई हेतु संबंधित एजेंसियों तक भेजना है।
  • यह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अन्वेषण, जांच एवं प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करके धन शोधन तथा आतंकवाद के वित्त-पोषण के खिलाफ वैश्विक प्रयासों को सशक्त करता है।
  • स्थापना: 2004 में। 
  • प्रकृति: यह एक स्वायत्त संस्था है। यह केंद्रीय आर्थिक आसूचना परिषद (Economic Intelligence Council- EIC) को रिपोर्ट करता है।
  • इस परिषद का अध्यक्ष केंद्रीय वित्त मंत्री होता है।

भारत के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय द्वारा कराए गए एक अध्ययन की रिपोर्ट में फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन (FGD) पर 2015 की नीति को वापस लेने की सिफारिश की गई है। 

  • इस नीति के तहत भारत के सभी कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों में फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन प्रणाली की स्थापना अनिवार्य की गई थी।
  • रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि FGD प्रणाली केवल उन संयंत्रों में लगाई जानी चाहिए, जो आयातित कोयले या उच्च सल्फर मात्रा (0.5% से अधिक) वाले कोयले का उपयोग करते हैं।

फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन के बारे में:

  • इस तकनीक में कोयला आधारित बिजली संयंत्रों से उत्सर्जित गैसों में मौजूद सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) को वायुमंडल में उत्सर्जन से पहले हटा दिया जाता है।
  • इसमें एक अल्कलाइन अभिक्रिया विधि (सोडियम या कैल्शियम आधारित क्षारीय रसायन) का इस्तेमाल करने वाली स्क्रबिंग तकनीक का उपयोग किया जाता है।
  • FGD प्रणालियों के प्रकार निम्नलिखित हैं:
    • ड्राई सोर्बेंट इंजेक्शन, 
    • वेट लाइमस्टोन बेस्ड, 
    • सी वॉटर बेस्ड आदि।

तीन साल पहले आई बाढ़ के कारण बंद की गई ‘क्रैडल ऑफ ह्यूमनकाइंड’ गुफाओं को अब फिर से आम जनता के लिए खोल दिया गया है। ये गुफाएं दक्षिण अफ्रीका में स्थित हैं। 

क्रैडल ऑफ ह्यूमनकाइंड के बारे में

  • ये यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं। ये चूना पत्थर की भूमिगत गुफाएं हैं।
  • अवस्थिति: जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका) के नजदीक।
  • शामिल स्थल: स्टर्कफोंटेन, स्वार्टक्रांस, क्रोमड्राई और एनवायरन के जीवाश्म होमिनिड स्थल, तथा मकापान घाटी एवं टौंग स्कल फोसिल साइट।
  • खोजे गए नमूने: ऑस्ट्रेलोपिथेकस अफ्रीकनस, पैरेन्थ्रोपस, आग का उपयोग, आदि।
  • महत्त्व: ये गुफाएं कम-से-कम पिछले 3.5 मिलियन वर्षों में आधुनिक मनुष्यों के विकास पर प्रचुर वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करती हैं

हाल ही में राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्वैप ऑर्गन ट्रांसप्लांट को लागू करने के लिए पत्र लिखा है।

स्वैप ऑर्गन ट्रांसप्लांट क्या है?

  • यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें कानूनी दाता-प्राप्तकर्ता का ब्लड ग्रुप या किसी अन्य वजह से मिलान नहीं होने के कारण किसी अन्य वैधानिक दाता-प्राप्तकर्ता जोड़ों से अंगों का आदान-प्रदान किया जाता है।

राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) के बारे में:

  • यह मानव अंगदान के विनियमन से संबंधित राष्ट्रीय स्तर का संगठन है। यह केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के तहत कार्य करता है।
  • इसका कार्य क्षेत्र मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम  (THOTA), 1994 के तहत निर्धारित किया गया है।
  • इसके निम्नलिखित दो मुख्य प्रभाग हैं:
    • नेशनल ह्यूमन ऑर्गन एंड टिश्यू रिमूवल एंड स्टोरेज नेटवर्क और  
    • नेशनल बायो-मटेरियल सेंटर। 
  • कार्यालय: सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली।
  • राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम (NOTP) के अंतर्गत NOTTO के साथ-साथ क्षेत्र स्तरीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (ROTTOs) तथा राज्य स्तरीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (SOTTOs) स्थापित किए गए हैं। 

शोध से पता चला है कि अरल सागर के सूख जाने के बाद उसके बेसिन की भूमि ऊंची हो रही है, जो संभावित भूवैज्ञानिक बदलाव का संकेत है।

अरल सागर के बारे में

  • इसके बारे में: यह कभी मध्य एशिया की एक बड़ी खारे पानी की झील थी।
  • अवस्थिति: कजाकिस्तान (उत्तर) और उज्बेकिस्तान (दक्षिण) की सीमा पर अवस्थित है।
    • इसे मुख्य रूप से अमू दरिया और सिर दरिया नदियों से पानी मिलता था।
  • सूखने का कारण: सोवियत संघ के दौर में, इन नदियों का पानी खेती के लिए मोड़ दिया गया, जिससे अरल सागर धीरे-धीरे सूख गया।
    • सूखने के बाद यह सागर खतरनाक अरलकुम रेगिस्तान में बदल गया है। आज यह क्षेत्र दुनिया के प्रमुख धूल-उत्पादक क्षेत्रों में से एक माना जाता है। 

केरल राज्य विद्युत बोर्ड (KSEB) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे ने वाहन-से-ग्रिड (V2G) प्रौद्योगिकी के कार्यान्वयन का पता लगाने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया।

V2G प्रौद्योगिकी के बारे में

  • V2G ऐसी प्रौद्योगिकियां हैं, जो इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की बैटरियों से ग्रिड में वापस बिजली भेजने की सुविधा देती है।
    • जब कोई इलेक्ट्रिक वाहन उपयोग में नहीं होता, तो वह एक छोटा ऊर्जा भंडारण केंद्र बन सकता है।
  • V2G प्रौद्योगिकियों को शामिल करके, EVs अक्षय ऊर्जा (RE) के एकीकरण को सुविधाजनक बनाने और मांग प्रतिक्रिया बाजार का समर्थन करने का अवसर प्रदान करते हैं।
  • यह ग्रिड पर परिवर्तनशील अक्षय ऊर्जा के प्रभाव को कम करने और ग्रिड स्थिरता में सुधार करने के लिए EV बैटरी में बिजली को मॉड्यूलेट करने में भी मदद कर सकता है।
Watch Video News Today
Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet