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वन्यजीव पर्यावासों के एकीकृत विकास के लिए केंद्र प्रायोजित योजना (CSS-INTEGRATED DEVELOPMENT OF WILDLIFE HABITATS SCHEME: CSS-IDWH) | Current Affairs | Vision IAS
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वन्यजीव पर्यावासों के एकीकृत विकास के लिए केंद्र प्रायोजित योजना (CSS-INTEGRATED DEVELOPMENT OF WILDLIFE HABITATS SCHEME: CSS-IDWH)

Posted 19 Aug 2025

Updated 28 Aug 2025

1 min read

सुर्ख़ियों में क्यों? 

हाल ही में, घड़ियाल और स्लॉथ बेयर को "वन्यजीव पर्यावासों के एकीकृत विकास के लिए केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme- Integrated Development of Wildlife: CSS-IDWH)" के तहत 'प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम (Species Recovery Programme)' में शामिल किए जाने की सिफारिश की गई है।

वन्यजीव पर्यावासों के एकीकृत विकास के लिए केंद्र प्रायोजित योजना (CSS-IDWH) के बारे में 

  • नोडल मंत्रालय: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
  • प्रकार: केंद्र प्रायोजित योजना 
  • उद्देश्य: वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण से संबंधित गतिविधियां संचालित करना।
  • वित्तीय सहायता: राज्य/ केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जो कि:
    • संरक्षित क्षेत्रों (राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभयारण्यों, संरक्षण रिजर्व और सामुदायिक रिजर्व) को समर्थन प्रदान करते हैं; 
    • संरक्षित क्षेत्रों के बाहर वन्यजीवों का संरक्षण करते हैं; 
    • क्रिटिकली एनडेंजर्ड प्रजातियों और उनके पर्यावासों को बचाने के लिए पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम संचालित करते हैं।  
      • अब तक प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम के अंतर्गत हिम तेंदुआ, एशियाई शेर, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड आदि सहित 22 प्रजातियों की पहचान की गई है।
  • मुख्य घटक: वन्यजीव पर्यावासों का विकास; प्रोजेक्ट टाइगर; प्रोजेक्ट एलिफेंट। 

घड़ियाल 

स्लॉथ बेयर 

पर्यावास: घड़ियाल गहरी, तेज बहाव वाली नदियाँ पसंद करते हैं। 

  • प्राकृतिक पर्यावास वाले क्षेत्र:
    • नेपाल: राप्ती-नारायणी नदी
    • भारत (गंगा की सहायक नदियाँ): गिरवा (उत्तर प्रदेश), सोन (मध्य प्रदेश), रामगंगा (उत्तराखंड), गंडक (बिहार), चम्बल (उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान), महानदी (ओडिशा)।
  • विशेषताएँ:
    • मछलियाँ पकड़ने के लिए विशेष प्रकार के दाँत।
    • मगरमच्छों में सबसे पतली और सबसे लंबी थूथन वाली प्रजाति। 
    • वयस्क नर के थूथन के सिरे पर एक बल्ब जैसी संरचना होती है, जिसे "घड़ा (GHARA)" कहा जाता है।
    • नर और मादा घड़ियाल की शारीरिक बनावट में स्पष्ट अंतर होता है।
    • यह सभी मगरमच्छ प्रजातियों में सबसे अधिक जल में रहना पसंद करते हैं। 

खतरे:

  • बांध, बैराज और नदी के जल मोड़ने जैसी गतिविधियों के कारण पर्यावास का नष्ट होना।
  • लंबी थूथन के कारण मछली पकड़ने के जाल में फँसने और डूबने का खतरा होता है।

संरक्षण की स्थिति: 

  • IUCN रेड लिस्ट: क्रिटिकली एनडेंजर्ड 
  • CITES: परिशिष्ट I
  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची I 
  • संरक्षण के प्रयास:
    • UNDP और FAO द्वारा समर्थित प्रोजेक्ट क्रोकोडाइल (1975)।  
    • घड़ियाल संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम। 
    • राष्ट्रीय घड़ियाल संरक्षण और प्रबंधन योजना।
  • पर्यावास: ये वनों और घास के मैदानों में पाए जाते हैं। 
  • प्राकृतिक पर्यावास वाले क्षेत्र: ये भारत, नेपाल और श्रीलंका के स्थानिक हैं। 
  • विशेषताएँ: 
    • इसका नाम लंबे पंजों और असामान्य दाँतों से पड़ा है, जो स्लॉथ (एक प्रकार का जानवर) जैसा दिखता है। 
    • इनका शरीर काले फर से ढका होता है और थूथन लंबी होती है। 
    • ये दीमक और चीटियां खाने में माहिर होते हैं। 
    • अन्य भालू प्रजातियों के विपरीत, ये शीतनिद्रा (Hibernate) में नहीं जाते हैं। 
    • ये अकेले रहते हैं और ज्यादातर रात में ही सक्रिय होते हैं। 
    • ये बहुत फुर्तीले होते हैं और भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे आक्रामक जीवों में से एक माने जाते हैं। 

खतरे

  • पर्यावास का नुकसान और क्षरण। 
  • मानव-भालू संघर्ष के कारण इंसानों द्वारा बदले की भावना में हमला करना। 
  • दुनिया में इनकी आबादी 20,000 से भी कम होने का अनुमान है। 

संरक्षण स्थिति

  • IUCN रेड लिस्ट: वल्नरेबल
  • CITES:: परिशिष्ट I 
  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची I
  • संरक्षण के प्रयास
  • कर्नाटक में स्थित दारोजी स्लॉथ बेयर अभयारण्य, एशिया का पहला स्लॉथ बेयर अभयारण्य है। 

 

  • Tags :
  • Gharial
  • Sloth Bear
  • Centrally Sponsored Scheme
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