सुर्ख़ियों में क्यों?
हाल ही में, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री ने भारत द्वारा पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण लक्ष्य हासिल करने की घोषणा की है।
अन्य संबंधित तथ्य
- यह लक्ष्य एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol: EBP) कार्यक्रम के तहत निर्धारित किया गया था।
- पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण 2014 के 1.5% से बढ़कर 2025 में 20% हो गया है। यह लगभग 13 गुना वृद्धि को दर्शाता है।
एथेनॉल के बारे में:
एथेनॉल के प्रकार:
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एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम के बारे में:
- शुरुआत: यह कार्यक्रम 2003 में पेट्रोल में एथेनॉल के मिश्रण को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था।
- एथेनॉल मिश्रण का क्या अर्थ है:
- परिभाषा: एथेनॉल मिश्रण के तहत पेट्रोल में एथेनॉल को मिलाया जाता है, ताकि ईंधन को अधिक संधारणीय और कम प्रदूषण फ़ैलाने वाला बनाया जा सके।
- इसके प्रकार:
- E10: 10% एथेनॉल बाय वॉल्यूम मिश्रित ईंधन
- E20: 20% एथेनॉल मिश्रित ईंधन
- E85: 85% एथेनॉल बाय वॉल्यूम मिश्रित ईंधन
- लाभ: E20 ईंधन, E10 की तुलना में बेहतर एक्सेलरेशन, बेहतर राइडर अनुभव और कार्बन उत्सर्जन में लगभग 30% की कटौती प्रदान करता है।
- लक्ष्य: राष्ट्रीय बायोफ्यूल नीति, 2018 को 2022 में संशोधित करते हुए पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य 2030 से पहले यानी 2025-26 तक पूरा करना तय किया गया था।
- राष्ट्रीय बायोफ्यूल नीति
- इस नीति के तहत गन्ने के रस, चुकंदर, कसावा और खराब अनाज, सड़े हुए आलू जैसी मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त सामग्री से एथेनॉल बनाने की अनुमति दी गई है।
- अधिशेष खाद्यान्न का उपयोग एथेनॉल उत्पादन के लिए किया जा सकता है।
- उपलब्धि: एथेनॉल उत्पादन 2014 के 38 करोड़ लीटर से बढ़कर 2025 में 660 करोड़ लीटर से अधिक हो गया।
- राष्ट्रीय बायोफ्यूल नीति

भारत में एथेनॉल मिश्रण के समक्ष चुनौतियाँ
- खाद्य सुरक्षा और मुद्रास्फीति: FAO रिपोर्ट 2023 के अनुसार, बायोफ्यूल या जैव ईंधन के अधिक उत्पादन से विशेष रूप से सुभेद्य आबादी के लिए खाद्य असुरक्षा बढ़ सकती है। उदाहरण के लिए, एथेनॉल उत्पादन के लिए खाद्य फसलों का अत्यधिक उपयोग करना।
- पर्यावरण: भारत में एथेनॉल बनाने के लिए मुख्य रूप से गन्ने का उपयोग होता है। गन्ना एक जल-गहन फसल है, जिससे भूजल स्तर और जल स्रोतों पर दबाव बढ़ता है।
- प्रौद्योगिकी और वाहन संबंधी लागत: वाहनों को E20 और उससे अधिक के एथेनॉल मिश्रण से चलने में सक्षम बनाने के लिए इंजन के डिजाइन और ईंधन प्रणाली में काफी बदलाव करने की आवश्यकता होती है। ये काफी महंगे साबित हो सकते हैं।
- कई पुराने वाहन और दो-पहिया वाहनों में एथेनॉल के अनुकूल कंपोनेंट नहीं होते हैं, जिससे वे उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के प्रति अनुकूल नहीं रह जाते हैं।
- ईंधन दक्षता और वाहन की संपूर्णता: एथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में ऊर्जा घनत्व कम होता है, जिससे वाहन के माइलेज में थोड़ी कमी आती है।
- पुराने इंजनों को एथेनॉल मिश्रित ईंधन के साथ एयर-फ्यूल एडजस्टमेंट में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। इससे वाहन चलाने में समस्या और उत्सर्जन में वृद्धि हो सकती है।
- एथेनॉल में पानी सोखने और फेज सेपरेशन की प्रवृत्ति होती है, जिससे ईंधन प्रणाली में जाम एवं विफलताओं का खतरा बढ़ जाता है।
- एथेनॉल की आपूर्ति:
- देशभर में एथेनॉल की उपलब्धता: उदाहरण के लिए, पूर्वोत्तर राज्यों में फीडस्टॉक या संबंधित उद्योगों की अनुपलब्धता या लॉजिस्टिक्स की उच्च लागत के कारण एथेनॉल मिश्रण को नहीं अपनाया गया है।
- एथेनॉल के अंतर-राज्यीय परिवहन पर प्रतिबंध है, क्योंकि उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 के संशोधित प्रावधानों को सभी राज्यों द्वारा लागू नहीं किया गया है।
- एथेनॉल को अलग-अलग जगहों पर ले जाने में लॉजिस्टिक्स की लागत और परिवहन से होने वाले उत्सर्जन की मात्रा भी अधिक होती है।
- मार्केटिंग टर्मिनलों/ डिपो में एथेनॉल के लिए भंडारण अवसंरचना की आवश्यकता होती है।
एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने वाली पहलें
- PM-JIVAN (जैव ईंधन-वातावरण अनुकूल फसल अवशेष निवारण/ (Jaiv Indhan- Vatavaran Anukool fasal Awashesh Nivaran) योजना: इस योजना के तहत दूसरी पीढ़ी (2G) के एथेनॉल संयंत्रों की स्थापना के लिए एकीकृत बायो-एथेनॉल परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी जाती है।
- एथेनॉल ब्याज सबवेंशन योजनाएँ (EISS): इन योजनाओं को विशेष रूप से समर्पित एथेनॉल संयंत्रों (DEPs) की स्थापना को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया है।
- EBP कार्यक्रम हेतु एथेनॉल पर GST में कमी: एथेनॉल मिश्रित कार्यक्रम (EBP) के लिए इस्तेमाल होने वाले एथेनॉल पर GST को 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है। हालांकि, अपरिष्कृत एथेनॉल पर अभी भी 18% GST लगता है।
- उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 में संशोधन: इस अधिनियम में संशोधन किया गया है, ताकि देश भर में एथेनॉल के परिवहन को सुगम बनाया जा सके।
निष्कर्ष
भारत की एथेनॉल मिश्रण के प्रति प्रतिबद्धता ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संबंधी संधारणीयता और आर्थिक विकास के लिए एक निर्णायक दृष्टिकोण को दर्शाती है। भविष्य में बायोडीजल के उपयोग की संभावना को देखते हुए, एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल से संबंधित चुनौतियों का ध्यान रखना जरूरी है। वर्तमान में, इनके उपयोग को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की आवश्यकता है।