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ब्रिक्स रियो डी जनेरियो घोषणा-पत्र

19 Aug 2025
1 min

सुर्ख़ियों में क्यों?

17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में, ब्रिक्स नेताओं ने "अधिक समावेशी और सतत शासन के लिए ग्लोबल साउथ सहयोग को मजबूत करना (Strengthening Global South Cooperation for More Inclusive and Sustainable Governance)" शीर्षक से रियो डी जेनेरियो घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से संबंधित मुख्य बिंदु

  • भागीदारी: यह पहला शिखर सम्मेलन था जिसमें ब्रिक्स के सभी 11 पूर्ण सदस्य देश और 10 साझेदार देश शामिल हुए। इसके अलावा आठ आमंत्रित राष्ट्रों और अनेक अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी इस सम्मेलन में भाग लिया।
    • ब्रिक्स के नए सदस्य के रूप में इंडोनेशिया का स्वागत किया गया, साथ ही बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, ​​नाइजीरिया, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, युगांडा और उज्बेकिस्तान को ब्रिक्स साझेदार देशों के रूप में शामिल किया गया।
  • सामाजिक रूप से निर्धारित रोगों (Socially Determined Diseases: SDDs) के उन्मूलन हेतु साझेदारी की शुरुआत: इसका उद्देश्य सहयोग को मजबूत करना, संसाधन जुटाना और विशेष रूप से ग्लोबल साउथ में एकीकृत तरीके से SDDs को खत्म करने के सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाना है।
    • SDDs का सीधा संबंध गरीबी, असमानता और निम्न जीवन स्तर से है, जो सतत विकास, आर्थिक स्थिरता और वैश्विक कल्याण सुनिश्चित करने में बड़ी बाधा हैं।
  • ब्रिक्स नेताओं का 'जलवायु वित्त पर फ्रेमवर्क घोषणा-पत्र': यह घोषणा-पत्र अगले पांच वर्षों के लिए एक ऐसा रोडमैप प्रस्तुत करता है, जो ब्रिक्स की क्षमता को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए संसाधन जुटाने की दिशा में स्थानांतरित कर सके।
  • ब्रिक्स नेताओं का 'AI के ग्लोबल गवर्नेंस पर घोषणा-पत्र': इसके प्रमुख सिद्धांतों में डिजिटल संप्रभुता, संयुक्त राष्ट्र-आधारित बहुपक्षवाद, जिम्मेदारीपूर्ण विकास, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा, समानता आधारित डेटा गवर्नेंस, खुले एवं संसाधन-उपयोग दक्षता आधारित आधारभूत मॉडल, पर्यावरणीय संधारणीयता और भरोसेमंद/ नैतिक AI शामिल हैं।

ब्रिक्स नेताओं का 'जलवायु वित्त पर फ्रेमवर्क घोषणा-पत्र' 

  • जलवायु वित्त-पोषण लक्ष्य: विकसित देशों से कहा गया है कि उन्हें 2035 तक विकासशील देशों को प्रति वर्ष 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता पूरी करनी चाहिए। साथ ही, पहले से तय किए गए लक्ष्य के तहत 2025 तक हर साल संयुक्त रूप से 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाने की प्रतिबद्धता भी निभानी चाहिए।
  • नए वित्तीय साधन: यह मिश्रित वित्त (ब्लेंडेड फाइनेंस), गारंटी, बीमा कवरेज, प्रासंगिक थीमेटिक बॉण्ड, विदेशी मुद्रा जोखिम न्यूनीकरण जैसे वित्तीय साधनों के साथ- साथ विनियामकीय व्यवस्था, नीतिगत पहलों और आर्थिक प्रोत्साहनों का भी समर्थन करता है।
  • ट्रॉपिकल फॉरेस्ट फॉरएवर फंड (TFFF): यह TFFF को उष्णकटिबंधीय वनों के संरक्षण हेतु दीर्घकालिक वित्त पोषण जुटाने की एक नई व्यवस्था के रूप में मान्यता देता है। साथ ही इसमें संभावित साझेदारों से बड़े पैमाने पर दान प्राप्त करने को भी प्रोत्साहित किया गया है।
    • इस फंड की शुरुआत संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित COP28 में हुई, जिसका उद्देश्य उष्णकटिबंधीय वनों वाले देशों को बड़े पैमाने पर, पूर्वानुमानित और प्रदर्शन-आधारित भुगतान प्रदान करना है, ताकि इन वनों को संरक्षित और विस्तारित किया जा सके।
    • इस फंड में सरकारी निवेश और निजी पूंजी, दोनों को जोड़ा जाएगा, जिससे हर साल लगभग 4 बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाने का लक्ष्य पूरा हो सके।
      • भुगतान को प्रत्येक देश के संरक्षित उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय आर्द्र वन क्षेत्र के अनुपात में आवंटित किया जाएगा।

ब्रिक्स और ग्लोबल साउथ सहयोग

रियो डी जेनेरियो घोषणा-पत्र ग्लोबल साउथ के हितों की रक्षा के लिए ब्रिक्स के सामूहिक संकल्प को रेखांकित करता है।

  • ग्लोबल गवर्नेंस को मजबूत बनाना: घोषणा-पत्र में विश्व में विभिन्न विषयों पर निर्णय लेने की प्रक्रियाओं और संरचनाओं में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने की बात कही गई है।
    • इसमें संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों के कार्यकारी प्रमुखों के पद पर चयन में पारदर्शी और समावेशी तरीका अपनाने तथा सभी क्षेत्रों को तथा महिलाओं को समान प्रतिनिधित्व देने की मांग की गई है।
    • इस घोषणा-पत्र में संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधारों की मांग की गयी है जिसमें सुरक्षा परिषद के सुधार भी शामिल है, साथ ही ब्राजील और भारत की भूमिका बढ़ाने संबंधी उनकी आकांक्षाओं का समर्थन भी किया गया है।
  • बहुध्रुवीयता और ग्लोबल साउथ की भूमिका: घोषणा-पत्र में ग्लोबल साउथ के महत्व पर बल दिया गया है, जो विशेष रूप से बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक मंदी, तीव्र तकनीकी रूपांतरण, संरक्षणवादी नीतियों जैसी बड़ी चुनौतियों के बीच सकारात्मक परिवर्तन का वाहक है।
  • ब्रेटन वुड्स संस्थाओं (BWIs) में सुधार: घोषणा-पत्र में शासी संरचना में सुधार करने, योग्यता-आधारित और समावेशी चयन प्रक्रियाओं को अपनाने तथा अलग-अलग क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने की बात कही गई है।
  • व्यापार प्रणाली: इसमें एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों में वृद्धि पर चिंता व्यक्त की गई है, साथ ही विश्व व्यापार संगठन (WTO) को अपने केंद्र में रखते हुए नियम-आधारित, खुले, पारदर्शी, निष्पक्ष, समावेशी, न्यायसंगत,भेदभाव-रहित, सर्वसम्मति-आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के समर्थन को दोहराया गया है।
  • अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक सहयोग: घोषणा-पत्र में ब्रिक्स आर्थिक साझेदारी 2030 की रणनीति को अंतिम रूप देने पर बल दिया गया है और निवेशकों के जोखिम को कम करने के लिए न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) के भीतर ब्रिक्स बहुपक्षीय गारंटी (BRICS Multilateral Guarantees: BMG) पायलट प्रोजेक्ट पर चर्चा शुरू की गई है।

निष्कर्ष

जलवायु परिवर्तन से लेकर डिजिटल गवर्नेंस तक, विश्व की तात्कालिक चुनौतियों का समाधान करते हुए, रियो घोषणा-पत्र समानता, सहयोग और साझा समृद्धि पर आधारित एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का निर्माण करने के लिए  ब्रिक्स की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। यह ब्रिक्स को केवल अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह नहीं मानता, बल्कि ग्लोबल गवर्नेंस के भविष्य को दिशा देने वाला एक प्लेटफ़ॉर्म मानता है।

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