Select Your Preferred Language

Please choose your language to continue.

भारत-अफ्रीका संबंध (INDIA-AFRICA RELATIONS) | Current Affairs | Vision IAS
Monthly Magazine Logo

Table of Content

भारत-अफ्रीका संबंध (INDIA-AFRICA RELATIONS)

Posted 19 Aug 2025

Updated 27 Aug 2025

1 min read

सुर्ख़ियों में क्यों?

हाल ही में, भारत के प्रधान मंत्री ने घाना और नामीबिया जैसे अफ्रीकी देशों की यात्रा पूरी की तथा उन्होंने दोहराया कि "अफ्रीका के लक्ष्य ही भारत की प्राथमिकता हैं।"

अन्य संबंधित तथ्य

  • प्रधान मंत्री ने घाना की संसद के विशेष सत्र को संबोधित किया। घाना के राष्ट्रपति ने उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान "ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ घाना" से सम्मानित किया।
  • प्रधान मंत्री ने घाना-भारत संसदीय मैत्री सोसाइटी की स्थापना का भी स्वागत किया, जो दिखाता है कि दोनों देश विधायी स्तर पर आपसी संबंध और गहरे करना चाहते हैं।
    • दोनों पक्षों ने संबंधों को और मजबूत बनाते हुए इन्हें व्यापक साझेदारी तक ले जाने पर सहमति बनाई।
  • भारत की अफ्रीका नीति पुराने संबंधों पर आधारित है, लेकिन यह वर्तमान जरूरतों पर भी केंद्रित है। यह नीति परामर्श आधारित और मांग-प्रधान दृष्टिकोण अपनाती है। इसमें दोनों देश समान भागीदार के रूप में काम करते हैं। यह नीति 2018 में भारत के प्रधान मंत्री द्वारा रेखांकित कंपाला सिद्धांतों (इन्फोग्राफिक देखें) पर आधारित है।

भारत के लिए अफ्रीका का रणनीतिक महत्त्व

  • रणनीतिक व सामरिक और भू-राजनीतिक महत्त्व: अफ्रीका, भारत का स्वाभाविक साझेदार है। दोनों ग्लोबल साउथ की चिंताओं को उठाने, संयुक्त राष्ट्र और विश्व व्यापार संगठन (WTO) जैसे बहुपक्षीय संगठनों में सुधार की मांग करने तथा शांति व सुरक्षा बढ़ाने के लिए मिलकर काम करते हैं।
    • उदाहरण: अफ्रीकी संघ (AU) को G-20 की सदस्यता मिलना, जिससे ग्लोबल साउथ की अभिव्यक्ति को मंच मिला और एशिया-अफ्रीका ग्रोथ कॉरिडोर (AAGC)।
      • AAGC की स्थापना 2017 में भारत और जापान ने मिलकर की थी। इसका उद्देश्य एशिया और अफ्रीका के बीच बेहतर कनेक्टिविटी एवं सहयोग के जरिए अफ्रीका में सतत एवं समावेशी विकास को बढ़ावा देना है। 
  • रक्षा क्षेत्र: भारत और अफ्रीकी देश, इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA) और इंडियन ओशन कमीशन (IOC) जैसे क्षेत्रीय संगठनों के ज़रिए अपने सहयोग को बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा, मिलन (MILAN), कटलैस एक्सप्रेस (Cutlass Express) जैसे बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यासों में भाग ले रहे हैं। 
    • हाल ही में भारतीय नौसेना ने अफ्रीकी देशों के साथ एक बड़े पैमाने पर बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास शुरू किया है। इसका नाम अफ्रीका-इंडिया की मैरीटाइम इंगेजमेंट (AIKEYME) है।
  • आर्थिक: अफ्रीका एक तरुण और तेज़ी से शहरीकृत हो रहा बाजार है। यहां मौजूद महत्वपूर्ण खनिज (कोबाल्ट, मैंगनीज, रेयर अर्थ्स आदि) भारत के विनिर्माण और हरित विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
    • अफ्रीका के पास विश्व के 48.1% कोबाल्ट और 47.7% मैंगनीज के भंडार हैं। 
    • भारत यूरोपीय संघ और चीन के बाद अफ्रीका का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
  • व्यापार: भारत से अफ्रीका को मुख्य रूप से खनिज ईंधन, खाद्य उत्पाद, दवाइयां आदि निर्यात किए जाते हैं। अफ्रीका से भारत कच्चा तेल, हीरा, तांबा आदि का आयात करता है।
  • बाज़ार तक पहुंच: भारत पहला विकासशील देश है, जिसने ड्यूटी-फ्री टैरिफ प्रेफरेंस (DFTP) योजना के जरिए अल्प विकसित देशों (LDCs) को गैर-पारस्परिक आधार पर शुल्क-मुक्त बाज़ार पहुंच प्रदान की है।
  • भारत की सॉफ्ट पावर कूटनीति: भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (ITEC) तथा भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) की छात्रवृत्तियां। साथ ही, ई-विद्याभारती और ई-आरोग्यभारती (e-VBAB) नेटवर्क के जरिए ऑनलाइन शिक्षा एवं टेलीमेडिसिन सेवाएं दी जा रही हैं। ये प्लेटफॉर्म्स अफ्रीका के कई देशों में क्षमता-विकास के प्रमुख मंच हैं।
  • प्रौद्योगिकी: डिजिटल कनेक्टिविटी भारत और अफ्रीकी देशों के बीच सहयोग का एक नया स्तंभ बनकर उभर रही है। उदाहरण के लिए- मॉरीशस में UPI और RuPay की शुरुआत, भारत की इंडिया स्टैक तकनीकों को अफ्रीका के साथ साझा करने के विजन का ही हिस्सा है।
  • ऊर्जा सुरक्षा: अफ्रीका में नवीकरणीय ऊर्जा की बड़ी संभावनाएं हैं, जैसे- 10 टेरावाट सौर क्षमता, 100 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता और 15 गीगावाट भू-तापीय ऊर्जा।
    • भारत द्वारा सह-स्थापित अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) अफ्रीका में मिनी-ग्रिड एवं विकेंद्रित सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए पायलट प्रोजेक्ट और वित्तीय तंत्रों (जैसे- ग्लोबल सोलर फैसिलिटी, STAR-C इनिशिएटिव, वर्चुअल ग्रीन हाइड्रोजन इनोवेशन सेंटर आदि) पर काम कर रहा है।

भारत-अफ्रीका संबंधों में मौजूद चुनौतियां

  • परियोजनाओं के क्रियान्वयन और डिलीवरी में देरी: भारत द्वारा वित्त-पोषित कई अवसंरचनात्मक एवं क्षमता-विकास परियोजनाएं प्रक्रियागत बाधाओं, धन वितरण की समस्याओं तथा दूर-दराज के अफ्रीकी क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स संबंधी चुनौतियों के कारण देर से पूरी हो रही हैं।
  • वैश्विक मंचों पर कम प्रतिनिधित्व: अफ्रीकी देशों को अब तक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अन्य वैश्विक निर्णयकारी संस्थाओं में स्थायी प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है।
  • अन्य साझेदारों से रणनीतिक प्रतिस्पर्धा: भारत की क्षमता-विकास और रियायती ऋण व्यवस्था (LoCs) आधारित नीति की सराहना होती है, लेकिन यह कई बार चीन की गति, विस्तार एवं बड़े निवेश के सामने कमजोर दिखाई देती है।
  • सुरक्षा और राजनीतिक अस्थिरता: अफ्रीका के कुछ हिस्सों (खासकर साहेल और हॉर्न ऑफ अफ्रीका) में राजनीतिक अशांति तथा संघर्ष एवं आतंकवाद, भारतीय कामगारों व निवेशों के समक्ष सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा करते हैं।

निष्कर्ष

परंपरागत रूप से अफ्रीका महाद्वीप भारत की विदेश नीति में एक केंद्रीय स्थान रखता आया है और भारत के अफ्रीका में महत्वपूर्ण हित भी हैं। क्षमता-विकास, स्थानीय स्वामित्व और साझेदारी पर ध्यान देकर तथा नैतिक कूटनीति के जरिए आपसी सद्भावना बढ़ाकर, भारत एक दीर्घकालिक, सतत व उपनिवेशोत्तर दक्षिण-दक्षिण सहयोग का एक ऐसा मॉडल बनाना चाहता है, जिसमें निर्भरता कम और विश्वसनीयता ज्यादा हो।

  • Tags :
  • AIKEYME
  • Asia-Africa Growth Corridor
  • Kampala Principles
  • Soft Power Diplomacy
Download Current Article
Subscribe for Premium Features