सुर्ख़ियों में क्यों?
हाल ही में भारत-मालदीव राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रधान मंत्री ने मालदीव की यात्रा की।
यात्रा के मुख्य परिणाम:
- मालदीव को 4,850 करोड़ रुपये की लाइन ऑफ क्रेडिट की सुविधा दी गई। भारत सरकार से लिए गए ऋणों के वार्षिक भुगतान को कम करने के लिए एक समझौता किया गया।
- भारत–मालदीव के बीच मुक्त व्यापार समझौते (IMFTA) पर वार्ता शुरू करने और उसके विचारार्थ विषयों पर चर्चा की गई।
- NPCI इंटरनेशनल पेमेंट लिमिटेड और मालदीव मौद्रिक प्राधिकरण के बीच एक समझौता हुआ। इसके तहत मालदीव में UPI लॉन्च करने पर सहमति बनी।
- मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि; मौसम विज्ञान; डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना; भारतीय फार्माकोपिया आदि क्षेत्रकों के संबंध में समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया गया।
सहयोग के क्षेत्र

भारत और मालदीव के बीच लंबे समय से नृजातीय, भाषाई, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं व्यावसायिक संबंध रहे हैं। भारत मालदीव को 1965 में स्वतंत्रता मिलने के बाद उसे मान्यता देने और उसके साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने वाला पहला देश था।
- सामरिक स्थिति और निकटता: मालदीव भौगोलिक रूप से पश्चिमी हिंद महासागर (अदन की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य) और पूर्वी हिंद महासागर (मलक्का जलडमरूमध्य) के बीच एक 'टोल गेट' की तरह अवस्थित है।
- भारत के पश्चिमी तट से मालदीव की निकटता और हिंद महासागर के प्रमुख समुद्री मार्गों के केंद्र में होने के कारण मालदीव भारत के लिए रणनीतिक व सामरिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है।
- समग्र सुरक्षा प्रदाता: भारत को मालदीव के लिए एक "समग्र सुरक्षा प्रदाता" (Net Security Provider) के रूप में देखा जाता है। इसकी पुष्टि इसलिए की गई है, क्योंकि मालदीव भारत की "पड़ोसी प्रथम" (Neighbourhood First) नीति में एक विशेष स्थान रखता है। साथ ही, यह भारत के विज़न महासागर/ MAHASAGAR (क्षेत्रों में सुरक्षा और संवृद्धि की पारस्परिक एवं समग्र उन्नति) में भी योगदान देता है। यह विज़न हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में सुरक्षा और विकास को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
- रक्षा सहयोग और सुरक्षा: भारत और मालदीव ने 2016 में डिफेंस एक्शन प्लान पर हस्ताक्षर किए थे। इससे दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी और मजबूत हुई है।
- दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास जैसे कुवेरिन और एकाथा का आयोजन किया जाता है।
- मालदीव कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव का संस्थापक सदस्य भी है।
- आर्थिक एकीकरण: 2023 में भारत–मालदीव का द्विपक्षीय व्यापार 548.97 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया था। 2023 में ही भारत, मालदीव का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा।
- मानवतावादी कूटनीति और संकट में "प्रथम सहायता प्रदाता": संकट के समय भारत हमेशा मालदीव का "पहला मददगार" रहा है। इसमें 1988 के तख्तापलट प्रयास, 2004 की सुनामी, 2014 का माले जल संकट और कोविड-19 महामारी के दौरान तुरंत सहायता देना शामिल है।
- लोगों के बीच (P2P) व्यापक संबंध: मालदीव के पर्यटन के लिए भारत अब सबसे बड़ा बाजार बन गया है। केवल 2023 में ही 2.09 लाख से अधिक भारतीय पर्यटक मालदीव गए थे।
द्विपक्षीय संबंधों में उत्पन्न हालिया मुद्दे
- मालदीव की आंतरिक राजनीति: मालदीव का राजनीतिक परिवेश मुख्य रूप से भारत-समर्थक व चीन-समर्थक गुटों में बंटा हुआ है।
- राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू के नेतृत्व में रणनीतिक पुनर्गठन:
- "इंडिया आउट कैंपेन" के राष्ट्रवादी जनादेश पर निर्वाचित होने के कारण, इसने भारत विरोधी जनभावनाओं को और भड़काया। इसके कारण हाइड्रोग्राफिकल सर्वेक्षण रद्द करना पड़ा, भारतीय सैन्य कर्मियों की वापसी जैसी घटनाएं हुई।
- मालदीव ने अपनी नीति को "इंडिया फर्स्ट" से बदलकर "मालदीव फर्स्ट" किया, जिसका उद्देश्य मालदीव की विदेश नीति को विविधता देना है।
- चीन का प्रभाव: मालदीव 2014 में चीन की बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) में शामिल हुआ और चीन ने कई बड़ी अवसंरचनाओं में निवेश किए हैं। उदाहरण के लिए- चाइना–मालदीव फ्रेंडशिप ब्रिज।
- आर्थिक अस्थिरता: विश्व बैंक के अनुसार उच्च राजकोषीय घाटे और जीडीपी की धीमी संवृद्धि दर के कारण, मालदीव का सार्वजनिक ऋण 2027 तक जीडीपी का 135.7% होने का अनुमान है।
- कट्टरपंथ: साल 2023 में अमेरिका ने मालदीव में मौजूद ISIS और अलकायदा के वित्तीय सहयोगियों एवं कार्यकर्ताओं को चिन्हित (नामित) किया था।
निष्कर्ष
भारत और मालदीव हिंद महासागर क्षेत्र में साझा चुनौतियों का सामना करते हैं, जिनका दोनों देशों की सुरक्षा एवं विकास पर बहुआयामी प्रभाव पड़ता है। प्राकृतिक साझेदार होने के नाते, दोनों देशों को समुद्री और सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए, ताकि भारत एवं मालदीव के लोगों के साथ-साथ पूरे हिंद महासागर क्षेत्र के लिए लाभ प्राप्त हो सकें।